जम्मू पहली बार पैसेंजर ट्रेन के माध्यम से सीधे कश्मीर से जुड़ा : वैष्णव

खबर है..नई दिल्लीदशकों से जम्मू में ट्रेन पर सवार होकर सीधे श्रीनगर पहुँचने की कल्पना वास्तविकता से दूर केवल एक सपना ही थी। लेकिन आज वह सपना इतिहास बन गया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने श्रीनगर-श्री माता वैष्णो देवी कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस सेवा के जम्मू तवी रेलवे स्टेशन तक विस्तार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे इतिहास में पहली बार जम्मू और कश्मीर सीधे ट्रेन सेवा से जुड़ गए हैं। अब एक सीधा और निर्बाध रेल कॉरिडोर इस क्षेत्र के दो सबसे प्रमुख केंद्रों को आपस में जोड़ता है, जो न केवल यात्रा को तेज बनाएगा बल्कि इस सुंदर क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और जन-संपर्क की तस्वीर भी बदल देगा।जम्मू तवी उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में से एक है, जो इस केंद्र शासित प्रदेश को देश के शेष हिस्सों से जोड़ने वाले एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। कन्याकुमारी, हावड़ा, मुंबई और अन्य बड़े शहरों जैसे प्रमुख गंतव्यों के लिए व्यापक रेल संपर्कों के साथ, यह स्टेशन विभिन्न क्षेत्रों के बीच निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।इस विकास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री वैष्णव ने इस कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कहा कि जम्मू-कश्मीर में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ एक बड़ी उपलब्धि को हासिल कर लिया गया है। अब ट्रेन के जम्मू तवी तक पहुँचने से, देश भर के यात्रियों के लिए श्री माता वैष्णो देवी और श्री अमरनाथ जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा अधिक सुविधाजनक और सुगम हो जाएगी।रेल मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वंदे भारत सेवा की शुरुआत के बाद से ही इसमें यात्रियों की फुल ऑक्युपेंसी देखी गई है, जो यात्रियों के बीच इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पूरे देश के लिए एक लाइफलाइन के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने आगे कहा कि आज जम्मू और श्रीनगर के बीच 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस सेवा शुरू की गई है, जो इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यात्री क्षमता में एक बड़ी वृद्धि का प्रतीक है।

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आंध्र प्रदेश में रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा : वैष्णव

दक्षिण तटीय रेलवे जोन के गठन के लिए जारी होगी राजपत्र अधिसूचना, 1 जून, 2026 से होगी प्रभावी खबर है..नई दिल्लीरेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने विशाखापत्तनम में गूगल क्लाउड इंडिया एआई हब के शिलान्यास समारोह के बाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दक्षिण तटीय रेलवे जोन के गठन के लिए राजपत्र अधिसूचना जारी की जाएगी जो 1 जून, 2026 से प्रभावी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि यह कदम आंध्र प्रदेश में रेलवे प्रशासन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।मंत्री ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश को रेलवे के लिए रिकॉर्ड 10,134 करोड़ रुपये का बजट आवंटन प्राप्त हुआ है जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए संयुक्त रूप से विगत वर्षों में आवंटित 886 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश में वर्तमान में लगभग 1,06,000 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं चल रही हैं जिनका उद्देश्य बंदरगाहों, पर्यटन स्थलों और प्रमुख शहरों को जोड़ने के साथ पूरे राज्य में संपर्क को बढ़ाना है।मंत्री आंध्र प्रदेश में रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण कर लिया गया है जिससे यह रेलवे के आधुनिकीकरण के मामले में अग्रणी क्षेत्रों में शामिल हो गया है।मंत्री ने यात्री सेवाओं के संबंध में बताया कि वर्तमान में राज्य में 16 वंदे भारत ट्रेनें और 22 अमृत भारत ट्रेनें चल रही हैं जिससे यात्रा की क्षमता और सुविधा में वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त उन्होंने यह भी कहा कि पूरे ईस्ट कोस्ट रेलवे कॉरिडोर को चार-लाइन वाले नेटवर्क में अपग्रेड किया जा रहा है जिससे इसकी क्षमता दोगुनी होने और 500 नई ट्रेनों के संचालन को सक्षम बनाने की उम्मीद है।उन्होंने भविष्य में हाई-स्पीड रेल संपर्क के बारे में बात करते हुए प्रमुख दक्षिणी गलियारों में प्रस्तावित हाई-स्पीड संपर्क और यात्रा समय के बारे में विस्तार से बताया कि अमरावती से हैदराबाद – लगभग 70 मिनट, अमरावती से चेन्नई – लगभग 112 मिनट, हैदराबाद से पुणे – लगभग 1 घंटा 55 मिनट, पुणे से मुंबई – लगभग 48 मिनट,चेन्नई से बेंगलुरु – लगभग 73 मिनट, हैदराबाद से बेंगलुरु – लगभग 2 घंटे 8 मिनट होगी।

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डर से स्वतंत्रता तक: नया खंबटकी घाट सुरंग, घाटों से होकर सुरक्षित यात्रा

परियोजना की प्रगति 86 प्रतिशत पर, सुरंग का 2026 की पहली छमाही में उद्घाटन संभव खबर है..नई दिल्लीदशकों से, पुणे-सतारा राजमार्ग पर खंबटकी घाट का खंड धैर्य और साहस की परीक्षा के रूप में जाना जाता था। संकरी लेनें, तीखे ‘एस’ आकार के मोड़, लंबे ट्रैफिक जाम और लगातार दुर्घटनाएं यात्रा को तनावपूर्ण बनाती थीं, खासकर सप्ताहांत और छुट्टी के ट्रैफिक के दौरान। जो छोटी ड्राइव होनी चाहिए थी, वह अक्सर भीड़भाड़ वाली सुरंगों में थकाऊ इंतजार में बदल जाती थी।आज, यह कहानी बदल रही है : राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा एनएच-4 (नया एनएच-48) पर शुरू किया गया नया खंबटकी घाट ट्विन ट्यूब 6-लेन सुरंग परियोजना, महाराष्ट्र के सबसे चुनौतीपूर्ण राजमार्ग खंडों में से एक को आधुनिक, जन-केंद्रित अवसंरचना का प्रतीक बना रही है।परीक्षण संचालन और सुरक्षा मूल्यांकन के हिस्से के रूप में, ट्विन सुरंग का एक हिस्सा परीक्षण उद्देश्यों के लिए जनता के लिए खोल दिया गया है, जिससे यात्री खुद बेहतर अवसंरचना का अनुभव कर सकें।परियोजना की भौतिक प्रगति 86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, और सुरंग 2026 की पहली छमाही में उद्घाटन के ट्रैक पर है। एक नियमित यात्री, जो घाट से नियमित रूप से यात्रा करता है, नई सुरंग में प्रवेश करते ही अंतर महसूस करता है।“यहां अधिक रिफ्लेक्टर हैं, बेहतर लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे, दिखाई देने वाली सुरक्षा गार्ड रेलिंग और उचित अग्निशामक बिंदु हैं। पुरानी सुरंग की तुलना में यह बहुत चौड़ी है और स्पष्ट रूप से सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है।”सतारा से पुणे जा रहे एक अन्य नियमित यात्री पुराने रूट पर रोजमर्रा की संघर्ष को याद करता है।“पहले, पुरानी सुरंग में केवल दो लेनें थीं। इसके कारण ट्रैफिक जमा हो जाता था। अगर कोई कार या ट्रक खराब हो जाता, तो लंबा जाम लग जाता और दुर्घटना का गंभीर जोखिम होता। पुरानी सुरंग का रूट लगभग 15-20 मिनट लेता था। अब, इस नई सुरंग के कारण, यह केवल 5-10 मिनट में हो जाता है।”जो कभी गतिरोध था, वह अब राजमार्ग का सबसे तेज और सबसे सुगम खंड बन गया है।नजदीकी गांव की दो स्थानीय महिलाओं के लिए, जो खंडाला और सतारा के बीच रोजाना यात्रा करती हैं, इस सुरंग ने रोजमर्रा की जिंदगी बदल दी है।“यह नई सुरंग यात्रा करने में बहुत अच्छी और बहुत सुरक्षित लगती है। पुरानी सुरंग में यात्रा का समय लंबा था और दुर्घटना का जोखिम बहुत अधिक था। हम रोजाना यात्रा करते हैं, इसलिए अब हम बहुत समय बचा रहे हैं। सुरंग के अंदर लाइटिंग उत्कृष्ट है, जो इसे सुरक्षित महसूस कराती है। पहले अंधेरा बड़ी समस्या था, लेकिन अब नहीं।”नई खंबटकी घाट ट्विन ट्यूब सुरंग यह साबित करती है कि जब अवसंरचना मानवीय अनुभव के इर्द-गिर्द डिजाइन की जाती है, तो यह वाहनों को मात्र ले जाने से अधिक करती है। यह डर मिटाती है, समय लौटाती है, जानें बचाती है और यात्रा पर विश्वास बहाल करती है।

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प्रधानमंत्री मोदी 28 अप्रैल को वाराणसी दौरे परदो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को दिखाएंगे हरी झंडी

खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अप्रैल 2026 को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे करोड़ों की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे और दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।प्रधानमंत्री दोपहर करीब 2:30 बजे बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे, जहां से बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) जाएंगे। यहां गेस्ट हाउस में लगभग एक घंटे विश्राम के बाद शाम करीब 4:30 बजे जनसभा को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के बाद वे अतिथि गृह लौट जाएंगे।इस अवसर पर पीएम मोदी वाराणसी से पुणे (हडपसर) के लिए अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे, जबकि अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन से मुंबई के लिए चलने वाली दूसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को वर्चुअल माध्यम से रवाना करेंगे। ये ट्रेनें वाराणसी, प्रयागराज, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ेंगी।नई ट्रेनों का संचालन ज्ञानपुर रोड, फतेहपुर, गोविंदपुरी, उरई, झांसी, बीना, रानी कमलापति (भोपाल), इटारसी, खंडवा, भुसावल, जलगांव और मनमाड जैसे प्रमुख स्टेशनों के रास्ते होगा। इससे उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र के बीच यात्रा तेज, सुगम और किफायती बनेगी, जिसका लाभ खासकर तीर्थ यात्रियों को मिलेगा।प्रधानमंत्री 29 अप्रैल की सुबह काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन भी करेंगे। सुबह 7 बजे अतिथि गृह से प्रस्थान कर करीब एक घंटे में दर्शन कर वापस लौटेंगे। इस दौरान वे कुछ विशिष्ट लोगों से मुलाकात भी कर सकते हैं। प्रधानमंत्री का यह दौरा पूर्वांचल समेत मध्य भारत के रेल नेटवर्क को मजबूती देने और यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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प्रधानमंत्री मोदी 28 अप्रैल को वाराणसी दौरे पर

दो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को दिखाएंगे हरी झंडी खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अप्रैल 2026 को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे करोड़ों की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे और दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।प्रधानमंत्री दोपहर करीब 2:30 बजे बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे, जहां से बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) जाएंगे। यहां गेस्ट हाउस में लगभग एक घंटे विश्राम के बाद शाम करीब 4:30 बजे जनसभा को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के बाद वे अतिथि गृह लौट जाएंगे।इस अवसर पर पीएम मोदी वाराणसी से पुणे (हडपसर) के लिए अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे, जबकि अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन से मुंबई के लिए चलने वाली दूसरी अमृत भारत एक्सप्रेस को वर्चुअल माध्यम से रवाना करेंगे। ये ट्रेनें वाराणसी, प्रयागराज, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ेंगी।नई ट्रेनों का संचालन ज्ञानपुर रोड, फतेहपुर, गोविंदपुरी, उरई, झांसी, बीना, रानी कमलापति (भोपाल), इटारसी, खंडवा, भुसावल, जलगांव और मनमाड जैसे प्रमुख स्टेशनों के रास्ते होगा। इससे उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र के बीच यात्रा तेज, सुगम और किफायती बनेगी, जिसका लाभ खासकर तीर्थ यात्रियों को मिलेगा।प्रधानमंत्री 29 अप्रैल की सुबह काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन भी करेंगे। सुबह 7 बजे अतिथि गृह से प्रस्थान कर करीब एक घंटे में दर्शन कर वापस लौटेंगे। इस दौरान वे कुछ विशिष्ट लोगों से मुलाकात भी कर सकते हैं। प्रधानमंत्री का यह दौरा पूर्वांचल समेत मध्य भारत के रेल नेटवर्क को मजबूती देने और यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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केंद्रीय विद्यालय आरडीएसओ में हैंडबॉल एवं योग प्रतियोगिता शुरू

खबर है..लखनऊ केंद्रीय विद्यालय आरडीएसओ में बुधवार को केंद्रीय विद्यालय संगठन लखनऊ संभाग की तीन दिवसीय हैंडबॉल एवं योग प्रतियोगिता बालिका वर्ग (अंडर 14 17 एवं 19) का शुभारंभ हुआ।आरडीएसओ के कार्यकारी निदेशक (प्रशासन) अरुण कुमार शर्मा ने प्रतियोगिता का उद्घाटन किया । प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि के रूप में श्री शर्मा ने दीप प्रज्वलन कर माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। विद्यालय के प्राचार्य राजेश कुमार शुक्ल ने मुख्य अतिथि का हरित स्वागत कर उनका आभार व्यक्त किया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने मुख्य अतिथि के स्वागत में गीत और सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। मुख्य अतिथि श्री शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।विद्यालय के प्राचार्य श्री शुक्ल के मुताबिक यह प्रतियोगिता 24 अप्रैल को समाप्त होगी। इस प्रतियोगिता में केंद्रीय विद्यालय लखनउ संभाग के 21 विस्यलयों के कुल 175 प्रतियोगी भाग ले रहे हैं तथा उनके 35 अनुरक्षक भी हैं। उद्घाटन समारोह का संचालन विद्यालय के पीजीटी हिंदी एचएन दुबे ने किया। मुख्य अध्यापिका सुश्री अंजू अरोड़ा ने उद्घाटन समारोह में आए अतिथियों का आभार व्यक्त किया ।

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हाईकोर्ट के निर्देश पर मॉडिफाई साइलेंसर, हूटर, सायरन के खिलाफ कसा शिकंजा

खबर है.. लखनऊ हाईकोर्ट के निर्देश पर राजधानी में विशेष अभियान के माध्यम से परिवहन विभाग ने यातायात पुलिस ने मोडिफाइड साइलेंसर, हूटर-सायरन और प्रेशर/मल्टीटोंड हॉर्न के खिलाफ शिकंजा कसा। संयुक्त अभियान में मोडिफाइलड साइलेंसर वाली 33 बाइकों का जहां चालान किया गया, वहीं नौ को सीज करने की कार्रवाई की गई। साथ ही इन्हें बेचने वाले 20 दुकानों के मालिकों को चेतावनी दी गई है। आरटीओ (प्रवर्तन) प्रभात पांडेय ने बताया कि एआरटीओ (प्रशासन) प्रदीप कुमार सिंह के नेतृत्व में प्रवर्तन और ट्रैफिक पुलिस की टीम ने लालबाग से लेकर कैसरबाग तक 30 से अधिक दुकानों की जांच की। एआरटीओ प्रशासन की जांच के दौरान 20 दुकानों पर मोडिफाइड साइलेंस, प्रेशर हॉर्न और हूटर मिलने पर दुकान मालिकों को इन्हें भविष्य में न बेचे जाने के लिए चेतावनी दी गई। उन्हें मोटर वाहन अधिनियमों के प्रावधानों से अवगत कराते हुए पत्र प्राप्त कराया गया। साथ ही प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने के लिए आरटीओ कार्यालाय में 20 अप्रैल को बुलाई बैठक में आवश्यक रूप से उपस्थित रहने को कहा गया। साथ ही 33 बाइकों का चालान और नौ को सीज किया गया। इस अभियान में सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) लखनऊ, प्रदीप कुमार, यात्री/मालकर अधिकारी, लखनऊ एसपी देव, आभा त्रिपाठी एवं अनीता वर्मा सहित चौकी इंचार्ज कैसरबाग एवं लालबाग मौजूद रहे। *हाईकोर्ट के आदेश पर चला अभियान*: उच्च न्यायालय, इलाहाबाद, खंडपीठ लखनऊ में दायर एक जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय ने मोडिफाइड साइलेंसर, हूटर एवं सायरन एवं प्रेशर/मल्टीटोंड हॉर्न के प्रयोग से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर कड़ी आपत्ति जताई। ऐसे वाहनों और मोडिफाइड साइलेंसर, हूटर एवं सायरन एवं प्रेशर/मल्टीटोंड हॉर्न की बिक्री करने वाले दुकानदारों/शोरूम मालिकों और उनको लगाने वाले गैराजों एवं वर्कशॉपों के विरुद्ध पुलिस एवं परिवहन विभाग को कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए। इसी आदेश के अनुपालन में 17 और 18 अप्रैल को अभियान चलाया गया। *एक वर्ष कारावास या एक लाख अर्थदंड का प्रावधान :* एआरटीओ प्रशासन प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा, 182ए(3) के तहत मोडिफाइड साइलेंसर, हूटर, साइलेंसर एवं मल्टीटोंड हॉर्न की बिक्री करने वाले एवं लगाने वाले गैराजों/वर्कशॉप के प्रोप्राइटर को अधिकतम 01 वर्ष के कारावास अथवा एक लाख रुपये का अर्थदंड आरोपित करने का प्रावधान है। मोडिफाइड साइलेंसर को लगवाने वाले वाहन स्वामी को मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 182A(4) के तहत रु 5000(पांच हजार रुपए) और मोटर वाहन के माध्यम से ध्वनि प्रदूषण फैलाने के अभियोग में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 190(2) के तहत रु 10000 (दस हजार रुपए) अर्थदंड आरोपित करने का प्रावधान है।

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जे.के. टायर्स एवं इंडस्ट्रीज के मैसूर प्लांट में ज्ञानवर्धक अध्ययन दौरे का सफल आयोजन

खबर है..नई दिल्लीएआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने कहा कि जे. के. टायर्स एवं इंडस्ट्रीज के मैसूर प्लांट के अध्ययन दौरे में शामिल होना हमारे लिए गर्व और अत्यंत प्रसन्नता का विषय रहा। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु एयरपोर्ट पर आगमन से लेकर वापसी तक कार्यक्रम की हर व्यवस्था बहुत ही सुव्यवस्थित और उत्कृष्ट रही, जिससे यह अनुभव अत्यंत सहज और यादगार बना।उन्होंने आगे कहा कि यह दौरा ज्ञानवर्धक और अत्यंत उपयोगी रहा। विभिन्न तकनीकी सत्रों के साथ-साथ डॉ. रघुपति सिंघानिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा मैसूर प्लांट विज़िट ने आधुनिक निर्माण प्रक्रियाओं, नई तकनीकों और सख्त गुणवत्ता मानकों को नजदीक से समझने का अवसर प्रदान किया। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कंपनी विश्वस्तरीय उत्पाद देने के साथ-साथ ग्राहकों की आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।डॉ. हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष – एआईएमटीसी ने डॉ. रघुपति सिंघानिया एवं अंशुमान सिंघानिया जैसे दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उत्कृष्टता, इन्नोवेशन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के साथ मजबूत जुड़ाव ने संगठन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। उन्होंने विशेष रूप से संजीव शर्मा, वाईज प्रसिडेंट (फ्लीट & मोबिलिटी सोल्युशंस), जे.के. टायर्स एवं इंडस्ट्रीज, के ‘पर्चेजिंग माइलेज’ – एक नई और अनोखी ओनरशिप योजना – (टायर की कीमत के बजाय उसके प्रदर्शन/माइलेज के आधार पर भुगतान) के नवाचारपूर्ण विचार की प्रशंसा करते हुए कहा कि “यह पहल ट्रांसपोर्ट उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। इस योजना में ग्राहक टायर का उपयोग “प्रति किलोमीटर” के आधार पर भुगतान करता है जिससे वह शुरुआती निवेश बचता है और वह केवल उपयोग के अनुसार भुगतान करता है।इस दौरे में डॉ जी आर शनमुगप्पा, चेयरमैन – एआईएमटीसी; पूर्व अध्यक्ष गुरिंदर पाल सिंह, बल मलकीत सिंह, भीम वाधवा, अमृतलाल मदान ; उपाध्यक्ष ईस्ट जोन – प्रमोद कुमार गुप्ता; उपाध्यक्ष वेस्ट जोन – जितेंद्र सांघवी; उपाध्यक्ष साउथ जोन – श्री ईश्वरा राव, शामिल रहे। ट्रांसपोर्ट ट्रेड के दिग्गज फ्लीट ऑनर्स – सतीश ढींगरा (डी.जी.एफ.सी.); राजीव गुप्ता (कारवां रोड़वेज); विक्रम गुप्ता (सुप्रीम ट्रांसपोर्ट) आदि शामिल रहे ।

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टोल पर ओवरलोडिंग नियमों में संशोधन चिंताजनक, सड़क सुरक्षा के लिए खतरा : सभरवाल

खबर है..नई दिल्लीऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल ने टोल पर ओवरलोडिंग नियमों में संशोधन पर चिंता जताई है और कहा है कि यह संशोधन के लिए सड़क सुरक्षा के लिए खतरा है।डा.सभरवाल ने भारत सरकार की ओर से National Highways Fee (Amendment) Rules, 2026 के तहत ओवरलोडिंग से संबंधित ढांचे में किए गए संशोधनों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जो 15 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गए हैं।नए प्रावधानों के अनुसार, निर्धारित ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) से अधिक भार ले जाने वाले वाहनों पर टोल आधारित अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। 10% तक ओवरलोडिंग पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं। 10% से 40% तक ओवरलोडिंग पर 2 गुना टोल। 40% से अधिक ओवरलोडिंग पर 4 गुना टोल।उन्होंने बताया कि ओवरलोडेड वाहनों की पहचान अब टोल प्लाज़ा पर लगे वज़न मापन सिस्टम के माध्यम से की जाएगी और इसका रिकॉर्ड VAHAN डेटाबेस में दर्ज होगा। भुगतान FASTag/डिजिटल माध्यमों से किया जाएगा।उन्होंने कहा कि AIMTC लंबे समय से ओवरलोडिंग का विरोध करता रहा है और इसे देश में सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण मानता है। भारत में हर वर्ष 1.5 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में होती है, जिसमें ओवरलोडिंग एक महत्वपूर्ण कारक है। ओवरलोडिंग से न केवल वाहन की ब्रेकिंग और स्थिरता प्रभावित होती है, बल्कि सड़क एवं पुलों के ढांचे को भी नुकसान पहुंचता है।”डॉ सभरवाल ने कहा हमारा का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में एक गंभीर कमी है क्योंकि यह दंड प्रणाली केवल टोल प्लाज़ा तक सीमित है, जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत RTO द्वारा लगाए जाने वाले दंड अलग से लागू रहेंगे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अतिरिक्त शुल्क लेकर ओवरलोडेड वाहनों को आगे चलने की अनुमति दी जा रही है, जो कि असुरक्षित संचालन को बढ़ावा देता है और दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ाता है।इसके अलावा लावा ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों में भ्रांति फैल रही है कि सरकार ने 10 प्रतिशत की छूट दे दी है । जो सरासर गलत है। CMVR 1989 के अनुसार वाणिज्य वाहनों पर भार क्षमता से सिर्फ 5 प्रतिशत अतिरिक्त भार मान्य है । सिर्फ दंड लगाना पर्याप्त नहीं है। ओवरलोडेड वाहनों को तब तक सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि अतिरिक्त भार उतार न दिया जाए। यही एक प्रभावी रोकथाम (deterrence) सुनिश्चित करेगा और सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाएगा।उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि इस नीति की समीक्षा कर इसे दंड आधारित नहीं बल्कि रोकथाम आधारित बनाया जाए, ताकि सड़क सुरक्षा को वास्तविक रूप से मजबूत किया जा सके।

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बेहतर रेल सुविधाएं जीत रहे हैं यात्रियों का भरोसा : अश्विनी वैष्णव

रोजाना 14 हजार यात्री ट्रेनों से सफर कर रहे हैं दो करोड़ लोग खबर है..नई दिल्लीदुनिया के सबसे विशाल और जटिल रेल नेटवर्कों में से एक भारतीय रेलवे प्रतिदिन 14,000 से अधिक यात्री ट्रेनों सहित कुल 25,000 से ज्यादा ट्रेनें संचालित करता है, जिनमें रोजाना दो करोड़ से अधिक लोग सफर करते हैं। दशकों तक रेलवे को लेकर होने वाली सार्वजनिक चर्चाओं का केंद्र केवल विस्तार और कनेक्टिविटी ही रहा। हालांकि, वर्ष 2014 के बाद से एक बुनियादी नीतिगत बदलाव के जरिए सुरक्षा को सभी परिचालनों के केंद्र में रखा गया। इसके परिणाम अब ठोस आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जो संरचनात्मक, तकनीकी और वित्तीय स्तर पर हुए समान रूप से महत्त्वपूर्ण बदलावों को दर्शाते हैं।अपने लेख के माध्यम से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर रेल सुरक्षा का आकलन प्रति बिलियन पैसेंजर-किलोमीटर होने वाली मृत्यु या दुर्घटनाओं के आधार पर किया जाता है, जिससे अलग-अलग स्तर के रेल सिस्टम के बीच तुलना संभव हो पाती है। वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान ही एक स्पष्ट संदेश दे दिया गया था: सुरक्षा सर्वोपरि। इसी विजन के साथ, 2014 से भारतीय रेलवे ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था के कायाकल्प के लिए तकनीकी-आधारित, व्यापक और निरंतर वित्तीय निवेश वाली रणनीति अपनाई है।एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते, जिससे यात्रियों की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। वित्त वर्ष 2025-26 में ‘मेक इन इंडिया’ प्रयासों को और मजबूती देते हुए 1,674 इंजनों का रिकॉर्ड उत्पादन किया गया और साथ ही 6,677 नए एलएचबी कोच तैयार किए गए, जो रेल सफर को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाते हैं।ट्रैक की गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए वैष्णव ने कहा कि 60 किलोग्राम की भारी पटरियों, लंबे वेल्डेड रेल पैनलों, उन्नत वेल्डिंग तकनीकों और अत्याधुनिक अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन टेस्टिंग को व्यापक स्तर पर अपनाने से रेल फ्रैक्चर में 92 प्रतिशत और वेल्ड फेलियर में 93 प्रतिशत की भारी कमी आई है। सर्दियों में कम विज़िबिलिटी के दौरान लोको पायलटों की मदद करने वाले जीपीएस आधारित ‘फॉग सेफ्टी डिवाइस’ की संख्या में भारी बढ़ोतरी की गई है—जहाँ पहले ये केवल 90 यूनिट थे, वहीं अब कोहरा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 30,000 डिवाइस लगाए जा चुके हैं। यह तकनीक लोको पायलट को आने वाले सिग्नल, रेलवे क्रॉसिंग और अन्य लैंडमार्क्स की रियल-टाइम सटीक जानकारी प्रदान करती है। श्री वैष्णव ने यह भी रेखांकित किया कि अब लगभग 4,000 रेलवे स्टेशन पूरी तरह से डिजिटल हो चुके हैं।वैष्णव ने जोर देकर कहा कि कोई भी तकनीक मानवीय सतर्कता का विकल्प नहीं हो सकती, इसीलिए भारतीय रेलवे ने अपने रनिंग स्टाफ (लोको पायलट और सहायक) की कार्य स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए व्यवस्थित निवेश किया है।वैष्णव ने तर्क दिया कि सुरक्षा संस्कृति में आए इस क्रांतिकारी बदलाव का सबसे बड़ा सबूत कोई एक नाटकीय घटना नहीं, बल्कि पिछले एक दशक से दुर्घटनाओं और हताहतों की संख्या में आ रही निरंतर और डेटा-आधारित गिरावट है।

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