आईआरसीटीसी के नए सीएमडी राहुल हिमालयन,सोमवार को संभालेंगे कार्यभार

निवर्तमान वर्तमान सीएमडी संजय कुमार जैन के इस्तीफे के बाद राहुल हिमालय को मिली अतिरिक्त जिम्मेदारीराहुल हिमालय को रेलवे की कामकाज का 26 वर्षों का बेहतरीन अनुभव खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेलवे ने आईआरसीटीसी के नए चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के रूप में वरिष्ठ आईआईटीएस अधिकारी राहुल हिमालयन को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। आईआरसीटीसी में डायरेक्टर टूरिज्म एंड मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हिमालयन 20 जुलाई को सोमवार को सीएमडी पद का कार्यभार संभालेंगे। रेल मंत्रालय ने अपनी निवर्तमान सीएमडी संजय कुमार जैन के इस्तीफे के बाद यह नई जिम्मेदारी उन्हें दी है। हिमालयन को भारतीय रेलवे में विभिन्न पदों पर 26 वर्षों के कार्य अनुभव है और वह वर्तमान में आईआरसीटीसी में सबसे वरिष्ठ अधिकारी है।भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम के नए चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के रूप में राहुल हिमालयन को नियुक्त किया गया है। राहुल हिमालयन भारतीय रेलवे यातायात सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वे अपने छात्र जीवन में स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं। रेलवे और पर्यटन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने यात्री सुविधाओं, पर्यटन उत्पादों और विपणन रणनीतियों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। मौजूदा प्रबंध निदेशक एवं अध्यक्ष संजय कुमार जैन 20 जुलाई तक पद पर रहेंगे। लिहाजा सोमवार इस पद की जिम्मेदारी राहुल हिमालयन संभालेंगे।उल्लेखनीय है कि आईआरसीटीसी रेलवे की ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग, ई-कैटरिंग, रेल पर्यटन, भारत गौरव ट्रेनों और महाराजा एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम सेवाओं का संचालन करता है। ऐसे समय में जब भारतीय रेलवे डिजिटल सेवाओं, पर्यटन विस्तार और यात्री सुविधाओं के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दे रहा है, राहुल हिमालयन की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेलवे लगातार ई टिकट प्रणाली को बेहतर करने के लिए कार्य कर रही है। अभी हाल में ही बीटा प्रणाली को लॉन्च किया गया है। रेलवे पर्यटन और खान-पान को लेकर निरंतर विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है। इसको आगे बढ़ाने में आईआरसीटीसी की बड़ी भूमिका है।

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पीएम ने ऐशबाग समेत 75 पुनर्विकसित अमृत स्टेशनों का किया लोकार्पण

24.13 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हुआ ऐशबाग जंक्शन खबर है..लखनऊप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जालंधर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों तथा अन्य रेल परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इसी क्रम में पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के अंतर्गत 24.13 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकसित ऐशबाग जंक्शन भी राष्ट्र को समर्पित किया गया।ऐशबाग जंक्शन पर आयोजित समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ राज्यसभा सांसद संजय सेठ, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल एवं मुकेश शर्मा, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा बिष्ट यादव, भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, केंद्रीय रक्षा मंत्री के प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना के माध्यम से रेलवे स्टेशनों को आधुनिक स्वरूप देकर यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने ऐशबाग स्टेशन के पुनर्विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने हरित एवं स्वच्छ परिवहन की दिशा में भारतीय रेलवे की पहल का उल्लेख करते हुए जींद और सोनीपत के बीच संचालित होने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की विशेषताओं की भी जानकारी दी।इस अवसर पर आयोजित निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) गौरव अग्रवाल ने बताया कि ऐशबाग जंक्शन का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है। इससे यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्टेशन के विकास से न केवल रेल यात्रियों को लाभ होगा, बल्कि आसपास के क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति मिलेगी।कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अरिजीत सिंह ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।ऐशबाग जंक्शन पर विकसित प्रमुख यात्री सुविधाएं24.13 करोड़ रुपये की लागत से स्टेशन का व्यापक पुनर्विकास।स्टेशन परिसर का विस्तार एवं आकर्षक सौंदर्यीकरण।बेहतर यातायात प्रबंधन और उच्च स्तरीय पार्किंग व्यवस्था।5,500 वर्ग मीटर का आधुनिक पार्किंग क्षेत्र।4,300 वर्ग मीटर का विकसित सर्कुलेटिंग एरिया एवं हरित पार्क।प्लेटफॉर्मों पर आधुनिक फर्श और उन्नत प्रसाधन सुविधाएं।यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए आधुनिक एलईडी साइनेज।दोनों प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा के लिए ‘काऊ कैचर’ की व्यवस्था।26 नए यात्री शेल्टर एवं विस्तृत सर्कुलेटिंग एरिया।आधुनिक प्रतीक्षालय, शिशु आहार कक्ष तथा पार्सल घर।पे-एंड-यूज शौचालय एवं आकर्षक स्टेशन फसाड।निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए डीजी सेट एवं सोलर पैनल।वर्षा जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली।दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए रैम्प, व्हीलचेयर और ब्रेल मैप जैसी विशेष सुविधाएं।नए स्वरूप में विकसित ऐशबाग जंक्शन अब यात्रियों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक रेल यात्रा का अनुभव प्रदान करेगा तथा अमृत भारत स्टेशन योजना के उद्देश्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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एमएसडीई ने पूर्वोत्तर के युवाओं के लिए प्रशिक्षुता कार्यक्रम का विस्तार किया, 30,000 युवाओं को मिलेगा लाभ

खबर है..नई दिल्लीकौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने प्रधानमंत्री की राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS) के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) में प्रशिक्षुता को बढ़ावा देने के विशेष कार्यक्रम का वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विस्तार किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्वोत्तर के युवाओं को अधिक रोजगारपरक प्रशिक्षण, उद्योगों से जुड़ाव और बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम का कार्यान्वयन भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी द्वारा किया जाएगा।यह विस्तार मई 2025 में शुरू की गई प्रायोगिक परियोजना की सफलता के बाद किया गया है। अब इस पहल को पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों तक विस्तारित करते हुए 30,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षुता के अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले चरण की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है।योजना के तहत 15,000 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर से बाहर सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और अन्य संस्थानों में प्रशिक्षुता के अवसर दिए जाएंगे, जबकि 15,000 प्रशिक्षुओं को उनके गृह राज्य अथवा पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर ही रोजगार आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।सरकार ने इस पहल के लिए 57.58 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि पीएम-एनएपीएस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र घटक के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत युवाओं की प्रतिभा और ऊर्जा का केंद्र है। उन्होंने कहा कि पायलट परियोजना की सफलता ने साबित किया है कि उचित अवसर और सहयोग मिलने पर क्षेत्र के युवा उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। इस योजना का विस्तार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षुता, उद्योगों की भागीदारी और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देगा।योजना के अंतर्गत प्रशिक्षुओं को पीएम-एनएपीएस के मौजूदा लाभों के अलावा 1,500 रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। पहले यह सुविधा केवल अपने राज्य से बाहर जाने वाले प्रशिक्षुओं तक सीमित थी, लेकिन अब अपने गृह राज्य में प्रशिक्षुता करने वाले युवाओं को भी इसका लाभ मिलेगा।मंत्रालय प्रशिक्षुता व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पूरे क्षेत्र में कार्यशालाएं, जागरूकता अभियान, नियोक्ता सहभागिता कार्यक्रम तथा शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के साथ सहयोग को भी बढ़ावा देगा।पायलट परियोजना के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। 26,000 प्रशिक्षुओं के लक्ष्य के मुकाबले 23,470 युवाओं को प्रशिक्षुता के अवसर मिले, जो लक्ष्य का 90 प्रतिशत से अधिक है। वित्त वर्ष 2024-25 में जहां पूर्वोत्तर में 15,562 प्रशिक्षु थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 23,470 हो गई, यानी लगभग 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।इनमें 13,673 प्रशिक्षुओं को अपने गृह राज्य से बाहर प्रशिक्षुता के अवसर मिले, जबकि 9,797 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर ही रोजगार आधारित प्रशिक्षण मिला। मेघालय में प्रशिक्षुता में सबसे अधिक 95 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। महिला प्रशिक्षुओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जबकि सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में नियोक्ताओं की भागीदारी में महत्वपूर्ण विस्तार देखने को मिला।यह पहल पूर्वोत्तर के युवाओं को उद्योग आधारित कौशल, व्यावहारिक अनुभव और बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्किल इंडिया मिशन के माध्यम से क्षेत्र में समावेशी विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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अमृत भारत स्टेशनों का निर्माण कार्य समय पर पूरा करें : डीआरएम

— डीआरएम ने किया लखनऊ– सुल्तानपुर–जौनपुर–लखनऊ रेलखंड का निरीक्षण— अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशनों पर चल रहे विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा खबर है..लखनऊउत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम सुनील कुमार वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अमृत भारत स्टेशनों का निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करें। साथ ही मानसून के दौरान रेलवे स्टेशनों पर जल निकासी के बेहतर व्यवस्था करें ताकि जल भराव की स्थिति उत्पन्न न हो सके।श्री वर्मा बृहस्पतिवार को लखनऊ–सुल्तानपुर–जौनपुर–लखनऊ रेलखंड का निरीक्षण करने के साथ ही अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप समय पर पूरा करने के निर्देश दिए तथा मानसून को देखते हुए रेलवे स्टेशनों पर जल निकासी बेहतर रखना की बात कही ताकि जल भराव की स्थिति उत्पन्न ना हो सके । डीआरएम ने विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण कर विभिन्न स्टेशनों पर चल रहे विकास कार्यों तथा रेल संरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।डीआरएम ने सुल्तानपुर, लम्भुआ, श्रीकृष्णा नगर एवं जौनपुर स्टेशनों पर अमृत भारत स्टेशन योजना योजना के तहत चल रहे निर्माण की प्रगति की जानकारी ली। सुल्तानपुर स्टेशन पर लोको पायलट एवं ट्रेन मैनेजर के लिए निर्मित नवीन रनिंग रूम का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्मार्ट क्लासरूम, आवासीय सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था, सीसीटीवी प्रणाली, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्ध व्यवस्थाओं को देखा । उन्होंने संबंधित अधिकारियों को रनिंग स्टाफ को उच्च गुणवत्ता की सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा रनिंग रूम का समुचित रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जौनपुर जंक्शन पर डीआरएम ने चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक रजनीश कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (एफएस) प्रशांत कुमार समेत मंडल के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन: स्वच्छ, सुरक्षित और भविष्य की रेल यात्रा की शुरुआत

खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेलवे देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को शुरू करने के लिए तैयार है। यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से स्वयं बिजली उत्पन्न करती है और इसके संचालन के दौरान केवल जल वाष्प निकलती है। यानी न धुआं, न कार्बन उत्सर्जन—यह भारत की हरित और टिकाऊ रेल व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।2,600 यात्रियों की क्षमता वाली दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोजन ट्रेनजहां दुनिया में अधिकांश हाइड्रोजन ट्रेनें केवल 2–4 कोच की हैं, वहीं भारतीय रेलवे ने 10 कोच वाली ट्रेन विकसित की है, जिसमें लगभग 2,600 यात्रियों के सफर की क्षमता है। यह ट्रेन 75 किमी/घंटा की परिचालन गति और 110 किमी/घंटा की डिज़ाइन गति के साथ जिंद–सोनीपत (89 किमी) रेलखंड पर चलेगी।ट्रेन कैसे करेगी काम?इस ट्रेन में डीजल इंजन नहीं होगा। इसकी जगह प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल का उपयोग किया गया है। इसमें संग्रहित हाइड्रोजन हवा की ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया कर बिजली पैदा करती है, जिससे मोटरें चलती हैं और ट्रेन आगे बढ़ती है।सरल समीकरण: हाइड्रोजन + ऑक्सीजन = बिजली + जल वाष्प + ऊष्मायही कारण है कि यह ट्रेन पर्यावरण के लिए सबसे स्वच्छ रेल परिवहन विकल्पों में शामिल मानी जा रही है।दो पावर कार, आधुनिक बैटरी और फ्यूल सेलट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार और आठ ट्रेलर कोच होंगे। प्रत्येक पावर कार में:1,200 किलोवाट (1600 HP) क्षमता का फ्यूल सेललिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरीउच्च दबाव वाले हाइड्रोजन सिलेंडरदोनों पावर कार मिलकर ट्रेन को अधिकतम 110 किमी/घंटा की गति देने में सक्षम हैं।सुरक्षा पर विशेष जोरहाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, इसलिए भारतीय रेलवे ने इसमें बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली विकसित की है।मुख्य सुरक्षा प्रबंध:हाइड्रोजन रिसाव का तत्काल पता लगाने वाले सेंसरगर्मी, आग और धुएं की निगरानीस्वचालित हाइड्रोजन शटडाउन सिस्टमलगातार वेंटिलेशन ताकि गैस जमा न होलोको पायलट के लिए विशेष सुरक्षित केबिनआपातकालीन संचालन मोडअंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रमाणितपूरी प्रणाली को NFPA-2 और ISO 19880 जैसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। साथ ही PESO की मंजूरी प्राप्त है और जर्मनी की प्रतिष्ठित संस्था TÜV SÜD ने इसका स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन किया है।जिंद में बना भारत का पहला हाइड्रोजन रेलवे इकोसिस्टमहरियाणा के जिंद में देश की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सुविधा बनाई गई है।इसमें:ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन500 बार दबाव तक संपीड़न3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन भंडारणदो डिस्पेंसर से एक साथ दोनों पावर कार में ईंधन भरने की सुविधापूरी तरह स्वदेशी तकनीकइस परियोजना का नेतृत्व भारतीय रेलवे ने किया है।RDSO ने तकनीकी डिजाइन और मानक तैयार किए।मेधा सर्वो ड्राइव्स ने ट्रेनसेट का एकीकरण किया।इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने ट्रेन का बाहरी डिजाइन विकसित किया।यात्रियों से पहले हुए कई सफल परीक्षणपरिचालन से पहले ट्रेन का:लोड बॉक्स परीक्षणरेडियो फ्रीक्वेंसी परीक्षणदोलन (Oscillation) परीक्षणआपातकालीन ब्रेक परीक्षणस्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनसफलतापूर्वक पूरा किया गया।दुनिया में भारत की नई पहचानजर्मनी, फ्रांस, इटली, चीन और जापान जैसे देशों में हाइड्रोजन ट्रेनें सीमित स्तर पर संचालित हो रही हैं, लेकिन भारत ने 10 कोच और 2,600 यात्रियों की क्षमता वाली हाइड्रोजन ट्रेन तैयार कर वैश्विक स्तर पर एक नया मानक स्थापित किया है।भविष्य की दिशाभारतीय रेलवे इस परियोजना से मिले अनुभव के आधार पर कालका–शिमला जैसे विरासत रेलमार्गों पर भी हाइड्रोजन तकनीक लागू करने की योजना बना रहा है। यह पहल राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ओडिशा और झारखंड में दो महत्वपूर्ण रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को दी मंजूरी

खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति, (CCEA) ने रेल मंत्रालय की लगभग 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली दो महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, माल ढुलाई को तेज़ और अधिक कुशल बनाना तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देना है। मंजूर की गई परियोजनाएं हैं:पारादीप–हरिदासपुर दोहरीकरण (Odisha)राजखरसावां–डांगोअपोसी चौथी रेल लाइन (Jharkhand–Odisha)इन दोनों परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 145 किलोमीटर की नई मल्टी-ट्रैक लाइन जुड़ेगी। परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं से रेलवे की लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारु होगा, भीड़भाड़ कम होगी और यात्रियों तथा मालगाड़ियों दोनों की समयबद्धता एवं सेवा विश्वसनीयता में सुधार आएगा।ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिनका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाना तथा लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है।इन परियोजनाओं का लाभ ओडिशा और झारखंड के चार जिलों को मिलेगा। लगभग 1,526 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे करीब 14 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।पर्यटन के क्षेत्र में भी इन परियोजनाओं का विशेष महत्व है। इनके माध्यम से ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवजेव मंदिर तथा मेघाहातुबुरु पहाड़ियां जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क और अधिक सुविधाजनक होगा।पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेलवे के माध्यम से अधिक माल परिवहन होने से प्रतिवर्ष लगभग 6 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 1 करोड़ पौधे लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ के समान है।इन परियोजनाओं को भारत की लॉजिस्टिक लागत कम करने, औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण तथा ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए बड़े सुधार : वैष्णव

इन सुधारों का उद्देश्य भारतीय रेलवे को विश्वस्तरीय, तकनीक-संचालित, सुरक्षित और अधिक दक्ष परिवहन प्रणाली के रूप में विकसित करना रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत माल ढुलाई क्षेत्र के लिए 8 नए बड़े सुधारों की घोषणा की खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ अभियान के तहत आठ नए संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की। इसके साथ ही इस पहल के अंतर्गत लागू सुधारों की कुल संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इन सुधारों का उद्देश्य माल ढुलाई को अधिक आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल, तेज़, लागत प्रभावी और निजी निवेश के लिए आकर्षक बनाना है।रेल भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे “52 सप्ताह में 52 सुधार” के लक्ष्य के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि पहले लागू किए गए सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और अब घोषित नई नीतियां लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने, निजी भागीदारी बढ़ाने तथा रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में व्यापक सुधार लाने में मदद करेंगी।सुधार 10: फ्लाई ऐश के लिए प्रदूषण-मुक्त कंटेनर परिवहनभारतीय रेलवे अब फ्लाई ऐश के परिवहन के लिए विशेष आईएसओ मानक बंद कंटेनरों का उपयोग करेगा। इससे धूल प्रदूषण समाप्त होगा, सीमेंट संयंत्रों तक सुरक्षित परिवहन संभव होगा तथा सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी। यह व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स दक्षता भी बढ़ाएगी।सुधार 11: कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए एकीकृत लाइसेंसअब चार अलग-अलग श्रेणियों की जगह एक पैन-इंडिया कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंस लागू किया गया है। ₹25 करोड़ की एक समान पंजीकरण फीस के साथ ऑपरेटर पूरे रेलवे नेटवर्क पर सेवाएं दे सकेंगे। लाइसेंस की वैधता 20 वर्ष होगी और सफल संचालन के आधार पर इसे बिना अतिरिक्त शुल्क के आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे निजी निवेश और कंटेनराइजेशन को बढ़ावा मिलेगा।सुधार 12: खाद परिवहन व्यवस्था सरलभारतीय रेलवे ने खाद परिवहन के लिए लगभग 50 अलग-अलग मालभाड़ा स्लैब समाप्त कर प्रति टन प्रति किलोमीटर आधारित सरल शुल्क प्रणाली लागू की है। अब कंटेनरों के माध्यम से खाद की ढुलाई भी संभव होगी, जिससे वितरण अधिक लचीला, तेज़ और मौसम से सुरक्षित होगा।सुधार 13: रेलवे परियोजनाओं में कारीगरों का कौशल प्रमाणीकरणरेलवे परियोजनाओं में कार्यरत वेल्डर, फिटर, राजमिस्त्री और अन्य कारीगरों के लिए नई स्किल सर्टिफिकेशन नीति लागू की गई है। सफल कारीगरों को क्यूआर कोड आधारित प्रमाणपत्र दिए जाएंगे, जिनका डिजिटल सत्यापन किया जा सकेगा। इससे गुणवत्ता, सुरक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।सुधार 14: निर्माण एवं ठेका प्रणाली में बदलावरेलवे ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब अनुबंध की शुरुआत में ही 10 प्रतिशत परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा करनी होगी। अधिक कानूनी विवाद वाले ठेकेदारों पर प्रतिबंध लगाया गया है तथा जोखिम प्रबंधन के लिए ऑल रिस्क इंश्योरेंस और प्रोफेशनल इंडेम्निटी इंश्योरेंस अनिवार्य किए गए हैं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी सीआरआईएस के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिक पारदर्शी बनाया गया है।सुधार 15: वैगन डिज़ाइन में उद्योग की भागीदारीअब उद्योग और निर्माता अपनी आवश्यकता के अनुरूप विशेष माल ढुलाई वैगनों के डिज़ाइन विकसित कर सकेंगे। आरडीएसओ परीक्षण और मूल्यांकन के बाद इन्हें मंजूरी देगा। इससे स्टील, पेट्रोलियम, रसायन, दूध तथा अन्य उद्योगों के लिए विशेष वैगन विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।सुधार 16: पेट्रोलियम उत्पादों के लिए निजी टैंक वैगननई नीति के तहत तेल कंपनियां अब स्वयं विशेष टैंक वैगन खरीद या लीज़ पर लेकर रेलवे नेटवर्क पर संचालित कर सकेंगी। इससे परिवहन लागत कम होगी, लॉजिस्टिक्स अधिक कुशल बनेगी तथा सड़क परिवहन से जुड़े मिलावट और उत्पाद हानि जैसे जोखिम घटेंगे।सुधार 17: अनाज, आटा और दालों की कंटेनर आधारित ढुलाईअनाज, आटा और दालों के परिवहन के लिए भी मालभाड़ा संरचना को सरल बनाया गया है। कंटेनर आधारित परिवहन से सुरक्षित भंडारण, चरणबद्ध वितरण और मिलावट की संभावना में कमी आएगी, जिससे खाद्यान्न परिवहन अधिक सुरक्षित और कुशल बनेगा।रेलवे का लक्ष्य: कम लागत, अधिक क्षमता और हरित परिवहनरेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन सुधारों से माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित होगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, कार्बन उत्सर्जन में लगभग 90 प्रतिशत तक कमी, निजी निवेश में वृद्धि तथा भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि कंटेनर आधारित परिवहन को बढ़ावा देकर रेलवे पारंपरिक थोक माल ढुलाई से आगे बढ़ते हुए आधुनिक और विविधीकृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित कर रहा है।

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भारत टेक्स 2026 कल से: दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक वस्त्र आयोजन की मेजबानी के लिए तैयार भारत

खबर है..नई दिल्लीभारत मंडपम में 14 से 17 जुलाई तक आयोजित होने वाला भारत टेक्स 2026 देश की संपूर्ण वस्त्र एवं परिधान उद्योग की क्षमता, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व को प्रदर्शित करेगा। वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस चार दिवसीय आयोजन में भारत की पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन—फाइबर, यार्न, फैब्रिक, परिधान, फैशन, होम टेक्सटाइल्स, टेक्निकल टेक्सटाइल्स और सहायक उद्योग—एक ही मंच पर दिखाई देंगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5F विज़न—Farm to Fibre, Fibre to Factory, Factory to Fashion और Fashion to Foreign—से प्रेरित यह आयोजन व्यापार, निवेश, वैश्विक सोर्सिंग, नवाचार और रणनीतिक साझेदारियों का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच बन चुका है।इस वर्ष भारत टेक्स 2026 में 1,600 से अधिक प्रदर्शक, 7,000 से ज्यादा वैश्विक खरीदार, 1.30 लाख से अधिक व्यापारिक आगंतुक और 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। आयोजन में 20,000 से अधिक वस्त्र उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे, जबकि प्रदर्शनी का क्षेत्रफल 16 लाख वर्गफुट से अधिक होगा।आयोजन के दौरान 4,000 से अधिक B2B बैठकें, 100 से अधिक B2G बैठकें और 30 से अधिक समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इन समझौतों का उद्देश्य व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, स्थिरता और वैश्विक बाजार तक पहुंच को मजबूत करना है।भारत टेक्स 2026 में 100 से अधिक ज्ञान सत्र आयोजित होंगे, जिनमें 39 पैनल चर्चाएं, 16 राउंडटेबल, 37 मास्टरक्लास और 8 राज्य सत्र शामिल हैं। इनमें व्यापार एवं निवेश, इंडस्ट्री 5.0, टेक्निकल टेक्सटाइल्स, सतत विकास, फैशन, नीति निर्माण और MSMEs की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता जैसे विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक और तमिलनाडु सहित कई राज्य निवेश और औद्योगिक अवसरों को प्रदर्शित करेंगे। वहीं अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, स्पेन, पुर्तगाल, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और नेपाल सहित 14 देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक भी आयोजन में भाग लेंगे। संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूरोपीय संघ (EU) का संस्थागत प्रतिनिधित्व भी रहेगा।प्रतिभागियों की सुविधा के लिए विकसित भारत टेक्स 2026 मोबाइल ऐप और डिजिटल बिजनेस प्लेटफॉर्म के माध्यम से AI आधारित सहायता, डिजिटल बैज, QR आधारित लीड कैप्चर और खरीदार-विक्रेता के बीच पूर्व-निर्धारित बिजनेस मैचमेकिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।भारत टेक्स 2026 को भारत के वस्त्र उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच माना जा रहा है, जो व्यापार और निवेश के नए अवसरों के साथ-साथ भारत को वैश्विक वस्त्र मूल्य श्रृंखला में एक विश्वसनीय और अग्रणी साझेदार के रूप में और मजबूत करेगा।

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वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 में लगाए गए 3600 पौधे

— आरटीओ और एडीटीआई परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लगाए गए पौधे— पौधारोपण आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने का है संकल्प : रोडवेज एएमडी— पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता : डीटीसी खबर है..लखनऊप्रदेशव्यापी वृहद वृक्षारोपण अभियान ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत रविवार को लखनऊ के संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) परिसर के साथ ही एडीटीआई एवं डिटेंशन सेंटर, सुल्तानपुर रोड पर भी व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया गया। इस दौरान परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी माताओं के सम्मान में पौधे लगाए तथा उनके संरक्षण का संकल्प लिया। एडीटीआई के काकोरी एवं डिटेंशन सेंटर, सुल्तानपुर रोड परिसर में कुल 3600 पौधे रोपे गए।इस अवसर पर रोडवेज के एएमडी विपिन मिश्रा ने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान केवल पौधारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक पौधे को वृक्ष बनाने का संकल्प ही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी।परिवहन विभाग के डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ( डीटीसी ) राधेश्याम ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करे तो प्रदेश को हरित और प्रदूषण मुक्त बनाने का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।एआरटीओ (प्रशासन/प्रवर्तन) प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे तो प्रदेश को हरित और स्वच्छ बनाने का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना जितना जरूरी है, उनकी नियमित देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है।कार्यक्रम में आरटीओ प्रवर्तन, प्रभात पाण्डेय, आरएम लखनऊ विमल राजन, एआरएम कैसरबाग, एआरएम आलमबाग, एआरएम अवध डिपो, एआरएम चारबाग, मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) प्रशांत कुमार, विष्णु कुमार, प्रदीप कुमार यादव सहित संभागीय परिवहन कार्यालय लखनऊ के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया।

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दिल्ली हाट में ‘वीव द फ्यूचर 4.0’ का आयोजन, वस्त्र अपशिष्ट नवाचार चुनौती होगी लॉन्च

खबर है..नई दिल्लीवस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय की ओर से 12 से 17 जुलाई 2026 तक दिल्ली हाट में ‘वीव द फ्यूचर 4.0 – अपसाइक्लिंग एडिशन’ का आयोजन किया जाएगा। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह 13 जुलाई को कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।इस अवसर पर मंत्रालय ‘व्हाट इज़ इट मेड ऑफ़?’ राष्ट्रीय वस्त्र अपशिष्ट नवाचार चुनौती भी शुरू करेगा। इसका उद्देश्य वस्त्र अपशिष्ट के पुनर्चक्रण, अपसाइक्लिंग और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाले नवाचारी एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करना है। प्रतियोगिता में 16 से 45 वर्ष आयु वर्ग के छात्र, कारीगर, बुनकर, डिजाइनर, शोधकर्ता, उद्यमी और नवप्रवर्तक भाग ले सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 है।भारत में हर वर्ष लगभग 70.73 लाख टन वस्त्र अपशिष्ट उत्पन्न होता है। मंत्रालय का मानना है कि नवाचार, पारंपरिक शिल्प और चक्रीय डिजाइन के माध्यम से इस अपशिष्ट को आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्य में बदला जा सकता है, जिससे हरित रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।‘वीव द फ्यूचर 4.0’ में 100 से अधिक ब्रांड, पुनर्चक्रणकर्ता, कारीगर, स्वयं सहायता समूह, मरम्मत विशेषज्ञ और सामग्री नवप्रवर्तक भाग लेंगे। प्रदर्शनी में अपसाइक्लिंग, पुनर्चक्रण, मरम्मत, पुनः उपयोग और चक्रीय डिजाइन के नवीन मॉडलों का प्रदर्शन किया जाएगा, जो टिकाऊ उत्पादन और जिम्मेदार उपभोग को बढ़ावा देंगे।

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