टोल पर ओवरलोडिंग नियमों में संशोधन चिंताजनक, सड़क सुरक्षा के लिए खतरा : सभरवाल

खबर है..नई दिल्लीऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल ने टोल पर ओवरलोडिंग नियमों में संशोधन पर चिंता जताई है और कहा है कि यह संशोधन के लिए सड़क सुरक्षा के लिए खतरा है।डा.सभरवाल ने भारत सरकार की ओर से National Highways Fee (Amendment) Rules, 2026 के तहत ओवरलोडिंग से संबंधित ढांचे में किए गए संशोधनों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जो 15 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गए हैं।नए प्रावधानों के अनुसार, निर्धारित ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) से अधिक भार ले जाने वाले वाहनों पर टोल आधारित अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। 10% तक ओवरलोडिंग पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं। 10% से 40% तक ओवरलोडिंग पर 2 गुना टोल। 40% से अधिक ओवरलोडिंग पर 4 गुना टोल।उन्होंने बताया कि ओवरलोडेड वाहनों की पहचान अब टोल प्लाज़ा पर लगे वज़न मापन सिस्टम के माध्यम से की जाएगी और इसका रिकॉर्ड VAHAN डेटाबेस में दर्ज होगा। भुगतान FASTag/डिजिटल माध्यमों से किया जाएगा।उन्होंने कहा कि AIMTC लंबे समय से ओवरलोडिंग का विरोध करता रहा है और इसे देश में सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण मानता है। भारत में हर वर्ष 1.5 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में होती है, जिसमें ओवरलोडिंग एक महत्वपूर्ण कारक है। ओवरलोडिंग से न केवल वाहन की ब्रेकिंग और स्थिरता प्रभावित होती है, बल्कि सड़क एवं पुलों के ढांचे को भी नुकसान पहुंचता है।”डॉ सभरवाल ने कहा हमारा का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में एक गंभीर कमी है क्योंकि यह दंड प्रणाली केवल टोल प्लाज़ा तक सीमित है, जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत RTO द्वारा लगाए जाने वाले दंड अलग से लागू रहेंगे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अतिरिक्त शुल्क लेकर ओवरलोडेड वाहनों को आगे चलने की अनुमति दी जा रही है, जो कि असुरक्षित संचालन को बढ़ावा देता है और दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ाता है।इसके अलावा लावा ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों में भ्रांति फैल रही है कि सरकार ने 10 प्रतिशत की छूट दे दी है । जो सरासर गलत है। CMVR 1989 के अनुसार वाणिज्य वाहनों पर भार क्षमता से सिर्फ 5 प्रतिशत अतिरिक्त भार मान्य है । सिर्फ दंड लगाना पर्याप्त नहीं है। ओवरलोडेड वाहनों को तब तक सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि अतिरिक्त भार उतार न दिया जाए। यही एक प्रभावी रोकथाम (deterrence) सुनिश्चित करेगा और सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाएगा।उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि इस नीति की समीक्षा कर इसे दंड आधारित नहीं बल्कि रोकथाम आधारित बनाया जाए, ताकि सड़क सुरक्षा को वास्तविक रूप से मजबूत किया जा सके।

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बेहतर रेल सुविधाएं जीत रहे हैं यात्रियों का भरोसा : अश्विनी वैष्णव

रोजाना 14 हजार यात्री ट्रेनों से सफर कर रहे हैं दो करोड़ लोग खबर है..नई दिल्लीदुनिया के सबसे विशाल और जटिल रेल नेटवर्कों में से एक भारतीय रेलवे प्रतिदिन 14,000 से अधिक यात्री ट्रेनों सहित कुल 25,000 से ज्यादा ट्रेनें संचालित करता है, जिनमें रोजाना दो करोड़ से अधिक लोग सफर करते हैं। दशकों तक रेलवे को लेकर होने वाली सार्वजनिक चर्चाओं का केंद्र केवल विस्तार और कनेक्टिविटी ही रहा। हालांकि, वर्ष 2014 के बाद से एक बुनियादी नीतिगत बदलाव के जरिए सुरक्षा को सभी परिचालनों के केंद्र में रखा गया। इसके परिणाम अब ठोस आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जो संरचनात्मक, तकनीकी और वित्तीय स्तर पर हुए समान रूप से महत्त्वपूर्ण बदलावों को दर्शाते हैं।अपने लेख के माध्यम से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर रेल सुरक्षा का आकलन प्रति बिलियन पैसेंजर-किलोमीटर होने वाली मृत्यु या दुर्घटनाओं के आधार पर किया जाता है, जिससे अलग-अलग स्तर के रेल सिस्टम के बीच तुलना संभव हो पाती है। वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान ही एक स्पष्ट संदेश दे दिया गया था: सुरक्षा सर्वोपरि। इसी विजन के साथ, 2014 से भारतीय रेलवे ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था के कायाकल्प के लिए तकनीकी-आधारित, व्यापक और निरंतर वित्तीय निवेश वाली रणनीति अपनाई है।एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते, जिससे यात्रियों की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। वित्त वर्ष 2025-26 में ‘मेक इन इंडिया’ प्रयासों को और मजबूती देते हुए 1,674 इंजनों का रिकॉर्ड उत्पादन किया गया और साथ ही 6,677 नए एलएचबी कोच तैयार किए गए, जो रेल सफर को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाते हैं।ट्रैक की गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए वैष्णव ने कहा कि 60 किलोग्राम की भारी पटरियों, लंबे वेल्डेड रेल पैनलों, उन्नत वेल्डिंग तकनीकों और अत्याधुनिक अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन टेस्टिंग को व्यापक स्तर पर अपनाने से रेल फ्रैक्चर में 92 प्रतिशत और वेल्ड फेलियर में 93 प्रतिशत की भारी कमी आई है। सर्दियों में कम विज़िबिलिटी के दौरान लोको पायलटों की मदद करने वाले जीपीएस आधारित ‘फॉग सेफ्टी डिवाइस’ की संख्या में भारी बढ़ोतरी की गई है—जहाँ पहले ये केवल 90 यूनिट थे, वहीं अब कोहरा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 30,000 डिवाइस लगाए जा चुके हैं। यह तकनीक लोको पायलट को आने वाले सिग्नल, रेलवे क्रॉसिंग और अन्य लैंडमार्क्स की रियल-टाइम सटीक जानकारी प्रदान करती है। श्री वैष्णव ने यह भी रेखांकित किया कि अब लगभग 4,000 रेलवे स्टेशन पूरी तरह से डिजिटल हो चुके हैं।वैष्णव ने जोर देकर कहा कि कोई भी तकनीक मानवीय सतर्कता का विकल्प नहीं हो सकती, इसीलिए भारतीय रेलवे ने अपने रनिंग स्टाफ (लोको पायलट और सहायक) की कार्य स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए व्यवस्थित निवेश किया है।वैष्णव ने तर्क दिया कि सुरक्षा संस्कृति में आए इस क्रांतिकारी बदलाव का सबसे बड़ा सबूत कोई एक नाटकीय घटना नहीं, बल्कि पिछले एक दशक से दुर्घटनाओं और हताहतों की संख्या में आ रही निरंतर और डेटा-आधारित गिरावट है।

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‘विश्व सूत्र – विश्‍व के लिए भारत की बुनाई’ कार्यक्रम के लिए फेमिना मिस इंडिया के साथ सहयोग

खबर है..नई दिल्लीकेन्‍द्रीय वस्त्र मंत्रालय के हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय ने उल्‍लेखनीय पहल करते हुए समृद्ध भारतीय हथकरघा क्षेत्र और उसकी विविधता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने के लिए पहली बार फेमिना मिस इंडिया के साथ सहयोग किया है।“विश्व सूत्र – विश्‍व के लिए भारत की बुनाई” नाम की विशेष पहल के तहत, फेमिना मिस इंडिया सौंदर्य प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में विशेष हथकरघा संग्रह प्रस्‍तुत किया जाएगा। यह संग्रह भारतीय बुनकरों की कलात्मकता दर्शाएगा जिसमें हथकरघा क्षेत्र की संवहनीयता और सांस्कृतिक गहराई दिखेगी।इस पहल की विशेषता यह है कि इसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के विजेता भाग ले रहे हैं, जिनमें से प्रत्येक अपने क्षेत्र की बुनाई परंपरा से प्रेरित हथकरघा परिधानों का प्रदर्शन करेंगे और चयनित देश की सांस्कृतिक सौंदर्यशास्त्र को प्रतिबिंबित करने के लिए रचनात्मक रूप से प्रस्तुत करेंगे। यह नज़रिया प्रतीकात्मक रूप से भारत की वस्त्र विरासत को वैश्विक फैशन से जोड़ता है।भारत के लोकप्रिय बुनाई पहनावे में वाराणसी ब्रोकेड, लेप्चा, कांचीपुरम, कोटा डोरिया, माहेश्वरी, पटोला, इकत, कसावु, पैठानी, फुलकारी, जामदानी, कुल्लू शॉल, उप्पादा, खुन्न, पश्मीना, मूगा सिल्क, इलकल और अन्य क्षेत्रीय परंपराएं शामिल हैं।हथकरघा विकास आयुक्त डॉ. एम. बीना ने कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य युवा वर्ग, फैशन जगत के हितधारकों और अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं के बीच भारतीय हथकरघा की दृश्यता बढ़ाना है। यह विरासत के रूप में हथकरघा, भविष्य के रूप में हथकरघा की धारणा को सुदृढ़ करता है और सरकार की रचनात्‍मक अर्थव्‍यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मक उद्यमिता को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।भारत विश्व की सबसे समृद्ध हथकरघा परंपराओं में से एक देश है। यह कृषि के बाद 35 लाख से अधिक बुनकरों और संबंधित श्रमिकों को स्थायी आजीविका प्रदान करता है। पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हथकरघा वस्त्रों में नए सिरे से रुचि उत्‍पन्‍न हुई है।यह पहल भारत सरकार की पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में परिवर्तित करने की प्रतिबद्धता दर्शाती है, जो वोकल फोर लोकल टू ग्लोबल” की दृष्टि और प्रधानमंत्री के 5एफ ढांचे (फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन) के अंतर्गत आती है। यह सांस्कृतिक उद्योगों को सुदृढ़ बनाने, स्थायी आजीविका सृजित करने और वैश्विक वस्त्र एवं फैशन बाजारों में भारत की उपस्थिति विस्तारित करने में हथकरघा की अहम् भूमिका रेखांकित करती है।विश्व सूत्र: भारत की हथकरघा विरासत को स्थानीय करघों से वैश्विक मंच तक ले जाना।

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अनंत स्वरूप संभालेंगे फिक्की महासचिव पद की कमान

रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में अपनी लंबी सेवा और अनुभव का लाभ देंगे उद्योग संगठन फिक्की को खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेलवे कार्मिक सेवा 1992 बैच के अधिकारी अनंत स्वरूप फेडरेशन ऑफ़ इंडियन चैंबर्स एंड इंडस्ट्री फिक्की के महासचिव पद की कमान संभालेंगे। अनंत स्वरूप रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में अपनी लंबी सेवा और अनुभव का लाभ उद्योग संगठन फिक्की को देंगे। इससे नीतिगत वकालत को आगे बढ़ाने और सरकार उद्योग जगत के नेताओं और अंतरराष्ट्रीय निकायों के साथ बातचीत में उनकी बेहतरीन कार्य शैली से मदद मिलेगी।अनंत स्वरूप को फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसी) के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया है, जो पूर्व महासचिव शैलेश पाठक का स्थान लेंगे। स्वरूप महासचिव फिक्की के रूप में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे और सचिवालय का प्रबंधन करेंगे। फिक्की की स्थापना 1927 में हुई थी और यह भारत के सबसे पुराने और सबसे बड़े शीर्ष व्यापारिक संगठन के रूप में कार्य करता है।अनंत स्वरूप उद्योग संगठन फिक्की के महासचिव बनने से पहले विश्व व्यापार संगठन के जेनेवा दफ्तर में फर्स्ट सेक्रेटरी के रूप में काम कर चुके हैं। स्वरूप को केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में काम करने का लंबा अनुभव है। मंत्रालय में हुए बतौर एडिशनल सेक्रेटरी कार्यरत रहे हैं। वे मंत्रालय में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज के पद पर रहे हैं। इससे पूर्व भारतीय रेलवे में विभिन्न पदों पर रहते हुए पूर्व रेलमंत्री के साथ साथ कार्य कर चुके हैं। वे पब्लिक पॉलिसी के अच्छे जानकार माने जाते हैं।अनंत स्वरूप ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जीव विज्ञान में बीएससी और एमएससी करने के अलावा एलएलबी, एमबीए और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंस में मास्टर्स सर्टिफिकेट भी हासिल किया है।

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दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का शुभारंभ, मिली विकास को नई रफ्तार

खबर है..नई दिल्लीदेश के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए आज 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून, उत्तराखंड में 12,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाले दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी इस अवसर पर उपस्थित रहे। 213 किमी लंबाई वाला यह 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाई स्पीड कॉरिडोर दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा समय को 6 घंटे से घटाकर 3 घंटे करेगा तथा दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के लिए श्री गडकरी जी ने आदरणीय प्रधानमंत्री जी का आभार व्यक्त किया।यह तेज मल्टी-लेन कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों से होकर गुजरता है। इस परियोजना के कार्यान्वयन में निर्बाध हाई स्पीड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), चार प्रमुख पुल और सड़क किनारे 12 जन सुविधाओं (वे साइड अमेनिटीज) का निर्माण भी शामिल है। यात्रियों के लिए सुरक्षित और अधिक कुशल यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए यह कॉरिडोर उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (एटीएम) से सुसज्जित है।इस परियोजना क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता, समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों को ध्यान में रखते हुए, इस कॉरिडोर को कई विशेषताओं के साथ डिजाइन किया गया है, जिनका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष में अत्यधिक कमी लाना है। जंगली जानवरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए, परियोजना में वन्यजीव संरक्षण की कई विशेष सुविधाएं शामिल की गई हैं। इनमें 12 किलोमीटर लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है, जो एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में से एक है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास होगा। कॉरिडोर में आठ पशु मार्ग, 200 मीटर लंबे दो हाथी अंडरपास और दात काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है।दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रमुख पर्यटन और आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क बढ़ाएगा। चार धाम, ऋषिकेश, हरिद्वार और मसूरी तक पहुंच आसान कर पर्यटन को नई ऊर्जा देगा। इस परियोजना से बागपत, शामली और सहारनपुर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार सृजन के अवसर निर्मित होंगे। सहारनपुर के लकड़ी नक्काशी और मुजफ्फरनगर के कागज उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। कृषि उत्पादों की तेज आवाजाही संभव होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य, शिक्षा केंद्रों तक पहुंच आसान होगी और जीवन स्तर में सुधार होगा। यह कॉरिडोर पूरे क्षेत्र में व्यापार और विकास के नए रास्ते खोलकर क्षेत्रीय आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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अधिक आबादी वाले राज्यों के लिए रेल परियोजनाएं ज्यादा

नई लाइनों, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग और अन्य कार्यों से जुड़ी 100 रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी पूरे भारत में यात्री और माल ढुलाई सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर खबर है..नई दिल्लीदेश के अंतिम छोर को जोड़कर और सबसे गरीब तथा वंचित क्षेत्रों की सेवा करते हुए, भारतीय रेल, पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एक परिवर्तनकारी विस्तार कर रही है। समावेशी विकास और राष्ट्रीय एकीकरण पर विशेष ध्यान देते हुए, वित्त वर्ष 2025-26 में नई लाइनों, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग और अन्य कार्यों से जुड़ी 100 रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह अभूतपूर्व प्रयास बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से विविध राष्ट्र को एकजुट करने के प्रति भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही एक उच्च-क्षमता वाले और भविष्य के लिए तैयार नेटवर्क की नींव भी रख रहा है।इन परियोजनाओं में कुल 1.53 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जो 6,000 किलोमीटर से अधिक के रेलवे नेटवर्क को कवर करता है। यह रेलवे विस्तार में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में, जहाँ 72,869 करोड़ रुपये की लागत वाली 64 परियोजनाओं (2,800 किलोमीटर से अधिक) को मंजूरी दी गई थी, इस बार परियोजना की स्वीकृतियों में 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, रूट कवरेज में 114 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है और वित्तीय प्रतिबद्धता में 110 प्रतिशत से अधिक की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।मंजूर की गई 100 परियोजनाओं में नई लाइनें, दोहरीकरण और मल्टी-ट्रैकिंग के काम, साथ ही बाईपास लाइनें, फ्लाईओवर और कॉर्ड लाइनें शामिल हैं। इनका रणनीतिक उद्देश्य भीड़भाड़ वाले मार्गों को खाली करना, समय की पाबंदी में सुधार करना और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है, साथ ही उन क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी का विस्तार करना है जहाँ अभी तक पर्याप्त सुविधाएँ नहीं पहुँची हैं। इन पहलों से पूरे नेटवर्क में परिचालन दक्षता में काफी सुधार होने और यात्रा के समय में कमी आने की उम्मीद है।ये परियोजनाएँ लगभग सभी प्रमुख राज्यों में फैली हुई हैं, जिससे रेलवे नेटवर्क का संतुलित और समावेशी विस्तार सुनिश्चित होता है। महाराष्ट्र (17 परियोजनाएँ), बिहार (11), झारखंड (10) और मध्य प्रदेश (9) प्रमुख फोकस राज्यों के रूप में उभरे हैं, क्योंकि माल ढुलाई गलियारों, औद्योगिक कनेक्टिविटी और यात्रियों की माँग में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन क्षेत्रों में निवेश का पैमाना यात्री और माल ढुलाई, दोनों ही सेवाओं को काफी हद तक बेहतर बनाने वाला है।महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इन परियोजनाओं से माल ढुलाई गलियारों को मजबूती मिलेगी, औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों की आवाजाही में सुधार होगा। ये राज्य भारत के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की रीढ़ हैं और यहाँ बेहतर कनेक्टिविटी होने से पूरी अर्थव्यवस्था में व्यापक लाभ होगा।पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप, ये परियोजनाएं केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन को सक्षम बनाती हैं। जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार पर मुख्य ध्यान दिया गया है। छत्तीसगढ़ में रावघाट-जगदलपुर लाइन जैसी ऐतिहासिक पहल और झारखंड एवं ओडिशा में कई अन्य गलियारे, बाजारों, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करेंगे, जिससे वंचित आबादी को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में लाया जा सकेगा। आर्थिक नजरिए से, यह विस्तार बड़े पैमाने पर और परिवर्तनकारी निवेश की दिशा में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाता है। 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 35 से ज्यादा परियोजनाएं कॉरिडोर-स्तर के अपग्रेड की आधारशिला हैं। प्रमुख परियोजनाओं में लगभग 10,150 करोड़ रुपये की लागत से कसारा-मनमाड तीसरी और चौथी लाइन (131 किमी), 8,740 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा 5वीं और 6वीं लाइन (278 किमी), 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इटारसी-नागपुर चौथी लाइन (297 किमी) और 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सिकंदराबाद (सनतनगर)-वाडी तीसरी और चौथी लाइन (173 किमी) शामिल हैं। एकसाथ मिलकर, केवल ये परियोजनाएं 28,000 करोड़ रुपये की हैं, जो उच्च-घनत्व वाले ट्रंक रूटों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान केंद्रित करती हैं।

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कुनो राष्ट्रीय उद्यान में भारतीय मूल की मादा चीता ने चार शावकों को दिया जन्मभारत के चीता संरक्षण के सफर में एक ऐतिहासिक क्षण : भूपेंद्र यादव

खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज भारत के चीता संरक्षण अभियान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का स्वागत किया क्योंकि गामिनी चीते की भारतीय मूल की मादा चीता – केजीपी12, जो गामिनी के पहले बच्चे की दूसरी शावक है और जिसकी उम्र 25 महीने है, ने मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में जंगल में चार शावकों को जन्म दिया।यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस घटनाक्रम को कुनो राष्ट्रीय उद्यान और देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि गामिनी की भारतीय मूल की मादा चीता जो एक साल से अधिक समय से जंगल में है उसने प्राकृतिक परिस्थितियों में चार शावकों को जन्म दिया है जो चीता पुनर्वास कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण कदम है।केंद्रीय मंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि 2022 में चीतों के पुनर्वास की शुरुआत के बाद से वन्य परिस्थितियों में दर्ज किया गया पहला जन्म है और महत्वपूर्ण रूप से। यह भारतीय मूल की मादा चीते से जुड़ा पहला ऐसा मामला है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह घटना परियोजना के मूल उद्देश्यों को प्राप्त करने में एक बड़ी उपलब्धि है। भारत में प्राकृतिक परिस्थितियों में चीतों के अस्तित्व और प्रजनन को सुनिश्चित करना।यादव ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय पारिस्थितिक परिस्थितियों के प्रति चीतों के बढ़ते अनुकूलन को दर्शाती है और कुनो राष्ट्रीय उद्यान में सतत संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन प्रयासों की सफलता को प्रदर्शित करती है। केंद्रीय मंत्री ने चीता संरक्षण कार्यक्रम में शामिल वन्यजीव प्रबंधकों, पशु चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ के समर्पण और अथक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस उपलब्धि को राष्ट्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया और परियोजना से जुड़े सभी लोगों को हार्दिक बधाई दी।

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निर्माण क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधन और नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों को अपनाएं: गडकरीनई दिल्ली में 17वें सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार और प्रदर्शनी विकसित भारत 2047 आयोजित

खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने निर्माण क्षेत्र में नवाचार, प्रौद्योगिकी और सतत पद्धतियों के महत्व पर बल दिया, साथ ही अवसंरचना विकास के भविष्य के लिए वैकल्पिक ईंधन और नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता का उल्‍लेख किया।नई दिल्ली में आयोजित 17वें सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार एवं प्रदर्शनी ‘विकसित भारत 2047’ में सभा को संबोधित करते हुए श्री नितिन गडकरी ने कहा कि ज्ञान को धन में परिवर्तित करने के लिए नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और कुशल कार्यप्रणालियां आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि निरंतर अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी परिवर्तनों के कारण निर्माण क्षेत्र लगातार विकसित हो रहा है।गडकरी ने निर्माण लागत कम करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाने और प्रक्रियाओं में सुधार करने से दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और परियोजना लागत में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि अवसंरचना विकास के लिए त्वरित निर्णय लेने, बेहतर परियोजना योजना बनाने और गुणवत्ता के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।गडकरी ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए भूमि अधिग्रहण और वैधानिक स्वीकृतियों जैसी प्रमुख पूर्व-आवश्यकताओं को समय से पहले पूरा करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अतीत में लंबित स्वीकृतियों और प्रक्रियात्मक अड़चनों के कारण हुई देरी ने परियोजना की समयसीमा और ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया था।सतत समाधानों पर बल देते हुए उन्होंने हितधारकों से जैव ईंधन, जैव द्रव्यमान आधारित ईंधन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की संभावना तलाशने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि ऐसी प्रौद्योगिकियां पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने और परिचालन लागत को घटाने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे और इस्तेमाल किए गए टायरों के पुनर्चक्रण सहित अपशिष्ट-से-धन प्रौद्योगिकियों के अधिक उपयोग का भी आह्वान किया। श्री गडकरी ने सफल नवाचारों का जिक्र करते हुए कहा कि सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे के उपयोग से नागपुर में कार्यान्वित परियोजनाओं जैसे कार्यों में पहले ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिल चुके हैं, जो बुनियादी ढांचे के विकास में टिकाऊ सामग्रियों की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।गडकरी ने समारोह में विजेताओं को 17वें सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार प्रदान किए और निर्माण एवं अवसंरचना क्षेत्र में गुणवत्ता और नवाचार में उनके योगदान के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस क्षेत्र से जुड़े इंजीनियर, बिल्डर और पेशेवर विश्व स्तरीय अवसंरचना के निर्माण तथा विकसित भारत 2047 के विजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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कटरा – बनिहाल के बीच चली विशेष अनारक्षित ट्रेन, 10 अप्रैल को भी

कटरा – बनिहाल के बीच विशेष अनारक्षित ट्रेन का होगा परिचालन खबर है..नई दिल्लीकटरा और बनिहाल के बीच आज 9 नवंबर को एक विशेष ट्रेन का सफलतापूर्वक परिचालन किया गया। इस विशेष ट्रेन सेवा के माध्यम से लगभग 1000 से अधिक यात्रियों ने अपनी यात्रा पूरी की, जिससे क्षेत्रीय लोगों को बड़ी सुविधा मिली है।यह विशेष ट्रेन भारी बरसात से रोड़ यातायात प्रभावित होने के कारण यात्रियों को कश्मीर से कटरा के बीच बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। कटरा से रवाना हुई इस ट्रेन में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटकों ने भी यात्रा की।रेलवे के अनुसार इस सफल संचालन का उद्देश्य दुर्गम क्षेत्रों के बीच सुरक्षित और तीव्र परिवहन सुनिश्चित करना है। स्टेशन पर सुरक्षा और सुविधाओं के कड़े प्रबंध किए गए थे ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आने वाले समय में मांग व परिस्थिति को देखते हुए, ट्रेन के संचालन को बढ़ाया भी जाएगा।रेलवे कल 10 अप्रैल को भी श्री माता वैष्णो देवी कटरा – बनिहाल- श्री माता वैष्णो देवी कटरा के मध्य इस विशेष अनारक्षित ट्रेन का संचालन करेगा ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को राहत प्रदान की जा सके।

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इग्नू के 39वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुएउपराष्ट्रपति

इग्नू के दीक्षांत समारोह में 32 लाख से अधिक छात्रों ने डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्राप्त किए खबर है..नई दिल्लीउपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 7 मार्च नई दिल्ली में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (आईजीएनओयू – इग्नू) के 39वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया, जहां 32 लाख से अधिक छात्रों ने अपनी डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्राप्त किए।उपराष्ट्रपति ने इग्नू की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसे देश की खुली और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का स्तंभ बताया, जिसने देश भर में उच्च शिक्षा को सबके लिए महत्वपूर्ण रूप से सुलभ बनाया है। इसके समावेशी विस्तार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इग्नू में 14 लाख से अधिक छात्र हैं, जिनमें 56 प्रतिशत महिलाएं और 58 प्रतिशत ग्रामीण तथा वंचित समुदायों से आते हैं। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के छात्रों की संख्या कई देशों की जनसंख्या से अधिक है, जो शैक्षिक समानता, सामाजिक गतिशीलता और राष्ट्रीय विकास में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है। उन्होंने छात्रों को आजीवन सीखते रहने, मूल्यों को बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इग्नू अपने स्थापित दूरस्थ शिक्षा मॉडल के कारण सुदृढ़ बना रहा। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वयं और ई-ज्ञानकोष जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया और यह प्रौद्योगिकी – आधारित शिक्षा में अग्रणी बनकर उभरा।उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को अपनाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इग्नू ने कई निकास विकल्पों (स्नातक कार्यक्रम के दौरान बीच में प्रमाण-पत्र के साथ पाठ्यक्रम छोड़ना) के साथ चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिससे उच्च शिक्षा अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित हो गई है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान प्रणालियों के एकीकरण की भी सराहना की।उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते उपकरण सीखने के अनुभवों को बेहतर बना सकते हैं, छात्रों को बेहतर सहायता प्रदान कर सकते हैं और व्यक्तिगत शिक्षा को सक्षम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास से डरने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब देश में कंप्यूटर आए थे, तब आशंकाएं थीं कि कंप्यूटर नौकरियां छीन लेंगे; हालांकि, अंततः कंप्यूटर आने से अधिक रोजगार सृजित हुए और राष्ट्रीय विकास में योगदान बढ़ा।उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को भी इसी तरह से अपनाया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने ऐसी तकनीकों के जिम्मेदार और जवाबदेह उपयोग की जरूरत पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने देश भर के छात्रों की सुगमता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार (एनएडी) के तहत डिजिलॉकर पर प्रमाण पत्र जारी किए। उन्होंने इग्नू पूर्व छात्र पोर्टल का भी शुभारम्भ किया, जिसमें 50 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं।इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू; इग्नू की कुलपति प्रो. उमा कांजीलाल; और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने देश भर के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों में स्वयं प्रभा स्टूडियो का भी शुभारम्भ किया। त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू, गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा और अन्य गणमान्य व्यक्ति अपने-अपने राज्य के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों से आभासी माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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