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भुवनेश्वर
कृति कोरापुट कॉफी केवल एक प्रीमियम क्षेत्रीय उत्पाद नहीं, बल्कि जनजातीय उद्यमिता, सतत कृषि और बेहतर संपर्क व्यवस्था का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है। पूर्वी घाट की पहाड़ियों में जनजातीय किसानों द्वारा पर्यावरण-अनुकूल पद्धतियों से उगाई जाने वाली शेड-ग्रोन अरेबिका कॉफी अपने विशिष्ट चॉकलेट और मेवेदार स्वाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है।
यह पहल हजारों जनजातीय किसानों और महिलाओं के लिए आजीविका का मजबूत माध्यम बनी है। खेती, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़कर वे स्थायी आय अर्जित कर रहे हैं, वहीं क्षेत्र की जैव विविधता के संरक्षण में भी योगदान दे रहे हैं।
इसी क्रम में पुरी–कोरापुट एक्सप्रेस का शुभारंभ क्षेत्र के विकास को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है। बेहतर रेल संपर्क से कोरापुट का जुड़ाव राज्य के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों से मजबूत होगा, जिससे स्थानीय उत्पादों, विशेषकर कृति कोरापुट कॉफी, को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और जनजातीय समुदायों के लिए नए आर्थिक अवसर सृजित होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृति कोरापुट कॉफी और पुरी–कोरापुट एक्सप्रेस, दोनों मिलकर समावेशी विकास के उस मॉडल को मजबूत करेंगे, जिसमें आधुनिक बुनियादी ढांचा स्थानीय उद्यमों को सशक्त बनाते हुए ओडिशा के जनजातीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कृति कोरापुट कॉफी और पुरी–कोरापुट एक्सप्रेस: जनजातीय विकास को मिलेगी नई उड़ान
