छपरा और मऊ को मिली दिल्ली से सीधी रेल कनेक्टिविटी

दोहरीघाट ट्रेन अब वाराणसी सिटी तक खबर है..नई दिल्लीरेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छपरा जंक्शन से छपरा–दिल्ली एक्सप्रेस, मऊ–दिल्ली (आनंद विहार) एक्सप्रेस तथा दोहरीघाट–औंड़िहार ट्रेन सेवा के वाराणसी सिटी तक विस्तार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।रेल मंत्रालय के अनुसार, इन नई सेवाओं से छपरा, मउ, वाराणसी, लखनऊ और दिल्ली के बीच यात्रियों को किफायती, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक रेल संपर्क मिलेगा।समारोह को संबोधित करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बिहार में रेलवे विकास को रिकॉर्ड बजट आवंटन मिला है और राज्य में तीसरी-चौथी लाइन, रेलवे ओवरब्रिज तथा स्टेशन पुनर्विकास के कार्य तेजी से चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बिहार के 98 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। रेल मंत्री ने भविष्य की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली -लखनऊ -वाराणसी -पटना -सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर भी काम आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी। इस अवसर पर बिहार के मढ़ौरा लोकोमोटिव प्लांट से गिनी गणराज्य को निर्यात होने वाले 51वें मालवाहक रेल इंजन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह बिहार में निर्मित इंजनों के वैश्विक निर्यात की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे बिहार और सारण क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि राज्य में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है और अधिकांश जिले अब रेल नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।नई रेल सेवाओं से पूर्वांचल और बिहार के लाखों यात्रियों को दिल्ली तथा वाराणसी तक बेहतर और सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे क्षेत्रीय विकास और आवागमन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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रेलवे की हरित पहल: अब राख बनेगी विकास की ताकत

खबर है..नई दिल्लीरेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में भारतीय रेलवे ने थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाली उड़न राख (फ्लाई ऐश) की ढुलाई के लिए एक महत्त्वपूर्ण हरित पहल पर चर्चा की। इस पहल का उद्देश्य राख को बिजली संयंत्रों से उद्योगों तक कुशलतापूर्वक पहुंचाना है, जहां इसका उपयोग सड़क निर्माण, ईंट और सीमेंट उत्पादन सहित विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं में किया जाएगा।बैठक में रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और रवनीत सिंह बिट्टू भी मौजूद रहे।हर वर्ष थर्मल पावर प्लांटों से बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश उत्पन्न होती है, जो लंबे समय तक पर्यावरणीय चुनौती बनी रही है। अब भारतीय रेलवे विशेष कंटेनरों और समर्पित रेल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के माध्यम से इस राख को उसके उपयोग स्थल तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रहा है।इस पहल से अपशिष्ट पदार्थ को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकेगा। फ्लाई ऐश का उपयोग सीमेंट, कंक्रीट, ईंट, ब्लॉक और अन्य निर्माण सामग्री बनाने में होता है। इससे निर्माण लागत कम होगी, आवास परियोजनाएं सस्ती होंगी और बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिलेगी।रेलवे की यह पहल चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां अपशिष्ट को धन और विकास के संसाधन में बदलकर पर्यावरण संरक्षण तथा आर्थिक प्रगति दोनों को बढ़ावा दिया जाएगा।

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राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी अब AI की मदद, गड्ढों और खराबी की पहले होगी पहचान

पूर्वानुमानित परिसंपत्ति प्रबंधन मॉडल अपनाने का फैसला खबर है..नई दिल्लीभारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने देश के राष्ट्रीय राजमार्गों को अधिक सुरक्षित, बेहतर और टिकाऊ बनाने के लिए रखरखाव व्यवस्था में बड़ा बदलाव शुरू किया है। अब राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और आधुनिक तकनीकों की मदद से की जाएगी, जिससे सड़कों में खराबी की पहले ही पहचान हो सकेगी।एनएचएआई ने पारंपरिक रखरखाव पद्धति से आगे बढ़ते हुए पूर्वानुमानित परिसंपत्ति प्रबंधन मॉडल अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत सड़क पर गड्ढे, दरारें, खराब क्रैश बैरियर, जलभराव और खराब रोशनी जैसी समस्याओं का समय रहते पता लगाया जाएगा, ताकि मरम्मत कार्य तुरंत कराया जा सके।इसके लिए नेटवर्क सर्वे व्हीकल (NSV), ड्रोन एनालिटिक्स मॉनिटरिंग सिस्टम और AI आधारित डैशकैम तकनीक का उपयोग किया जाएगा। साथ ही विशेष परीक्षणों के जरिए सड़क की मजबूती और संभावित क्षति का आकलन भी पहले से किया जाएगा।एनएचएआई के मुताबिक, सभी आंकड़ों को एक केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली में जोड़ा जाएगा, जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति की लगातार निगरानी संभव होगी और जोखिम वाले हिस्सों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी। इस नई पहल से राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता बेहतर होगी, उनकी उम्र बढ़ेगी और यात्रियों को देशभर में अधिक सुरक्षित, आरामदायक और विश्वस्तरीय यात्रा अनुभव मिल सकेगा।

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सफर होगा सुहाना, एलएचबी रेक से चलेगी दैनिक यात्रियों की दो ट्रेन

खबर है.. लखनऊ। दैनिक यात्रियों के लिए अच्छी खबर यह है कि उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल प्रशासन ने लखनऊ– वाराणसी शटल सुपरफास्ट (24203/24204) एवं वाराणसी – बहराइच इंटरसिटी एक्सप्रेस (14213/14214) का संचालन अब लिंके होफमैन बुश (एलएचबी) रेक से करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव से हजारों मुसाफिरों का सफर पहले से सुविधाजनक, आरामदायक और सुरक्षित होगा। साथ ही दोनों ट्रेनों में यात्रियों की क्षमता भी बढ़ जाएगी।मुसाफिरों को नई सुविधा 25 जून से मिलेगी।मौजूदा वक्त में दोनों ट्रेनों का संचालन इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) रेक से किया जा रहा है। दैनिक यात्रियों के लिए दोनों ट्रेन महत्वपूर्ण हैं। प्रतिदिन इन दोनों ट्रेनों के जरिए हजारों मुसाफिर सफर करते हैं। दैनिक यात्रियों का सफर अब और सुहाना होगा क्योंकि अब पारंपरिक रेक के स्थान पर आधुनिक एलएचबी रेक से दोनों ट्रेनों का संचालन 25 जून से किया जाएगा।उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक समर्थ गुप्ता ने बताया कि एलएचबी रेक आधुनिक तकनीक से निर्मित हैं, जिससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और आरामदायक होती है। इन कोचों में झटके और कंपन कम महसूस होते हैं, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुगम बनती है। इनकी अधिकतम गति क्षमता पारंपरिक कोचों की तुलना में अधिक होती है, जिससे बेहतर परिचालन में सहायता मिलती है। शोर कम होता है और बेहतर सस्पेंशन से झटके ज्यादा महसूस नहीं होते। दुर्घटना की स्थिति में एलएचबी कोच अधिक सुरक्षित माने जाते हैं, क्योंकि इनमें एंटी-क्लाइम्बिंग (एक-दूसरे पर चढ़ने से रोकने वाली) व्यवस्था होती है। एलएचबी कोचों में बेहतर ब्रेकिंग प्रणाली एवं उन्नत कपलिंग व्यवस्था होने से ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनता है।

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गर्मी की छुट्टियों में लखनऊ से करें शक्तिपीठ की यात्रा

— आईआरसीटीसी ने लॉन्च किया नया हवाई टूर पैकेज, शक्तिपीठ यात्रा 6 दिन वी 7 रात की होगी — पर्यटकों को उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का कराया जाएगा भ्रमण, 24 जून से शुरू होगी यात्रा खबर है..लखनऊ। भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) उत्तर क्षेत्र कार्यालय लखनऊ ने गर्मियों की छुट्टियों को लेकर पर्यटकों की सुविधा के लिए शक्तिपीठ यात्रा का हवाई टूर पैकेज लॉन्च किया है। यह यात्रा छह रात और सात दिनों के लिए 24 जून से शुरू होकर 30 जून को समाप्त होगी। इस विशेष टूर पैकेज में सैलानियों को उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा।यह जानकारी आईआरसीटीसी उत्तर क्षेत्र के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अजीत कुमार सिन्हा ने दी। उन्होंने बताया कि गर्मी की छुट्टियों को लेकर शक्तिपीठ यात्रा को लांच किया गया है। यात्रा के दौरान यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था होटलों में की जाएगी। पैकेज में नाश्ता एवं रात्रि भोजन, सभी प्रमुख दर्शनीय स्थलों का भ्रमण, अनुभवी टूर एस्कॉर्ट तथा स्थानीय परिवहन की सुविधा शामिल है। शक्तिपीठ यात्रा के तहत यात्रियों को कटरा,माता वैष्णो देवी मंदिर ,धर्मशाला),मैक्लोडगंज), ज्वालाजी मंदिर),श्री बज्रेश्वरी देवी मंदिर, चामुंडा देवी मंदिर एवं अमृतसर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को माता वैष्णो देवी, ज्वालाजी, श्री बज्रेश्वरी देवी एवं चामुंडा देवी शक्तिपीठों के दर्शन के साथ-साथ अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के दर्शन भी कराए जाएंगे।श्री सिन्हा ने बताया कि शक्तिपीठ यात्रा के लिए एक व्यक्ति के ठहरने पर पैकेज का मूल्य ₹71,600/- प्रति व्यक्ति, दो व्यक्तियों के एक साथ ठहरने पर ₹59,100/- प्रति व्यक्ति तथा तीन व्यक्तियों के एक साथ ठहरने पर ₹57,500/- प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है। माता-पिता के साथ ठहरने पर 5 से 11 वर्ष तक के बच्चों का पैकेज मूल्य ₹50,300/- (बेड सहित) एवं ₹48,400/- (बिना बेड) होगा। वहीं 2 से 4 वर्ष तक के बच्चों के लिए बिना बेड पैकेज मूल्य ₹32,900/- प्रति बच्चा निर्धारित है।इस टूर की बुकिंग “पहले आओ – पहले पाओ” के आधार पर की जाएगी। उक्त यात्रा की बुकिंग पर्यटन भवन, गोमती नगर, लखनऊ स्थित आईआरसीटीसी कार्यालय एवं आईआरसीटीसी पर्यटन वेबसाइट पर भी कराई जा सकती है। अधिक जानकारी एवं बुकिंग मोबाइल नंबरों 9236391909 / 8287930902 पर हो सकती है।

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सातवें बड़े मंगल पर भव्य भंडारे का आयोजन

— हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया भंडारे का प्रसाद खबर है..लखनऊ । सातवें बड़े मंगल के अवसर पर मंगलवार को लक्ष्मी विहार कॉलोनी, केसरीखेड़ा मोड के सामने स्थानीय दुकानदारों ने भव्य भंडारे का आयोजन किया। शाम तक चले इस भव्य भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।लक्ष्मी विहार कॉलोनी मोड़ के सामने बन रहे निर्माणाधीन रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के सामने स्थित दुकानदारों दिनेश सिंह, इंजीनियर मंजेश, चुन्नीलाल पाल, वीरेंद्र कुमार और लक्ष्मी विहार कॉलोनी के निवासियों ने सुबह संकट मोचन बजरंगबली का पूजा अर्चना किया। इसके बाद पवन पुत्र हनुमान को भंडारे का भोग लगाया गया। दोपहर 12:00 बजे से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की शुरुआत की गई, जो शाम तक चली। इस भव्य भंडारे में श्रद्धालुओं को बूंदी, चावल-छोले, फल आदि का वितरण किया गया। भंडारे के आयोजन से जुड़े दिनेश सिंह ने बताया कि कड़ी धूप के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं नजर आई बल्कि शाम तक चले इस भव्य भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

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रेलमंत्री ने व्यस्त रेलवे स्टेशनों के लिए मास्टर प्लान की समीक्षा की

निर्माण कार्यों के दौरान यात्रियों को कोई असुविधा ना हो : अश्विनी वैष्णव पुनर्विकास में अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, ज़्यादा एंट्री पॉइंट, चौड़े फुट ओवर ब्रिज और बेहतर संपर्क की योजना खबर है..नई दिल्लीरेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में बोरीवली, अंबाला और मंगलुरु जैसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए मास्टर प्लान की समीक्षा की। समीक्षा बैठक के दौरान रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू भी मौजूद थे।रेल मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पुनर्विकास का काम यात्रियों को कम से कम असुविधा पहुँचाए और ट्रेनों के संचालन में बिना किसी रुकावट के किया जाए। उन्होंने स्टेशन के रोज़मर्रा के कामकाज को सुचारू रूप से चलाते हुए भविष्य के लिए तैयार रेलवे प्रणाली तैयार करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। इस बैठक का मकसद मौजूदा भीड़-भाड़ की समस्या को हल करना और भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से क्षमता बढ़ाना था। चर्चा में यात्रियों की सुविधा बढ़ाने पर ध्यान दिया गया, जिसके लिए अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, चौड़े फुट ओवर ब्रिज (एफओबी), प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर आवाजाही, स्टेशन में आने-जाने के अतिरिक्त रास्ते, बेहतर सर्कुलेशन एरिया, बेहतर मल्टीमॉडल एकीकरण और यात्रियों की आसान आवाजाही जैसे उपाय शामिल थे।बोरीवली-कांदिवली पुर्नविकास :बोरीवली स्टेशन पर क्षमता बढ़ाने, यात्रियों की आवाजाही को बेहतर करने और भीड़ कम करने के लिए, एक बड़े मास्टर प्लान के तहत कांदिवली स्टेशन को भी साथ-साथ विकसित करने का फ़ैसला किया गया है। कांदिवली स्टेशन, बोरीवली स्टेशन से लगभग 2 किलोमीटर दूर है। रेलवे के पास काफ़ी ज़मीन उपलब्ध होने के कारण, कांदिवली स्टेशन भविष्य में ट्रेनों के संचालन और यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने में मदद करेगा। इससे बोरीवली स्टेशन पर भीड़ कम होगी और ऑपरेशन की क्षमता, यात्रियों की सुविधा और पहुँच बेहतर होगी। बोरीवली और कांदिवली के एकीकृत विकास से पूर्वी-दक्षिणी संपर्क मज़बूत होने, इंटरचेंज की क्षमता बेहतर होने, मेट्रो और सड़क नेटवर्क के साथ बेहतर तालमेल बनने और लंबे समय तक विकास में मदद करने वाली एक आसान मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बनने की उम्मीद है। इस योजना में रेलवे की ज़मीन का सही इस्तेमाल करने के लिए बहु स्तरीय पार्किंग, पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ़ के लिए खास ज़ोन, बेहतर सड़क संपर्क और पारगमन आधारित विकास भी शामिल है। अंबाला का पुनर्विकास :बैठक में अंबाला कैंट स्टेशन की पुर्नविकास योजना की भी समीक्षा की गई। भविष्य में यात्रियों की बढ़ती संख्या और अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं को संभालने के लिए, पुर्नविकास योजना में दो नए पूरे लंबाई के प्लेटफ़ॉर्म और 12 मीटर चौड़े नए फ़ुट ओवर ब्रिज के निर्माण का प्रस्ताव है। इस प्रस्तावित पुर्नविकास का मकसद स्टेशन तक पहुँच को आसान बनाना, यात्रियों के आने-जाने की जगह को बेहतर करना, संपर्क में सुधार, स्टेशन पर आधुनिक सुविधाएँ देना और भविष्य में यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करना है।मंगलुरु का पुनर्विकास :इस समीक्षा में मंगलुरु सेंट्रल स्टेशन की पुर्नविकास योजना पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि बोरीवली, अंबाला और मंगलुरु में पुर्नविकास की कोशिशों से यात्रियों के अनुभव, परिचालन क्षमता और ढ़ांचागत क्षमता में काफ़ी सुधार होगा। अब इन प्रस्तावों पर आगे की विस्तृत जाँच और हितधारकों के साथ बातचीत की जाएगी, जिसके बाद की योजना और उसे लागू करने के अगले चरण पर काम किया जाएगा।

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लखनऊ–नोएडा के बीच सीधी उड़ान सेवा15 जून से

पहली कमर्शियल फ्लाइट लखनऊ और नोएडा के बीच खबर है..नई दिल्लीउत्तर प्रदेश के भीतर हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कमर्शियल फ्लाइट सोमवार 15 जून से शुरू हो रही है। पहली कमर्शियल फ्लाइट लखनऊ और नोएडा के बीच उड़ान भरेंगी। इस नई सेवा से व्यापारियों, कॉर्पोरेट पेशेवरों, उद्यमियों, विद्यार्थियों तथा आम यात्रियों को दोनों शहरों के बीच सुविधाजनक आवागमन का लाभ मिलेगा।इस रूट पर पहली उड़ान 15 जून 2026 को संचालित की जाएगी, जबकि नियमित उड़ान सेवाएं 1 जुलाई 2026 से प्रारंभ होंगी। यह सेवा यात्रियों को एक ही दिन में आने-जाने का विकल्प भी उपलब्ध कराएगी। उड़ान समय-सारिणी इस प्रकार है:

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हिमाचल में ड्रोन से डाक सेवा शुरू, 7 मिनट में पहुंचेगा पार्सल

हिमाचल में ड्रोन से डाक सेवा शुरू, 7 मिनट में पहुंचेगा पार्सल खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम.सिंधिया के नेतृत्व में डाक विभाग ने हिमाचल प्रदेश में ड्रोन आधारित डाक एवं पार्सल सेवा शुरू की है। यह सेवा 12 जून 2026 से मंडी प्रधान डाकघर और रेहरधार शाखा डाकघर के बीच शुरू की गई है।करीब 12 किलोमीटर की दूरी तय करने में पारंपरिक माध्यमों से दो घंटे से अधिक समय लगता था, लेकिन ड्रोन सेवा से अब यह दूरी लगभग 7 मिनट में पूरी हो रही है।डाक विभाग अगले 2–3 महीनों में हिमाचल प्रदेश और असम के लगभग 150 चिन्हित मार्गों पर ड्रोन आधारित डाक सेवा शुरू करने की तैयारी में है। इस पहल से दूर-दराज और पर्वतीय क्षेत्रों में डाक सेवाएं तेज, कुशल और पर्यावरण अनुकूल बनेंगी, साथ ही कनेक्टिविटी और सामाजिक-आर्थिक समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा

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रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे भर्ती बोर्ड की भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की

खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की भर्ती प्रक्रिया की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए भर्ती में अधिक पारदर्शिता, सटीकता और तेज़ी लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब सभी विभागीय परीक्षाएं CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) के माध्यम से आयोजित की जाएंगी तथा रेलवे टैबलेट-आधारित टेस्टिंग सिस्टम का दायरा भी बढ़ाएगा।समीक्षा बैठक में भारतीय रेलवे की तकनीक-आधारित भर्ती प्रणाली और वार्षिक भर्ती कैलेंडर की प्रगति पर चर्चा की गई। रेल मंत्री ने कहा कि वार्षिक भर्ती कैलेंडर के तहत समयबद्ध तरीके से जारी होने वाली भर्तियों को उम्मीदवारों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाते हुए 47,084 पदों के लिए प्रक्रिया पूरी की और 43,781 उम्मीदवारों को नियुक्ति दी। इनमें 18,799 असिस्टेंट लोको पायलट (ALP), 14,298 टेक्नीशियन, 452 सब-इंस्पेक्टर, 4,208 कॉन्स्टेबल, 7,951 जूनियर इंजीनियर (JE)/DMS/CMA तथा 1,376 पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती शामिल है।रेल मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भर्ती प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाया जाए, ताकि अभ्यर्थियों को समयबद्ध और निष्पक्ष अवसर मिल सकें।

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