प्रशासनिक दक्षता और करियर में प्रगति के लिए कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जरूरी

‘सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ’ और ‘केंद्रीय सचिवालय समूह-सी कर्मचारी संघ’ सहित कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल मिले मंत्री से खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 22 मार्च को कहा कि सभी विभागों में प्रशासनिक दक्षता और करियर में प्रगति सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ व्यवस्थित बातचीत ज़रूरी है।डॉ. सिंह “सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ” और “केंद्रीय सचिवालय समूह-सी कर्मचारी संघ” सहित कर्मचारी निकायों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें सर्वे ऑफ इंडिया, इसरो, इंडिया पोस्ट और अन्य संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे, जहां कैडर पुनर्गठन, पदोन्नति और सेवा शर्तों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके नेतृत्व में कैडर प्रबंधन और पदोन्नति प्रक्रियाओं में हाल ही में कई नई शुरूआत की गई हैं। उन्होंने बताया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सक्रिय दृष्टिकोण के चलते हाल के वर्षों में 10,000 से अधिक कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है, जिससे कर्मचारियों को काफी लाभ हुआ है और कई सेवाओं में विकास की बाधाओं को दूर करने में मदद मिली है। उन्होंने इन सुधारों को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन और सहयोग देने के लिए मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को धन्यवाद दिया और स्वीकार किया कि इन उपायों का सभी विभागों में करियर की उन्‍नति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।प्रतिनिधिमंडलों ने मंत्री के समक्ष कैडर पुनर्गठन, वेतन समानता, भत्ते और पदोन्नति के अवसरों से संबंधित कुछ विषय भी रखे, विशेष रूप से सर्वे ऑफ इंडिया और इसरो जैसे संगठनों में। प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार के निरंतर मार्गदर्शन में, इन विषयों को एक सुनियोजित और आपसी सहयोग के माध्‍यम से हल किया जाएगा।

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भारत ने एक बार फिर हासिल की एक अरब टन कोयला उत्पादन की उपलब्धि

ईंधन उपलब्धता में देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिली मजबूती कोयला क्षेत्र में निरंतर और समन्वित प्रयासों तथा सभी हितधारकों के अमूल्य योगदान से देश ने लगातार दूसरे वर्ष 20.03.2026 को 1 अरब टन (बीटी) कोयले के उत्पादन की उपलब्धि प्राप्त की। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और प्रमुख उद्योगों को निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।कोयले के उत्पादन में इस निरंतर और बेहतर वृद्धि ने देश को बढ़ती ऊर्जा मांगों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम बनाया है, साथ ही बिजली क्षेत्र को कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्रों में रिकॉर्ड उच्च स्तर का कोयला भंडार बनाए रखने में भी सहायता प्रदान की है। यह उपलब्धि सुदृढ़ योजना, कुशल क्रियान्वयन और कोयला मूल्य श्रृंखला में मजबूत समन्वय को प्रदर्शित है, जिससे देश की आर्थिक विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।“विकसित भारत 2047” की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप, ये प्रयास एक सरल ऊर्जा ढांचा बनाने, घरेलू उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने और लगातार आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार के संकल्प को सुदृढ़ करते हैं।

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जम्मू-कश्मीर में डिगडोल-पंथ्याल ट्विन ट्यूब टनल से बदलने वाली है जिंदगी

दिनों का इंतजार नहीं बल्कि पांच मिनट में होगी पहुंच खबर है..नई दिल्लीदशकों तक राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर रामबन, डिगडोल और पंथ्याल के बीच के क्षेत्र को एक ऐसे नाम से जाना जाता था जिसके बारे में स्थानीय लोग चिंता किए बिना शायद ही कभी बात करते थे – खूनी नाला। चट्टानें गिरने, भूस्खलन, भारी बारिश और बड़ी संख्या में जानलेवा दुर्घटनाओं के कारण अक्सर यातायात ठप हो जाता था। यात्री अक्सर घंटों, कभी-कभी तो दिनों तक, सड़क साफ होने का इंतजार करते हुए फंसे रहते थे। आज राष्ट्रीय राजमार्ग 44 के रामबन-बनिहाल खंड में डिगडोल से पंथ्याल तक चार लेन वाली ट्विन ट्यूब सुरंगों के निर्माण के साथ यह कहानी बदल रही है।दिगडोल निवासी रतन को याद है कि पहले यात्रा कितनी अनिश्चित हुआ करती थी। वे कहते हैं की “पहले जब चट्टानें गिरती थीं और तेज़ बारिश होती थी, तो कई लोगों को दोनों तरफ कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। अब हम दिगडोल से रामसू-मगरकोट की तरफ सिर्फ 5 मिनट में पहुंच सकते हैं। सुरंग निर्माण के लिए मैं सरकार का तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं।”एनएच-44 के रामबन-बनिहाल खंड के चल रहे चार लेन निर्माण कार्य के अंतर्गत, डिगडोल-पंथ्याल ट्विन ट्यूब टनल इस चुनौतीपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित रामबन-बनिहाल खंड कश्मीर घाटी को शेष भारत से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस महत्वपूर्ण मार्ग को सुरक्षित, तेज और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक प्रमुख अवसंरचना पहल – डिगडोल-पंथ्याल ट्विन ट्यूब टनल परियोजना – पूर्ण होने के करीब है। रणनीतिक महत्व का एक गलियारा दिगडोल-पंथ्याल ट्विन ट्यूब टनल परियोजना जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हर मौसम में बेहतर संपर्क स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पूरी परियोजना से जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा का समय कम होगा। इससे माल परिवहनकर्ताओं, पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और सुरक्षा एजेंसियों को समय और लागत दोनों के लिहाज से सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा यात्रा का समय कम होने से इस महत्वपूर्ण गलियारे पर सेना और अन्य सुरक्षा कर्मियों की आवाजाही तेज होगी। इससे आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी और क्षेत्र में रणनीतिक संपर्क मजबूत होगा।एक बार चालू हो जाने पर ट्विन ट्यूब सुरंगें रामबन-बनिहाल मार्ग पर सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार लाएंगी। भूस्खलन-संभावित ढलानों के बजाय पहाड़ों के बीच से वाहनों को गुजारने से यह परियोजना पत्थरों के गिरने और मौसम संबंधी व्यवधानों के जोखिम को कम करेगी। इससे पूरे वर्ष विश्वसनीय हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित होगा।

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फिल्म अभिनेता बिंदु दारा सिंह पहुंचे मदन मोहन शर्मा की कलाकृतियों को देखने

कहा, बहुत अच्छी बहू हो आप, ससुर की सुंदर कलाकृतियों को दुनिया के सामने लेकर लाईंएक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाएंगे जहां कलाकार अपनी कलाकृतियों को चाहेंगे तो बेच भी सकेंगेभारत मंडपम में मदन मोहन शर्मा की कलाकृतियों से रूबरू हुए कला प्रेमी‘द हार्ट आफ आर्ट’ प्रदर्शनी में फल और फूलों के अवशेषों से बनी उनकी कलाकृतियों ने सराहा खबर है..नई दिल्लीफिल्म अभिनेता और कला प्रेमी बिंदु दारा सिंह ने आज भारत मंडप में आयोजित ‘द हार्ट आफ आर्ट’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और यहां आयोजित कलाकार स्वर्गीय मदन मोहन शर्मा की उत्कृष्ट कलाकृतियों को देखने के लिए उनके स्टाल पर पहुंचे। उन्होंने यहां स्टॉल पर प्रदर्शित कलाकृतियों को देखकर कहा, ‘आप बहुत ही अच्छी बहू हो, जो अपने ससुर जी की कलाकृतियों को दुनिया के सामने लेकर आईं हैं। निःसंदेह ये कलाकृतियां उस कलाकार की सोच को प्रदर्शित कर रही हैं, जिन्होंने फूल, पत्ते, फल एवं सब्जियां के अवशेषों से इतनी खूबसूरत कलाकृतियों को उकेरा है।स्वर्गीय मदन मोहन शर्मा की कलाकृतियों को प्रदर्शित करने की प्रबल इच्छा के साथ भारत मंडप में करीबन पांच दर्जन से अधिक कलाकृतियों को लेकर पहुंचीं डॉ. पल्लवी मिश्रा ने फिल्म अभिनेता बिंदु दारा सिंह को बताया कि वे इन कलाकृतियों को व्यावसायिक तौर पर बेचने के लिए यहां लेकर नहीं आईं हैं, बल्कि बताने आई हैं कि प्राकृतिक वस्तुओं के अवशेषों से भी कलाकृतियां बनाई जा सकती हैं। इस पर बिंदु दारा सिंह ने कहा कि हम जल्दी ही एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने जा रहे हैं जहां कलाकार अपनी पेंटिंग को प्रदर्शित कर सकते हैं। यदि कलाकार यहां अपनी पेंटिंग को बेचना चाहेंगे तो उन्हें यहां कला प्रेमियों का बाजार मिलेगा और नहीं बेचना चाहेंगे तो उन्हें प्रशंसक जरूर मिलेंगे।भारत मंडप में आज से शुरू हुए ‘द हार्ट ऑफ़ आर्ट’ कला प्रदर्शनी श्रृंखला में स्वर्गीय मदन मोहन शर्मा की दुर्लभ कलाकृतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में कला के प्रेमी आए। यह कला प्रदर्शनी 22 मार्च तक चलेगी। जापान की ओशिबाना कला की तरह प्रकृति के खूबसूरत उपहार फूल, पत्तियों और अन्य वानस्पतिक सामग्री को समेटकर, सुंदर और सजीव कलात्मक चित्र बनाने वाले कलाकार मदन मोहन शर्मा हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनकी कलाकृतियों ने आज खूब प्रशंसा बटोरी। डा. पल्लवी मिश्रा ने बताया किबाबूजी ने अपने जीवन के 50 वर्ष पूरे करने के बाद इन कलाकृतियों को बनाने की शुरुआत की। उन्होंने बताया था कि उन्हें इसके लिए ईश्वरीय प्रेरणा प्राप्त हुई थी। इसके बाद वे ताउम्र कलाकृतियों को बनाते रहे।अपने जीवन काल में उन्होंने 100 से अधिक ऐसी कलाकृतियां बनाई हैं। इनमें प्रमुख रूप से अयोध्या का राम मंदिर और बिहार का सूर्य मंदिर भी शामिल है। उनकी दर्जनों कलाकृतियां यह बताने को पर्याप्त है कि उन्हें ओशिबाना कला के प्रति सिर्फ शौक नहीं था बल्कि उनका दिली लगाव था। उन्होंने बताया कि बाबूजी की इन कलाकृतियों वह सहेज कर रखेंगी।

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रेलवे की सख्त कार्रवाई में छह अधिकारियों की छुट्टी

कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों में हड़कंप खबर है..नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने कार्यप्रदर्शन में अनुकूल नहीं पाए जाने पर छह रेलवे अधिकारियों को की छुट्टी करती है। उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। नियमों के तहत अपनी सेवा का अधिकतम समय बिता चुके अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा की जाती है। अपने कार्य में सुधार नहीं पाए जाने पर उनकीजवाबदेही सुनिश्चित की जाती है। इस कार्रवाई से अधिकारियों में हरकंप पहुंचा हुआ हैसूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई भारतीय रेल स्थापना संहिता के नियम 1802(क) के तहत की गई है। सेवानिवृत्त किए गए अधिकारियों में उत्तर रेलवे के चीफ मैकेनिकल इंजीनियर/ प्रोजेक्ट/मुख्यालय भी शामिल हैं।यह कदम रेलवे की अपने तंत्र में परिचालन दक्षता और जवाबदेही बनाए रखने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नियम 1802(क) प्रशासन को जनहित में अधिकारियों को सेवानिवृत्त करने का अधिकार देता है, और यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत है कि गैर-प्रदर्शन और अक्षमता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे इस कदम को गंभीरता से लें, क्योंकि प्रशासन ने सेवा मानकों को पूरा न करने वालों के प्रति अपनी शून्य-सहनशीलता नीति को पुनः स्पष्ट किया है।

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हवाई यात्रा के दौरान रहें फिट

हवाई यात्रियों के लिए स्मार्ट योग रूटीन प्रस्तुतयोग निवारक स्वास्थ्य और कल्याण का एक शक्तिशाली साधन : जाधव खबर है..नई दिल्ली भूमि से 35,000 फीट ऊपर, समय धीमा होता हुआ प्रतीत होता है और शरीर भी सुस्त पड़ जाता है। एक सीमित सीट पर घंटों बिताने से सबसे अनुभवी यात्री भी थका हुआ, तनावग्रस्त और मानसिक रूप से निर्बल महसूस कर सकता है। यात्रा की इस आधुनिक चुनौती का समाधान करने के लिए, एक सरल लेकिन शक्तिशाली उपाय सामने आ रहा है: हवाई यात्रा के लिए योग —एक सोच-समझकर तैयार किया गया 5 मिनट का इन-फ्लाइट वेलनेस प्रोटोकॉल।आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव द्वारा योग महोत्सव 2026 के दौरान शुरू की गई यह अभिनव पहल, योग के शाश्वत ज्ञान को आपके केबिन के दायरे में लाती है और आपकी सीट को कायाकल्प के स्थान में बदल देती है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान द्वारा विकसित यह प्रोटोकॉल आज के नियमित हवाई यात्रियों के लिए तैयार किया गया है—यह हवाई यात्रा के दौरान तरोताजा रहने का एक त्वरित, सुरक्षित और प्रभावी तरीका प्रदान करता है।आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने इस पहल के पीछे की सोच को उजागर करते हुए बताया, “योग निवारक स्वास्थ्य और कल्याण का एक शक्तिशाली साधन है। यह इन-फ्लाइट योग प्रोटोकॉल हर परिस्थिति में—यहां तक कि 35,000 फीट की ऊंचाई पर भी—योग को सुलभ बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, ताकि व्यक्ति यात्रा के दौरान सक्रिय, तनावमुक्त और संतुलित रह सकें।”

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सड़क सुरक्षा में सुधार लाने में जमीनी स्तर के हस्तक्षेपों की भूमिका महत्वपूर्ण : उमाशंकर

स्वयंसेवकों से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और जीवन बचाने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने कहा कि पूरे देश में सड़क सुरक्षा में सुधार लाने में जमीनी स्तर के हस्तक्षेपों की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए। सचिव ने स्वयंसेवकों से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और जीवन बचाने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।वे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत आईआईटी मद्रास में स्थापित ‘सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र’ (सीओईआरएस) ने 16-18 मार्च 2026 तक फरीदाबाद में ‘सड़क सुरक्षा मित्र’ (एसएसएम) स्वयंसेवकों के लिए अपनी पहली प्रत्यक्ष प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के युवाओं को सड़क सुरक्षा में सक्रिय योगदानकर्ता के रूप में सशक्त बनाना और पूरे देश में युवाओं के नेतृत्व वाला आंदोलन खड़ा करना है। इस तीन-दिवसीय गहन कार्यशाला में 5 राज्यों और 13 जिलों से आए 53 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को ‘जिला सड़क सुरक्षा समितियों’ (डीआरएससी) को तीन प्रमुख क्षेत्रों में सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। ये क्षेत्र हैं – दुर्घटनाओं के समय तत्काल प्रतिक्रिया, सड़क सुरक्षा ऑडिट, और जिला-स्तरीय सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए प्रशासनिक सहायता।सड़क सुरक्षा स्वयंसेवकों और संबंधित पक्षों को संबोधित करते हुए वी. उमाशंकर ने पूरे देश से आए सड़क सुरक्षा नेताओं और स्वयंसेवकों की भागीदारी पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त सीख को जिला स्तर पर ठोस और परिणाम-उन्मुख कार्यों में बदलें।रोकथाम के उपायों के महत्व पर बल देते हुए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव ने कहा कि यद्यपि दुर्घटना के बाद की प्रतिक्रियाएं—जैसे कि सीपीआर देना और आपातकालीन सेवाओं को सूचित करना—अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, तथापि दुर्घटनाओं को पूरी तरह से होने से रोकना ही हमारा प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक सड़क दुर्घटना का कोई न कोई अंतर्निहित कारण अवश्य होता है, और इन कारणों की पहचान करके उनका समाधान करने से भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने में मदद मिल सकती है।मुख्य आँकड़ों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली लगभग 45% मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़ी होती हैं, जिसमें हेलमेट का इस्तेमाल न करना एक बड़ा कारण है। उन्होंने हेलमेट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान तेज़ करने और समुदाय को जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी बताया कि दुर्घटनाओं में होने वाली लगभग 20% मौतें पैदल चलने वालों की होती हैं। उन्होंने बेहतर बुनियादी ढाँचे तथा ट्रैफ़िक को धीमा करने के उपायों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

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राष्ट्रपति ने अयोध्या में किये श्री रामलला के दर्शन

राष्ट्रपति ने कहा, अयोध्या नगरी की पवित्र धूलि का स्पर्श करना ही उनका परम सौभाग्य खबर है..नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (19 मार्च, 2026) उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाकर राम लला के दर्शन किये। उन्होंने राम जन्मभूमि मंदिर के भीतर विभिन्न स्थानों पर दर्शन एवं आरती की और श्री राम यंत्र स्थापना और पूजन भी किया।इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या नगरी की पवित्र धूलि का स्पर्श करना ही उनका परम सौभाग्य है, यह वही पवित्र नगरी है जहां प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल संवत्सर 2083 के प्रारंभ और नवरात्रि के पहले दिन यहां उपस्थित होना उनके लिए वास्तव में एक सौभाग्य है।राष्ट्रपति ने कहा कि इस अत्यंत पवित्र श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन, यहां राम लला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तजनों के लिए खोला जाना तथा मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण के दिन हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्री राम के आशीर्वाद से हम इन लक्ष्यों को 2047 तक, शायद उससे भी पहले, प्राप्त कर लेंगे। 21वीं सदी में, हमारे समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र की परिकल्पना राम राज्य के वर्णन में प्राप्त होती है। गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि राम-राज्य में न कोई दुखी है, न निर्धन है, न परावलंबी है, न बुद्धिहीन है और न ही कोई संस्कारहीन है।राष्ट्रपति ने कहा कि राम राज्य का आदर्श आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता के उच्चतम मानकों को प्रस्तुत करता है। प्रभु श्री राम के जीवन के अनेक उदाहरण सर्वव्यापी और समावेशी जीवन दर्शन के आदर्श को दर्शाते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समकालीन संदर्भ में सामाजिक समावेश और आर्थिक न्याय सहित राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं और उन्हें क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राम राज्य के आदर्शों पर चलते हुए हम सब नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे।

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पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की निगरानी करेंगे 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात

खबर है..नई दिल्ली निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनावों के लिए 1,111 पर्यवेक्षक तैनात किये हैं।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विधानसभा चुनाव कार्यक्रम घोषित करते हुए कहा था कि चुनाव-हिंसा और प्रलोभन मुक्त कराए जाएं ताकि प्रत्येक मतदाता बिना किसी भय या पक्षपात के अपना वोट डाल सके। इसे सुनिश्चित करने में पर्यवेक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।विधानसभा चुनाव और उपचुनावों में तैनात 1,111 पर्यवेक्षकों में सामान्य और पुलिस पर्यवेक्षकों शामिल है। आयोग ने पर्यवेक्षकों को कल 18 मार्च, 2026 तक संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में तैनात करने के निर्देश दिए हैं। पर्यवेक्षक पहुंचने पर अपने संपर्क विवरण सार्वजनिक करेंगे और उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों या उनके प्रतिनिधियों या जनता के किसी भी सदस्य के उनसे मिलने और चुनाव संबंधी उनकी शिकायतें सुनने के लिए प्रतिदिन एक निश्चित समय निर्धारित करेंगे।

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एलपीजी वाहक शिवालिक आज पहुंचेगा भारत,नंदा देवी के कल पहुंचने की उम्मीद

घरेलू एलपीजी उत्पादन में 36 प्रतिशत की वृद्धिऑनलाइन एलपीजी सिलेंडर बुकिंग लगभग 84% से बढ़कर 90% हुई खबर है..नई दिल्ली पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों के मद्देनजर सरकार ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन की उपलब्धता बरकरार रखने में जुटी हुई है। ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाले घरेलू एलपीजी की जबरदस्त मांग के बीच एलजी वाहन शिवालिक आज भारत पहुंचेगी जबकि कल सुबह तक नंदा देवी के भारत पहुंचने की उम्मीद है। घरेलू एलपीजी उत्पादन में फिलहाल 36% की वृद्धि हुई है। हालांकि ऑनलाइन एलपीजी सिलेंडर बुकिंग 84% से बढ़कर 90% हो गया है। यह इस बात के संकेत है कि आने वाले समय में अगर संकट बरकरार रहा और हो होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहा तो पेट्रोलियम उत्पादों की और खासकर एलजी की मांग और बढ़ेगी।भारत सरकार की ओर से निरंतर की जा रही प्रेस वार्ता के दौरान सरकार की ओर से किए जा रहे हैं उपायों को बताया जा रहा है। भारत सरकार के अधिकारियों के अनुसार सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार बनाए हुए हैं। भारत पेट्रोल और डीजल उत्पादन में आत्मनिर्भर है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इन ईंधनों के आयात की आवश्यकता नहीं है।घरेलू रसोई गैस एलपीजी वितरकों में आपूर्ति बंद होने की कोई सूचना नहीं मिली है। ऑनलाइन एलपीजी सिलेंडर बुकिंग में लगभग 84% से बढ़कर लगभग 90% की वृद्धि हुई है। बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मणिपुर और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप गैर-घरेलू एलपीजी आवंटित करने के आदेश जारी किए हैं।

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