‘एनएचएआई आरोग्य वन’ परियोजना होगी विकसित

राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर लगेंगे औषधीय पौधे खबर है…नई दिल्लीजैव विविधता को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास में पारिस्थितिक स्थिरता को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर औषधीय पौधारोपण के रूप में ‘आरोग्य वन’ विकसित करने की पहल की है। इस पहल का उद्देश्य परागणकों, पक्षियों और सूक्ष्मजीवों को सहारा देने वाली औषधीय पौधे प्रजातियों को लगाकर राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे जैव विविधता को समृद्ध करना है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती सुनिश्चित हो सके।‘आरोग्य वन’ के विकास के पहले चरण में 62.8 हेक्टेयर में फैले 17 भूखंडों को शामिल करते हुए एक कार्य योजना तैयार की गई है, जहां मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्यों में विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के किनारे लगभग 67,462 औषधीय पौधे लगाए जाएंगे।इसके अलावा नीम, आंवला, इमली, जामुन, नींबू, गूलर, मौलसरी आदि औषधीय गुणों से युक्त लगभग 36 पौधे प्रजातियों की पहचान की गई है और इन्हें संबंधित कृषि-जलवायु क्षेत्रों की उपयुक्तता के अनुसार भूमि भूखंडों पर लगाया जाएगा। जन जागरूकता और पहुंच को अधिकतम करने के लिए टोल प्लाजा, सड़क किनारे की सुविधाओं, इंटरचेंजों, क्लोवरलीफ जंक्शनों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अन्य प्रमुख स्थानों के पास स्थित भूमि भूखंडों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस पहल का कार्यान्वयन भारत सरकार के भूनिर्माण और वृक्षारोपण संबंधी दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाएगा।परंपरागत रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण गतिविधियां हरियाली बढ़ाने और पारिस्थितिक स्थिरता के उद्देश्य से देशी और सड़क किनारे उगने वाले वृक्षों की मिश्रित प्रजातियों का उपयोग करके की जाती रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्रशासन (एनएचएआई) ने आगामी मानसून के मौसम में वृक्षारोपण के लिए लगभग 188 हेक्टेयर रिक्त भूमि की पहचान की है ताकि पौधों के जीवित रहने की दर को बढ़ाया जा सके और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। औषधीय वृक्ष प्रजातियों पर केंद्रित एक विषयगत मॉडल को अपनाने से ऐसे पौधारोपण का पारिस्थितिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक महत्व बढ़ेगा।यह पहल आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने और स्वदेशी औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण में योगदान देने की भारत सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप भी है। इसके अलावा इन वृक्षारोपण को ऐसे जीवंत भंडार के रूप में परिकल्पित किया गया है जो पारंपरिक औषधीय ज्ञान प्रणालियों और समकालीन समय में उनकी प्रासंगिकता के बारे में जन जागरूकता पैदा करेंगे।‘आरोग्य वन’ पहल, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ अवसंरचना विकसित करने के प्रति एनएचएआई की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है। पारिस्थितिक बहाली को जन जागरूकता के साथ एकीकृत करके इस पहल का उद्देश्य हरित गलियारों का एक नेटवर्क बनाना है जो न केवल सड़क किनारे की पारिस्थितिकी को बढ़ावा दे, बल्कि ज्ञान केंद्रों के रूप में भी कार्य करे और भारत की औषधीय पौधों की समृद्ध विरासत और टिकाऊ जीवन शैली के बारे में जागरूकता को प्रोत्साहित करे।

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इग्नू के 39वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुएउपराष्ट्रपति

इग्नू के दीक्षांत समारोह में 32 लाख से अधिक छात्रों ने डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्राप्त किए खबर है..नई दिल्लीउपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 7 मार्च नई दिल्ली में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (आईजीएनओयू – इग्नू) के 39वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया, जहां 32 लाख से अधिक छात्रों ने अपनी डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्राप्त किए।उपराष्ट्रपति ने इग्नू की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसे देश की खुली और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का स्तंभ बताया, जिसने देश भर में उच्च शिक्षा को सबके लिए महत्वपूर्ण रूप से सुलभ बनाया है। इसके समावेशी विस्तार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इग्नू में 14 लाख से अधिक छात्र हैं, जिनमें 56 प्रतिशत महिलाएं और 58 प्रतिशत ग्रामीण तथा वंचित समुदायों से आते हैं। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के छात्रों की संख्या कई देशों की जनसंख्या से अधिक है, जो शैक्षिक समानता, सामाजिक गतिशीलता और राष्ट्रीय विकास में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है। उन्होंने छात्रों को आजीवन सीखते रहने, मूल्यों को बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इग्नू अपने स्थापित दूरस्थ शिक्षा मॉडल के कारण सुदृढ़ बना रहा। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वयं और ई-ज्ञानकोष जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया और यह प्रौद्योगिकी – आधारित शिक्षा में अग्रणी बनकर उभरा।उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को अपनाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इग्नू ने कई निकास विकल्पों (स्नातक कार्यक्रम के दौरान बीच में प्रमाण-पत्र के साथ पाठ्यक्रम छोड़ना) के साथ चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिससे उच्च शिक्षा अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित हो गई है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान प्रणालियों के एकीकरण की भी सराहना की।उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते उपकरण सीखने के अनुभवों को बेहतर बना सकते हैं, छात्रों को बेहतर सहायता प्रदान कर सकते हैं और व्यक्तिगत शिक्षा को सक्षम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास से डरने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब देश में कंप्यूटर आए थे, तब आशंकाएं थीं कि कंप्यूटर नौकरियां छीन लेंगे; हालांकि, अंततः कंप्यूटर आने से अधिक रोजगार सृजित हुए और राष्ट्रीय विकास में योगदान बढ़ा।उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को भी इसी तरह से अपनाया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने ऐसी तकनीकों के जिम्मेदार और जवाबदेह उपयोग की जरूरत पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने देश भर के छात्रों की सुगमता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षणिक भंडार (एनएडी) के तहत डिजिलॉकर पर प्रमाण पत्र जारी किए। उन्होंने इग्नू पूर्व छात्र पोर्टल का भी शुभारम्भ किया, जिसमें 50 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं।इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू; इग्नू की कुलपति प्रो. उमा कांजीलाल; और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने देश भर के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों में स्वयं प्रभा स्टूडियो का भी शुभारम्भ किया। त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू, गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा और अन्य गणमान्य व्यक्ति अपने-अपने राज्य के क्षेत्रीय इग्नू केंद्रों से आभासी माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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सुरक्षा प्रणाली कवच लगाने और रेल सिग्नलिंग आधुनिकीकरण के लिए 1,364 करोड़ स्वीकृत

खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेल ने विभिन्न रेलवे जोन में सुरक्षा प्रणाली कवच लगाने और सिग्नलिंग आधुनिकीकरण के लिए 1,364.45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। दक्षिण रेलवे के 232 लोकोमोटिव में कवच के चौथे संस्करण स्थापित करने के लिए 208.81 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, ताकि रेलगाडियों में टकराव रोकने की व्यवस्था सुदृढ की जा सके।रेल मंत्रालय के अनुसार उत्तर रेलवे में उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली के लिए 3,200 से अधिक किलोमीटर मार्ग में 400.86 करोड़ रुपये की लागत से ऑप्टिकल फाइबर संचार व्यवस्था समुन्नत बनाई जाएगी। उत्तर मध्य रेलवे में कवच कार्यान्वयन समर्थन के लिए 2,196 रूट किलोमीटर मार्ग में 176.76 करोड़ रुपये की लागत से 2×48 फाइबर ऑप्टिकल फाइबर संचार नेटवर्क बिछाया जाएगा।दक्षिण मध्य रेलवे के अधिक यातायात वाले मार्गों पर परिचालन सुरक्षा मजबूत करने के लिए 578.02 करोड़ रुपये की लागत से 49 स्टेशनों पर मैनुअल व्यवस्था की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की जाएगी।

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पांच राज्यों के चुनाव में अब तक 650 करोड़ रुपये से अधिक राशि जब्त

खबर है..नई दिल्लीभारत निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनावों की घोषणा के दौरान अब तक 650 करोड रुपए की राशि जब्त की है। आयोग ने राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।गौरतलब है कि आयोग ने पांच चुनावी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उनके 12 सीमावर्ती राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, प्रमुख कार्यकारी अधिकारियों और पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ कई समीक्षा बैठकें की हैं और उन्हें हिंसा मुक्त, धमकी मुक्त और प्रलोभन मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 5,173 से अधिक उड़न दस्ते तैनात किए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के भीतर किया जाए। इसके अतिरिक्त, विभिन्न स्थानों पर औचक नाकेबंदी के लिए 5,200 से अधिक स्थैतिक निगरानी दल भी तैनात किए गए हैं।आयोग ने इस बात पर भी जोर दिया है कि इन निर्देशों के प्रवर्तन के लिए की जाने वाली जांच और निरीक्षण के दौरान आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा या परेशानी न हो, इसे प्रवर्तन अधिकारी सुनिश्चित करें। इस संबंध में किसी भी शिकायत के निवारण के लिए जिला शिकायत समितियाँ भी गठित की गई हैं। नागरिक और राजनीतिक दल ‘ईसीआईएनइटी’ पर ‘सी-विजिल’ मॉड्यूल का उपयोग करके आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट कर सकते हैं।

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बीआरओ की परियोजना चेतक ने अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया

खबर है..नई दिल्लीसीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की परियोजना चेतक ने 04 अप्रैल, 2026 को राजस्थान के बीकानेर में अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर पश्चिमी क्षेत्र के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चार दशकों से ज्यादा की समर्पित सेवा को याद किया गया। 1980 में इसी दिन शुरू हुई इस परियोजना ने राजस्थान, पंजाब और गुजरात के उत्तरी हिस्सों में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और रखरखाव में अहम भूमिका निभाई है। इस तरह इसने सीमावर्ती इलाकों को जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास में भी योगदान दिया है।अपने आदर्श वाक्य ‘चेतक का प्रयास, देश का विकास’ के साथ, परियोजना चेतक भौगोलिक क्षेत्र के लिहाज से बीआरओ की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है। इसके तहत 4,000 किलोमीटर से ज्यादा का सड़क नेटवर्क और 214 किलोमीटर की ‘खाई-सह-बांध’ (डिच कम बंड) शामिल है। यह अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर जाने वाली मुख्य फीडर सड़कों का रखरखाव करके रक्षा बलों की सहायता करता है। इन सड़कों को ‘राष्ट्रीय राजमार्ग दो-लेन’ मानकों के अनुसार अपग्रेड करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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गरीब व मध्यम वर्ग को अच्छी और बेहतर अनुभव वाली सवारी देने की हर संभव कोशिश : रेलमंत्री

रेल दुर्घटनाओं में आई ऐतिहासिक कमी तथा रिकॉर्ड माल ढुलाई व विशेष ट्रेनों को चलाने के लिए रेल परिवार को दी बधाई खबर है..नई दिल्लीरेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग को एक अच्छी सवारी तथा बेहतर अनुभव देना रेलवे की हर सम्भव कोशिश है। इस उद्देश्य के लिए हम सभी मिल कर काम करें। वैष्णव ने आज 3 अप्रैल को देश भर के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक में ये आह्वान किया। ये बैठक रेल भवन, नई दिल्ली से की गई।रेल मंत्री ने रेल परिवार को पिछले वर्ष में अच्छा काम करने के लिए बधाई देते हुए, बैठक की शुरुआत की। साथ ही नए उत्साह के साथ, इस वर्ष काम करने के लिए अपनी नई प्राथमिकताएँ तय करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि पिछले साल रेल दुर्घटनाओं में आई एतिहासिक कमी और रिकॉर्ड माल ढुलाई ने देश भर में रेलवे की छवि सुधारने का काम किया है। बड़ी संख्या में विशेष ट्रेन चलाकर त्यौहारों के दौरान रेल यात्रा की बढ़ी हुई माँग को भी बड़ी ही प्रभावी तरीके से अधिकारियों ने पूरा किया है।रेल मंत्री ने जोर देकर कहा कि रेलवे स्टेशन देश के लोगों के सामने हमारा चेहरा है। वो साफ़ सुथरे होने चाहिए। इस दिशा में देश भर के अधिकारियों को जी तोड़ मेहनत करनी चाहिए। अधिकारियों को प्रेरित करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में पिछले एक दशक में आधुनिकीकरण के लिए एक रिकार्ड आवंटन हुआ है। रेल मंत्री ने कहा कि लोगों की आजीविका से जुड़े इस संवेदनशील मामले को एक मानवीय दृष्टिकोण से हल किया जाना आवश्यक है। देश के कई शहरी इलाकों में ये एक बड़ी समस्या है, जिसका समयबद्ध तरीके से निदान जरूरी है। अपनी पिछली बैठक में देश भर में भूमिगत रेल पुलियाएँ बनाने के निर्णय पर भी आज की बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। ये तय किया गया कि रेलवे पटरियों को पार करने के लिए अब जहाँ तक हो सके भूमिगत पुलियाएँ ही बनाई जाएँ। धीरे-धीरे हम रेलवे फुटओवर पुलों को कम बनाएँ, बैठक में चर्चा के दौरान ये महसूस किया गया। रेल मंत्री ने कहा, भले ही रेलवे स्टेशन हो या फिर स्टेशन परिसर के बाहर की पटरियाँ, दोनों में ही पहली कोशिश भूमिगत सुविधाजनक पुलिया बनाने की होनी चाहिए।

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चंचल कुमार ने सूचना एवं प्रसारण सचिव का कार्यभार संभाला

खबर है..नई दिल्लीभारतीय प्रशासनिक सेवा के 1992 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी चंचल कुमार ने 1 अप्रैल 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव का कार्यभार संभाल लिया। चंचल कुमार के कार्यभार ग्रहण करने के अवसर पर निवर्तमान सचिव श्री संजय जाजू और मंत्रालय तथा विभिन्न मीडिया इकाइयों के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। संजय जाजू को अब पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव का कार्यभार सौंपा गया है।इससे पहले कुमार पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय में सचिव रहे हैं और भारत सरकार में कई वरिष्ठ पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में भी कार्य किया है, जहां रणनीतिक राजमार्गों और ढांचागत परियोजनाओं में उनका विशिष्‍ट योगदान रहा है।बिहार सरकार में कई जिलों में जिला मजिस्ट्रेट रहने के अलावा वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे। चंचल कुमार ने आईआईटी कानपुर से बी.टेक और एम.टेक की डिग्री और पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है, जो उनके प्रशासनिक करियर में सुदृढ़ अकादमिक और नीतिगत पृष्ठभूमि प्रदान करती है।

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असम, केरल और पुद्दुचेरी विस चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ समीक्षा बैठक

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सहयोगी निर्वाचन आयुक्तों के साथ समीक्षा बैठक की 282 केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग माध्यम से ब्रीफिंग में भाग लिया खबर है..नई दिल्लीमुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ 9 अप्रैल, 2026 को विधानसभा चुनाव कराए जाने वाले राज्‍यों – असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुद्दुचेरी में तैनात केंद्रीय पर्यवेक्षकों (सामान्य, पुलिस, व्यय) के साथ आज समीक्षा बैठक की।असम, केरल और पुद्दुचेरी के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों सहित कुल 282 केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग माध्यम से ब्रीफिंग में भाग लिया ।आयोग ने पर्यवेक्षकों को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तथा किसी भी प्रकार की धमकी, हिंसा और प्रलोभन से मुक्त उत्‍साहपूर्ण माहौल में हो।आयोग ने आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन और इसके उल्लंघन की किसी भी शिकायत के मामले में त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया। पर्यवेक्षकों से कहा गया कि वे अपने संपर्क नंबर–लोगों/राजनीतिक दलों/उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों से शिकायतें सुनने के स्थान और समय के लिए सार्वजनिक रूप से प्रचारित करें।उन्हें यह भी निर्देश दिया गया कि वे इस बात की निगरानी करें कि पीठासीन अधिकारियों का प्रशिक्षण भलीभांति हुआ है या नहीं, जिसमें ईसीआईएनईटी के मतदाता मतदान मॉड्यूल पर प्रत्येक 2 घंटे और मतदान समाप्‍त होने के समय मतदान और अन्य डेटा समय पर भरना, अमिट स्याही का उचित उपयोग, फॉर्म 17-सी भरना और मतदान समाप्‍त होने के समय उपस्थित मतदान एजेंटों के साथ इसे साझा करना, अभ्‍यास के लिए इस्‍तेमाल मतदान डेटा हटाने आदि पर विशेष जोर हो।पर्यवेक्षकों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे सभी मतदान केंद्रों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करें, जिनमें मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा और मतदाताओं के कतारों में बैठने के लिए बेंच शामिल हो। वेबकास्टिंग, मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम की व्यवस्थाओं की ठीक से जांच की जानी चाहिए और वहां निगरानी में तैनात सभी कर्मचारियों की उपस्थिति में एक परीक्षण अभ्‍यास चलाया जाए, जो त्रुटियों की पहचान करने और यदि कोई त्रुटि हो तो उसे चिह्नित करने में अच्छी तरह प्रशिक्षित हों।

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सहकार टैक्सी और दिल्ली पुलिस के बीच समझौते से मिलेगा परिचालन का फ्रेमवर्क

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने दी राज्यसभा में जानकारी खबर है..नई दिल्लीदिल्ली के 21 स्थानों पर स्थित 34 प्री-पेड टैक्सी बूथों के प्रबंधन और डिजिटल एकीकरण के लिए एक सहयोगात्मक फ्रेमवर्क स्थापित करने के लिए 4 फरवरी 2026 को सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) और दिल्ली यातायात पुलिस के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे।यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। समझौता ज्ञापन (एमओयू) एक स्पष्ट परिचालन फ्रेमवर्क प्रदान करता है, जिसमें: दिल्ली यातायात पुलिस प्री-पेड बूथों के प्रबंधन और संचालन, बूथ कर्मचारियों की भर्ती, चालक सत्यापन और नियंत्रण कक्ष तंत्र की स्थापना सहित यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है।एसटीसीएल डिजिटल एकीकरण, वित्तीय प्रबंधन, कर्मचारियों के वेतन का भुगतान सहित , बूथों के रखरखाव, और ब्रांडिंग/विपणन कार्यकलापों के लिए उत्तरदायी है।इस समझौते का उद्देश्य डिजिटल सक्षमता के माध्यम से मौजूदा प्रीपेड टैक्सी प्रणाली का आधुनिकीकरण करते हुए सुरक्षा, पारदर्शिता, यात्रियों की सुगमता और चालक की आय में वृद्धि करना है । भारत टैक्सी ने इन बूथों पर मौजूदा पात्र जनशक्ति को प्रशिक्षित करने और उन्हें नियोजित करने के साथ-साथ अतिरिक्त कर्मियों को काम पर रखा है।सहकारी फ्रेमवर्क के भीतर भर्ती प्रचालनात्मक आवश्यकताओं और सेवाओं के चरणबद्ध विस्तार के अनुसार की जाती है। सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) अपनी अनुमोदित संगठनात्मक संरचना और व्यावसायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, समय-समय पर नियोजित कर्मियों की संख्या का निर्धारण करता है। दिनांक 23 मार्च, 2026 की स्थिति के अनुसार इस प्लेटफॉर्म पर सहायता और परिचालन संबंधी भूमिकाओं में लगभग 130 कर्मियों को नियोजित किया गया है।

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भारतीय नौसेना को मिली समुद्री सहयोग को सुदृढ़करने में मददजहाज त्रिकंद ने मोजाम्बिक के मापुटो बंदरगाह पर किया अपना प्रवास पूरा

खबर है..नई दिल्लीभारतीय नौसेना में अग्रिम पंक्ति के निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंद ने 29 मार्च, 2026 को मोजाम्बिक के मापुटो में अपना बंदरगाह प्रवास पूरा किया।बंदरगाह पर ठहरने के दौरान, संयुक्त प्रशिक्षण और व्यावसायिक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिससे भारतीय नौसेना और मोज़ाम्बिक नौसेना के बीच अंतरसंचालनीयता और समुद्री सहयोग को सुदृढ़करने में मदद मिली।भारत से भेजी गई राहत सामग्री मोज़ाम्बिक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. उसेन हिलारियो इस्से, मोज़ाम्बिक में भारत के उच्चायुक्त रॉबर्ट शेटकिंटोंग और अन्य वरिष्ठ सरकारी तथा सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति में सौंपी गई। मोज़ाम्बिक नौसेना अस्पताल में एक चिकित्सा शिविर का भी आयोजन किया गया।कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने मोजाम्बिक में भारत के उच्चायुक्त से मुलाकात की।प्रस्थान के समय, जहाज ने नियोजित परिचालन तैनाती के लिए आगे बढ़ने से पहले, जहाज पर मौजूद मोजाम्बिक नौसेना के कर्मियों के साथ संयुक्त ईईजेड निगरानी और प्रशिक्षण गतिविधियों को अंजाम दिया।ज्मापुटो बंदरगाह पर हुई यह यात्रा भारत के महासागर (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) के दृष्टिकोण को दर्शाती है और हिंद महासागर क्षेत्र में पसंदीदा सुरक्षा भागीदार और प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता बने रहने की भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

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