6जी की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है भारत

90 सदस्यों वाला भारत 6जी गठबंधन, स्पेक्ट्रम रोडमैप जारी खबर..नई दिल्लीभारत सरकार ने देश में 6जी तकनीक के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत 6जी गठबंधन (Bharat 6G Alliance – B6GA) को मजबूत किया है। 15 जुलाई 2026 तक इस गठबंधन में 90 सदस्य शामिल हो चुके हैं, जो दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, उपकरण निर्माताओं, स्टार्टअप्स, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य हितधारकों का व्यापक प्रतिनिधित्व करते हैं।भारत 6जी गठबंधन ने सात कार्य-समूह गठित किए हैं, जो 6जी तकनीक, स्पेक्ट्रम, एप्लिकेशन एवं उपयोग के मामले, उपकरण एवं कलपुर्जे, हरित एवं सतत प्रौद्योगिकी तथा आउटरीच जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कार्य कर रहे हैं। गठबंधन का उद्देश्य उद्योग, अकादमिक जगत और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाकर स्वदेशी अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा (IPR) को बढ़ावा देना है।6जी के लिए स्पेक्ट्रम रोडमैप जारीभारत 6जी गठबंधन के स्पेक्ट्रम कार्य-समूह ने “भारत में 6जी के लिए स्पेक्ट्रम रोडमैप” रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इसके अतिरिक्त, दूरसंचार विभाग (DoT) ने विभिन्न हितधारकों से परामर्श के बाद 6जी सेवाओं के लिए आधिकारिक स्पेक्ट्रम रोडमैप भी जारी किया है।कोलकाता में बनेगा 6जी टेराहर्ट्ज टेस्टबेडडिजिटल भारत निधि के तहत दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास कोष (TTDF) से तीन वर्ष की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसके अंतर्गत सोसायटी फॉर अप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (SAMEER), कोलकाता में 6जी टेराहर्ट्ज टेस्टबेड स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में आईआईटी मद्रास, आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी पटना भी साझेदार हैं।इस परियोजना के तहत इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में हाई डेटा रेट लाइन-ऑफ-साइट लिंक का सफल प्रदर्शन किया जा चुका है।वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत भागीदारीभारत ने अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के IMT-2030 (6G) फ्रेमवर्क में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत ने 6जी के उपयोग परिदृश्यों में ‘सर्वव्यापी संचार-संपर्क’, व्यापक कवरेज, अंतर-संचालन (Interoperability) और स्थिरता (Sustainability) को शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई है।सरकार 3GPP, ITU और oneM2M जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठनों में भारतीय उद्योग, स्टार्टअप्स और एमएसएमई की सक्रिय भागीदारी को भी बढ़ावा दे रही है। प्रौद्योगिकी विकास एवं निवेश संवर्धन (TDIP) योजना के तहत सदस्यता शुल्क, अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भागीदारी, भारत में बैठकों की मेजबानी, पायलट परीक्षण और प्रमाणन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।यह जानकारी केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उत्तर मैसिडोनिया दौरे पर, द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई मजबूती

खबर है..नई दिल्लीभारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तर मैसिडोनिया की अपनी ऐतिहासिक राजकीय यात्रा के दौरान वहां की राष्ट्रपति डॉ. गोर्डाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा के साथ द्विपक्षीय बैठक की और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता का नेतृत्व किया। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की उत्तर मैसिडोनिया की पहली आधिकारिक यात्रा है।राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आर्थिक सहयोग भारत और उत्तर मैसिडोनिया के द्विपक्षीय संबंधों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने आईटी/आईटीईएस, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, बायोटेक, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी और फिल्म निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।औपचारिक स्वागत और उच्चस्तरीय वार्ताराष्ट्रपति का उत्तर मैसिडोनिया की राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास विला वोडनो में औपचारिक स्वागत किया गया तथा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों तथा साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर विस्तृत चर्चा की। दोनों पक्षों ने आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों पर जोरराष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध और लोगों के बीच संपर्क हमेशा से द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूत नींव रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से क्रिएटिव इंडस्ट्री और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।वैश्विक पहलों में सहयोग : राष्ट्रपति ने कहा कि भारत इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस जैसी वैश्विक पहलों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने इन पहलों में शामिल होने की उत्तर मैसिडोनिया की इच्छा का स्वागत किया।आईटीईसी प्रशिक्षण स्लॉट होंगे दोगुनेभारत ने उत्तर मैसिडोनिया के लिए इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (ITEC) कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण स्लॉट की संख्या दोगुनी करने की घोषणा की। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े पाठ्यक्रम भी शामिल होंगे।प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख सदस्यराष्ट्रपति के साथ इस यात्रा में: निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया, केंद्रीय राज्य मंत्री (उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण), डॉ. दिनेश शर्मा, राज्यसभा सांसद, विजय बघेल, लोकसभा सांसदभी शामिल हैं।मुख्य संदेश: यह ऐतिहासिक राजकीय यात्रा भारत और उत्तर मैसिडोनिया के बीच आर्थिक, तकनीकी, सांस्कृतिक और वैश्विक सहयोग को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों ने आने वाले वर्षों में अपनी बहुआयामी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प व्यक्त किया।

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एनएचएआई ने ‘राजमार्गयात्रा’ ऐप पर लॉन्च की डिजिटल लोकल पास और ‘मार्गमित्र’ हेल्प सेंटर सुविधा

अब टोल प्लाजा जाए बिना घर बैठे बनेगा लोकल पास, 22 भाषाओं में मिलेगी डिजिटल सहायता खबर है..नई दिल्लीराष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने डिजिटल इंडिया और ईज़ ऑफ लिविंग अभियान को आगे बढ़ाते हुए ‘राजमार्गयात्रा’ मोबाइल ऐप पर दो नई नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाएं—डिजिटल लोकल पास और ‘मार्गमित्र’ हेल्प सेंटर—शुरू की हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा को अधिक सरल, तेज़, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है।घर बैठे बन सकेगा डिजिटल लोकल पासनई ‘लोकल पास’ सुविधा के माध्यम से पात्र यात्री अब टोल प्लाजा पर जाए बिना ही राजमार्गयात्रा ऐप के जरिए डिजिटल रूप से लोकल टोल पास खरीद सकेंगे। इसकी शुरुआत दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (यूईआर-II) स्थित मुंडका–बक्करवाला टोल प्लाजा से की गई है। आने वाले महीनों में इसे देश के अन्य टोल प्लाजा पर भी लागू किया जाएगा।टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले पात्र निवासी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। एक बार लोकल पास बनने के बाद वे संबंधित टोल प्लाजा से पूरे महीने असीमित यात्रा कर सकेंगे।अब नहीं लगेगा दस्तावेज़ जमा करने का झंझटपहले लोकल पास बनवाने के लिए यात्रियों को टोल प्लाजा जाकर दस्तावेज़ जमा करने पड़ते थे। अब पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो गई है। ऐप डिजीलॉकर और वाहन (VAHAN) जैसे सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म से सहमति-आधारित सत्यापित जानकारी प्राप्त करेगा, जबकि जीआईएस आधारित सत्यापन के माध्यम से पात्रता की पुष्टि होगी। इससे कागजी कार्रवाई समाप्त होगी और पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी।‘मार्गमित्र’ देगा 22 भाषाओं में सहायताएनएचएआई ने ‘मार्गमित्र’ हेल्प सेंटर भी शुरू किया है, जो राजमार्गयात्रा ऐप के भीतर एक एकीकृत डिजिटल सहायता मंच है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं के लिए सिंगल विंडो इंटरफेस के रूप में कार्य करेगा।यात्री अपनी समस्या, शिकायत या प्रश्न भारत की 22 भाषाओं में टाइप या बोलकर दर्ज कर सकेंगे। प्लेटफॉर्म उन्हें तत्काल जानकारी देगा या संबंधित सेवा तक मार्गदर्शन करेगा।इन सेवाओं की मिलेगी सुविधामार्गमित्र के जरिए उपयोगकर्ता:फास्टैग रिचार्ज और केवाईसी संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।रिफंड की स्थिति जान सकेंगे।वार्षिक और लोकल पास से जुड़ी सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।शिकायत दर्ज कर उसकी रियल-टाइम ट्रैकिंग कर सकेंगे।समाधान से असंतुष्ट होने पर अपील भी कर सकेंगे।फास्टैग ब्लैकलिस्ट स्थिति, लंबित ई-नोटिस देख सकेंगेसड़क पर बंद वाहन, अतिक्रमण और अन्य सुरक्षा संबंधी समस्याओं की रिपोर्ट भी कर सकेंगे।80 लाख से अधिक एनुअल पास पहले ही जारीएनएचएआई के अनुसार, राजमार्गयात्रा ऐप के माध्यम से अब तक 80 लाख से अधिक एनुअल पास रियल-टाइम एक्टिवेशन के साथ जारी किए जा चुके हैं। नई डिजिटल सुविधाएं इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाएंगी।एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि वे एंड्रॉइड और आईओएस पर उपलब्ध राजमार्गयात्रा मोबाइल ऐप डाउनलोड कर इन डिजिटल सेवाओं का लाभ उठाएं। यह पहल राष्ट्रीय राजमार्ग यात्रा को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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रेल दुर्घटनाओं को टालने वाले आठ रेलकर्मी सम्मानित

डीआरएम ने सतर्क रेलकर्मियों को संरक्षा पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया रेल संरक्षा प्रत्येक रेलकर्मी की सर्वोच्च प्राथमिकता है : डीआरएम खबर है..लखनऊउत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के ड्यूटी पर सतर्क रेलकर्मियों ने रेल दुर्घटनाओं को टाल दिया। डीआरएम सुनील कुमार वर्मा ने सोमवार को संभावित रेल दुर्घटनाओं को टालने वाले आठ रेलकर्मियों को संरक्षा पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर सभी कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर उनके उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की गई।पुरस्कृत कर्मचारियों ने ड्यूटी के दौरान माल एवं यात्री ट्रेनों में विभिन्न प्रकार की तकनीकी एवं संरक्षा संबंधी असामान्यताओं जैसे वैगन का खुला दरवाजा, हैंगिंग पार्ट, असामान्य आवाज तथा लोको में ब्रेक बाइंडिंग जैसी गंभीर कमियों को समय रहते पहचानकर संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचित किया। उनकी त्वरित कार्रवाई से ट्रेनों को सुरक्षित रूप से रोककर आवश्यक जांच एवं सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की गई, जिससे संभावित दुर्घटनाओं को टाला जा सका।वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी अरुण कुमार दोहरे, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक रजनीश कुमार श्रीवास्तव की मौजूदगी में डीआरएम सुनील कुमार वर्मा ने रेलकर्मियों को सम्मानित किया। इस मौके पर डीआरएम ने कहा कि रेल संरक्षा प्रत्येक रेलकर्मी की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी कर्मचारियों से सदैव सतर्क एवं सजग रहकर कार्य करने तथा किसी भी प्रकार की असामान्यता दिखाई देने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया।उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक समर्थ गुप्ता ने बताया कि संरक्षा पुरस्कार पाने वाले कर्मचारियों में रिंकू कुमार (पॉइंट्समैन, बाबतपुर), सुभाष यादव (पॉइंट्समैन, ब्लॉक हट-बी), श्यामू (पॉइंट्समैन, रोजागांव), अमित वर्मा (पॉइंट्समैन, रहमत नगर), राज नारायण (की-मैन, हरौनी), राजेन्द्र कुमार (ब्लैकस्मिथ-I, अजगैन), सुजीत कुमार (शंटिंग मास्टर, शिवपुर) तथा सोनू कुमार (पॉइंट्समैन, ब्लॉक हट-बी/वाराणसी) शामिल है।

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आईआरसीटीसी के नए सीएमडी राहुल हिमालयन,सोमवार को संभालेंगे कार्यभार

निवर्तमान वर्तमान सीएमडी संजय कुमार जैन के इस्तीफे के बाद राहुल हिमालय को मिली अतिरिक्त जिम्मेदारीराहुल हिमालय को रेलवे की कामकाज का 26 वर्षों का बेहतरीन अनुभव खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेलवे ने आईआरसीटीसी के नए चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के रूप में वरिष्ठ आईआईटीएस अधिकारी राहुल हिमालयन को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। आईआरसीटीसी में डायरेक्टर टूरिज्म एंड मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हिमालयन 20 जुलाई को सोमवार को सीएमडी पद का कार्यभार संभालेंगे। रेल मंत्रालय ने अपनी निवर्तमान सीएमडी संजय कुमार जैन के इस्तीफे के बाद यह नई जिम्मेदारी उन्हें दी है। हिमालयन को भारतीय रेलवे में विभिन्न पदों पर 26 वर्षों के कार्य अनुभव है और वह वर्तमान में आईआरसीटीसी में सबसे वरिष्ठ अधिकारी है।भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम के नए चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के रूप में राहुल हिमालयन को नियुक्त किया गया है। राहुल हिमालयन भारतीय रेलवे यातायात सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वे अपने छात्र जीवन में स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं। रेलवे और पर्यटन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने यात्री सुविधाओं, पर्यटन उत्पादों और विपणन रणनीतियों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। मौजूदा प्रबंध निदेशक एवं अध्यक्ष संजय कुमार जैन 20 जुलाई तक पद पर रहेंगे। लिहाजा सोमवार इस पद की जिम्मेदारी राहुल हिमालयन संभालेंगे।उल्लेखनीय है कि आईआरसीटीसी रेलवे की ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग, ई-कैटरिंग, रेल पर्यटन, भारत गौरव ट्रेनों और महाराजा एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम सेवाओं का संचालन करता है। ऐसे समय में जब भारतीय रेलवे डिजिटल सेवाओं, पर्यटन विस्तार और यात्री सुविधाओं के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दे रहा है, राहुल हिमालयन की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेलवे लगातार ई टिकट प्रणाली को बेहतर करने के लिए कार्य कर रही है। अभी हाल में ही बीटा प्रणाली को लॉन्च किया गया है। रेलवे पर्यटन और खान-पान को लेकर निरंतर विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है। इसको आगे बढ़ाने में आईआरसीटीसी की बड़ी भूमिका है।

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पीएम ने ऐशबाग समेत 75 पुनर्विकसित अमृत स्टेशनों का किया लोकार्पण

24.13 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हुआ ऐशबाग जंक्शन खबर है..लखनऊप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जालंधर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों तथा अन्य रेल परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इसी क्रम में पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के अंतर्गत 24.13 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकसित ऐशबाग जंक्शन भी राष्ट्र को समर्पित किया गया।ऐशबाग जंक्शन पर आयोजित समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ राज्यसभा सांसद संजय सेठ, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल एवं मुकेश शर्मा, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा बिष्ट यादव, भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, केंद्रीय रक्षा मंत्री के प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना के माध्यम से रेलवे स्टेशनों को आधुनिक स्वरूप देकर यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने ऐशबाग स्टेशन के पुनर्विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने हरित एवं स्वच्छ परिवहन की दिशा में भारतीय रेलवे की पहल का उल्लेख करते हुए जींद और सोनीपत के बीच संचालित होने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की विशेषताओं की भी जानकारी दी।इस अवसर पर आयोजित निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) गौरव अग्रवाल ने बताया कि ऐशबाग जंक्शन का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है। इससे यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्टेशन के विकास से न केवल रेल यात्रियों को लाभ होगा, बल्कि आसपास के क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति मिलेगी।कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अरिजीत सिंह ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।ऐशबाग जंक्शन पर विकसित प्रमुख यात्री सुविधाएं24.13 करोड़ रुपये की लागत से स्टेशन का व्यापक पुनर्विकास।स्टेशन परिसर का विस्तार एवं आकर्षक सौंदर्यीकरण।बेहतर यातायात प्रबंधन और उच्च स्तरीय पार्किंग व्यवस्था।5,500 वर्ग मीटर का आधुनिक पार्किंग क्षेत्र।4,300 वर्ग मीटर का विकसित सर्कुलेटिंग एरिया एवं हरित पार्क।प्लेटफॉर्मों पर आधुनिक फर्श और उन्नत प्रसाधन सुविधाएं।यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए आधुनिक एलईडी साइनेज।दोनों प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा के लिए ‘काऊ कैचर’ की व्यवस्था।26 नए यात्री शेल्टर एवं विस्तृत सर्कुलेटिंग एरिया।आधुनिक प्रतीक्षालय, शिशु आहार कक्ष तथा पार्सल घर।पे-एंड-यूज शौचालय एवं आकर्षक स्टेशन फसाड।निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए डीजी सेट एवं सोलर पैनल।वर्षा जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली।दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए रैम्प, व्हीलचेयर और ब्रेल मैप जैसी विशेष सुविधाएं।नए स्वरूप में विकसित ऐशबाग जंक्शन अब यात्रियों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक रेल यात्रा का अनुभव प्रदान करेगा तथा अमृत भारत स्टेशन योजना के उद्देश्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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एमएसडीई ने पूर्वोत्तर के युवाओं के लिए प्रशिक्षुता कार्यक्रम का विस्तार किया, 30,000 युवाओं को मिलेगा लाभ

खबर है..नई दिल्लीकौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने प्रधानमंत्री की राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS) के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) में प्रशिक्षुता को बढ़ावा देने के विशेष कार्यक्रम का वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विस्तार किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्वोत्तर के युवाओं को अधिक रोजगारपरक प्रशिक्षण, उद्योगों से जुड़ाव और बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम का कार्यान्वयन भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी द्वारा किया जाएगा।यह विस्तार मई 2025 में शुरू की गई प्रायोगिक परियोजना की सफलता के बाद किया गया है। अब इस पहल को पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों तक विस्तारित करते हुए 30,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षुता के अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले चरण की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है।योजना के तहत 15,000 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर से बाहर सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और अन्य संस्थानों में प्रशिक्षुता के अवसर दिए जाएंगे, जबकि 15,000 प्रशिक्षुओं को उनके गृह राज्य अथवा पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर ही रोजगार आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।सरकार ने इस पहल के लिए 57.58 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि पीएम-एनएपीएस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र घटक के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत युवाओं की प्रतिभा और ऊर्जा का केंद्र है। उन्होंने कहा कि पायलट परियोजना की सफलता ने साबित किया है कि उचित अवसर और सहयोग मिलने पर क्षेत्र के युवा उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। इस योजना का विस्तार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षुता, उद्योगों की भागीदारी और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देगा।योजना के अंतर्गत प्रशिक्षुओं को पीएम-एनएपीएस के मौजूदा लाभों के अलावा 1,500 रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। पहले यह सुविधा केवल अपने राज्य से बाहर जाने वाले प्रशिक्षुओं तक सीमित थी, लेकिन अब अपने गृह राज्य में प्रशिक्षुता करने वाले युवाओं को भी इसका लाभ मिलेगा।मंत्रालय प्रशिक्षुता व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पूरे क्षेत्र में कार्यशालाएं, जागरूकता अभियान, नियोक्ता सहभागिता कार्यक्रम तथा शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के साथ सहयोग को भी बढ़ावा देगा।पायलट परियोजना के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। 26,000 प्रशिक्षुओं के लक्ष्य के मुकाबले 23,470 युवाओं को प्रशिक्षुता के अवसर मिले, जो लक्ष्य का 90 प्रतिशत से अधिक है। वित्त वर्ष 2024-25 में जहां पूर्वोत्तर में 15,562 प्रशिक्षु थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 23,470 हो गई, यानी लगभग 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।इनमें 13,673 प्रशिक्षुओं को अपने गृह राज्य से बाहर प्रशिक्षुता के अवसर मिले, जबकि 9,797 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर ही रोजगार आधारित प्रशिक्षण मिला। मेघालय में प्रशिक्षुता में सबसे अधिक 95 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। महिला प्रशिक्षुओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जबकि सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में नियोक्ताओं की भागीदारी में महत्वपूर्ण विस्तार देखने को मिला।यह पहल पूर्वोत्तर के युवाओं को उद्योग आधारित कौशल, व्यावहारिक अनुभव और बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्किल इंडिया मिशन के माध्यम से क्षेत्र में समावेशी विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन: स्वच्छ, सुरक्षित और भविष्य की रेल यात्रा की शुरुआत

खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेलवे देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को शुरू करने के लिए तैयार है। यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से स्वयं बिजली उत्पन्न करती है और इसके संचालन के दौरान केवल जल वाष्प निकलती है। यानी न धुआं, न कार्बन उत्सर्जन—यह भारत की हरित और टिकाऊ रेल व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।2,600 यात्रियों की क्षमता वाली दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोजन ट्रेनजहां दुनिया में अधिकांश हाइड्रोजन ट्रेनें केवल 2–4 कोच की हैं, वहीं भारतीय रेलवे ने 10 कोच वाली ट्रेन विकसित की है, जिसमें लगभग 2,600 यात्रियों के सफर की क्षमता है। यह ट्रेन 75 किमी/घंटा की परिचालन गति और 110 किमी/घंटा की डिज़ाइन गति के साथ जिंद–सोनीपत (89 किमी) रेलखंड पर चलेगी।ट्रेन कैसे करेगी काम?इस ट्रेन में डीजल इंजन नहीं होगा। इसकी जगह प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल का उपयोग किया गया है। इसमें संग्रहित हाइड्रोजन हवा की ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया कर बिजली पैदा करती है, जिससे मोटरें चलती हैं और ट्रेन आगे बढ़ती है।सरल समीकरण: हाइड्रोजन + ऑक्सीजन = बिजली + जल वाष्प + ऊष्मायही कारण है कि यह ट्रेन पर्यावरण के लिए सबसे स्वच्छ रेल परिवहन विकल्पों में शामिल मानी जा रही है।दो पावर कार, आधुनिक बैटरी और फ्यूल सेलट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार और आठ ट्रेलर कोच होंगे। प्रत्येक पावर कार में:1,200 किलोवाट (1600 HP) क्षमता का फ्यूल सेललिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरीउच्च दबाव वाले हाइड्रोजन सिलेंडरदोनों पावर कार मिलकर ट्रेन को अधिकतम 110 किमी/घंटा की गति देने में सक्षम हैं।सुरक्षा पर विशेष जोरहाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, इसलिए भारतीय रेलवे ने इसमें बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली विकसित की है।मुख्य सुरक्षा प्रबंध:हाइड्रोजन रिसाव का तत्काल पता लगाने वाले सेंसरगर्मी, आग और धुएं की निगरानीस्वचालित हाइड्रोजन शटडाउन सिस्टमलगातार वेंटिलेशन ताकि गैस जमा न होलोको पायलट के लिए विशेष सुरक्षित केबिनआपातकालीन संचालन मोडअंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रमाणितपूरी प्रणाली को NFPA-2 और ISO 19880 जैसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। साथ ही PESO की मंजूरी प्राप्त है और जर्मनी की प्रतिष्ठित संस्था TÜV SÜD ने इसका स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन किया है।जिंद में बना भारत का पहला हाइड्रोजन रेलवे इकोसिस्टमहरियाणा के जिंद में देश की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सुविधा बनाई गई है।इसमें:ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन500 बार दबाव तक संपीड़न3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन भंडारणदो डिस्पेंसर से एक साथ दोनों पावर कार में ईंधन भरने की सुविधापूरी तरह स्वदेशी तकनीकइस परियोजना का नेतृत्व भारतीय रेलवे ने किया है।RDSO ने तकनीकी डिजाइन और मानक तैयार किए।मेधा सर्वो ड्राइव्स ने ट्रेनसेट का एकीकरण किया।इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने ट्रेन का बाहरी डिजाइन विकसित किया।यात्रियों से पहले हुए कई सफल परीक्षणपरिचालन से पहले ट्रेन का:लोड बॉक्स परीक्षणरेडियो फ्रीक्वेंसी परीक्षणदोलन (Oscillation) परीक्षणआपातकालीन ब्रेक परीक्षणस्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनसफलतापूर्वक पूरा किया गया।दुनिया में भारत की नई पहचानजर्मनी, फ्रांस, इटली, चीन और जापान जैसे देशों में हाइड्रोजन ट्रेनें सीमित स्तर पर संचालित हो रही हैं, लेकिन भारत ने 10 कोच और 2,600 यात्रियों की क्षमता वाली हाइड्रोजन ट्रेन तैयार कर वैश्विक स्तर पर एक नया मानक स्थापित किया है।भविष्य की दिशाभारतीय रेलवे इस परियोजना से मिले अनुभव के आधार पर कालका–शिमला जैसे विरासत रेलमार्गों पर भी हाइड्रोजन तकनीक लागू करने की योजना बना रहा है। यह पहल राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ओडिशा और झारखंड में दो महत्वपूर्ण रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को दी मंजूरी

खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति, (CCEA) ने रेल मंत्रालय की लगभग 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली दो महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, माल ढुलाई को तेज़ और अधिक कुशल बनाना तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देना है। मंजूर की गई परियोजनाएं हैं:पारादीप–हरिदासपुर दोहरीकरण (Odisha)राजखरसावां–डांगोअपोसी चौथी रेल लाइन (Jharkhand–Odisha)इन दोनों परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 145 किलोमीटर की नई मल्टी-ट्रैक लाइन जुड़ेगी। परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं से रेलवे की लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारु होगा, भीड़भाड़ कम होगी और यात्रियों तथा मालगाड़ियों दोनों की समयबद्धता एवं सेवा विश्वसनीयता में सुधार आएगा।ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिनका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाना तथा लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है।इन परियोजनाओं का लाभ ओडिशा और झारखंड के चार जिलों को मिलेगा। लगभग 1,526 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे करीब 14 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।पर्यटन के क्षेत्र में भी इन परियोजनाओं का विशेष महत्व है। इनके माध्यम से ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवजेव मंदिर तथा मेघाहातुबुरु पहाड़ियां जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क और अधिक सुविधाजनक होगा।पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेलवे के माध्यम से अधिक माल परिवहन होने से प्रतिवर्ष लगभग 6 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 1 करोड़ पौधे लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ के समान है।इन परियोजनाओं को भारत की लॉजिस्टिक लागत कम करने, औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण तथा ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए बड़े सुधार : वैष्णव

इन सुधारों का उद्देश्य भारतीय रेलवे को विश्वस्तरीय, तकनीक-संचालित, सुरक्षित और अधिक दक्ष परिवहन प्रणाली के रूप में विकसित करना रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत माल ढुलाई क्षेत्र के लिए 8 नए बड़े सुधारों की घोषणा की खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ अभियान के तहत आठ नए संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की। इसके साथ ही इस पहल के अंतर्गत लागू सुधारों की कुल संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इन सुधारों का उद्देश्य माल ढुलाई को अधिक आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल, तेज़, लागत प्रभावी और निजी निवेश के लिए आकर्षक बनाना है।रेल भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे “52 सप्ताह में 52 सुधार” के लक्ष्य के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि पहले लागू किए गए सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और अब घोषित नई नीतियां लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने, निजी भागीदारी बढ़ाने तथा रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में व्यापक सुधार लाने में मदद करेंगी।सुधार 10: फ्लाई ऐश के लिए प्रदूषण-मुक्त कंटेनर परिवहनभारतीय रेलवे अब फ्लाई ऐश के परिवहन के लिए विशेष आईएसओ मानक बंद कंटेनरों का उपयोग करेगा। इससे धूल प्रदूषण समाप्त होगा, सीमेंट संयंत्रों तक सुरक्षित परिवहन संभव होगा तथा सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी। यह व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स दक्षता भी बढ़ाएगी।सुधार 11: कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए एकीकृत लाइसेंसअब चार अलग-अलग श्रेणियों की जगह एक पैन-इंडिया कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंस लागू किया गया है। ₹25 करोड़ की एक समान पंजीकरण फीस के साथ ऑपरेटर पूरे रेलवे नेटवर्क पर सेवाएं दे सकेंगे। लाइसेंस की वैधता 20 वर्ष होगी और सफल संचालन के आधार पर इसे बिना अतिरिक्त शुल्क के आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे निजी निवेश और कंटेनराइजेशन को बढ़ावा मिलेगा।सुधार 12: खाद परिवहन व्यवस्था सरलभारतीय रेलवे ने खाद परिवहन के लिए लगभग 50 अलग-अलग मालभाड़ा स्लैब समाप्त कर प्रति टन प्रति किलोमीटर आधारित सरल शुल्क प्रणाली लागू की है। अब कंटेनरों के माध्यम से खाद की ढुलाई भी संभव होगी, जिससे वितरण अधिक लचीला, तेज़ और मौसम से सुरक्षित होगा।सुधार 13: रेलवे परियोजनाओं में कारीगरों का कौशल प्रमाणीकरणरेलवे परियोजनाओं में कार्यरत वेल्डर, फिटर, राजमिस्त्री और अन्य कारीगरों के लिए नई स्किल सर्टिफिकेशन नीति लागू की गई है। सफल कारीगरों को क्यूआर कोड आधारित प्रमाणपत्र दिए जाएंगे, जिनका डिजिटल सत्यापन किया जा सकेगा। इससे गुणवत्ता, सुरक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।सुधार 14: निर्माण एवं ठेका प्रणाली में बदलावरेलवे ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब अनुबंध की शुरुआत में ही 10 प्रतिशत परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा करनी होगी। अधिक कानूनी विवाद वाले ठेकेदारों पर प्रतिबंध लगाया गया है तथा जोखिम प्रबंधन के लिए ऑल रिस्क इंश्योरेंस और प्रोफेशनल इंडेम्निटी इंश्योरेंस अनिवार्य किए गए हैं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी सीआरआईएस के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिक पारदर्शी बनाया गया है।सुधार 15: वैगन डिज़ाइन में उद्योग की भागीदारीअब उद्योग और निर्माता अपनी आवश्यकता के अनुरूप विशेष माल ढुलाई वैगनों के डिज़ाइन विकसित कर सकेंगे। आरडीएसओ परीक्षण और मूल्यांकन के बाद इन्हें मंजूरी देगा। इससे स्टील, पेट्रोलियम, रसायन, दूध तथा अन्य उद्योगों के लिए विशेष वैगन विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।सुधार 16: पेट्रोलियम उत्पादों के लिए निजी टैंक वैगननई नीति के तहत तेल कंपनियां अब स्वयं विशेष टैंक वैगन खरीद या लीज़ पर लेकर रेलवे नेटवर्क पर संचालित कर सकेंगी। इससे परिवहन लागत कम होगी, लॉजिस्टिक्स अधिक कुशल बनेगी तथा सड़क परिवहन से जुड़े मिलावट और उत्पाद हानि जैसे जोखिम घटेंगे।सुधार 17: अनाज, आटा और दालों की कंटेनर आधारित ढुलाईअनाज, आटा और दालों के परिवहन के लिए भी मालभाड़ा संरचना को सरल बनाया गया है। कंटेनर आधारित परिवहन से सुरक्षित भंडारण, चरणबद्ध वितरण और मिलावट की संभावना में कमी आएगी, जिससे खाद्यान्न परिवहन अधिक सुरक्षित और कुशल बनेगा।रेलवे का लक्ष्य: कम लागत, अधिक क्षमता और हरित परिवहनरेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन सुधारों से माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित होगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, कार्बन उत्सर्जन में लगभग 90 प्रतिशत तक कमी, निजी निवेश में वृद्धि तथा भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि कंटेनर आधारित परिवहन को बढ़ावा देकर रेलवे पारंपरिक थोक माल ढुलाई से आगे बढ़ते हुए आधुनिक और विविधीकृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित कर रहा है।

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