रणनीतिक विविधीकरण के पहले पूर्ण वर्ष में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल की
कंपनी की एसेट अंडर मैनेजमेंट बढ़कर रिकॉर्ड 4.85 लाख करोड़ रुपये पहुंची
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नई दिल्ली
रेल मंत्रालय के अंतर्गत नवरत्न सीपीएसई भारतीय रेलवे वित्त निगम (आईआरएफसी) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया। कंपनी का वार्षिक शुद्ध लाभ 7.80 प्रतिशत बढ़ा, साथ ही राजस्व में भी सकारात्मक वृद्धि हुई। विविधीकरण आधारित विस्तार के कारण कंपनी के स्प्रेड और नेट इंटरेस्ट मार्जिन में लगातार सुधार हुआ तथा कंपनी ने अपना शून्य एनपीए का रिकॉर्ड बरकरार रखा।
कंपनी ने संकेत दिया कि मेट्रो, बंदरगाह और अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में उभरते अवसरों तथा मजबूत परियोजना पाइपलाइन के चलते आने वाले वित्त वर्ष में विकास और तेज होने की उम्मीद है। इस अवसर पर कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनोज कुमार दुबे ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 आईआरएफसी के लिए एक निर्णायक वर्ष रहा है। हमने रेलवे इकोसिस्टम के बुनियादी ढांचे को समर्थन देने की अपनी मूल जिम्मेदारी निभाते हुए एक विविधीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया है। हमारी विविधीकरण रणनीति अब बेहतर स्प्रेड, उच्च मार्जिन और शेयरधारकों के लिए अधिक मूल्य के रूप में दिखाई दे रही है। आईआरएफसी ने व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की अपनी क्षमता साबित की है, साथ ही वित्तीय अनुशासन और शून्य एनपीए की परंपरा भी कायम रखी है।
उन्होंने आगे कहा कि 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही और वित्त वर्ष के ऑडिटेड वित्तीय परिणाम आईआरएफसी के बिजनेस मॉडल में एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाते हैं, जिसमें कंपनी पारंपरिक रेलवे फाइनेंसर से एक विविधीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग संस्था के रूप में विकसित हुई है, जबकि रेलवे अभी भी उसके केंद्र में है।
वर्ष 1986 में मुख्य रूप से भारतीय रेल के लिए धन जुटाने हेतु स्थापित आईआरएफसी ने पिछले एक वर्ष में अपने पारंपरिक ऋण मॉडल पर निर्भरता कम होने के बाद अपनी रणनीति में बदलाव किया है। वित्तीय वर्ष 24 से भारतीय रेल द्वारा नए ऋण वितरण नहीं लेने के कारण कंपनी ने बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन, उर्वरक तथा रेलवे से जुड़े बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में विस्तार किया है।
वित्तीय वर्ष 26 के दौरान आईआरएफसी ने 72,949 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी और लगभग 35,067 करोड़ रुपये का वितरण किया, जो उसके वार्षिक लक्ष्य से अधिक रहा। कंपनी ने प्रतिस्पर्धी और द्विपक्षीय वित्तपोषण अवसरों में सक्रिय भागीदारी करते हुए लगभग 56,251 करोड़ रुपये की बोलियां हासिल कीं। प्रमुख सौदों में कंपनी ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन लिमिटेड के विश्व बैंक ऋण को 9,821 करोड़ रुपये की दीर्घकालिक रुपये सुविधा के माध्यम से पुनर्वित्त किया, जिससे लगभग 2,700 करोड़ रुपये की बचत हुई।
इसके अलावा, आईआरएफसी ने हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के लिए 12,842 करोड़ रुपये का पुनर्वित्त सौदा किया, जो उर्वरक क्षेत्र में बड़े पुनर्वित्त सौदों में कंपनी की एंट्री मानी जा रही है। कंपनी ने बाहरी वाणिज्यिक उधार सौदों के माध्यम से वैश्विक बाजारों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत की, जहां निवेशकों की मजबूत भागीदारी देखने को मिली और उधारी लागत को कम करने में मदद मिली।
विविधीकरण रणनीति के चलते कंपनी की लाभप्रदता में भी सुधार हुआ है। उच्च प्रतिफल वाले एसेट्स के कारण वित्तीय वर्ष 26 में नेट इंटरेस्ट मार्जिन बढ़कर 1.50 प्रतिशत पहुंच गया।
मजबूत बैलेंस शीट, विविधीकृत पोर्टफोलियो और उभरते इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में बढ़ते अवसरों के साथ आईआरएफसी अब देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसर के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है, जबकि कंपनी जोखिम प्रबंधन और ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण के तहत आगे बढ़ रही है।
