दिल्ली की नई ईवी नीति का AIMTC और DCBA ने किया विरोध
मौजूदा वाहनों को वैध आयु तक चलाने की मांग खबर है..नई दिल्लीऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) और दिल्ली कॉन्ट्रैक्ट बस एसोसिएशन (DCBA) ने दिल्ली सरकार की प्रस्तावित ईवी पॉलिसी 2026 का कड़ा विरोध करते हुए मांग की है कि वर्तमान में चल रहे BS-VI, सीएनजी, डीजल और पेट्रोल वाहनों को उनकी वैधानिक आयु पूरी होने तक परिचालन की अनुमति दी जाए।दोनों संगठनों का कहना है कि सरकार की पूर्व नीतियों के अनुरूप परिवहन ऑपरेटरों ने BS-VI और सीएनजी वाहनों में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया है। ऐसे में उन्हें समय से पहले इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए बाध्य करना आर्थिक रूप से अनुचित और व्यावहारिक नहीं है।AIMTC के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने कहा कि परिवहन उद्योग को बार-बार नीतिगत बदलावों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पष्ट चार्जिंग नीति के अभाव में अनिवार्य ईवी परिवर्तन लागू करना परिवहन क्षेत्र के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर सकता है।संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा BS-VI और सीएनजी वाहनों को समय से पहले हटाने का निर्णय लिया गया, तो हजारों परिवहन ऑपरेटर दिवालियापन की स्थिति में पहुंच सकते हैं, बैंकों के ऋण प्रभावित होंगे, स्कूल एवं सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बाधित होगी तथा लाखों परिवारों की आजीविका पर असर पड़ेगा।AIMTC और DCBA ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की नीति स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित होनी चाहिए, न कि अनिवार्य और दंडात्मक। उन्होंने केंद्र और दिल्ली सरकार से किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श करने की मांग की।ट्रकों से प्रदूषण संबंधी दावों पर भी उठाए सवाल :AIMTC ने हाल में सामने आए उन दावों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें दिल्ली में प्रवेश करने वाले भारी ट्रकों को प्रदूषण का प्रमुख स्रोत बताया गया है। संगठन का कहना है कि अध्ययन की कार्यप्रणाली, नमूना आकार और वैज्ञानिक आधार सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।AIMTC के परिवहन विशेषज्ञ सलाहकार एवं दिल्ली सरकार के पूर्व उप-परिवहन आयुक्त अनिल छिकारा ने कहा कि ट्रकिंग उद्योग के खिलाफ लंबे समय से भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। उनके अनुसार, प्रदूषण का आकलन केवल वैज्ञानिक रूप से मापे गए टेल पाइप उत्सर्जन के आधार पर ही किया जाना चाहिए।डॉ. हरीश सभरवाल ने कहा कि ट्रकों की आवाजाही नियामकीय प्रतिबंधों के कारण मुख्य रूप से रात और सुबह के समय होती है, इसलिए केवल उसी अवधि के आंकड़ों के आधार पर ट्रकों को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताना उचित नहीं है।दोनों संगठनों ने सरकार से परिवहन क्षेत्र से जुड़े निर्णय वैज्ञानिक तथ्यों, व्यापक अध्ययन और सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही लेने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि परिवहन उद्योग की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में व्यापक आंदोलन और परिचालन प्रभावित होने जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
