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नई दिल्ली
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. हरीश सभरवाल ने कहा कि सड़क परिवहन क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा और आवश्यक सप्लाई चेन की रीढ़ है। लेकिन बढ़ती ईंधन लागत, ऊँचे टोल शुल्क और बहु-स्तरीय कराधान के कारण परिवहन संचालन की आर्थिक व्यवहार्यता लगातार घट रही है।
केंद्रीय बजट 2026–27 को कर सुधार, ईंधन सुधार और बुनियादी ढाँचे आधारित विकास पर केंद्रित होना चाहिए, न कि पहले से दबाव झेल रहे इस क्षेत्र से अतिरिक्त राजस्व वसूली पर। सही नीतिगत सहयोग मिलने पर परिवहन उद्योग रोजगार सृजन, लॉजिस्टिक्स दक्षता और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि बजट ऐसे समय में तैयार हो रहा है जब वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं से जूझ रहा है और भारत विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। नीति-निर्माताओं से अपेक्षा है कि वे वित्तीय अनुशासन और विकास की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाएँ, विशेष रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा, एमएसएमई और रोजगार सृजन पर ध्यान दें।
परिवहन क्षेत्र ने यह भी रेखांकित किया कि 24×7 बैंकिंग और ईंधन स्टेशन सुविधाओं की सीमाओं के कारण नकद लेन-देन पर निर्भरता बनी हुई है। साथ ही, बढ़ती ईंधन लागत, राज्यों के बीच मूल्य असमानता और वैश्विक व्यापार तनाव का प्रभाव टायर, स्पेयर पार्ट्स और तकनीक के आयात पर पड़ रहा है।
इन प्राथमिकताओं को संबोधित करने से परिचालन लागत स्थिर होगी, दक्षता बढ़ेगी और भारत की लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, जिससे यह क्षेत्र देश की 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य और उससे आगे तक सार्थक योगदान दे सकेगा।
