एमएसडीई ने पूर्वोत्तर के युवाओं के लिए प्रशिक्षुता कार्यक्रम का विस्तार किया, 30,000 युवाओं को मिलेगा लाभ

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नई दिल्ली
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने प्रधानमंत्री की राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS) के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) में प्रशिक्षुता को बढ़ावा देने के विशेष कार्यक्रम का वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विस्तार किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्वोत्तर के युवाओं को अधिक रोजगारपरक प्रशिक्षण, उद्योगों से जुड़ाव और बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम का कार्यान्वयन भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी द्वारा किया जाएगा।
यह विस्तार मई 2025 में शुरू की गई प्रायोगिक परियोजना की सफलता के बाद किया गया है। अब इस पहल को पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों तक विस्तारित करते हुए 30,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षुता के अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले चरण की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है।
योजना के तहत 15,000 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर से बाहर सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और अन्य संस्थानों में प्रशिक्षुता के अवसर दिए जाएंगे, जबकि 15,000 प्रशिक्षुओं को उनके गृह राज्य अथवा पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर ही रोजगार आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार ने इस पहल के लिए 57.58 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि पीएम-एनएपीएस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र घटक के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत युवाओं की प्रतिभा और ऊर्जा का केंद्र है। उन्होंने कहा कि पायलट परियोजना की सफलता ने साबित किया है कि उचित अवसर और सहयोग मिलने पर क्षेत्र के युवा उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। इस योजना का विस्तार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षुता, उद्योगों की भागीदारी और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देगा।
योजना के अंतर्गत प्रशिक्षुओं को पीएम-एनएपीएस के मौजूदा लाभों के अलावा 1,500 रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। पहले यह सुविधा केवल अपने राज्य से बाहर जाने वाले प्रशिक्षुओं तक सीमित थी, लेकिन अब अपने गृह राज्य में प्रशिक्षुता करने वाले युवाओं को भी इसका लाभ मिलेगा।
मंत्रालय प्रशिक्षुता व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पूरे क्षेत्र में कार्यशालाएं, जागरूकता अभियान, नियोक्ता सहभागिता कार्यक्रम तथा शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के साथ सहयोग को भी बढ़ावा देगा।
पायलट परियोजना के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। 26,000 प्रशिक्षुओं के लक्ष्य के मुकाबले 23,470 युवाओं को प्रशिक्षुता के अवसर मिले, जो लक्ष्य का 90 प्रतिशत से अधिक है। वित्त वर्ष 2024-25 में जहां पूर्वोत्तर में 15,562 प्रशिक्षु थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 23,470 हो गई, यानी लगभग 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इनमें 13,673 प्रशिक्षुओं को अपने गृह राज्य से बाहर प्रशिक्षुता के अवसर मिले, जबकि 9,797 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर ही रोजगार आधारित प्रशिक्षण मिला। मेघालय में प्रशिक्षुता में सबसे अधिक 95 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। महिला प्रशिक्षुओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जबकि सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में नियोक्ताओं की भागीदारी में महत्वपूर्ण विस्तार देखने को मिला।
यह पहल पूर्वोत्तर के युवाओं को उद्योग आधारित कौशल, व्यावहारिक अनुभव और बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्किल इंडिया मिशन के माध्यम से क्षेत्र में समावेशी विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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