‘विश्व सूत्र – विश्‍व के लिए भारत की बुनाई’ कार्यक्रम के लिए फेमिना मिस इंडिया के साथ सहयोग

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नई दिल्ली
केन्‍द्रीय वस्त्र मंत्रालय के हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय ने उल्‍लेखनीय पहल करते हुए समृद्ध भारतीय हथकरघा क्षेत्र और उसकी विविधता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने के लिए पहली बार फेमिना मिस इंडिया के साथ सहयोग किया है।
“विश्व सूत्र – विश्‍व के लिए भारत की बुनाई” नाम की विशेष पहल के तहत, फेमिना मिस इंडिया सौंदर्य प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में विशेष हथकरघा संग्रह प्रस्‍तुत किया जाएगा। यह संग्रह भारतीय बुनकरों की कलात्मकता दर्शाएगा जिसमें हथकरघा क्षेत्र की संवहनीयता और सांस्कृतिक गहराई दिखेगी।
इस पहल की विशेषता यह है कि इसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के विजेता भाग ले रहे हैं, जिनमें से प्रत्येक अपने क्षेत्र की बुनाई परंपरा से प्रेरित हथकरघा परिधानों का प्रदर्शन करेंगे और चयनित देश की सांस्कृतिक सौंदर्यशास्त्र को प्रतिबिंबित करने के लिए रचनात्मक रूप से प्रस्तुत करेंगे। यह नज़रिया प्रतीकात्मक रूप से भारत की वस्त्र विरासत को वैश्विक फैशन से जोड़ता है।
भारत के लोकप्रिय बुनाई पहनावे में वाराणसी ब्रोकेड, लेप्चा, कांचीपुरम, कोटा डोरिया, माहेश्वरी, पटोला, इकत, कसावु, पैठानी, फुलकारी, जामदानी, कुल्लू शॉल, उप्पादा, खुन्न, पश्मीना, मूगा सिल्क, इलकल और अन्य क्षेत्रीय परंपराएं शामिल हैं।
हथकरघा विकास आयुक्त डॉ. एम. बीना ने कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य युवा वर्ग, फैशन जगत के हितधारकों और अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं के बीच भारतीय हथकरघा की दृश्यता बढ़ाना है। यह विरासत के रूप में हथकरघा, भविष्य के रूप में हथकरघा की धारणा को सुदृढ़ करता है और सरकार की रचनात्‍मक अर्थव्‍यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मक उद्यमिता को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
भारत विश्व की सबसे समृद्ध हथकरघा परंपराओं में से एक देश है। यह कृषि के बाद 35 लाख से अधिक बुनकरों और संबंधित श्रमिकों को स्थायी आजीविका प्रदान करता है। पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हथकरघा वस्त्रों में नए सिरे से रुचि उत्‍पन्‍न हुई है।
यह पहल भारत सरकार की पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में परिवर्तित करने की प्रतिबद्धता दर्शाती है, जो वोकल फोर लोकल टू ग्लोबल” की दृष्टि और प्रधानमंत्री के 5एफ ढांचे (फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन) के अंतर्गत आती है। यह सांस्कृतिक उद्योगों को सुदृढ़ बनाने, स्थायी आजीविका सृजित करने और वैश्विक वस्त्र एवं फैशन बाजारों में भारत की उपस्थिति विस्तारित करने में हथकरघा की अहम् भूमिका रेखांकित करती है।
विश्व सूत्र: भारत की हथकरघा विरासत को स्थानीय करघों से वैश्विक मंच तक ले जाना।

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