आईआरसीटीसी ने लॉन्च किया जापान टूर पैकेज

खबर है..लखनऊ भारतीय रेल खानपान व पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने मुसाफिरों की सुविधा के लिए जापान का नया टूर पैकेज लॉन्च किया है । यह टूर 02 से 11 अप्रैल के बीच आयोजित होगा।यह जानकारी आईआरसीटीसी उत्तर क्षेत्र लखनऊ के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक (सीआरएम) अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि टूर में जापान के प्रमुख पर्यटन स्थलों टोक्यो, फूजी, क्योटो, ओसाका, हिरोशिमा एवं मियाजिमा का भ्रमण कराया जाएगा। उएनो पार्क, लेक कावागुची, योयोगी पार्क में चेरी ब्लॉसम दर्शन, टोक्यो स्काईट्री, माउंट फूजी क्षेत्र, अराशियामा बांस वन, किंकाकु-जी मंदिर, ओसाका कैसल, नारा डियर पार्क, हिरोशिमा पीस मेमोरियल पार्क एवं इट्सुकुशिमा श्राइन का भ्रमण भी शामिल है। हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन (शिंकानसेन) यात्रा इस टूर को और भी यादगार बनाएगी।श्री सिन्हा ने बताया कि दो से 11 अप्रैल तक आयोजित 10 दिवसीय विदेशी यात्रा का मुसाफिरों को अनुभव प्राप्त होगा। इस यात्रा में यात्रियों को लखनऊ, देहरादून, आगरा, मुरादाबाद, मथुरा एवं बरेली से उपयुक्त साधन द्वारा दिल्ली लाया जाएगा तथा दिल्ली से एयर इंडिया की उड़ान द्वारा जापान ले जाया जाएगा। यात्रा के दौरान यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था तीन सितारा होटलों में की जाएगी। पैकेज में भारतीय भोजन (08 नाश्ता, 08 दोपहर का भोजन एवं 08 रात्रि भोजन), ट्रैवल इंश्योरेंस एवं अनुभवी गाइड की सुविधा शामिल है। उन्होंने बताया कि इस पैकेज की बुकिंग ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर की जायेगी। उक्त यात्रा की बुकिंग पर्यटन भवन गोमती नगर लखनऊ स्थित आईआरसीटीसी कार्यालय एवं आईआरसीटीसी की बेवसाइट www.irctctourism.com पर भी कराई जा सकती है। अधिक जानकारी मोबाइल नम्बरों पर 9236367954/8287930922 किया जा सकता है।

Read More

6G में विश्व का नेतृत्व करेगा भारत : सिंधिया

2030 तक 100 करोड़ देशवासी होंगे 5G कनेक्टिविटी से लैस खबर है..नई दिल्ली केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार 11 फरवरी को कहा कि भारत ने दुनिया में सबसे तेज गति से 5G तकनीक को अपनाया है। मात्र 22 महीनों में देश के 99.9% जिलों में 5G सेवाएँ प्रारंभ हो चुकी हैं, जो वैश्विक स्तर पर एक रिकॉर्ड है। इसके लिए टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा लगभग ₹4 लाख करोड़ का निवेश किया गया और देशभर में 5 लाख से अधिक बीटीएस स्थापित किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में 40 करोड़ नागरिक 5G सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, और वर्ष 2030 तक यह संख्या बढ़कर 100 करोड़ तक पहुँचने की संभावना है। भविष्य की दिशा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि भारत 4G में पीछे था, 5G में दुनिया के साथ चला है और 6G में दुनिया का नेतृत्व करेगा।डिजिटल कनेक्टिविटी को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए सिंधिया ने कहा कि वाई-फाई नेटवर्क का विस्तार ग्रामीण भारत के लिए एक नई क्रांति सिद्ध हो रहा है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि वाई-फाई हॉटस्पॉट के मामले में महाराष्ट्र देश में दूसरे स्थान पर है, जहाँ 7,500 हॉटस्पॉट स्थापित किए गए हैं, जबकि देशभर में यह संख्या 92,000 है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 10 वर्षों में देश में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी 6 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ तक पहुँच गई है, और वर्ष 2030 तक इस नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ बनाने की योजना है।उत्तर पूर्वी भारत में कनेक्टिविटी की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए केन्द्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री सिंधिया ने अरुणाचल प्रदेश के विजयनगर जैसे दुर्गम क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘आखिरी गाँव’ की सोच को बदलकर उसे ‘भारत का पहला गाँव’ बनाया है, और सरकार इन क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी और ‘राइट ऑफ वे’ जैसी पर्यावरणीय एवं भौगोलिक चुनौतियों के समाधान के लिए अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्थानीय सांसदों के साथ मिलकर कार्य करने की बात भी कही।मंत्री ने कहा कि जहाँ आर्थिक रूप से मोबाइल टावर लगाना कठिन है, वहाँ सरकार ‘डिजिटल भारत निधि’ के माध्यम से कनेक्टिविटी सुनिश्चित कर रही है। 4G सैचुरेशन योजना के तहत लगभग 30,000 गाँवों को चिह्नित किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि इसके लिए 21,000 टावर स्थापित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 17,000 टावर पहले ही लगाए जा चुके हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में देश के हर गाँव में शत-प्रतिशत 4G सैचुरेशन सुनिश्चित कर डिजिटल समावेशन का सपना साकार किया जाएगा। सिंधिया ने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल तकनीक नहीं, बल्कि समावेशी विकास का माध्यम है, जो भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा रही है।

Read More

स्कूली बच्चों के लिए एक करोड़ अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट पूरे पांच महीने में 83000 स्कूलों में (एमबीयू) शिविर आयोजित

खबर है..नई दिल्ली भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणयू (आईडीएआई) ने स्कूली बच्चों के लिए मिशन मोड के तहत चल रहे अभियान में एक करोड़ अनिवार्य बायोमेट्रिक (एमडीयू) अपडेट का काम पूरा कर लिया है। इसके लिए प्राधिकरण ने मात्र 5 महीने में 83000 स्कूलों में एमडीयू शिविर आयोजित किए थे। प्राधिकरण 7-15 आयु वर्ग के बच्चों के लिए एमबीयू को एक अक्टूबर 2025 से एक वर्ष की अवधि के लिए निःशुल्क कर दिया गया था।यूआईडीएआई ने सितंबर 2025 में स्कूली छात्रों के लिए यह विशेष एमबीयू अभियान शुरू किया था। यह अभियान यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) एप्लिकेशन के साथ सफल तकनीकी एकीकरण के बाद शुरू किया गया था, जिससे स्कूलों में बच्चों के एमबीयू की स्थिति को देखना संभव हुआ था। इस सफलता ने यूआईडीएआई और स्कूलों को संयुक्त रूप से उन बच्चों की पहचान करने में मदद की, जिनका एमबीयू होना बाकी था और एमबीयू पूरा करने के लिए स्कूलों में शिविर आयोजित किए गए।यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर यूआईडीएआई की इस कदम से अवगत कराया और विद्यालयों में लक्षित एमबीयू शिविर आयोजित करने में उनके सहयोग का अनुरोध किया। देश भर में आठ स्थानों पर स्थित यूआईडीएआई के क्षेत्रीय कार्यालयों ने इस व्यापक अभियान को सभी हितधारकों, अर्थात् राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों, जिला स्तरीय प्रशासन, यूआईडीएआई रजिस्ट्रारों और विद्यालय अधिकारियों के साथ समन्वयित करने के लिए पांच महीने तक अथक परिश्रम किया है। यह मिशन मोड अभियान तब तक चलता रहेगा जब तक देश के सभी विद्यालय इसमें शामिल नहीं हो जाते। इस पहल से अब तक 83,000 विद्यालयों के 1 करोड़ बच्चे लाभान्वित हुए और कई और भी बच्चों को इससे लाभान्वित होने की आशा है। पांच वर्ष से कम आयु का बच्चा आधार कार्ड के लिए पंजीकरण कराते समय अपनी फोटो, नाम, जन्मतिथि, लिंग, पता और जन्म प्रमाण पत्र प्रदान करता है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के फिंगरप्रिंट और आइरिस बायोमेट्रिक्स आधार पंजीकरण के लिए नहीं लिए जाते हैं क्योंकि इस आयु में ये परिपक्व नहीं होते हैं। इसलिए, 5 से 15 वर्ष की आयु पार करने के बाद, फिंगरप्रिंट और आइरिस बायोमेट्रिक्स (एमबीयू) प्रक्रिया का पालन करते हुए आधार में फिंगरप्रिंट और आइरिस बायोमेट्रिक्स की जानकारी देना बच्चों के लिए अनिवार्य है। आधार में एमबीयू न होने से विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने, एनईईटी, जेईई, सीयूईटी आदि जैसी प्रतियोगी और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में पंजीकरण कराने के दौरान प्रमाणीकरण में कठिनाइयां आ सकती हैं।बच्चों को एमबीयू पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करने और इस सेवा को सभी के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से, यूआईडीएआई ने 7-15 आयु वर्ग के बच्चों के लिए एमबीयू के शुल्क को 1 अक्टूबर 2025 से एक वर्ष की अवधि के लिए माफ कर दिया था। इसके अलावा, 5-7 वर्ष और 15-17 वर्ष के बच्चों के लिए एमबीयू निःशुल्क बना हुआ है।स्कूलों में आयोजित शिविरों के अलावा, बच्चे देश भर में चल रहे आधार नामांकन केंद्रों और आधार सेवा केंद्रों में भी अपना आधार पंजीकरण फॉर्म भर सकते हैं। इसी अवधि में इन केंद्रों पर आने वाले बच्चों द्वारा लगभग 1.3 करोड़ आधार पंजीकरण फॉर्म भरे जा चुके हैं।

Read More