राष्ट्रपति एकता नगर में करेंगी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान

खबर है..नई दिल्लीराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। इस समारोह में देश भर के फिल्म निर्माता, अभिनेता, तकनीशियन और अन्य कलाकार एक साथ उपस्थित होंगे। इस अवसर वर्ष 2024 में भारतीय सिनेमा में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए यह पुरस्‍कार प्रदान किए जाएंगे।वर्ष 1954 में स्थापित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए देश के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान हैं। सात दशकों से अधिक समय से, ये पुरस्कार फीचर फिल्मों, गैर-फीचर फिल्मों और सिनेमा पर लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट रचनात्मक और तकनीकी उपलब्धियों को मान्यता देते आ रहे हैं, साथ ही भारतीय फिल्म निर्माण की समृद्ध भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता को भी दर्शाते हैं।एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल के अंतर्गत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को राष्ट्रीय राजधानी से बाहर देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस वर्ष एकता नगर में आयोजित होने वाला यह समारोह देश भर की सिनेमाई प्रतिभाओं को एक साथ लाएगा और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मूर्त रूप देगा।72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विभिन्न भाषाओं, विधाओं और सिनेमा के विभिन्‍न रूपों में व्‍यापक विविधता का उत्‍सव मनाते हैं। ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार दिया जाएगा। ‘भंगार’ को सर्वश्रेष्ठ नॉन-फीचर फिल्म और ‘राम-नामी’ को जूरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र चुना गया है। ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए ममूटी और ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन को सर्वश्रेष्ठ मुख्य अभिनेता का पुरस्कार दिया जाएगा, जबकि यामी गौतम को ‘आर्टिकल 370’ के लिए सर्वश्रेष्ठ मुख्य अभिनेत्री का पुरस्कार मिलेगा। रणदीप हुड्डा को ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का पुरस्कार मिलेगा।ये पुरस्कार मराठी, संथाली, तमिल, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, तुलु और गढ़वाली सहित विभिन्न भाषाओं और विधाओं की उत्कृष्ट फिल्मों को भी सम्मानित करते हैं। ‘कल्कि 2898 ईस्वी’, ‘अमरन’, ‘पुष्पा: द रूल पार्ट-02’, ‘भूल भुलैया 3’ और ‘स्त्री 2’ सहित कई फिल्मों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार मिलेंगे। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के गैर-फीचर फिल्म वर्ग में पहली बार किसी संथाली फिल्म को सम्मानित किया जाएगा।सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन श्रेणी में संजीव श्रीवास्तव को सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक का पुरस्कार डॉ. प्रदीप केंचनुरु द्वारा लिखित और मिरर बुक्‍स द्वारा प्रकाशित ‘नानिरुवुदे निमगागी, नादिरुवुदे ननगागी: कन्नड सिनेमाद तात्विक मत्तु राजकीय’ (आई स्टैंड फॉर यू, द स्टेट स्टैंड्स फॉर अस: पॉलिटिकल एंड फिलॉसॉफिकल डाइमेंशन्स ऑफ कन्नड़ सिनेमा) को दिया जाएगा।

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मोदी 8 सितंबर को करेंगे पश्चिमी समर्पित माल गलियारे के खंड राष्ट्र को समर्पित

खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 8 सितंबर 2026 को पश्चिमी समर्पित माल गलियारे (Western Dedicated Freight Corridor–WDFC) के तीन महत्वपूर्ण खंड राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसके साथ भारत में समर्पित माल ढुलाई अवसंरचना के विकास के एक महत्वपूर्ण चरण का समापन होगा।केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पूर्वी और पश्चिमी समर्पित माल गलियारे देश के परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की महत्वपूर्ण रीढ़ हैं। इन परियोजनाओं का पूरा होना देश में उच्च क्षमता वाले समर्पित माल परिवहन नेटवर्क के निर्माण की दिशा में वर्षों से किए जा रहे प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रमुख बिंदु : पश्चिमी समर्पित माल गलियारे के तीन खंड : सानंद (उत्तर)–मकरपुरा, न्यू उमरगाम–न्यू सफाले न्यू सफाले–जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (JNPT) है। इन तीनों खंडों की कुल लंबाई 326 रूट किलोमीटर है और इनके निर्माण पर ₹20,700 करोड़ से अधिक की लागत आई है।इन खंडों के पूरा होने के साथ JNPT से दादरी तक पूरा पश्चिमी समर्पित माल गलियारा तैयार हो गया है।वहीं, पूर्वी दिशा में लुधियाना से सोननगर तक पूर्वी समर्पित माल गलियारा भी पूरा हो चुका है।रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि 2014 से पहले इस परियोजना पर कोई भौतिक कार्य पूरा नहीं हुआ था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में लंबे समय से लंबित चुनौतियों का समाधान करते हुए विभिन्न खंडों से जुड़े मुद्दों को दूर किया गया और परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री वडोदरा –रतलाम तीसरी और चौथी रेलवे लाइन की आधारशिला भी रखेंगे।माल परिवहन को मिलेगी नई गति : समर्पित माल गलियारों के पूरा होने से भारत के माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। माल ढुलाई के लिए अलग एवं उच्च क्षमता वाली रेल अवसंरचना उपलब्ध होने से रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी, परिवहन अधिक कुशल होगा और देशभर में वस्तुओं की तेज एवं सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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2029 तक ‘नशामुक्त भारत’ का संकल्प: अमित शाह

खबर है..नई दिल्लीकेन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने 2029 तक ‘नशामुक्त भारत’ बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि जैसे नक्सलवाद को समाप्त करने में सफलता मिली, उसी दृढ़ता से ड्रग्स की समस्या भी खत्म की जाएगी।गोवा की राजधानी पणजी में नारकोटिक्स नियंत्रण पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने बताया कि जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक का तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया गया है। इसकी रणनीति चार स्तंभों—इंटेलिजेंस एवं ऑपरेशन आधारित एन्फोर्समेंट, प्रीकर्सर व सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, डिमांड एवं हार्म रिडक्शन तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय—पर आधारित है।उन्होंने कहा कि 2014-2026 के दौरान 1.19 करोड़ किलोग्राम से अधिक ड्रग्स जब्त किए गए, जिनका मूल्य लगभग ₹1.89 लाख करोड़ है। इसी अवधि में 48.68 लाख किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए।‘नशामुक्त भारत’ अभियान के तहत 25 करोड़ नागरिकों को शपथ दिलाई गई और 5.70 लाख लोगों को उपचार व पुनर्वास के माध्यम से नशामुक्त किया गया। नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 1,751 की जाएगी। शाह ने कहा कि सरकार ड्रग तस्करी के नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों पर कार्रवाई करते हुए 2029 तक लक्ष्य हासिल करेगी।

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एनसीपीसीआर ने विशेष अभियान में 3800 से ज़्यादा बच्चों को बाल मज़दूरी से मुक्त कराया

खबर है..नई दिल्लीमहिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत एक वैधानिक संस्था, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने 12 जून 2026 को एक विशेष “अखिल भारतीय बचाव और पुनर्वास” अभियान शुरू किया, जो 31 अगस्त 2026 तक चला। एनसीपीसीआर ने बाल मज़दूरी में लगे बच्चों और तस्करी व शोषण के शिकार होने वाले बच्चों की पहचान, बचाव और पुनर्वास के काम को तेज़ करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, जिलाधिकारियों, श्रम विभागों, पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम किया।एनसीपीसीआर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर बाल मजदूरी और तस्करी वाले स्थानों पर गहन और लक्षित बचाव अभियान चलाने का अनुरोध किया। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से बचाव अभियान, बचाए गए बच्चों, दर्ज एफआईआर, पुनर्वास, पुनर्स्थापना, मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने, मुआवज़े और अन्य फ़ॉलो-अप उपायों आदि के बारे में नियमित डेटा उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया।कार्यान्वयन की निगरानी करने और क्षेत्रीय स्तर की समस्याओं का समाधान करने के लिए, एनसीपीसीआर ने जिला प्रशासनों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य बचाव अभियानों की समीक्षा करना, परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करना, कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) का समय पर जमा होना सुनिश्चित करना तथा संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना था।एनसीपीसीआर ने सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों के जरिए जागरूकता और जनसंपर्क अभियान भी चलाया, जिसके तहत इस विशेष अभियान, बाल श्रम की रिपोर्टिंग करने तथा बचाव के बाद बच्चों के पुनर्वास एवं उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के महत्व के बारे में जानकारी प्रसारित की गई।उपरोक्त अभियान की निरंतर और सक्रिय निगरानी से, एनसीपीसीआर ने राज्य अधिकारियों के सहयोग से 3,800 से अधिक बच्चों को सफलतापूर्वक मुक्त कराया। इसके अलावा, अभियान के दौरान 575 से अधिक प्राथमिकियां (एफआईआर) दर्ज की गईं।

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घटिया सप्लाई और लापरवाही पर अब परमानेंट ब्लैकलिस्ट होंगे सप्लायर : वैष्णव

खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को रेल भवन, नई दिल्ली में रेलवे सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, बोर्ड के सदस्य, सभी क्षेत्रीय रेलवे के महाप्रबंधक, महानिदेशक और मंडल रेल प्रबंधकों ने हिस्सा लिया।बैठक के दौरान रेल मंत्री ने सुरक्षा, तकनीक और रखरखाव से जुड़ी कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए।सिग्नलिंग और OHE सिस्टम की होगी विशेष निगरानी : रेल मंत्री ने सिग्नलिंग से संबंधित तकनीकी खामियों को तुरंत दूर करने को कहा। ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) को लेकर निर्देश दिया कि जिन पुर्जों ने अपनी निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर ली है, वहां समय पर उनका रखरखाव और प्रतिस्थापन सुनिश्चित किया जाए।कोचों में अग्नि सुरक्षा पर जोर : उन्होंने कार्यशालाओं में कोचों के रखरखाव, विशेषकर विद्युत परिपथों और अग्नि सुरक्षा से जुड़ी वायरिंग की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया। साथ ही वैगनों और कोचों के कपलर और पहियों के मेंटेनेंस पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।ट्रैक मेंटेनेंस को लेकर निर्देश : ट्रैक के रखरखाव के संबंध में पॉइंट मशीनों, टर्नआउट और फास्टनर के उचित रखरखाव के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि जहां भी फास्टनर गायब हैं, उन्हें तुरंत लगवाया जाए।घटिया आपूर्ति पर जीरो टॉलरेंस : बैठक में सबसे सख्त रुख घटिया गुणवत्ता वाली आपूर्ति को लेकर रहा। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि सिग्नलिंग एवं दूरसंचार (एस एंड टी), OHE, ट्रैक, कोच या वैगन से संबंधित सामग्रियों की गुणवत्ता में कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित आपूर्तिकर्ता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में जानबूझकर की गई लापरवाही पाई गई तो संबंधित फर्म को स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।त्योहारी भीड़ को लेकर तैयारी के निर्देश : रेल मंत्री ने सभी अधिकारियों को जिला और राज्य प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन स्थानों पर त्योहारों या मेलों के कारण यात्रियों की भीड़ अचानक बढ़ने की संभावना है, वहां पहले से ही सभी आवश्यक सुविधाएं और व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

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संजना आर्य ने संभाला क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, गाज़ियाबाद का कार्यभार

नागरिक-केंद्रित एवं सुगम पासपोर्ट सेवाएँ उपलब्ध कराना प्राथमिकता खबर है..गाजियाबादक्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, गाज़ियाबाद में बुधवार एक सितम्बर 2026 को सुश्री संजना आर्य ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।संजना आर्य 2018 बैच की भारतीय विदेश सेवा (IFS) की प्रतिष्ठित अधिकारी हैं। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, गाज़ियाबाद के रूप में कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व वे विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली, भारतीय दूतावास, सियोल एवं भारतीय उच्चायोग, कोलंबो में अपनी सेवाएँ प्रदान कर चुकी हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया है।कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात संजना आर्य ने कहा कि विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नागरिकों को पासपोर्ट संबंधी सेवाएँ सरल, सुगम, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट सेवा प्रणाली को और अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने तथा आवेदकों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

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भारत-सेशेल्स संबंध सदियों पुराने सभ्यतागत जुड़ाव पर आधारित: ओम बिरला

प्रधानमंत्री मोदी के सेशेल्स संसद में संबोधन से द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई ऊर्जा खबर है..नई दिल्लीलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत और सेशेल्स के बीच संबंध केवल कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सदियों पुराने सभ्यतागत जुड़ाव, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और दोनों देशों के लोगों के बीच आत्मीय संबंधों पर आधारित हैं।संसद भवन परिसर में सेशेल्स की नेशनल असेंबली की पहली महिला स्पीकर अज़ारेल योलांडा अर्नेस्टा के नेतृत्व में आए संसदीय शिष्टमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक में बिरला ने उनके ऐतिहासिक निर्वाचन पर बधाई दी। उन्होंने सेशेल्स में भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं, विशेषकर योग के प्रति बढ़ती रुचि की सराहना की और भारतीय प्रशिक्षकों के माध्यम से योग को और लोकप्रिय बनाने में सहयोग की पेशकश की।बिरला ने कहा कि भारत और सेशेल्स इस वर्ष दोनों देशों की स्वतंत्रता और राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सेशेल्स यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का सेशेल्स की नेशनल असेंबली के विशेष सत्र को संबोधित करना ऐतिहासिक अवसर है। उनके संबोधन ने दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को नई ऊर्जा और गति प्रदान की है।लोकसभा अध्यक्ष ने दोनों संसदों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए सेशेल्स के सांसदों और अधिकारियों को भारत की संसद का दौरा करने का निमंत्रण दिया। उन्होंने संसदीय लोकतंत्र अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) के माध्यम से विधायी प्रारूपण, संसदीय प्रक्रियाओं और क्षमता निर्माण के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की पेशकश भी की।उन्होंने कहा कि भारत की संसद पेपरलेस संसद की दिशा में आगे बढ़ रही है और संसदीय कार्यवाही का 22 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किया जा रहा है। स्वास्थ्य, डिजिटल परिवर्तन, बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत-सेशेल्स सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।बिरला ने संस्कृति, शिक्षा और पर्यटन के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और मजबूत करने तथा ग्लोबल साउथ की आवाज को सशक्त बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने सेशेल्स को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का विश्वसनीय और महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए ‘विजन महासागर’ के संदर्भ में द्विपक्षीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।इस अवसर पर सेशेल्स की नेशनल असेंबली की स्पीकर अज़ारेल अर्नेस्टा ने भारत के आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा, “भारत मेरे दिल के करीब है।” उन्होंने भारत को “लोकतंत्र की जननी” बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सेशेल्स के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने में गहराई से रची-बसी है। उन्होंने संसद के डिजिटलीकरण और तकनीक के इस्तेमाल में भारत की प्रगति की भी सराहना की। बैठक में सांसद डॉ. डी. पुरंदेश्वरी, श्रीमती अपराजिता सारंगी और श्रीमती हिमाद्रि सिंह भी उपस्थित रहीं।

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अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने ‘आयुर्वार्ता’ डिजिटल संवाद श्रृंखला की शुरुआत की

आयुर्वेद दिवस से पहले शुरू हुई पहल, पहली कड़ी में 23 सितंबर की निश्चित तिथि पर विशेष विमर्श खबर है..नई दिल्लीअखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली ने आयुर्वेद के प्रामाणिक ज्ञान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में इसकी प्रासंगिकता को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘आयुर्वार्ता’ नामक विशेष डिजिटल संवाद श्रृंखला की शुरुआत की है। AIIA, आयुष मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है।आगामी आयुर्वेद दिवस, 23 सितंबर से पहले शुरू की गई इस श्रृंखला में आयुर्वेद, वैज्ञानिक अनुसंधान, शिक्षा, चिकित्सा पद्धति, समकालीन स्वास्थ्य चुनौतियों और वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुर्वेद की बढ़ती भूमिका जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के साथ संवाद प्रस्तुत किए जाएंगे।‘आखिर आयुर्वेद दिवस 23 सितंबर को ही क्यों?’ :‘आयुर्वार्ता’ की पहली कड़ी में AIIA के निदेशक प्रोफेसर (वैद्य) पी. के. प्रजापति और डीन, पीएच.डी., प्रोफेसर डॉ. महेश व्यास के बीच विशेष संवाद हुआ। इसका केंद्रीय विषय था—“आखिर आयुर्वेद दिवस 23 सितंबर को ही क्यों?” संवाद में आयुर्वेद दिवस के इतिहास, पूर्व में धन्वंतरि जयंती के अवसर पर इसके आयोजन तथा भारत सरकार द्वारा आयुर्वेद दिवस के लिए निश्चित तिथि निर्धारित किए जाने के निर्णय पर विस्तार से चर्चा की गई।प्रो. पी. के. प्रजापति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद को एक महत्वपूर्ण ज्ञान एवं स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में सुदृढ़ करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में भी आयुर्वेद की प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद दिवस के लिए निश्चित तिथि निर्धारित होने से इसके वार्षिक आयोजन में निरंतरता आएगी और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद की एक मजबूत पहचान विकसित होगी।संतुलन और सामंजस्य से जुड़ी है 23 सितंबर की तिथि : प्रो. डॉ. महेश व्यास ने 23 सितंबर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह तिथि शरद विषुव (Autumnal Equinox) के आसपास आती है, जब दिन और रात की अवधि लगभग समान होती है। उन्होंने कहा कि संतुलन और सामंजस्य आयुर्वेद में स्वास्थ्य एवं कल्याण की अवधारणा के प्रमुख आधार हैं। इस दृष्टि से 23 सितंबर की तिथि को आयुर्वेद के संतुलन, सामंजस्य और समत्व पर आधारित दृष्टिकोण से भी जोड़ा जा सकता है।विशेषज्ञों के साथ होंगे विविध विषयों पर संवाद : AIIA के अनुसार ‘आयुर्वार्ता’ को आयुर्वेद के विभिन्न आयामों पर निरंतर और सार्थक संवाद के लिए एक डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया गया है। आगामी कड़ियों में देश-विदेश के आयुर्वेद विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नीति विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।श्रृंखला में आयुर्वेद का वैज्ञानिक आधार एवं आधुनिक अनुसंधान, आयुर्वेद शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, नवाचार एवं तकनीक, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ समन्वय, औषधीय पौधे एवं प्राकृतिक संसाधन, स्वस्थ जीवनशैली, निवारक स्वास्थ्य, वैश्विक स्वास्थ्य और प्रमाण-आधारित चिकित्सा जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

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