रेल मंत्रालय सख्त, खानपान की गुणवत्ता से समझौता नहीं

रेलवे अपनी ही कंपनी आईआरसीटीसी पर लगाया 10 लाख का जुर्मानावंदे भारत एक्सप्रेस में खाना परोसने वाली कंपनी पर भी 50 लाख का जुर्मानाखाना परोसने वाली कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेट करने का आदेश खबर है..नई दिल्लीरेल मंत्रालय ने खानपान की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किए जाने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। भारतीय रेलवे ने अपनी ही कंपनी आईआरसीटीसी पर 10 लख रुपए का जुर्माना लगाया है जबकि वंदे भारत एक्सप्रेस में खाना परोसने वाली कंपनी पर भी 10 लाख का जुर्माना ठोका है इसके अलावा खाना पर उसने अली कंपनी का कांटेक्ट भी इंटरनेट करने का आदेश दिये है।भारतीय मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया एक्स ट्विटर हैंडल में कहा गया है कि “ 15 मार्च 2026 को ट्रेन संख्या 21896 (पटना – टाटानगर वंदे भारत एक्स) में पाई गई अनियमितता के संबंध में यात्री द्वारा भोजन की गुणवत्ता पर की गई शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। कार्रवाई करते हुए IRCTC पर ₹10 लाख का दंड लगाया गया है। संबंधित service provider पर ₹50 लाख का जुर्माना तथा contract termination के आदेश दिए है । यात्रियों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”इस बड़ी कार्रवाई से साफ समझा जा सकता है कि यात्रियों की सुरक्षा और गुणवत्ता को भारतीय रेलवे तथा रेल मंत्रालय ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इस कार्रवाई से रेलवे में हड़कंप मचा हुआ है। समझा जाता है कि खानपान की गुणवत्ता को लेकर अब मिलने वाली किसी भी शिकायत को नजर अंदाज नहीं किया जाएगा और शिकायत पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। भारतीय रेलवे के प्रवक्ता ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे, आईआरसीटीसी के के माध्यम से रेलवे नेटवर्क में प्रतिदिन 15 लाख से अधिक यात्रियों को भोजन परोसता है, जो विश्व के सबसे बड़े ऑनबोर्ड खाद्य संचालनों में से एक है। यात्री सुरक्षा और खाद्य गुणवत्ता इस मिशन की आधारशिला है। इस मानक का कोई भी उल्लंघन होने पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाती है ।

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हाईवे और रेलवे परियोजनाओं में आरओबी अनुमोदन प्रक्रियाओं के लिए PRISM-SG पोर्टल शुरू

इस पहल से एक वर्ष की प्रक्रिया तीन महीने में होगी पूरी खबर है..नई दिल्लीबुनियादी ढांचा विकास में दक्षता, पारदर्शिता और अंतर-एजेंसी समन्वय को बढ़ाने की दिशा में एक प्रमुख कदम के रूप में, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज नई दिल्ली में PRISM-SG (पोर्टल फॉर रेल-रोड इंस्पेक्शन एंड स्टेजेस मैनेजमेंट – स्टील गर्डर्स) पोर्टल लॉन्च किया।PRISM-SG पोर्टल का विकास सड़क ऊपरी पुलों (आरओबी) के निर्माण से संबंधित प्रमुख अनुमोदन और निरीक्षण प्रक्रियाओं को डिजिटाइज करने के लिए किया गया है, जिसमें क्वालिटी एश्योरेंस प्लान (क्यूएपी), वेल्डिंग प्रक्रिया विनिर्देश पत्रक (डब्ल्यूपीएसएस) और स्टील गर्डर्स के निर्माण चरण निरीक्षण को शामिल किया गया है।यह पोर्टल दस्तावेजों की अंत-से-अंत ऑनलाइन जमा, जांच, प्रश्न उठाना और उनका समाधान, अनुमोदन, निरीक्षण शेड्यूलिंग तथा निरीक्षण रिपोर्ट, फोटोग्राफ, परीक्षण परिणामों की अपलोडिंग को सक्षम बनाता है, जो पूर्ण ऑडिट ट्रेल और वास्तविक समय निगरानी क्षमताओं द्वारा समर्थित है।वर्तमान में, आरओबी के निर्माण के लिए भारतीय रेलवे से जनरल अरेंजमेंट ड्रॉइंग (जीएडी), संरचनात्मक चित्र, क्वालिटी एश्योरेंस प्लान (क्यूएपी), वेल्डिंग प्रक्रिया विनिर्देश पत्रक (डब्ल्यूपीएसएस) और स्टील गर्डर्स के निर्माण चरण निरीक्षण जैसी कई अनुमोदनों की आवश्यकता होती है। जबकि जीएडी और संरचनात्मक चित्रों के अनुमोदन आरआरसीएएस पोर्टल के माध्यम से प्रोसेस किए जाते हैं और क्यूएपी, डब्ल्यूपीएसएस और निर्माण निरीक्षण संबंधी प्रक्रियाएं मुख्य रूप से ऑफलाइन या भौतिक मोड में की जाती हैं। इससे अक्सर विलंब होता है साथ ही हितधारकों के बीच वास्तविक समय ट्रैकिंग और समन्वय सीमित रहता है।नव लॉन्च PRISM-SG पोर्टल इन चुनौतियों का समाधान करता है, जो सड़क स्वामित्व विभागों, भारतीय रेलवे, ठेकेदारों, फैब्रिकेटरों और निरीक्षण एजेंसियों सहित सभी प्रमुख हितधारकों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करता है। यह पहल अनुमोदन और निरीक्षण समयसीमा को लगभग 12 महीनों से घटाकर 3 से 4 महीनों तक करने में मदद करेगी, जिससे परियोजना दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार होगा। यह आरओबी और रेलवे पुलों के समय पर पूर्ण होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे देश भर में कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा और बुनियादी ढांचा वितरण में तेजी आएगी।

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सड़क सुरक्षा में जनभागीदारी जरूरी : दयाशंकर सिंह

खबर है.. लखनऊ उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय सड़क सुरक्षा संवाद कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सरकार कानून तो बना सकती है, लेकिन सड़क सुरक्षा केवल नियमों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही सुनिश्चित हो सकती है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने व्यवहार से देश को सुरक्षित बनाएं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और स्काउट-गाइड की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि 2047 में जब देश आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब सड़क सुरक्षा और सामाजिक योगदान में स्काउट-गाइड का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे यातायात नियमों का पालन करें और जिम्मेदार नागरिक बनें।श्री सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली मृत्यु के आंकड़े में 50 प्रतिशत की कमी लाई जाए। जब तक देश के युवा इस महत्वपूर्ण अभियान से नहीं जुड़ेंगे तब तक इस लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन होगा। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाले मौत के आंकड़ों की बात की जाए तो प्रतिवर्ष लगभग 23 से 24 हजार मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं के कारण होती है जबकि कोरोना जैसी महामारी में भी इतनी संख्या में लोगों की मृत्यु नहीं हुई। इस दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य है कि यहां से प्रशिक्षित होकर जाएं और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए पूरे मनोयोग से प्रयास किया जाए। एक्सप्रेस वे पर सड़क दुर्घटनाओ में कमी लेने के लिए जगह-जगह पर कैमरे लगाए गए हैं, जिससे कि ओवर स्पीडिंग उलटी लेन ड्राइविंग इत्यादि को नियंत्रित किया जा सके लेकिन लोग चालान से बचने के लिए भिन्न-भिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। इसी प्रकार नो हेलमेट नो फ्यूल का कानून लाया गया है, लोग उसका पालन करें।उन्होंने कहा कि चालान का लक्ष्य जीवन बचाना है, जुर्माना वसूल करना नहीं। उन्होंने कार्यक्रम में आए युवाओं से अधिक से अधिक सड़क सुरक्षा के नियमों को लोगों तक पहुंचाने की अपील की और पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने संकल्प दिलाया कि सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करेंगे और दुर्घटना में होने वाले मौत के आंकड़ों में 50 प्रतिशत की कमी लाने का प्रयास करेंगे। परिवहन आयुक्त श्रीमती किंजल सिंह ने बताया कि इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रदेश के सभी 75 जनपदों से आए स्काउट गाइड प्रशिक्षिकों को आधारभूत नियमों, संकल्पनाओं और दुर्घटनाओं में त्वरित प्राथमिक सहायता के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इन प्रशिक्षिकों के माध्यम से जनपदों में स्कूल स्तर से गठित सभी स्काउट गाइड इकाईयों तक इसे विस्तारित किया जाएगा। इसके अलावा एक प्रायोगिक चरण में एनसीसी और एनएसएस युवाओं को भी प्रदेश स्तर पर सड़क सुरक्षा से जोड़ने की योजना है, क्योंकि इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी है। यह संगठन अपनी सक्रियता, अनुशासन सेवा और जागरूकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा संवाद प्रदेश के सभी जनपदीय स्तर स्काउट एवं गाइड इकाईयों को सड़क सुरक्षा की मुहिम से जोड़ने और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल है।कार्यक्रम में भारत स्काउट एवं गाइड, उ0प्र0 के स्टेट चीफ कमिश्नर डॉ0 प्रभात कुमार, विशेष सचिव पीडब्लयूडी अमित कुमार, आईआरटीई के निदेशक रोहित बालूजा एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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चुनाव में सुरक्षा चाक-चौबंद करने के लिएअंतर-राज्यीय सीमा बैठकें आयोजित

खबर है..नई दिल्लीभारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने आज 24 मार्च को चुनाव वाले 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उनके 12 सीमावर्ती राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ तैयारियों की समीक्षा करने, समन्वय बढ़ाने के लिए समीक्षा बैठक की और सभी संबंधित अधिकारियों को हिंसा-मुक्त, धमकी-मुक्त और प्रलोभन-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आगामी आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव के लिए चुनाव तैयारियों, कानून व्यवस्था की स्थिति, अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थों, हथियारों की जब्ती, अंतरराज्यीय चेक पोस्ट और व्यय संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों की समीक्षा की।मतदान वाले राज्यों ने आयोग को अपनी समग्र तैयारियों, कानून व्यवस्था संबंधी मुद्दों, व्यय प्रवर्तन और केंद्रीय एजेंसियों तथा पड़ोसी राज्यों के साथ लंबित मुद्दों के बारे में जानकारी दी। सीमावर्ती जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया और मतदान वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमाओं को सील कर दिया गया।पड़ोसी सीमावर्ती राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे मतदान करने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को प्रलोभन मुक्त और हिंसा मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने में सहायता के लिए हर संभव कदम उठाएं।एजेंसियों अर्थात सीबीडीटी, सीबीआईसी, ईडी, डीआरआई, सीईआईबी, एफआईयू-आईएनडी, आरबीआई, आईबीए, एनसीबी, आईसीजी,बीसीएएस, एएआई, डाक सेवा, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, एसएसबी, आरपीएफ, आईटीबीपी, भारतीय तटरक्षक बल और असम राइफल्स के प्रमुखों को मतदान वाले राज्यों और इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से सटे क्षेत्रों में कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने और अंतरराज्यीय चेक पोस्टों पर जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए।नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), आयकर विभाग, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) सहित केंद्रीय एजेंसियों को चुनाव से पहले प्रयासों को तेज करने और कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी पर कार्रवाई करते हुए अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थों, हथियारों आदि की अधिकतम जब्ती करने का निर्देश दिया गया था।

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रेलमंत्री ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत पाँच नए सुधारों की घोषणा की

माल ढुलाई, निर्माण और यात्रियों की सुविधा पर बलजल्द ही यात्री ट्रेन के रवाना होने से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगेअब नमक और ऑटोमोबाइल ले जाने के लिए विशेष कंटेनर डिज़ाइन कर सकता है ऑटोमोबाइल उद्योगरेलवे ने नमक परिवहन में जंग-रोधी स्टेनलेस स्टील के कंटेनर पेश किए खबर है..नई दिल्लीरेल अश्विनी वैष्णव ने आज 24 मार्च घोषणा की कि 2026 के दौरान सुधार करने के भारतीय रेल के संकल्प के अनुरूप, पाँच नए सुधारों को स्वीकृति दी गई है। इन नए सुधारों की मंज़ूरी के साथ, वर्ष 2026 के लिए सुधारों की कुल संख्या नौ हो गई है।वैष्णव ने कहा कि वर्तमान “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पहल के तहत, चार सुधारों की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी और अब पाँच नए सुधार पेश किए जा रहे हैं। इन पाँच नए सुधारों में से दो माल ढुलाई से, एक निर्माण से और दो यात्रियों की सुविधा से संबंधित हैं।उन्होंने बताया कि पांचवां सुधार नमक के परिवहन पर केंद्रित है। नमक का उत्पादन करने वाले तीन प्रमुख राज्य तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान हैं। रेलवे द्वारा पहुँचाए जाने वाले कुल नमक का 62 प्रतिशत हिस्सा 1,000 से 2,500 किलोमीटर की दूरी तय करता है, जिससे यह खंड रेल परिवहन के लिए बेहद उपयुक्त बन जाता है। नमक की ढुलाई के लिए अब स्टेनलेस स्टील से बना, ऊपर से लोड होने वाला और बगल से खाली होने वाला कंटेनर सिस्टम सफलतापूर्वक विकसित किया गया है। यह कंटेनर जंग से बचाने के लिए स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है, और इसमें ऊपर से लोड करने के लिए फ्लैप तथा बगल से खाली करने के लिए हाइड्रोलिक तंत्र लगा है, जिससे गंतव्य स्थान पर ट्रकों में नमक को आसानी से अनलोड किया जा सकता है।उन्होंने बताया कि अब टिकट रद्द करने पर रिफंड अपने आप ही मिल जाएगा। यात्रियों के हित में एक और कदम उठाते हुए, अब यात्री प्रस्थान से 30 मिनट पहले तक अपनी यात्रा की श्रेणी (क्लास) को अपग्रेड कर सकेंगे; जबकि पहले यह बदलाव केवल चार्ट तैयार होने से पहले तक ही संभव था। रेल मंत्री ने कहा कि इन सुधारों से रेलवे टिकटिंग प्रणाली में पारदर्शिता और बढ़ेगी, गलत इस्तेमाल या दुरुपयोग में कमी आएगी और यात्रियों का अनुभव भी बेहतर होगा।मंत्री ने कहा कि नौवां सुधार यात्रियों को रेलगाड़ी के शुरुआती स्टेशन से रवाना होने से 30 मिनट पहले तक डिजिटल रूप से अपना बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा देता है। उन्होंने बताया कि पहले यात्री चार्ट तैयार होने से पहले ही बोर्डिंग पॉइंट बदल सकते थे। नए प्रावधान के तहत, यदि कोई यात्री शुरुआती स्टेशन से रेलगाड़ी में सवार नहीं हो पाता है, तो वह अगला सुविधाजनक स्टेशन चुन सकता है और अपनी कन्फर्म सीट खोए बिना रेलगाड़ी में सवार हो सकता है।

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भारत ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ के मूल्यों में करता है विश्वास : बिरला

श्रीलंका के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकातभारत और श्रीलंका हजारों वर्षों की सभ्यतागत, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत करते हैं साझावैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत तेजी से कर रहा है विकास खबर है..नई दिल्लीश्रीलंका की संसद में अवसंरचना और मामलों की संसदीय निगरानी समिति के अध्यक्ष एस.एम. मारिक्कर के नेतृत्व में एक श्रीलंकाई संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने 23 मार्च को संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की।लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि श्रीलंका भारत का एक करीबी पड़ोसी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश हजारों वर्षों से चली आ रही सभ्यतागत, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत साझा करते हैं। श्री बिरला ने बीते दशक में भारत के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि निरंतर अनुसंधान एवं नवाचार ने पूरे देश में मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास को गति दी है।भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए उन्होंने अवसंरचना और संपर्क के क्षेत्र में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला, साथ ही संसदीय कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने में नवाचार एवं प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारत ने राज्यों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया है, साथ ही बंदरगाहों और हवाई अड्डों का भी काफी विस्तार किया है तथा ये सभी देश की वृद्धि और विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।बिरला ने ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ (विश्व एक परिवार है) के दर्शन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत अपने मित्र पड़ोसी देशों को सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।इस अवसर पर, बिरला ने भारतीय संसद द्वारा आयोजित राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) के दौरान श्रीलंका की संसद के माननीय अध्यक्ष के साथ अपनी मुलाकात को स्नेहपूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन बेहद सफल रहा, जिसमें नवाचारों और राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के समक्ष आने वाले चुनौतियों पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि 28वें सीएसपीओसी में राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों की अब तक की सबसे अधिक भागीदारी देखी गई, जिसने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बना दिया।

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आम चुनाव और उपचुनाव 2026

मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को मिलेंगी न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं खबर है..नई दिल्लीभारत निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और छह राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।निर्वाचन आयोग ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश जारी किए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि 2,18,807 मतदान केंद्रों में से प्रत्येक मतदान के दिन सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाओं (एएमएफ) और मतदाता सहायता से सुसज्जित हो।एएमएफ में पीने का पानी, छायादार प्रतीक्षा क्षेत्र, पानी की सुविधा वाला शौचालय, पर्याप्त रोशनी, दिव्यांग मतदाताओं के लिए उचित ढलान वाला रैंप, मानक मतदान कक्ष और उचित संकेत शामिल हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे कतार में नियमित अंतराल पर बेंच लगाएं ताकि मतदाता अपनी बारी का इंतजार करते समय बैठ सकें।मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए, सभी मतदान केंद्रों पर चार एकसमान और मानकीकृत मतदाता सुविधा पोस्टर (वीएफपी) प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे, जिनमें मतदान केंद्र का विवरण, उम्मीदवारों की सूची, क्या करें और क्या न करें, स्वीकृत पहचान दस्तावेजों की सूची और मतदान प्रक्रिया की जानकारी होगी।प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाता सहायता बूथ (वीएबी) स्थापित किए जाएंगे, जिनमें बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ)/कर्मचारियों की एक टीम होगी जो मतदाताओं को संबंधित बूथ की मतदाता सूची में अपना मतदान बूथ नंबर और क्रम संख्या खोजने में सहायता करेगी । वीएबी पर प्रमुख चिह्न लगे होंगे और मतदान परिसर में पहुंचते ही मतदाताओं को आसानी से दिखाई देंगे।

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प्रशासनिक दक्षता और करियर में प्रगति के लिए कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जरूरी

‘सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ’ और ‘केंद्रीय सचिवालय समूह-सी कर्मचारी संघ’ सहित कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल मिले मंत्री से खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 22 मार्च को कहा कि सभी विभागों में प्रशासनिक दक्षता और करियर में प्रगति सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ व्यवस्थित बातचीत ज़रूरी है।डॉ. सिंह “सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ” और “केंद्रीय सचिवालय समूह-सी कर्मचारी संघ” सहित कर्मचारी निकायों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें सर्वे ऑफ इंडिया, इसरो, इंडिया पोस्ट और अन्य संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे, जहां कैडर पुनर्गठन, पदोन्नति और सेवा शर्तों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके नेतृत्व में कैडर प्रबंधन और पदोन्नति प्रक्रियाओं में हाल ही में कई नई शुरूआत की गई हैं। उन्होंने बताया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सक्रिय दृष्टिकोण के चलते हाल के वर्षों में 10,000 से अधिक कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है, जिससे कर्मचारियों को काफी लाभ हुआ है और कई सेवाओं में विकास की बाधाओं को दूर करने में मदद मिली है। उन्होंने इन सुधारों को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन और सहयोग देने के लिए मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को धन्यवाद दिया और स्वीकार किया कि इन उपायों का सभी विभागों में करियर की उन्‍नति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।प्रतिनिधिमंडलों ने मंत्री के समक्ष कैडर पुनर्गठन, वेतन समानता, भत्ते और पदोन्नति के अवसरों से संबंधित कुछ विषय भी रखे, विशेष रूप से सर्वे ऑफ इंडिया और इसरो जैसे संगठनों में। प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार के निरंतर मार्गदर्शन में, इन विषयों को एक सुनियोजित और आपसी सहयोग के माध्‍यम से हल किया जाएगा।

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भारत ने एक बार फिर हासिल की एक अरब टन कोयला उत्पादन की उपलब्धि

ईंधन उपलब्धता में देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिली मजबूती कोयला क्षेत्र में निरंतर और समन्वित प्रयासों तथा सभी हितधारकों के अमूल्य योगदान से देश ने लगातार दूसरे वर्ष 20.03.2026 को 1 अरब टन (बीटी) कोयले के उत्पादन की उपलब्धि प्राप्त की। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और प्रमुख उद्योगों को निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।कोयले के उत्पादन में इस निरंतर और बेहतर वृद्धि ने देश को बढ़ती ऊर्जा मांगों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम बनाया है, साथ ही बिजली क्षेत्र को कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्रों में रिकॉर्ड उच्च स्तर का कोयला भंडार बनाए रखने में भी सहायता प्रदान की है। यह उपलब्धि सुदृढ़ योजना, कुशल क्रियान्वयन और कोयला मूल्य श्रृंखला में मजबूत समन्वय को प्रदर्शित है, जिससे देश की आर्थिक विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।“विकसित भारत 2047” की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप, ये प्रयास एक सरल ऊर्जा ढांचा बनाने, घरेलू उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने और लगातार आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार के संकल्प को सुदृढ़ करते हैं।

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जम्मू-कश्मीर में डिगडोल-पंथ्याल ट्विन ट्यूब टनल से बदलने वाली है जिंदगी

दिनों का इंतजार नहीं बल्कि पांच मिनट में होगी पहुंच खबर है..नई दिल्लीदशकों तक राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर रामबन, डिगडोल और पंथ्याल के बीच के क्षेत्र को एक ऐसे नाम से जाना जाता था जिसके बारे में स्थानीय लोग चिंता किए बिना शायद ही कभी बात करते थे – खूनी नाला। चट्टानें गिरने, भूस्खलन, भारी बारिश और बड़ी संख्या में जानलेवा दुर्घटनाओं के कारण अक्सर यातायात ठप हो जाता था। यात्री अक्सर घंटों, कभी-कभी तो दिनों तक, सड़क साफ होने का इंतजार करते हुए फंसे रहते थे। आज राष्ट्रीय राजमार्ग 44 के रामबन-बनिहाल खंड में डिगडोल से पंथ्याल तक चार लेन वाली ट्विन ट्यूब सुरंगों के निर्माण के साथ यह कहानी बदल रही है।दिगडोल निवासी रतन को याद है कि पहले यात्रा कितनी अनिश्चित हुआ करती थी। वे कहते हैं की “पहले जब चट्टानें गिरती थीं और तेज़ बारिश होती थी, तो कई लोगों को दोनों तरफ कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। अब हम दिगडोल से रामसू-मगरकोट की तरफ सिर्फ 5 मिनट में पहुंच सकते हैं। सुरंग निर्माण के लिए मैं सरकार का तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं।”एनएच-44 के रामबन-बनिहाल खंड के चल रहे चार लेन निर्माण कार्य के अंतर्गत, डिगडोल-पंथ्याल ट्विन ट्यूब टनल इस चुनौतीपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित रामबन-बनिहाल खंड कश्मीर घाटी को शेष भारत से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस महत्वपूर्ण मार्ग को सुरक्षित, तेज और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक प्रमुख अवसंरचना पहल – डिगडोल-पंथ्याल ट्विन ट्यूब टनल परियोजना – पूर्ण होने के करीब है। रणनीतिक महत्व का एक गलियारा दिगडोल-पंथ्याल ट्विन ट्यूब टनल परियोजना जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हर मौसम में बेहतर संपर्क स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पूरी परियोजना से जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा का समय कम होगा। इससे माल परिवहनकर्ताओं, पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और सुरक्षा एजेंसियों को समय और लागत दोनों के लिहाज से सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा यात्रा का समय कम होने से इस महत्वपूर्ण गलियारे पर सेना और अन्य सुरक्षा कर्मियों की आवाजाही तेज होगी। इससे आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी और क्षेत्र में रणनीतिक संपर्क मजबूत होगा।एक बार चालू हो जाने पर ट्विन ट्यूब सुरंगें रामबन-बनिहाल मार्ग पर सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार लाएंगी। भूस्खलन-संभावित ढलानों के बजाय पहाड़ों के बीच से वाहनों को गुजारने से यह परियोजना पत्थरों के गिरने और मौसम संबंधी व्यवधानों के जोखिम को कम करेगी। इससे पूरे वर्ष विश्वसनीय हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित होगा।

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