भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार आईआरसीटीसी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त

भ्रष्टाचार एवं अवैध रिश्वतखोरी के विरुद्ध आईआरसीटीसी की जीरो टॉलरेंस नीति
आईआरसीटीसी की यह कार्रवाई कर्मचारियों के लिए स्पष्ट संदेश, सेवा में ईमानदारी जरूरी

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नई दिल्ली
भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने भ्रष्टाचार और अवैध रिश्वतखोरी के विरुद्ध अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) नीति को दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि संगठन में किसी भी प्रकार के भ्रष्ट आचरण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हाल ही में एक मामले में निगम के एक कर्मचारी को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया था। मामले के तथ्यों पर विधिवत विचार करने तथा निगम के लागू नियमों एवं विनियमों के अनुरूप कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारी को आईआरसीटीसी की सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संदेश है कि आईआरसीटीसी भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी तथा किसी भी प्रकार के अनैतिक आचरण के प्रति पूर्णतः शून्य सहनशीलता की नीति का पालन करता है।
निगम के प्रत्येक कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन पूर्ण ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही तथा उच्चतम पेशेवर मानकों के अनुरूप करे। जनता का विश्वास संगठन की सबसे बड़ी पूंजी है और प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से किसी भी प्रकार की अवैध रिश्वत या अनुचित लाभ स्वीकार करना गंभीर कदाचार है, जो देश के लागू कानूनों के तहत दंडनीय अपराध भी है।
आईआरसीटीसी समय-समय पर अपने कर्मचारियों को निर्देशित करता है कि वे सभी कार्य केवल लागू कानूनों, निर्धारित प्रक्रियाओं तथा उच्चतम नैतिक मूल्यों के अनुरूप करें। यदि कोई कर्मचारी भ्रष्ट आचरण में संलिप्त पाया जाता है या भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आचरण नियमों अथवा अन्य लागू प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध सक्षम जांच एजेंसियों द्वारा आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ निगम द्वारा भी कठोर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध आईआरसीटीसी की यह सख्त कार्रवाई सभी कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सार्वजनिक सेवा के दौरान पूर्ण ईमानदारी, निष्पक्षता और नैतिक आचरण बनाए रखना प्रत्येक कर्मचारी का सर्वोच्च दायित्व है।

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