श्रीलंका के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकात
भारत और श्रीलंका हजारों वर्षों की सभ्यतागत, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत करते हैं साझा
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत तेजी से कर रहा है विकास
खबर है..
नई दिल्ली
श्रीलंका की संसद में अवसंरचना और मामलों की संसदीय निगरानी समिति के अध्यक्ष एस.एम. मारिक्कर के नेतृत्व में एक श्रीलंकाई संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने 23 मार्च को संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि श्रीलंका भारत का एक करीबी पड़ोसी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश हजारों वर्षों से चली आ रही सभ्यतागत, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत साझा करते हैं। श्री बिरला ने बीते दशक में भारत के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि निरंतर अनुसंधान एवं नवाचार ने पूरे देश में मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास को गति दी है।
भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए उन्होंने अवसंरचना और संपर्क के क्षेत्र में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला, साथ ही संसदीय कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने में नवाचार एवं प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारत ने राज्यों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया है, साथ ही बंदरगाहों और हवाई अड्डों का भी काफी विस्तार किया है तथा ये सभी देश की वृद्धि और विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
बिरला ने ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ (विश्व एक परिवार है) के दर्शन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत अपने मित्र पड़ोसी देशों को सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।
इस अवसर पर, बिरला ने भारतीय संसद द्वारा आयोजित राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) के दौरान श्रीलंका की संसद के माननीय अध्यक्ष के साथ अपनी मुलाकात को स्नेहपूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन बेहद सफल रहा, जिसमें नवाचारों और राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के समक्ष आने वाले चुनौतियों पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि 28वें सीएसपीओसी में राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों की अब तक की सबसे अधिक भागीदारी देखी गई, जिसने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बना दिया।
