देशभर में मॉनसून पर गृह मंत्रालय की कड़ी नजर, प्रभावित राज्यों को हरसंभव सहायता

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नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय देशभर में मॉनसून की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है। भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
गृह मंत्रालय का एकीकृत नियंत्रण कक्ष (ICT) भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग (CWC) और भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) सहित अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर राज्यों और जिला आपदा संचालन केंद्रों को समय पर अलर्ट जारी कर रहा है। यह नियंत्रण कक्ष 24 घंटे राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी भी कर रहा है।
पिछले सप्ताह 52 लोगों को बचाया, 2,206 को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), राज्य पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर राहत एवं बचाव अभियान चला रहा है। पिछले एक सप्ताह में:
52 लोगों का सफलतापूर्वक बचाव किया गया।
2,206 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
संवेदनशील क्षेत्रों में एनडीआरएफ की टीमें पहले से तैनात हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
रक्षा मंत्रालय भी राहत कार्यों में सक्रिय रक्षा मंत्रालय ने भी अपने संसाधनों को त्वरित रूप से तैनात कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान, राहत सामग्री वितरण और लोगों के सुरक्षित परिवहन में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।
असम और अरुणाचल में नुकसान का आकलन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों ने 7 से 10 जुलाई 2026 के बीच अरुणाचल प्रदेश और असम के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन किया। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय आपदा सहायता कोष (NDRF) से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए की गई।
इसके अलावा, 25 जुलाई 2026 से एक अन्य अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लगातार बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान का मूल्यांकन करेगा।
पहले से की गई थी तैयारियों की समीक्षा
गृह मंत्रालय ने 10 मई 2026 को लू और मॉनसून पूर्व बाढ़ की तैयारियों तथा 3 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर में भारी वर्षा, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की थी। चारधाम यात्रा मार्ग की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की भी नियमित समीक्षा की जा रही है।
बारिश से वर्षा की कमी में सुधार
हालांकि कई राज्यों में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन देशभर में हुई वर्षा के कारण पहले अनुमानित 30 प्रतिशत वर्षा की कमी घटकर लगभग 15 प्रतिशत रह गई है, जिससे खरीफ फसलों और जल संसाधनों की स्थिति में सुधार की उम्मीद बढ़ी है।

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