Headlines

Featured posts

LATEST NEWS

All

Latest posts

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति पर गडकरी की समीक्षा बैठक

मध्यप्रदेश में ब्लैक स्पॉट्स के समयबद्ध सुधार एवं सड़क सुरक्षा सुदृढ़ करने पर विशेष जोर खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को जिला रायसेन, मध्यप्रदेश में दौरा हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), भोपाल क्षेत्र के अधिकारियों के साथ प्रदेश में संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के संबंध में विस्तृत चर्चा की।इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रदेश में चिन्हित सभी ब्लैक स्पॉट्स की समुचित पहचान कर उनका निर्धारित समय-सीमा में स्थायी सुधार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ब्लैक स्पॉट पर आवश्यकतानुसार ज्योमेट्रिकल सुधार, उपयुक्त साइनेज, क्रैश बैरियर, रोड मार्किंग, लाइटिंग तथा अन्य इंजीनियरिंग उपायों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके और यातायात अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।गडकरी ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, भूमि अधिग्रहण की स्थिति तथा कार्यान्वयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करते हुए गुणवत्ता के उच्चतम मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।उन्होंने कहा कि सड़क अवसंरचना का विकास केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति तथा क्षेत्रीय संतुलित विकास का एक महत्वपूर्ण आधार है। इस दौरान यह अवगत कराया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के माध्यम से मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के मध्य कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत तथा सड़क सुरक्षा में सुधार परिलक्षित हो रहा है। साथ ही, बेहतर सड़क नेटवर्क के परिणामस्वरूप कृषि उत्पादों एवं औद्योगिक वस्तुओं के आवागमन में तेजी आई है, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई है तथा सप्लाई चेन अधिक प्रभावी हुई है।गडकरी ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल रहा है तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, बेहतर कनेक्टिविटी के कारण प्रदेश के पर्यटन स्थलों तक पहुंच अधिक सुगम हुई है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को भी गति मिल रही है।

Read More

अधिक आबादी वाले राज्यों के लिए रेल परियोजनाएं ज्यादा

नई लाइनों, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग और अन्य कार्यों से जुड़ी 100 रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी पूरे भारत में यात्री और माल ढुलाई सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर खबर है..नई दिल्लीदेश के अंतिम छोर को जोड़कर और सबसे गरीब तथा वंचित क्षेत्रों की सेवा करते हुए, भारतीय रेल, पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एक परिवर्तनकारी विस्तार कर रही है। समावेशी विकास और राष्ट्रीय एकीकरण पर विशेष ध्यान देते हुए, वित्त वर्ष 2025-26 में नई लाइनों, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग और अन्य कार्यों से जुड़ी 100 रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह अभूतपूर्व प्रयास बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से विविध राष्ट्र को एकजुट करने के प्रति भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही एक उच्च-क्षमता वाले और भविष्य के लिए तैयार नेटवर्क की नींव भी रख रहा है।इन परियोजनाओं में कुल 1.53 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जो 6,000 किलोमीटर से अधिक के रेलवे नेटवर्क को कवर करता है। यह रेलवे विस्तार में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में, जहाँ 72,869 करोड़ रुपये की लागत वाली 64 परियोजनाओं (2,800 किलोमीटर से अधिक) को मंजूरी दी गई थी, इस बार परियोजना की स्वीकृतियों में 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, रूट कवरेज में 114 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है और वित्तीय प्रतिबद्धता में 110 प्रतिशत से अधिक की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।मंजूर की गई 100 परियोजनाओं में नई लाइनें, दोहरीकरण और मल्टी-ट्रैकिंग के काम, साथ ही बाईपास लाइनें, फ्लाईओवर और कॉर्ड लाइनें शामिल हैं। इनका रणनीतिक उद्देश्य भीड़भाड़ वाले मार्गों को खाली करना, समय की पाबंदी में सुधार करना और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है, साथ ही उन क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी का विस्तार करना है जहाँ अभी तक पर्याप्त सुविधाएँ नहीं पहुँची हैं। इन पहलों से पूरे नेटवर्क में परिचालन दक्षता में काफी सुधार होने और यात्रा के समय में कमी आने की उम्मीद है।ये परियोजनाएँ लगभग सभी प्रमुख राज्यों में फैली हुई हैं, जिससे रेलवे नेटवर्क का संतुलित और समावेशी विस्तार सुनिश्चित होता है। महाराष्ट्र (17 परियोजनाएँ), बिहार (11), झारखंड (10) और मध्य प्रदेश (9) प्रमुख फोकस राज्यों के रूप में उभरे हैं, क्योंकि माल ढुलाई गलियारों, औद्योगिक कनेक्टिविटी और यात्रियों की माँग में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन क्षेत्रों में निवेश का पैमाना यात्री और माल ढुलाई, दोनों ही सेवाओं को काफी हद तक बेहतर बनाने वाला है।महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इन परियोजनाओं से माल ढुलाई गलियारों को मजबूती मिलेगी, औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों की आवाजाही में सुधार होगा। ये राज्य भारत के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की रीढ़ हैं और यहाँ बेहतर कनेक्टिविटी होने से पूरी अर्थव्यवस्था में व्यापक लाभ होगा।पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप, ये परियोजनाएं केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन को सक्षम बनाती हैं। जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार पर मुख्य ध्यान दिया गया है। छत्तीसगढ़ में रावघाट-जगदलपुर लाइन जैसी ऐतिहासिक पहल और झारखंड एवं ओडिशा में कई अन्य गलियारे, बाजारों, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करेंगे, जिससे वंचित आबादी को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में लाया जा सकेगा। आर्थिक नजरिए से, यह विस्तार बड़े पैमाने पर और परिवर्तनकारी निवेश की दिशा में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाता है। 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 35 से ज्यादा परियोजनाएं कॉरिडोर-स्तर के अपग्रेड की आधारशिला हैं। प्रमुख परियोजनाओं में लगभग 10,150 करोड़ रुपये की लागत से कसारा-मनमाड तीसरी और चौथी लाइन (131 किमी), 8,740 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा 5वीं और 6वीं लाइन (278 किमी), 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इटारसी-नागपुर चौथी लाइन (297 किमी) और 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सिकंदराबाद (सनतनगर)-वाडी तीसरी और चौथी लाइन (173 किमी) शामिल हैं। एकसाथ मिलकर, केवल ये परियोजनाएं 28,000 करोड़ रुपये की हैं, जो उच्च-घनत्व वाले ट्रंक रूटों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान केंद्रित करती हैं।

Read More

कुनो राष्ट्रीय उद्यान में भारतीय मूल की मादा चीता ने चार शावकों को दिया जन्मभारत के चीता संरक्षण के सफर में एक ऐतिहासिक क्षण : भूपेंद्र यादव

खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज भारत के चीता संरक्षण अभियान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का स्वागत किया क्योंकि गामिनी चीते की भारतीय मूल की मादा चीता – केजीपी12, जो गामिनी के पहले बच्चे की दूसरी शावक है और जिसकी उम्र 25 महीने है, ने मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में जंगल में चार शावकों को जन्म दिया।यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस घटनाक्रम को कुनो राष्ट्रीय उद्यान और देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि गामिनी की भारतीय मूल की मादा चीता जो एक साल से अधिक समय से जंगल में है उसने प्राकृतिक परिस्थितियों में चार शावकों को जन्म दिया है जो चीता पुनर्वास कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण कदम है।केंद्रीय मंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि 2022 में चीतों के पुनर्वास की शुरुआत के बाद से वन्य परिस्थितियों में दर्ज किया गया पहला जन्म है और महत्वपूर्ण रूप से। यह भारतीय मूल की मादा चीते से जुड़ा पहला ऐसा मामला है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह घटना परियोजना के मूल उद्देश्यों को प्राप्त करने में एक बड़ी उपलब्धि है। भारत में प्राकृतिक परिस्थितियों में चीतों के अस्तित्व और प्रजनन को सुनिश्चित करना।यादव ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय पारिस्थितिक परिस्थितियों के प्रति चीतों के बढ़ते अनुकूलन को दर्शाती है और कुनो राष्ट्रीय उद्यान में सतत संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन प्रयासों की सफलता को प्रदर्शित करती है। केंद्रीय मंत्री ने चीता संरक्षण कार्यक्रम में शामिल वन्यजीव प्रबंधकों, पशु चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ के समर्पण और अथक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस उपलब्धि को राष्ट्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया और परियोजना से जुड़े सभी लोगों को हार्दिक बधाई दी।

Read More

निर्माण क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधन और नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों को अपनाएं: गडकरीनई दिल्ली में 17वें सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार और प्रदर्शनी विकसित भारत 2047 आयोजित

खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने निर्माण क्षेत्र में नवाचार, प्रौद्योगिकी और सतत पद्धतियों के महत्व पर बल दिया, साथ ही अवसंरचना विकास के भविष्य के लिए वैकल्पिक ईंधन और नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता का उल्‍लेख किया।नई दिल्ली में आयोजित 17वें सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार एवं प्रदर्शनी ‘विकसित भारत 2047’ में सभा को संबोधित करते हुए श्री नितिन गडकरी ने कहा कि ज्ञान को धन में परिवर्तित करने के लिए नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और कुशल कार्यप्रणालियां आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि निरंतर अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी परिवर्तनों के कारण निर्माण क्षेत्र लगातार विकसित हो रहा है।गडकरी ने निर्माण लागत कम करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाने और प्रक्रियाओं में सुधार करने से दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और परियोजना लागत में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि अवसंरचना विकास के लिए त्वरित निर्णय लेने, बेहतर परियोजना योजना बनाने और गुणवत्ता के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।गडकरी ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए भूमि अधिग्रहण और वैधानिक स्वीकृतियों जैसी प्रमुख पूर्व-आवश्यकताओं को समय से पहले पूरा करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अतीत में लंबित स्वीकृतियों और प्रक्रियात्मक अड़चनों के कारण हुई देरी ने परियोजना की समयसीमा और ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया था।सतत समाधानों पर बल देते हुए उन्होंने हितधारकों से जैव ईंधन, जैव द्रव्यमान आधारित ईंधन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की संभावना तलाशने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि ऐसी प्रौद्योगिकियां पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने और परिचालन लागत को घटाने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे और इस्तेमाल किए गए टायरों के पुनर्चक्रण सहित अपशिष्ट-से-धन प्रौद्योगिकियों के अधिक उपयोग का भी आह्वान किया। श्री गडकरी ने सफल नवाचारों का जिक्र करते हुए कहा कि सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे के उपयोग से नागपुर में कार्यान्वित परियोजनाओं जैसे कार्यों में पहले ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिल चुके हैं, जो बुनियादी ढांचे के विकास में टिकाऊ सामग्रियों की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।गडकरी ने समारोह में विजेताओं को 17वें सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार प्रदान किए और निर्माण एवं अवसंरचना क्षेत्र में गुणवत्ता और नवाचार में उनके योगदान के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस क्षेत्र से जुड़े इंजीनियर, बिल्डर और पेशेवर विश्व स्तरीय अवसंरचना के निर्माण तथा विकसित भारत 2047 के विजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Read More

कटरा – बनिहाल के बीच चली विशेष अनारक्षित ट्रेन, 10 अप्रैल को भी

कटरा – बनिहाल के बीच विशेष अनारक्षित ट्रेन का होगा परिचालन खबर है..नई दिल्लीकटरा और बनिहाल के बीच आज 9 नवंबर को एक विशेष ट्रेन का सफलतापूर्वक परिचालन किया गया। इस विशेष ट्रेन सेवा के माध्यम से लगभग 1000 से अधिक यात्रियों ने अपनी यात्रा पूरी की, जिससे क्षेत्रीय लोगों को बड़ी सुविधा मिली है।यह विशेष ट्रेन भारी बरसात से रोड़ यातायात प्रभावित होने के कारण यात्रियों को कश्मीर से कटरा के बीच बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। कटरा से रवाना हुई इस ट्रेन में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटकों ने भी यात्रा की।रेलवे के अनुसार इस सफल संचालन का उद्देश्य दुर्गम क्षेत्रों के बीच सुरक्षित और तीव्र परिवहन सुनिश्चित करना है। स्टेशन पर सुरक्षा और सुविधाओं के कड़े प्रबंध किए गए थे ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आने वाले समय में मांग व परिस्थिति को देखते हुए, ट्रेन के संचालन को बढ़ाया भी जाएगा।रेलवे कल 10 अप्रैल को भी श्री माता वैष्णो देवी कटरा – बनिहाल- श्री माता वैष्णो देवी कटरा के मध्य इस विशेष अनारक्षित ट्रेन का संचालन करेगा ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को राहत प्रदान की जा सके।

Read More

‘एनएचएआई आरोग्य वन’ परियोजना होगी विकसित

राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर लगेंगे औषधीय पौधे खबर है…नई दिल्लीजैव विविधता को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास में पारिस्थितिक स्थिरता को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर औषधीय पौधारोपण के रूप में ‘आरोग्य वन’ विकसित करने की पहल की है। इस पहल का उद्देश्य परागणकों, पक्षियों और सूक्ष्मजीवों को सहारा देने वाली औषधीय पौधे प्रजातियों को लगाकर राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे जैव विविधता को समृद्ध करना है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती सुनिश्चित हो सके।‘आरोग्य वन’ के विकास के पहले चरण में 62.8 हेक्टेयर में फैले 17 भूखंडों को शामिल करते हुए एक कार्य योजना तैयार की गई है, जहां मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्यों में विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के किनारे लगभग 67,462 औषधीय पौधे लगाए जाएंगे।इसके अलावा नीम, आंवला, इमली, जामुन, नींबू, गूलर, मौलसरी आदि औषधीय गुणों से युक्त लगभग 36 पौधे प्रजातियों की पहचान की गई है और इन्हें संबंधित कृषि-जलवायु क्षेत्रों की उपयुक्तता के अनुसार भूमि भूखंडों पर लगाया जाएगा। जन जागरूकता और पहुंच को अधिकतम करने के लिए टोल प्लाजा, सड़क किनारे की सुविधाओं, इंटरचेंजों, क्लोवरलीफ जंक्शनों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अन्य प्रमुख स्थानों के पास स्थित भूमि भूखंडों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस पहल का कार्यान्वयन भारत सरकार के भूनिर्माण और वृक्षारोपण संबंधी दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाएगा।परंपरागत रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण गतिविधियां हरियाली बढ़ाने और पारिस्थितिक स्थिरता के उद्देश्य से देशी और सड़क किनारे उगने वाले वृक्षों की मिश्रित प्रजातियों का उपयोग करके की जाती रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्रशासन (एनएचएआई) ने आगामी मानसून के मौसम में वृक्षारोपण के लिए लगभग 188 हेक्टेयर रिक्त भूमि की पहचान की है ताकि पौधों के जीवित रहने की दर को बढ़ाया जा सके और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। औषधीय वृक्ष प्रजातियों पर केंद्रित एक विषयगत मॉडल को अपनाने से ऐसे पौधारोपण का पारिस्थितिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक महत्व बढ़ेगा।यह पहल आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने और स्वदेशी औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण में योगदान देने की भारत सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप भी है। इसके अलावा इन वृक्षारोपण को ऐसे जीवंत भंडार के रूप में परिकल्पित किया गया है जो पारंपरिक औषधीय ज्ञान प्रणालियों और समकालीन समय में उनकी प्रासंगिकता के बारे में जन जागरूकता पैदा करेंगे।‘आरोग्य वन’ पहल, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ अवसंरचना विकसित करने के प्रति एनएचएआई की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है। पारिस्थितिक बहाली को जन जागरूकता के साथ एकीकृत करके इस पहल का उद्देश्य हरित गलियारों का एक नेटवर्क बनाना है जो न केवल सड़क किनारे की पारिस्थितिकी को बढ़ावा दे, बल्कि ज्ञान केंद्रों के रूप में भी कार्य करे और भारत की औषधीय पौधों की समृद्ध विरासत और टिकाऊ जीवन शैली के बारे में जागरूकता को प्रोत्साहित करे।

Read More

इग्नू के 39वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुएउपराष्ट्रपति

इग्नू के दीक्षांत समारोह में 32 लाख से अधिक छात्रों ने डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्राप्त किए खबर है..नई दिल्लीउपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 7 मार्च नई दिल्ली में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (आईजीएनओयू – इग्नू) के 39वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया, जहां 32 लाख से अधिक छात्रों ने अपनी डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्राप्त किए।उपराष्ट्रपति ने इग्नू की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसे देश की खुली और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का स्तंभ बताया, जिसने देश भर में उच्च शिक्षा को सबके लिए महत्वपूर्ण रूप से सुलभ बनाया है। इसके समावेशी विस्तार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इग्नू में 14 लाख से अधिक छात्र हैं, जिनमें 56 प्रतिशत महिलाएं और 58 प्रतिशत ग्रामीण तथा वंचित समुदायों से आते हैं। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के छात्रों की संख्या कई देशों की जनसंख्या से अधिक है, जो शैक्षिक समानता, सामाजिक गतिशीलता और राष्ट्रीय विकास में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है। उन्होंने छात्रों को आजीवन सीखते रहने, मूल्यों को बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इग्नू अपने स्थापित दूरस्थ शिक्षा मॉडल के कारण सुदृढ़ बना रहा। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वयं और ई-ज्ञानकोष जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया और यह प्रौद्योगिकी – आधारित शिक्षा में अग्रणी बनकर उभरा।उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को अपनाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इग्नू ने कई निकास विकल्पों (स्नातक कार्यक्रम के दौरान बीच में प्रमाण-पत्र के साथ पाठ्यक्रम छोड़ना) के साथ चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिससे उच्च शिक्षा अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित हो गई है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान प्रणालियों के एकीकरण की भी सराहना की।उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते उपकरण सीखने के अनुभवों को बेहतर बना सकते हैं, छात्रों को बेहतर सहायता प्रदान कर सकते हैं और व्यक्तिगत शिक्षा को सक्षम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास से डरने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब देश में कंप्यूटर आए थे, तब आशंकाएं थीं कि कंप्यूटर नौकरियां छीन लेंगे; हालांकि, अंततः कंप्यूटर आने से अधिक रोजगार सृजित हुए और राष्ट्रीय विकास में योगदान बढ़ा।उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को भी इसी तरह से अपनाया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने ऐसी तकनीकों के जिम्मेदार और जवाबदेह उपयोग की जरूरत पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने देश भर के छात्रों की सुगमता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार (एनएडी) के तहत डिजिलॉकर पर प्रमाण पत्र जारी किए। उन्होंने इग्नू पूर्व छात्र पोर्टल का भी शुभारम्भ किया, जिसमें 50 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं।इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू; इग्नू की कुलपति प्रो. उमा कांजीलाल; और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने देश भर के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों में स्वयं प्रभा स्टूडियो का भी शुभारम्भ किया। त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू, गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा और अन्य गणमान्य व्यक्ति अपने-अपने राज्य के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों से आभासी माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

Read More

सुरक्षा प्रणाली कवच लगाने और रेल सिग्नलिंग आधुनिकीकरण के लिए 1,364 करोड़ स्वीकृत

खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेल ने विभिन्न रेलवे जोन में सुरक्षा प्रणाली कवच लगाने और सिग्नलिंग आधुनिकीकरण के लिए 1,364.45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। दक्षिण रेलवे के 232 लोकोमोटिव में कवच के चौथे संस्करण स्थापित करने के लिए 208.81 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, ताकि रेलगाडियों में टकराव रोकने की व्यवस्था सुदृढ की जा सके।रेल मंत्रालय के अनुसार उत्तर रेलवे में उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली के लिए 3,200 से अधिक किलोमीटर मार्ग में 400.86 करोड़ रुपये की लागत से ऑप्टिकल फाइबर संचार व्यवस्था समुन्नत बनाई जाएगी। उत्तर मध्य रेलवे में कवच कार्यान्वयन समर्थन के लिए 2,196 रूट किलोमीटर मार्ग में 176.76 करोड़ रुपये की लागत से 2×48 फाइबर ऑप्टिकल फाइबर संचार नेटवर्क बिछाया जाएगा।दक्षिण मध्य रेलवे के अधिक यातायात वाले मार्गों पर परिचालन सुरक्षा मजबूत करने के लिए 578.02 करोड़ रुपये की लागत से 49 स्टेशनों पर मैनुअल व्यवस्था की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की जाएगी।

Read More

पांच राज्यों के चुनाव में अब तक 650 करोड़ रुपये से अधिक राशि जब्त

खबर है..नई दिल्लीभारत निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनावों की घोषणा के दौरान अब तक 650 करोड रुपए की राशि जब्त की है। आयोग ने राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।गौरतलब है कि आयोग ने पांच चुनावी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उनके 12 सीमावर्ती राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, प्रमुख कार्यकारी अधिकारियों और पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ कई समीक्षा बैठकें की हैं और उन्हें हिंसा मुक्त, धमकी मुक्त और प्रलोभन मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 5,173 से अधिक उड़न दस्ते तैनात किए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के भीतर किया जाए। इसके अतिरिक्त, विभिन्न स्थानों पर औचक नाकेबंदी के लिए 5,200 से अधिक स्थैतिक निगरानी दल भी तैनात किए गए हैं।आयोग ने इस बात पर भी जोर दिया है कि इन निर्देशों के प्रवर्तन के लिए की जाने वाली जांच और निरीक्षण के दौरान आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा या परेशानी न हो, इसे प्रवर्तन अधिकारी सुनिश्चित करें। इस संबंध में किसी भी शिकायत के निवारण के लिए जिला शिकायत समितियाँ भी गठित की गई हैं। नागरिक और राजनीतिक दल ‘ईसीआईएनइटी’ पर ‘सी-विजिल’ मॉड्यूल का उपयोग करके आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट कर सकते हैं।

Read More

बीआरओ की परियोजना चेतक ने अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया

खबर है..नई दिल्लीसीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की परियोजना चेतक ने 04 अप्रैल, 2026 को राजस्थान के बीकानेर में अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर पश्चिमी क्षेत्र के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चार दशकों से ज्यादा की समर्पित सेवा को याद किया गया। 1980 में इसी दिन शुरू हुई इस परियोजना ने राजस्थान, पंजाब और गुजरात के उत्तरी हिस्सों में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और रखरखाव में अहम भूमिका निभाई है। इस तरह इसने सीमावर्ती इलाकों को जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास में भी योगदान दिया है।अपने आदर्श वाक्य ‘चेतक का प्रयास, देश का विकास’ के साथ, परियोजना चेतक भौगोलिक क्षेत्र के लिहाज से बीआरओ की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है। इसके तहत 4,000 किलोमीटर से ज्यादा का सड़क नेटवर्क और 214 किलोमीटर की ‘खाई-सह-बांध’ (डिच कम बंड) शामिल है। यह अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर जाने वाली मुख्य फीडर सड़कों का रखरखाव करके रक्षा बलों की सहायता करता है। इन सड़कों को ‘राष्ट्रीय राजमार्ग दो-लेन’ मानकों के अनुसार अपग्रेड करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

Read More