- परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने किया 33 बाइक का चालान, नौ सीज
- इन्हें बेचने वाले 20 दुकानों के मालिकों को दी गयी चेतावनी
- संयुक्त टीम ने लालबाग से लेकर कैसरबाग तक 30 से अधिक दुकानों की जांच
खबर है..
लखनऊ
हाईकोर्ट के निर्देश पर राजधानी में विशेष अभियान के माध्यम से परिवहन विभाग ने यातायात पुलिस ने मोडिफाइड साइलेंसर, हूटर-सायरन और प्रेशर/मल्टीटोंड हॉर्न के खिलाफ शिकंजा कसा। संयुक्त अभियान में मोडिफाइलड साइलेंसर वाली 33 बाइकों का जहां चालान किया गया, वहीं नौ को सीज करने की कार्रवाई की गई। साथ ही इन्हें बेचने वाले 20 दुकानों के मालिकों को चेतावनी दी गई है।
आरटीओ (प्रवर्तन) प्रभात पांडेय ने बताया कि एआरटीओ (प्रशासन) प्रदीप कुमार सिंह के नेतृत्व में प्रवर्तन और ट्रैफिक पुलिस की टीम ने लालबाग से लेकर कैसरबाग तक 30 से अधिक दुकानों की जांच की। एआरटीओ प्रशासन की जांच के दौरान 20 दुकानों पर मोडिफाइड साइलेंस, प्रेशर हॉर्न और हूटर मिलने पर दुकान मालिकों को इन्हें भविष्य में न बेचे जाने के लिए चेतावनी दी गई। उन्हें मोटर वाहन अधिनियमों के प्रावधानों से अवगत कराते हुए पत्र प्राप्त कराया गया। साथ ही प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने के लिए आरटीओ कार्यालाय में 20 अप्रैल को बुलाई बैठक में आवश्यक रूप से उपस्थित रहने को कहा गया। साथ ही 33 बाइकों का चालान और नौ को सीज किया गया।
इस अभियान में सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) लखनऊ, प्रदीप कुमार, यात्री/मालकर अधिकारी, लखनऊ एसपी देव, आभा त्रिपाठी एवं अनीता वर्मा सहित चौकी इंचार्ज कैसरबाग एवं लालबाग मौजूद रहे।
*हाईकोर्ट के आदेश पर चला अभियान*: उच्च न्यायालय, इलाहाबाद, खंडपीठ लखनऊ में दायर एक जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय ने मोडिफाइड साइलेंसर, हूटर एवं सायरन एवं प्रेशर/मल्टीटोंड हॉर्न के प्रयोग से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर कड़ी आपत्ति जताई। ऐसे वाहनों और मोडिफाइड साइलेंसर, हूटर एवं सायरन एवं प्रेशर/मल्टीटोंड हॉर्न की बिक्री करने वाले दुकानदारों/शोरूम मालिकों और उनको लगाने वाले गैराजों एवं वर्कशॉपों के विरुद्ध पुलिस एवं परिवहन विभाग को कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए। इसी आदेश के अनुपालन में 17 और 18 अप्रैल को अभियान चलाया गया।
*एक वर्ष कारावास या एक लाख अर्थदंड का प्रावधान :* एआरटीओ प्रशासन प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा, 182ए(3) के तहत मोडिफाइड साइलेंसर, हूटर, साइलेंसर एवं मल्टीटोंड हॉर्न की बिक्री करने वाले एवं लगाने वाले गैराजों/वर्कशॉप के प्रोप्राइटर को अधिकतम 01 वर्ष के कारावास अथवा एक लाख रुपये का अर्थदंड आरोपित करने का प्रावधान है। मोडिफाइड साइलेंसर को लगवाने वाले वाहन स्वामी को मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 182A(4) के तहत रु 5000(पांच हजार रुपए) और मोटर वाहन के माध्यम से ध्वनि प्रदूषण फैलाने के अभियोग में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 190(2) के तहत रु 10000 (दस हजार रुपए) अर्थदंड आरोपित करने का प्रावधान है।
