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नई दिल्ली
भारत के हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह 3 अगस्त 2026 को आईआईटी दिल्ली में हथकरघा प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence for Handloom Technology – CoE-HT) का उद्घाटन करेंगे।
इस अवसर पर केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, वस्त्र सचिव श्रीमती नीलम शमी राव, विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना तथा वस्त्र मंत्रालय और आईआईटी दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।
11.99 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित केंद्र :
केंद्र सरकार द्वारा 11.99 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित यह उत्कृष्टता केंद्र भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा को अत्याधुनिक अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीक और नवाचार से जोड़ने का कार्य करेगा। इसका उद्देश्य हथकरघा क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता, स्थिरता और वैश्विक पहुंच को मजबूत करना है।
अगले पांच वर्षों की प्रमुख योजनाएं :
यह केंद्र अगले पांच वर्षों में—
राष्ट्रीय डिजिटल हैंडलूम नॉलेज रिपॉजिटरी विकसित करेगा।
एआई आधारित स्मार्ट उपकरण तैयार करेगा।
आधुनिक करघा तकनीकों का विकास करेगा।
अनुसंधान एवं पेटेंट को बढ़ावा देगा।
स्टार्टअप और उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगा।
देशभर के बुनकरों, शिक्षकों और पेशेवरों को प्रशिक्षण देगा।
35 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ:
भारत का हथकरघा क्षेत्र 35 लाख से अधिक बुनकरों एवं संबद्ध श्रमिकों को रोजगार देता है, जिनमें लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह केंद्र उत्पादकता, तकनीक अपनाने, उत्पाद प्रमाणीकरण, स्थिरता और बाजार प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पांच नई पहलें भी होंगी लॉन्च :
उद्घाटन समारोह के दौरान हथकरघा क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए पांच महत्वपूर्ण पहलें शुरू की जाएंगी—
- हैंडलूम 4.0 – प्रत्येक करघे के लिए डिजिटल साथी, जो उत्पादकता और स्थिरता का आकलन करेगा।
- हैंडलूम ई-विद्या – बुनकरों, छात्रों और हितधारकों के लिए डिजिटल शिक्षण एवं ज्ञान मंच
- हैंडलूमएक्स (HandloomX) – हथकरघा स्टार्टअप और नवाचारों के लिए एक्सेलेरेटर एवं इनक्यूबेशन प्लेटफॉर्म।
- कलागृह हैंडलूम स्टूडियो (GenZ Design Studio) – डिजिटल माध्यम से युवाओं को भारतीय हथकरघा उत्पादों से जोड़ने और उत्पाद प्रमाणीकरण को बढ़ावा देने की पहल।
- थ्रेड्स ऑफ वैलोर – पुनर्चक्रित रक्षा वस्त्रों को प्रीमियम हथकरघा उत्पादों में बदलकर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने वाली पहल।
परंपरा और तकनीक का संगम :
हथकरघा प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र भारत की पारंपरिक बुनाई कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए बुनकरों को सशक्त बनाने, उत्पादकता बढ़ाने, टिकाऊ उत्पादन को प्रोत्साहित करने और भारतीय हथकरघा को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
