डर से स्वतंत्रता तक: नया खंबटकी घाट सुरंग, घाटों से होकर सुरक्षित यात्रा

परियोजना की प्रगति 86 प्रतिशत पर, सुरंग का 2026 की पहली छमाही में उद्घाटन संभव खबर है..नई दिल्लीदशकों से, पुणे-सतारा राजमार्ग पर खंबटकी घाट का खंड धैर्य और साहस की परीक्षा के रूप में जाना जाता था। संकरी लेनें, तीखे ‘एस’ आकार के मोड़, लंबे ट्रैफिक जाम और लगातार दुर्घटनाएं यात्रा को तनावपूर्ण बनाती थीं, खासकर सप्ताहांत और छुट्टी के ट्रैफिक के दौरान। जो छोटी ड्राइव होनी चाहिए थी, वह अक्सर भीड़भाड़ वाली सुरंगों में थकाऊ इंतजार में बदल जाती थी।आज, यह कहानी बदल रही है : राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा एनएच-4 (नया एनएच-48) पर शुरू किया गया नया खंबटकी घाट ट्विन ट्यूब 6-लेन सुरंग परियोजना, महाराष्ट्र के सबसे चुनौतीपूर्ण राजमार्ग खंडों में से एक को आधुनिक, जन-केंद्रित अवसंरचना का प्रतीक बना रही है।परीक्षण संचालन और सुरक्षा मूल्यांकन के हिस्से के रूप में, ट्विन सुरंग का एक हिस्सा परीक्षण उद्देश्यों के लिए जनता के लिए खोल दिया गया है, जिससे यात्री खुद बेहतर अवसंरचना का अनुभव कर सकें।परियोजना की भौतिक प्रगति 86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, और सुरंग 2026 की पहली छमाही में उद्घाटन के ट्रैक पर है। एक नियमित यात्री, जो घाट से नियमित रूप से यात्रा करता है, नई सुरंग में प्रवेश करते ही अंतर महसूस करता है।“यहां अधिक रिफ्लेक्टर हैं, बेहतर लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे, दिखाई देने वाली सुरक्षा गार्ड रेलिंग और उचित अग्निशामक बिंदु हैं। पुरानी सुरंग की तुलना में यह बहुत चौड़ी है और स्पष्ट रूप से सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है।”सतारा से पुणे जा रहे एक अन्य नियमित यात्री पुराने रूट पर रोजमर्रा की संघर्ष को याद करता है।“पहले, पुरानी सुरंग में केवल दो लेनें थीं। इसके कारण ट्रैफिक जमा हो जाता था। अगर कोई कार या ट्रक खराब हो जाता, तो लंबा जाम लग जाता और दुर्घटना का गंभीर जोखिम होता। पुरानी सुरंग का रूट लगभग 15-20 मिनट लेता था। अब, इस नई सुरंग के कारण, यह केवल 5-10 मिनट में हो जाता है।”जो कभी गतिरोध था, वह अब राजमार्ग का सबसे तेज और सबसे सुगम खंड बन गया है।नजदीकी गांव की दो स्थानीय महिलाओं के लिए, जो खंडाला और सतारा के बीच रोजाना यात्रा करती हैं, इस सुरंग ने रोजमर्रा की जिंदगी बदल दी है।“यह नई सुरंग यात्रा करने में बहुत अच्छी और बहुत सुरक्षित लगती है। पुरानी सुरंग में यात्रा का समय लंबा था और दुर्घटना का जोखिम बहुत अधिक था। हम रोजाना यात्रा करते हैं, इसलिए अब हम बहुत समय बचा रहे हैं। सुरंग के अंदर लाइटिंग उत्कृष्ट है, जो इसे सुरक्षित महसूस कराती है। पहले अंधेरा बड़ी समस्या था, लेकिन अब नहीं।”नई खंबटकी घाट ट्विन ट्यूब सुरंग यह साबित करती है कि जब अवसंरचना मानवीय अनुभव के इर्द-गिर्द डिजाइन की जाती है, तो यह वाहनों को मात्र ले जाने से अधिक करती है। यह डर मिटाती है, समय लौटाती है, जानें बचाती है और यात्रा पर विश्वास बहाल करती है।

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प्रधानमंत्री मोदी 28 अप्रैल को वाराणसी दौरे पर

दो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को दिखाएंगे हरी झंडी खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अप्रैल 2026 को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे करोड़ों की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे और दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।प्रधानमंत्री दोपहर करीब 2:30 बजे बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे, जहां से बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) जाएंगे। यहां गेस्ट हाउस में लगभग एक घंटे विश्राम के बाद शाम करीब 4:30 बजे जनसभा को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के बाद वे अतिथि गृह लौट जाएंगे।इस अवसर पर पीएम मोदी वाराणसी से पुणे (हडपसर) के लिए अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे, जबकि अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन से मुंबई के लिए चलने वाली दूसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को वर्चुअल माध्यम से रवाना करेंगे। ये ट्रेनें वाराणसी, प्रयागराज, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ेंगी।नई ट्रेनों का संचालन ज्ञानपुर रोड, फतेहपुर, गोविंदपुरी, उरई, झांसी, बीना, रानी कमलापति (भोपाल), इटारसी, खंडवा, भुसावल, जलगांव और मनमाड जैसे प्रमुख स्टेशनों के रास्ते होगा। इससे उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र के बीच यात्रा तेज, सुगम और किफायती बनेगी, जिसका लाभ खासकर तीर्थ यात्रियों को मिलेगा।प्रधानमंत्री 29 अप्रैल की सुबह काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन भी करेंगे। सुबह 7 बजे अतिथि गृह से प्रस्थान कर करीब एक घंटे में दर्शन कर वापस लौटेंगे। इस दौरान वे कुछ विशिष्ट लोगों से मुलाकात भी कर सकते हैं। प्रधानमंत्री का यह दौरा पूर्वांचल समेत मध्य भारत के रेल नेटवर्क को मजबूती देने और यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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केंद्रीय विद्यालय आरडीएसओ में हैंडबॉल एवं योग प्रतियोगिता शुरू

खबर है..लखनऊ केंद्रीय विद्यालय आरडीएसओ में बुधवार को केंद्रीय विद्यालय संगठन लखनऊ संभाग की तीन दिवसीय हैंडबॉल एवं योग प्रतियोगिता बालिका वर्ग (अंडर 14 17 एवं 19) का शुभारंभ हुआ।आरडीएसओ के कार्यकारी निदेशक (प्रशासन) अरुण कुमार शर्मा ने प्रतियोगिता का उद्घाटन किया । प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि के रूप में श्री शर्मा ने दीप प्रज्वलन कर माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। विद्यालय के प्राचार्य राजेश कुमार शुक्ल ने मुख्य अतिथि का हरित स्वागत कर उनका आभार व्यक्त किया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने मुख्य अतिथि के स्वागत में गीत और सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। मुख्य अतिथि श्री शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।विद्यालय के प्राचार्य श्री शुक्ल के मुताबिक यह प्रतियोगिता 24 अप्रैल को समाप्त होगी। इस प्रतियोगिता में केंद्रीय विद्यालय लखनउ संभाग के 21 विस्यलयों के कुल 175 प्रतियोगी भाग ले रहे हैं तथा उनके 35 अनुरक्षक भी हैं। उद्घाटन समारोह का संचालन विद्यालय के पीजीटी हिंदी एचएन दुबे ने किया। मुख्य अध्यापिका सुश्री अंजू अरोड़ा ने उद्घाटन समारोह में आए अतिथियों का आभार व्यक्त किया ।

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जे.के. टायर्स एवं इंडस्ट्रीज के मैसूर प्लांट में ज्ञानवर्धक अध्ययन दौरे का सफल आयोजन

खबर है..नई दिल्लीएआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने कहा कि जे. के. टायर्स एवं इंडस्ट्रीज के मैसूर प्लांट के अध्ययन दौरे में शामिल होना हमारे लिए गर्व और अत्यंत प्रसन्नता का विषय रहा। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु एयरपोर्ट पर आगमन से लेकर वापसी तक कार्यक्रम की हर व्यवस्था बहुत ही सुव्यवस्थित और उत्कृष्ट रही, जिससे यह अनुभव अत्यंत सहज और यादगार बना।उन्होंने आगे कहा कि यह दौरा ज्ञानवर्धक और अत्यंत उपयोगी रहा। विभिन्न तकनीकी सत्रों के साथ-साथ डॉ. रघुपति सिंघानिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा मैसूर प्लांट विज़िट ने आधुनिक निर्माण प्रक्रियाओं, नई तकनीकों और सख्त गुणवत्ता मानकों को नजदीक से समझने का अवसर प्रदान किया। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कंपनी विश्वस्तरीय उत्पाद देने के साथ-साथ ग्राहकों की आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।डॉ. हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष – एआईएमटीसी ने डॉ. रघुपति सिंघानिया एवं अंशुमान सिंघानिया जैसे दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उत्कृष्टता, इन्नोवेशन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के साथ मजबूत जुड़ाव ने संगठन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। उन्होंने विशेष रूप से संजीव शर्मा, वाईज प्रसिडेंट (फ्लीट & मोबिलिटी सोल्युशंस), जे.के. टायर्स एवं इंडस्ट्रीज, के ‘पर्चेजिंग माइलेज’ – एक नई और अनोखी ओनरशिप योजना – (टायर की कीमत के बजाय उसके प्रदर्शन/माइलेज के आधार पर भुगतान) के नवाचारपूर्ण विचार की प्रशंसा करते हुए कहा कि “यह पहल ट्रांसपोर्ट उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। इस योजना में ग्राहक टायर का उपयोग “प्रति किलोमीटर” के आधार पर भुगतान करता है जिससे वह शुरुआती निवेश बचता है और वह केवल उपयोग के अनुसार भुगतान करता है।इस दौरे में डॉ जी आर शनमुगप्पा, चेयरमैन – एआईएमटीसी; पूर्व अध्यक्ष गुरिंदर पाल सिंह, बल मलकीत सिंह, भीम वाधवा, अमृतलाल मदान ; उपाध्यक्ष ईस्ट जोन – प्रमोद कुमार गुप्ता; उपाध्यक्ष वेस्ट जोन – जितेंद्र सांघवी; उपाध्यक्ष साउथ जोन – श्री ईश्वरा राव, शामिल रहे। ट्रांसपोर्ट ट्रेड के दिग्गज फ्लीट ऑनर्स – सतीश ढींगरा (डी.जी.एफ.सी.); राजीव गुप्ता (कारवां रोड़वेज); विक्रम गुप्ता (सुप्रीम ट्रांसपोर्ट) आदि शामिल रहे ।

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टोल पर ओवरलोडिंग नियमों में संशोधन चिंताजनक, सड़क सुरक्षा के लिए खतरा : सभरवाल

खबर है..नई दिल्लीऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल ने टोल पर ओवरलोडिंग नियमों में संशोधन पर चिंता जताई है और कहा है कि यह संशोधन के लिए सड़क सुरक्षा के लिए खतरा है।डा.सभरवाल ने भारत सरकार की ओर से National Highways Fee (Amendment) Rules, 2026 के तहत ओवरलोडिंग से संबंधित ढांचे में किए गए संशोधनों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जो 15 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गए हैं।नए प्रावधानों के अनुसार, निर्धारित ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) से अधिक भार ले जाने वाले वाहनों पर टोल आधारित अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। 10% तक ओवरलोडिंग पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं। 10% से 40% तक ओवरलोडिंग पर 2 गुना टोल। 40% से अधिक ओवरलोडिंग पर 4 गुना टोल।उन्होंने बताया कि ओवरलोडेड वाहनों की पहचान अब टोल प्लाज़ा पर लगे वज़न मापन सिस्टम के माध्यम से की जाएगी और इसका रिकॉर्ड VAHAN डेटाबेस में दर्ज होगा। भुगतान FASTag/डिजिटल माध्यमों से किया जाएगा।उन्होंने कहा कि AIMTC लंबे समय से ओवरलोडिंग का विरोध करता रहा है और इसे देश में सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण मानता है। भारत में हर वर्ष 1.5 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में होती है, जिसमें ओवरलोडिंग एक महत्वपूर्ण कारक है। ओवरलोडिंग से न केवल वाहन की ब्रेकिंग और स्थिरता प्रभावित होती है, बल्कि सड़क एवं पुलों के ढांचे को भी नुकसान पहुंचता है।”डॉ सभरवाल ने कहा हमारा का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में एक गंभीर कमी है क्योंकि यह दंड प्रणाली केवल टोल प्लाज़ा तक सीमित है, जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत RTO द्वारा लगाए जाने वाले दंड अलग से लागू रहेंगे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अतिरिक्त शुल्क लेकर ओवरलोडेड वाहनों को आगे चलने की अनुमति दी जा रही है, जो कि असुरक्षित संचालन को बढ़ावा देता है और दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ाता है।इसके अलावा लावा ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों में भ्रांति फैल रही है कि सरकार ने 10 प्रतिशत की छूट दे दी है । जो सरासर गलत है। CMVR 1989 के अनुसार वाणिज्य वाहनों पर भार क्षमता से सिर्फ 5 प्रतिशत अतिरिक्त भार मान्य है । सिर्फ दंड लगाना पर्याप्त नहीं है। ओवरलोडेड वाहनों को तब तक सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि अतिरिक्त भार उतार न दिया जाए। यही एक प्रभावी रोकथाम (deterrence) सुनिश्चित करेगा और सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाएगा।उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि इस नीति की समीक्षा कर इसे दंड आधारित नहीं बल्कि रोकथाम आधारित बनाया जाए, ताकि सड़क सुरक्षा को वास्तविक रूप से मजबूत किया जा सके।

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बेहतर रेल सुविधाएं जीत रहे हैं यात्रियों का भरोसा : अश्विनी वैष्णव

रोजाना 14 हजार यात्री ट्रेनों से सफर कर रहे हैं दो करोड़ लोग खबर है..नई दिल्लीदुनिया के सबसे विशाल और जटिल रेल नेटवर्कों में से एक भारतीय रेलवे प्रतिदिन 14,000 से अधिक यात्री ट्रेनों सहित कुल 25,000 से ज्यादा ट्रेनें संचालित करता है, जिनमें रोजाना दो करोड़ से अधिक लोग सफर करते हैं। दशकों तक रेलवे को लेकर होने वाली सार्वजनिक चर्चाओं का केंद्र केवल विस्तार और कनेक्टिविटी ही रहा। हालांकि, वर्ष 2014 के बाद से एक बुनियादी नीतिगत बदलाव के जरिए सुरक्षा को सभी परिचालनों के केंद्र में रखा गया। इसके परिणाम अब ठोस आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जो संरचनात्मक, तकनीकी और वित्तीय स्तर पर हुए समान रूप से महत्त्वपूर्ण बदलावों को दर्शाते हैं।अपने लेख के माध्यम से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर रेल सुरक्षा का आकलन प्रति बिलियन पैसेंजर-किलोमीटर होने वाली मृत्यु या दुर्घटनाओं के आधार पर किया जाता है, जिससे अलग-अलग स्तर के रेल सिस्टम के बीच तुलना संभव हो पाती है। वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान ही एक स्पष्ट संदेश दे दिया गया था: सुरक्षा सर्वोपरि। इसी विजन के साथ, 2014 से भारतीय रेलवे ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था के कायाकल्प के लिए तकनीकी-आधारित, व्यापक और निरंतर वित्तीय निवेश वाली रणनीति अपनाई है।एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते, जिससे यात्रियों की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। वित्त वर्ष 2025-26 में ‘मेक इन इंडिया’ प्रयासों को और मजबूती देते हुए 1,674 इंजनों का रिकॉर्ड उत्पादन किया गया और साथ ही 6,677 नए एलएचबी कोच तैयार किए गए, जो रेल सफर को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाते हैं।ट्रैक की गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए वैष्णव ने कहा कि 60 किलोग्राम की भारी पटरियों, लंबे वेल्डेड रेल पैनलों, उन्नत वेल्डिंग तकनीकों और अत्याधुनिक अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन टेस्टिंग को व्यापक स्तर पर अपनाने से रेल फ्रैक्चर में 92 प्रतिशत और वेल्ड फेलियर में 93 प्रतिशत की भारी कमी आई है। सर्दियों में कम विज़िबिलिटी के दौरान लोको पायलटों की मदद करने वाले जीपीएस आधारित ‘फॉग सेफ्टी डिवाइस’ की संख्या में भारी बढ़ोतरी की गई है—जहाँ पहले ये केवल 90 यूनिट थे, वहीं अब कोहरा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 30,000 डिवाइस लगाए जा चुके हैं। यह तकनीक लोको पायलट को आने वाले सिग्नल, रेलवे क्रॉसिंग और अन्य लैंडमार्क्स की रियल-टाइम सटीक जानकारी प्रदान करती है। श्री वैष्णव ने यह भी रेखांकित किया कि अब लगभग 4,000 रेलवे स्टेशन पूरी तरह से डिजिटल हो चुके हैं।वैष्णव ने जोर देकर कहा कि कोई भी तकनीक मानवीय सतर्कता का विकल्प नहीं हो सकती, इसीलिए भारतीय रेलवे ने अपने रनिंग स्टाफ (लोको पायलट और सहायक) की कार्य स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए व्यवस्थित निवेश किया है।वैष्णव ने तर्क दिया कि सुरक्षा संस्कृति में आए इस क्रांतिकारी बदलाव का सबसे बड़ा सबूत कोई एक नाटकीय घटना नहीं, बल्कि पिछले एक दशक से दुर्घटनाओं और हताहतों की संख्या में आ रही निरंतर और डेटा-आधारित गिरावट है।

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‘विश्व सूत्र – विश्‍व के लिए भारत की बुनाई’ कार्यक्रम के लिए फेमिना मिस इंडिया के साथ सहयोग

खबर है..नई दिल्लीकेन्‍द्रीय वस्त्र मंत्रालय के हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय ने उल्‍लेखनीय पहल करते हुए समृद्ध भारतीय हथकरघा क्षेत्र और उसकी विविधता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने के लिए पहली बार फेमिना मिस इंडिया के साथ सहयोग किया है।“विश्व सूत्र – विश्‍व के लिए भारत की बुनाई” नाम की विशेष पहल के तहत, फेमिना मिस इंडिया सौंदर्य प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में विशेष हथकरघा संग्रह प्रस्‍तुत किया जाएगा। यह संग्रह भारतीय बुनकरों की कलात्मकता दर्शाएगा जिसमें हथकरघा क्षेत्र की संवहनीयता और सांस्कृतिक गहराई दिखेगी।इस पहल की विशेषता यह है कि इसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के विजेता भाग ले रहे हैं, जिनमें से प्रत्येक अपने क्षेत्र की बुनाई परंपरा से प्रेरित हथकरघा परिधानों का प्रदर्शन करेंगे और चयनित देश की सांस्कृतिक सौंदर्यशास्त्र को प्रतिबिंबित करने के लिए रचनात्मक रूप से प्रस्तुत करेंगे। यह नज़रिया प्रतीकात्मक रूप से भारत की वस्त्र विरासत को वैश्विक फैशन से जोड़ता है।भारत के लोकप्रिय बुनाई पहनावे में वाराणसी ब्रोकेड, लेप्चा, कांचीपुरम, कोटा डोरिया, माहेश्वरी, पटोला, इकत, कसावु, पैठानी, फुलकारी, जामदानी, कुल्लू शॉल, उप्पादा, खुन्न, पश्मीना, मूगा सिल्क, इलकल और अन्य क्षेत्रीय परंपराएं शामिल हैं।हथकरघा विकास आयुक्त डॉ. एम. बीना ने कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य युवा वर्ग, फैशन जगत के हितधारकों और अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं के बीच भारतीय हथकरघा की दृश्यता बढ़ाना है। यह विरासत के रूप में हथकरघा, भविष्य के रूप में हथकरघा की धारणा को सुदृढ़ करता है और सरकार की रचनात्‍मक अर्थव्‍यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मक उद्यमिता को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।भारत विश्व की सबसे समृद्ध हथकरघा परंपराओं में से एक देश है। यह कृषि के बाद 35 लाख से अधिक बुनकरों और संबंधित श्रमिकों को स्थायी आजीविका प्रदान करता है। पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हथकरघा वस्त्रों में नए सिरे से रुचि उत्‍पन्‍न हुई है।यह पहल भारत सरकार की पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में परिवर्तित करने की प्रतिबद्धता दर्शाती है, जो वोकल फोर लोकल टू ग्लोबल” की दृष्टि और प्रधानमंत्री के 5एफ ढांचे (फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन) के अंतर्गत आती है। यह सांस्कृतिक उद्योगों को सुदृढ़ बनाने, स्थायी आजीविका सृजित करने और वैश्विक वस्त्र एवं फैशन बाजारों में भारत की उपस्थिति विस्तारित करने में हथकरघा की अहम् भूमिका रेखांकित करती है।विश्व सूत्र: भारत की हथकरघा विरासत को स्थानीय करघों से वैश्विक मंच तक ले जाना।

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अनंत स्वरूप संभालेंगे फिक्की महासचिव पद की कमान

रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में अपनी लंबी सेवा और अनुभव का लाभ देंगे उद्योग संगठन फिक्की को खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेलवे कार्मिक सेवा 1992 बैच के अधिकारी अनंत स्वरूप फेडरेशन ऑफ़ इंडियन चैंबर्स एंड इंडस्ट्री फिक्की के महासचिव पद की कमान संभालेंगे। अनंत स्वरूप रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में अपनी लंबी सेवा और अनुभव का लाभ उद्योग संगठन फिक्की को देंगे। इससे नीतिगत वकालत को आगे बढ़ाने और सरकार उद्योग जगत के नेताओं और अंतरराष्ट्रीय निकायों के साथ बातचीत में उनकी बेहतरीन कार्य शैली से मदद मिलेगी।अनंत स्वरूप को फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसी) के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया है, जो पूर्व महासचिव शैलेश पाठक का स्थान लेंगे। स्वरूप महासचिव फिक्की के रूप में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे और सचिवालय का प्रबंधन करेंगे। फिक्की की स्थापना 1927 में हुई थी और यह भारत के सबसे पुराने और सबसे बड़े शीर्ष व्यापारिक संगठन के रूप में कार्य करता है।अनंत स्वरूप उद्योग संगठन फिक्की के महासचिव बनने से पहले विश्व व्यापार संगठन के जेनेवा दफ्तर में फर्स्ट सेक्रेटरी के रूप में काम कर चुके हैं। स्वरूप को केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में काम करने का लंबा अनुभव है। मंत्रालय में हुए बतौर एडिशनल सेक्रेटरी कार्यरत रहे हैं। वे मंत्रालय में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज के पद पर रहे हैं। इससे पूर्व भारतीय रेलवे में विभिन्न पदों पर रहते हुए पूर्व रेलमंत्री के साथ साथ कार्य कर चुके हैं। वे पब्लिक पॉलिसी के अच्छे जानकार माने जाते हैं।अनंत स्वरूप ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जीव विज्ञान में बीएससी और एमएससी करने के अलावा एलएलबी, एमबीए और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंस में मास्टर्स सर्टिफिकेट भी हासिल किया है।

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दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का शुभारंभ, मिली विकास को नई रफ्तार

खबर है..नई दिल्लीदेश के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए आज 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून, उत्तराखंड में 12,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाले दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी इस अवसर पर उपस्थित रहे। 213 किमी लंबाई वाला यह 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाई स्पीड कॉरिडोर दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा समय को 6 घंटे से घटाकर 3 घंटे करेगा तथा दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के लिए श्री गडकरी जी ने आदरणीय प्रधानमंत्री जी का आभार व्यक्त किया।यह तेज मल्टी-लेन कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों से होकर गुजरता है। इस परियोजना के कार्यान्वयन में निर्बाध हाई स्पीड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), चार प्रमुख पुल और सड़क किनारे 12 जन सुविधाओं (वे साइड अमेनिटीज) का निर्माण भी शामिल है। यात्रियों के लिए सुरक्षित और अधिक कुशल यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए यह कॉरिडोर उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (एटीएम) से सुसज्जित है।इस परियोजना क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता, समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों को ध्यान में रखते हुए, इस कॉरिडोर को कई विशेषताओं के साथ डिजाइन किया गया है, जिनका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष में अत्यधिक कमी लाना है। जंगली जानवरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए, परियोजना में वन्यजीव संरक्षण की कई विशेष सुविधाएं शामिल की गई हैं। इनमें 12 किलोमीटर लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है, जो एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में से एक है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास होगा। कॉरिडोर में आठ पशु मार्ग, 200 मीटर लंबे दो हाथी अंडरपास और दात काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है।दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रमुख पर्यटन और आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क बढ़ाएगा। चार धाम, ऋषिकेश, हरिद्वार और मसूरी तक पहुंच आसान कर पर्यटन को नई ऊर्जा देगा। इस परियोजना से बागपत, शामली और सहारनपुर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार सृजन के अवसर निर्मित होंगे। सहारनपुर के लकड़ी नक्काशी और मुजफ्फरनगर के कागज उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। कृषि उत्पादों की तेज आवाजाही संभव होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य, शिक्षा केंद्रों तक पहुंच आसान होगी और जीवन स्तर में सुधार होगा। यह कॉरिडोर पूरे क्षेत्र में व्यापार और विकास के नए रास्ते खोलकर क्षेत्रीय आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति पर गडकरी की समीक्षा बैठक

मध्यप्रदेश में ब्लैक स्पॉट्स के समयबद्ध सुधार एवं सड़क सुरक्षा सुदृढ़ करने पर विशेष जोर खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को जिला रायसेन, मध्यप्रदेश में दौरा हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), भोपाल क्षेत्र के अधिकारियों के साथ प्रदेश में संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के संबंध में विस्तृत चर्चा की।इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रदेश में चिन्हित सभी ब्लैक स्पॉट्स की समुचित पहचान कर उनका निर्धारित समय-सीमा में स्थायी सुधार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ब्लैक स्पॉट पर आवश्यकतानुसार ज्योमेट्रिकल सुधार, उपयुक्त साइनेज, क्रैश बैरियर, रोड मार्किंग, लाइटिंग तथा अन्य इंजीनियरिंग उपायों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके और यातायात अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।गडकरी ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, भूमि अधिग्रहण की स्थिति तथा कार्यान्वयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करते हुए गुणवत्ता के उच्चतम मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।उन्होंने कहा कि सड़क अवसंरचना का विकास केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति तथा क्षेत्रीय संतुलित विकास का एक महत्वपूर्ण आधार है। इस दौरान यह अवगत कराया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के माध्यम से मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के मध्य कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत तथा सड़क सुरक्षा में सुधार परिलक्षित हो रहा है। साथ ही, बेहतर सड़क नेटवर्क के परिणामस्वरूप कृषि उत्पादों एवं औद्योगिक वस्तुओं के आवागमन में तेजी आई है, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई है तथा सप्लाई चेन अधिक प्रभावी हुई है।गडकरी ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल रहा है तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, बेहतर कनेक्टिविटी के कारण प्रदेश के पर्यटन स्थलों तक पहुंच अधिक सुगम हुई है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को भी गति मिल रही है।

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