टोल पर ओवरलोडिंग नियमों में संशोधन चिंताजनक, सड़क सुरक्षा के लिए खतरा : सभरवाल

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नई दिल्ली
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल ने टोल पर ओवरलोडिंग नियमों में संशोधन पर चिंता जताई है और कहा है कि यह संशोधन के लिए सड़क सुरक्षा के लिए खतरा है।
डा.सभरवाल ने भारत सरकार की ओर से National Highways Fee (Amendment) Rules, 2026 के तहत ओवरलोडिंग से संबंधित ढांचे में किए गए संशोधनों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जो 15 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गए हैं।
नए प्रावधानों के अनुसार, निर्धारित ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) से अधिक भार ले जाने वाले वाहनों पर टोल आधारित अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। 10% तक ओवरलोडिंग पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं। 10% से 40% तक ओवरलोडिंग पर 2 गुना टोल। 40% से अधिक ओवरलोडिंग पर 4 गुना टोल।
उन्होंने बताया कि ओवरलोडेड वाहनों की पहचान अब टोल प्लाज़ा पर लगे वज़न मापन सिस्टम के माध्यम से की जाएगी और इसका रिकॉर्ड VAHAN डेटाबेस में दर्ज होगा। भुगतान FASTag/डिजिटल माध्यमों से किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि AIMTC लंबे समय से ओवरलोडिंग का विरोध करता रहा है और इसे देश में सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण मानता है। भारत में हर वर्ष 1.5 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में होती है, जिसमें ओवरलोडिंग एक महत्वपूर्ण कारक है। ओवरलोडिंग से न केवल वाहन की ब्रेकिंग और स्थिरता प्रभावित होती है, बल्कि सड़क एवं पुलों के ढांचे को भी नुकसान पहुंचता है।”
डॉ सभरवाल ने कहा हमारा का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में एक गंभीर कमी है क्योंकि यह दंड प्रणाली केवल टोल प्लाज़ा तक सीमित है, जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत RTO द्वारा लगाए जाने वाले दंड अलग से लागू रहेंगे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अतिरिक्त शुल्क लेकर ओवरलोडेड वाहनों को आगे चलने की अनुमति दी जा रही है, जो कि असुरक्षित संचालन को बढ़ावा देता है और दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ाता है।
इसके अलावा लावा ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों में भ्रांति फैल रही है कि सरकार ने 10 प्रतिशत की छूट दे दी है । जो सरासर गलत है। CMVR 1989 के अनुसार वाणिज्य वाहनों पर भार क्षमता से सिर्फ 5 प्रतिशत अतिरिक्त भार मान्य है । सिर्फ दंड लगाना पर्याप्त नहीं है। ओवरलोडेड वाहनों को तब तक सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि अतिरिक्त भार उतार न दिया जाए। यही एक प्रभावी रोकथाम (deterrence) सुनिश्चित करेगा और सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाएगा।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि इस नीति की समीक्षा कर इसे दंड आधारित नहीं बल्कि रोकथाम आधारित बनाया जाए, ताकि सड़क सुरक्षा को वास्तविक रूप से मजबूत किया जा सके।

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