दानकुनी–सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना पर तेजी से काम करें: रेलमंत्री

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नई दिल्ली
भारतीय रेलवे ने केंद्रीय बजट 2026 में घोषित दानकुनी–सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के शीघ्र क्रियान्वयन के लिए फास्ट-ट्रैक कार्रवाई शुरू कर दी है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फ्रेट कॉरिडोर को तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
लगभग 2,100 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित यह कॉरिडोर दानकुनी (पश्चिम बंगाल) से सूरत (गुजरात) तक जाएगा। यह पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरेगा।
क्या होगा फायदा?
पूर्वी और पश्चिमी भारत के बीच माल परिवहन में तेजी
लॉजिस्टिक्स अधिक कुशल और तेज़
मालगाड़ियों के सफर समय में कमी
मौजूदा रेलवे मार्गों पर भीड़भाड़ में राहत
आधुनिक तकनीक पर जोर
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) को नवीनतम तकनीकी मानकों को अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख विशेषताएं होंगी:
उच्च क्षमता वाली विद्युतीकरण प्रणाली
लेवल क्रॉसिंग रहित ट्रैक (Nil LC)
उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम जैसे ‘कवच’
बेहतर सुरक्षा और अधिक माल वहन क्षमता
डीपीआर अपडेट और निगरानी
परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को नवीनतम लागत अनुमान और संशोधित समय-सीमा के साथ अपडेट किया जाएगा।
परियोजना को विभिन्न खंडों में बांटकर समानांतर रूप से कार्य शुरू किया जाएगा। प्रत्येक क्षेत्र के लिए समर्पित कोर टीमें गठित की जाएंगी, जो मैदान में रहकर प्रगति की निगरानी करेंगी।
रेलवे बोर्ड ने प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियों को तेजी से पूरा करने और कॉन्ट्रैक्ट दस्तावेजों की तैयारी साथ-साथ शुरू करने के निर्देश दिए हैं ताकि परियोजना में कोई देरी न हो।
इसके अलावा, आवश्यक मानव संसाधन का आकलन भी किया जा रहा है। रेलवे बोर्ड को हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट दी जाएगी।

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