अजय प्रताप सिंह बने ऑपरेटिंग शाखा के सचिव

नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन लखनऊ मंडल की ऑपरेटिंग शाखा का चुनाव सम्पन्न खबर है..लखनऊनॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन (NRMU) लखनऊ मंडल की ऑपरेटिंग शाखा का चुनाव बुधवार को चारबाग स्थित यूनियन के मंडल कार्यालय में संपन्न हुआ। ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन/ यूनियन के जोनल अध्यक्ष एसयू शाह को निर्वाचन अधिकारी बनाया गया था। इनकी मौजूदगी में पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई जिसमें अजय प्रताप सिंह को शाखा सचिव निर्वाचित किया गया।नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन के मंडल मंत्री विभूति मिश्रा ने बताया कि ऑपरेटिंग शाखा के चुनाव में शाखा सचिव अजय प्रताप सिंह, शाखा अध्यक्ष राजेश कुमार, सहायक शाखा सचिव दिलीप द्विवेदी, सुनील गुप्ता एवं अनुराग शर्मा, उपाध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव, शैलेश पाठक, , सत्येंद्र कुमार एवं संजीव वर्मा और कोषाध्यक्ष बबिता साही को निर्वाचित किया गया।इस मौके पर मंडल अध्यक्ष सुधीर तिवारी ने नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि नई टीम ऑपरेटिंग शाखा के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान, उनके अधिकारों की रक्षा तथा संगठन को और अधिक सशक्त बनाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करेगी।ऑपरेटिंग शाखा चुनाव के दौरान नॉर्दर्न रेलवे मल्टी स्टेट प्राइमरी कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन राकेश कनौजिया समेत यूनियन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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रेलवे में संरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, वर्ष 2026-27 में सिर्फ दो रेल दुर्घटनाएं

खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेल ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रेल दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। रेल मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक केवल दो परिणामी (Consequential) रेल दुर्घटनाएं हुई हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में बड़ा सुधार दर्शाती हैं।रेल मंत्रालय ने बताया कि आधुनिक तकनीक, बेहतर रखरखाव, ट्रैक नवीनीकरण, उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली और ‘कवच’ जैसी स्वदेशी ट्रेन टक्कर-रोधी प्रणाली के विस्तार से रेल सुरक्षा लगातार मजबूत हुई है।मंत्रालय के अनुसार, 20 जुलाई 2026 तक कवच वर्जन 4.0 को 2,569 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक चालू किया जा चुका है। इसमें देश के सबसे व्यस्त दिल्ली–मुंबई और दिल्ली–हावड़ा रेल कॉरिडोर के प्रमुख खंड शामिल हैं।इसके अलावा, भारतीय रेल ने 21,858 रूट किलोमीटर पर ट्रैक-साइड कवच प्रणाली के कार्यान्वयन का काम शुरू कर दिया है। साथ ही, 11,253 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल, 1,668 दूरसंचार टावरों सहित अन्य सुरक्षा अवसंरचना का तेजी से विकास किया जा रहा है।रेल मंत्रालय का कहना है कि प्रौद्योगिकी, अवसंरचना उन्नयन और बेहतर रखरखाव के संयुक्त प्रयासों से भारतीय रेल का लक्ष्य यात्रियों को और अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय तथा आधुनिक रेल सेवा उपलब्ध कराना है।

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मानसून की धुंध के बीच चिनाब रेल पुल से गुजरी वंदे भारत एक्सप्रेस

नई दिल्लीजम्मू-कश्मीर की मनमोहक वादियों में मानसून की धुंध से ढके पहाड़ों के बीच प्रतिष्ठित चिनाब रेल पुल से गुजरती वंदे भारत एक्सप्रेस का अद्भुत दृश्य सामने आया है। यह नज़ारा भारत की आधुनिक रेल तकनीक और प्राकृतिक सौंदर्य का शानदार संगम प्रस्तुत करता है।विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज माना जाने वाला चिनाब रेल पुल दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में भारतीय इंजीनियरिंग की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह पुल उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसने कश्मीर घाटी को देश के शेष हिस्सों से रेल मार्ग द्वारा जोड़ने का सपना साकार किया है।इस मार्ग पर संचालित वंदे भारत एक्सप्रेस से जम्मू-कश्मीर में आवागमन अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हुआ है। इसके माध्यम से पर्यटन को नई गति मिलने के साथ-साथ स्थानीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह परियोजना क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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अमृतसर बना अंतरराष्ट्रीय एविएशन नेटवर्क का नया स्पोक, वैश्विक संपर्क को मिलेगी नई उड़ान

खबर है..नई दिल्लीभारत के विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत अमृतसर को अंतरराष्ट्रीय हब-एंड-स्पोक नेटवर्क में एक अहम स्पोक हवाई अड्डे के रूप में शामिल किया गया है। यह कदम देशभर में भारतीय हब एयरपोर्ट्स के माध्यम से निर्बाध अंतरराष्ट्रीय संपर्क स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।सरकार के अनुसार, कई अन्य स्पोक हवाई अड्डे भी संचालन के लिए तैयार किए जा रहे हैं और उन्हें चरणबद्ध तरीके से इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे यात्रियों को अधिक सुविधाजनक, किफायती और बेहतर वैश्विक हवाई संपर्क उपलब्ध होगा। यह पहल विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भारत का विमानन तंत्र अधिक प्रतिस्पर्धी और विश्वस्तरीय बनेगा।कार्यक्रम में नागर विमानन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा, अतिरिक्त सचिव पुनीत कंसल, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के चेयरमैन विपिन कुमार, एएआई के मुख्य परामर्शदाता शरद कुमार, एयर इंडिया के ग्रुप हेड–गवर्नेंस पी. बालाजी, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, कस्टम्स तथा सीआईएसएफ के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।इसके अलावा विमानन उद्योग, होटल एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र, ट्रैवल इंडस्ट्री, पर्यटन क्षेत्र तथा व्यापारिक जगत के अनेक प्रमुख हितधारक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।इस अवसर पर विभिन्न प्रतिनिधियों और विमानन एवं व्यापारिक क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ हुई चर्चा में अमृतसर से अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए ठोस सहयोग पर विशेष बल दिया गया। सरकार का मानना है कि इस पहल से पंजाब सहित उत्तर भारत के यात्रियों, पर्यटन और व्यापार को बड़ा लाभ मिलेगा तथा भारत की वैश्विक कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

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कानपुर-कबराई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से बुंदेलखंड को मिलेगा विकास का नया मार्ग

खबर है..नई दिल्लीसड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा विकसित किया जाने वाला 117.7 किलोमीटर लंबा कानपुर-कबराई (4/6 लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड) ग्रीनफील्ड राजमार्ग बुंदेलखंड और मध्य भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला साबित होगा। लगभग ₹7,145 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारे का अहम हिस्सा है और खनन, उद्योग तथा कृषि क्षेत्रों को सीधे राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ेगी। प्रमुख विशेषताएंलंबाई: 117.7 किमीलागत: ₹7,145 करोड़प्रकार: 4/6 लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्गक्रियान्वयन एजेंसी: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)लॉजिस्टिक्स को मिलेगी नई ताकतयह राजमार्ग कबराई के खनन क्षेत्र को कानपुर और भोपाल जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से तेज और निर्बाध संपर्क प्रदान करेगा। इससे खनिज, निर्माण सामग्री और औद्योगिक उत्पादों का परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित और कम लागत वाला होगा। ईंधन की बचत होगी, माल ढुलाई की लागत घटेगी तथा आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत बनेगी।यात्रा समय में होगी बड़ी कमीवर्तमान में कानपुर से कबराई तक की यात्रा में लगभग 3.5 घंटे लगते हैं, जो इस परियोजना के पूरा होने पर घटकर करीब 1.5 घंटे रह जाएगी। इससे माल परिवहन के साथ-साथ सामान्य यात्रियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।किसानों को मिलेगा सीधा फायदायह एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड के किसानों के लिए भी नई संभावनाएं खोलेगा।कृषि उपज तेजी से मंडियों और प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचेगी।फलों एवं सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों का नुकसान कम होगा।परिवहन लागत घटने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा।बीज, उर्वरक और कृषि मशीनरी की उपलब्धता आसान होगी।क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावाकानपुर-कबराई राजमार्ग से बुंदेलखंड में निवेश, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह परियोजना पीएम गति शक्ति के विजन को मजबूत करते हुए खनन, उद्योग और कृषि क्षेत्रों को एकीकृत कर संतुलित क्षेत्रीय विकास का आधार तैयार करेगी।यह परियोजना केवल एक राजमार्ग नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की खदानों, खेतों और उद्योगों को देश के बड़े बाजारों से जोड़ने वाली विकास की नई जीवनरेखा है।

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रेलकर्मियों में संरक्षा नियमों की जागरूकता के लिए पहली बार क्विज प्रतियोगिता

परिचालन विभाग ने किया सामान्य एवं सहायक नियम (G&SR) प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजनक्विज का मुख्य उद्देश्य रेलकर्मियों में संरक्षा नियमों एवं परिचालन प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना : डीआरएमप्रतियोगिता में यातायात निरीक्षक, लखनऊ-द्वितीय की टीम विजेता तो सुलतानपुर द्वितीय की टीम उपविजेता खबर है..लखनऊउत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के परिचालन विभाग ने एक नई पहल करते हुए पहली बार परिचालन कर्मचारियों के लिए सामान्य एवं सहायक नियम (G&SR) प्रश्नोत्तरी (Quiz) प्रतियोगिता का आयोजन किया। डीआरएम सुनील कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य रेलकर्मियों में संरक्षा नियमों एवं परिचालन प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उनके ज्ञान का मूल्यांकन करना तथा सुरक्षित ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों के प्रभावी ढंग से पालन कराना था।उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक रजनीश कुमार श्रीवास्तव ने मंडल में संरक्षा और सुरक्षा को लेकर रेलकर्मियों में और जागरूकता लाने के लिए क्विज प्रतियोगिता का खाका खींचा था, जबकि इसके सफल आयोजन एवं क्रियान्वयन का दायित्व वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (सामान्य) पवनीश काटल ने निभाया। प्रतियोगिता के दौरान एडीआरएम श्रीमती नीलिमा सिंह तथा सहायक मंडल परिचालन प्रबंधक सुश्री राशिदा खातून भी मौजूद रहीं और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक समर्थ गुप्ता ने बताया कि इस प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से कर्मचारियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित हुई तथा निरंतर सीखने की प्रवृत्ति एवं संरक्षा संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में यातायात निरीक्षक, लखनऊ-द्वितीय की टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि यातायात निरीक्षक, सुलतानपुर-द्वितीय की टीम उपविजेता (रनर-अप) रही। श्री गुप्ता ने बताया कि भविष्य में भी मंडल में ऐसे ज्ञानवर्धक एवं संरक्षा-केंद्रित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा ताकि कर्मचारियों की कार्यकुशलता में निरंतर वृद्धि हो तथा ट्रेनों का सुरक्षित संचालन हो सके।

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सैलानियों के लिए गुजरात और कर्नाटक का नया टूर पैकेज

आईआरसीटीसी ने लांच किया दो नए हवाई टूर पैकेजलखनऊ के पर्यटकों को दोनों राज्यों के धार्मिक, पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों का कराया जाएगा भ्रमण खबर है..लखनऊभारतीय रेल खानपान और पर्यटन निगम ( आईआरसीटीसी) ने सैलानियों के लिए दो नए हवाई टूर पैकेज लॉन्च किए हैं। गुजरात और कर्नाटक के धार्मिक, पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण पर्यटकों को कराया जाएगा। लखनऊ से आने जाने की व्यवस्था विमान से की गई है।यह जानकारी आईआरसीटीसी उत्तर क्षेत्र के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अजीत कुमार सिन्हा ने दी। उन्होंने बताया कि आईआरसीटीसी क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ से ‘’खुशबू गुजरात की’’ हवाई टूर पैकेज का संचालन किया जा रहा है। यह पैकेज 06 रात एवं 07 दिन का है। 1 से 8 अगस्त तक इस टूर पैकेज में सैलानियों को राजकोट, सोमनाथ, पोरबंदर, दीव, द्वारका का भ्रमण कराया जाएगा । इस टूर में यात्रियों को लखनऊ से राजकोट आने – जाने की व्यवस्था फ्लाइट से तथा खानपान और ठहरने की व्यवस्था तीन सितारा होटल में की गई है।श्सिन्हा ने बताया कि यात्रा के दौरान सैलानियों को बाला हनुमान मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, बेट द्वारका, रुख्मणी मंदिर, शिवराजपुर बीच, कीर्ति मंदिर (महात्मा गांधी का जन्म स्थान), सुदामा मंदिर, सोमनाथ मंदिर, भालका तीर्थ, दीव किला, दीव समुद्र तट, नायडा गुफाएं और गंगेश्वर महादेव मंदिर आदि का भ्रमण कराया जाएगा। एक व्यक्ति के ठहरने पर पैकेज का मूल्य प्रति व्यक्ति रू. 61900/-, दो व्यक्तियों के एक साथ ठहरने पर पैकेज का मूल्य प्रति व्यक्ति रू. 49000/-, तीन व्यक्तियो के एक साथ ठहरने पर पैकेज का मूल्य प्रति व्यक्ति रू. 47200/-, माता-पिता के साथ ठहरने पर प्रति बच्चे का पैकेज मूल्य रू. 42700/-, बेड सहित एवं मूल्य रू. 37400/- बिना बेड के होगा। उन्होंने बताया कि इस पैकेज की ‘बुकिंग पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर की जायेगी। उक्त यात्रा की बुकिंग पर्यटन भवन गोमती नगर लखनऊ स्थित आईआरसीटीसी कार्यालय एवं आईआरसीटीसी की बेवसाइट irctctourism.com पर भी कराई जा सकती है। इस टूर की जानकारी मोबाइल नम्बरों 8287930911/8287930902/9236391911 पर ली जा सकती है।सिन्हा ने बताया कि दूसरा हवाई टूर पैकेज मानसून स्पेशल बदामी विरासत ओडिसी (05 रात/06 दिन) का हैं। यह टूर पैकेज 30 जुलाई से 04 अगस्त के बीच आयोजित होगा। इस विशेष टूर पैकेज में सैलानियों को कर्नाटक की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन मंदिरों, भव्य स्थापत्य कला, ऐतिहासिक स्मारकों तथा विश्व प्रसिद्ध धरोहर स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा।उन्होंने बताया कि सैलानियों को लखनऊ से विमान के साथ आने जाने तथा होटल में रुकने और खानपान की व्यवस्था की गई है। यात्रा के दौरान पर्यटकों को अंजनाद्री हिल, विट्ठल मंदिर परिसर, विरुपाक्ष मंदिर, स्टोन चैरियट, हेमकुटा हिल, ससिवेकालु गणेश, बादामी गुफा मंदिर तथा चित्रदुर्ग किला का भ्रमण कराया जाएगा। उन्होंने टूर के टैरिफ के बारे में बताया कि (प्रति व्यक्ति): एक व्यक्ति के ठहरने पर पैकेज का मूल्य ₹53,100/- प्रति व्यक्ति, दो व्यक्तियों के एक साथ ठहरने पर ₹43,100/- प्रति व्यक्ति तथा तीन व्यक्तियों के एक साथ ठहरने पर ₹40,600/- प्रति व्यक्ति होगा। माता-पिता के साथ ठहरने पर 5 से 11 वर्ष तक के बच्चों का पैकेज मूल्य ₹35,500/- (बेड सहित) एवं ₹32,100/- (बिना बेड) होगा। 2 से 4 वर्ष तक के बच्चों के लिए बिना बेड पैकेज मूल्य ₹17,600/- प्रति बच्चा निर्धारित है। उक्त यात्रा की बुकिंग पर्यटन भवन, गोमती नगर, लखनऊ स्थित आईआरसीटीसी कार्यालय एवं आईआरसीटीसी की वेबसाइट www.irctctourism.com पर भी कराई जा सकती है। इस पैकेज की बुकिंग की जानकारी मोबाइल नंबरों से 9236391909 / 9305111765/ 9236391911 ले सकते हैं।

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कैबिनेट ने बल्लारी–गुंटकल रेलखंड पर मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना को दी मंजूरी

₹1,264 करोड़ की परियोजना से कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में बढ़ेगी रेल क्षमता, 2028–29 तक होगा कार्य पूरा खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बल्लारी–गुंटकल रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे दी है। ₹1,264 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना को वर्ष 2028–29 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य बहु-माध्यमीय परिवहन नेटवर्क को मजबूत बनाना, लॉजिस्टिक क्षमता बढ़ाना और लोगों, वस्तुओं तथा सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है।प्रमुख विशेषताएंपरियोजना लागत: ₹1,264 करोड़पूर्णता का लक्ष्य: 2028–29रेल नेटवर्क में वृद्धि: लगभग 46 किलोमीटरप्रभावित जिले: कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के तीन जिलेलाभान्वित गांव: लगभग 99लाभान्वित आबादी: करीब 7 लाख लोगपर्यटन और उद्योग को मिलेगा बढ़ावापरियोजना पूरी होने के बाद बल्लारी किला, श्री कुमार स्वामी मंदिर सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा। साथ ही यह रेलखंड लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर, लोहा एवं इस्पात, कोयला, उर्वरक और अनाज जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई का प्रमुख मार्ग होने के कारण औद्योगिक गतिविधियों को भी गति देगा।माल ढुलाई क्षमता में बड़ा इजाफानई रेल लाइनों के निर्माण से इस मार्ग पर प्रतिवर्ष लगभग 16.22 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी, जिससे लॉजिस्टिक लागत कम होगी और माल परिवहन अधिक तेज एवं कुशल बनेगा।पर्यावरण संरक्षण में भी योगदानपरियोजना के पूरा होने पर:1.32 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी।6.67 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी।यह कमी लगभग 27 लाख (0.27 करोड़) वृक्ष लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ प्रदान करेगी।यात्रियों को होगा सीधा लाभलाइन क्षमता बढ़ने से रेल परिचालन अधिक सुचारु होगा, ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आएगा, भीड़भाड़ कम होगी और यात्रियों को अधिक विश्वसनीय एवं सुविधाजनक रेल सेवाएं उपलब्ध होंगी।केंद्र सरकार के अनुसार यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नए भारत’ के विज़न के अनुरूप क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन, स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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देशभर में मॉनसून पर गृह मंत्रालय की कड़ी नजर, प्रभावित राज्यों को हरसंभव सहायता

खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय देशभर में मॉनसून की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है। भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।गृह मंत्रालय का एकीकृत नियंत्रण कक्ष (ICT) भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग (CWC) और भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) सहित अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर राज्यों और जिला आपदा संचालन केंद्रों को समय पर अलर्ट जारी कर रहा है। यह नियंत्रण कक्ष 24 घंटे राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी भी कर रहा है।पिछले सप्ताह 52 लोगों को बचाया, 2,206 को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचायाराष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), राज्य पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर राहत एवं बचाव अभियान चला रहा है। पिछले एक सप्ताह में:52 लोगों का सफलतापूर्वक बचाव किया गया।2,206 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।संवेदनशील क्षेत्रों में एनडीआरएफ की टीमें पहले से तैनात हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।रक्षा मंत्रालय भी राहत कार्यों में सक्रिय रक्षा मंत्रालय ने भी अपने संसाधनों को त्वरित रूप से तैनात कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान, राहत सामग्री वितरण और लोगों के सुरक्षित परिवहन में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।असम और अरुणाचल में नुकसान का आकलनकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों ने 7 से 10 जुलाई 2026 के बीच अरुणाचल प्रदेश और असम के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन किया। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय आपदा सहायता कोष (NDRF) से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए की गई।इसके अलावा, 25 जुलाई 2026 से एक अन्य अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लगातार बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान का मूल्यांकन करेगा।पहले से की गई थी तैयारियों की समीक्षागृह मंत्रालय ने 10 मई 2026 को लू और मॉनसून पूर्व बाढ़ की तैयारियों तथा 3 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर में भारी वर्षा, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की थी। चारधाम यात्रा मार्ग की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की भी नियमित समीक्षा की जा रही है।बारिश से वर्षा की कमी में सुधारहालांकि कई राज्यों में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन देशभर में हुई वर्षा के कारण पहले अनुमानित 30 प्रतिशत वर्षा की कमी घटकर लगभग 15 प्रतिशत रह गई है, जिससे खरीफ फसलों और जल संसाधनों की स्थिति में सुधार की उम्मीद बढ़ी है।

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6जी की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है भारत

90 सदस्यों वाला भारत 6जी गठबंधन, स्पेक्ट्रम रोडमैप जारी खबर..नई दिल्लीभारत सरकार ने देश में 6जी तकनीक के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत 6जी गठबंधन (Bharat 6G Alliance – B6GA) को मजबूत किया है। 15 जुलाई 2026 तक इस गठबंधन में 90 सदस्य शामिल हो चुके हैं, जो दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, उपकरण निर्माताओं, स्टार्टअप्स, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य हितधारकों का व्यापक प्रतिनिधित्व करते हैं।भारत 6जी गठबंधन ने सात कार्य-समूह गठित किए हैं, जो 6जी तकनीक, स्पेक्ट्रम, एप्लिकेशन एवं उपयोग के मामले, उपकरण एवं कलपुर्जे, हरित एवं सतत प्रौद्योगिकी तथा आउटरीच जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कार्य कर रहे हैं। गठबंधन का उद्देश्य उद्योग, अकादमिक जगत और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाकर स्वदेशी अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा (IPR) को बढ़ावा देना है।6जी के लिए स्पेक्ट्रम रोडमैप जारीभारत 6जी गठबंधन के स्पेक्ट्रम कार्य-समूह ने “भारत में 6जी के लिए स्पेक्ट्रम रोडमैप” रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इसके अतिरिक्त, दूरसंचार विभाग (DoT) ने विभिन्न हितधारकों से परामर्श के बाद 6जी सेवाओं के लिए आधिकारिक स्पेक्ट्रम रोडमैप भी जारी किया है।कोलकाता में बनेगा 6जी टेराहर्ट्ज टेस्टबेडडिजिटल भारत निधि के तहत दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास कोष (TTDF) से तीन वर्ष की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसके अंतर्गत सोसायटी फॉर अप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (SAMEER), कोलकाता में 6जी टेराहर्ट्ज टेस्टबेड स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में आईआईटी मद्रास, आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी पटना भी साझेदार हैं।इस परियोजना के तहत इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में हाई डेटा रेट लाइन-ऑफ-साइट लिंक का सफल प्रदर्शन किया जा चुका है।वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत भागीदारीभारत ने अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के IMT-2030 (6G) फ्रेमवर्क में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत ने 6जी के उपयोग परिदृश्यों में ‘सर्वव्यापी संचार-संपर्क’, व्यापक कवरेज, अंतर-संचालन (Interoperability) और स्थिरता (Sustainability) को शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई है।सरकार 3GPP, ITU और oneM2M जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठनों में भारतीय उद्योग, स्टार्टअप्स और एमएसएमई की सक्रिय भागीदारी को भी बढ़ावा दे रही है। प्रौद्योगिकी विकास एवं निवेश संवर्धन (TDIP) योजना के तहत सदस्यता शुल्क, अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भागीदारी, भारत में बैठकों की मेजबानी, पायलट परीक्षण और प्रमाणन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।यह जानकारी केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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