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नई दिल्ली
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में भारतीय रेलवे ने थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाली उड़न राख (फ्लाई ऐश) की ढुलाई के लिए एक महत्त्वपूर्ण हरित पहल पर चर्चा की। इस पहल का उद्देश्य राख को बिजली संयंत्रों से उद्योगों तक कुशलतापूर्वक पहुंचाना है, जहां इसका उपयोग सड़क निर्माण, ईंट और सीमेंट उत्पादन सहित विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं में किया जाएगा।
बैठक में रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और रवनीत सिंह बिट्टू भी मौजूद रहे।
हर वर्ष थर्मल पावर प्लांटों से बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश उत्पन्न होती है, जो लंबे समय तक पर्यावरणीय चुनौती बनी रही है। अब भारतीय रेलवे विशेष कंटेनरों और समर्पित रेल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के माध्यम से इस राख को उसके उपयोग स्थल तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रहा है।
इस पहल से अपशिष्ट पदार्थ को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकेगा। फ्लाई ऐश का उपयोग सीमेंट, कंक्रीट, ईंट, ब्लॉक और अन्य निर्माण सामग्री बनाने में होता है। इससे निर्माण लागत कम होगी, आवास परियोजनाएं सस्ती होंगी और बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिलेगी।
रेलवे की यह पहल चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां अपशिष्ट को धन और विकास के संसाधन में बदलकर पर्यावरण संरक्षण तथा आर्थिक प्रगति दोनों को बढ़ावा दिया जाएगा।

