हथकरघा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देगा ‘हैंडलूम हैकाथॉन 2026’, 20 जुलाई तक करें आवेदन

नई दिल्लीवस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय ने ‘हैंडलूम हैकाथॉन 2026 – बुनाई नवाचार’ नामक राष्ट्रीय नवाचार प्रतियोगिता की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी, डिजाइन, उद्यमिता और टिकाऊ समाधानों के माध्यम से भारत के हथकरघा क्षेत्र को अधिक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और सशक्त बनाना है। यह पहल राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित की जा रही है।हैकाथॉन का ग्रैंड फिनाले 1 अगस्त 2026 को एफआईटीटी, आईआईटी दिल्ली में होगा, जहां चयनित टीमें विशेषज्ञ जूरी के सामने अपने नवाचार प्रस्तुत करेंगी।विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य युवाओं की रचनात्मकता को भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा से जोड़ना है। इससे बुनकरों, छात्रों, डिजाइनरों, तकनीकी विशेषज्ञों, स्टार्टअप और उद्यमियों को मिलकर व्यावहारिक एवं विस्तार योग्य समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा।हैकाथॉन में उत्पाद एवं डिजाइन नवाचार, डिजिटल तकनीक, बाजार पहुंच, ब्रांडिंग, आपूर्ति श्रृंखला, उत्पादकता, व्यवसाय विकास, स्थिरता और सामाजिक प्रभाव जैसे विषयों पर समाधान आमंत्रित किए गए हैं।प्रतियोगिता में वस्त्र, फैशन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी के छात्र, हथकरघा बुनकर, कारीगर, शोधकर्ता, स्टार्टअप, उद्यमी और नवप्रवर्तक भाग ले सकते हैं।ऑनलाइन पंजीकरण 20 जुलाई 2026 तक खुले हैं। इस पहल का उद्देश्य ऐसे नवाचारों की पहचान और संवर्धन करना है, जो भारतीय हथकरघा क्षेत्र के आधुनिकीकरण, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक सतत विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

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पीएम-सेतु के तहत देशभर में आईटीआई उन्नयन को मिली रफ्तार

₹1,237.58 करोड़ के निवेश को मंजूरी खबर है..नई दिल्लीकौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की सचिव देबाश्री मुखर्जी की अध्यक्षता में आयोजित पीएम-सेतु (Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs) की चौथी राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) की बैठक में देशभर के 200 आईटीआई क्लस्टरों में योजना के राष्ट्रव्यापी विस्तार को मंजूरी दी गई।बैठक में उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) को जोड़ने और योजना के क्रियान्वयन को सरल बनाने के कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।₹1,237.58 करोड़ के रणनीतिक निवेश को मंजूरी:समिति ने ओडिशा, गुजरात और तेलंगाना के पांच आईटीआई क्लस्टरों के लिए कुल ₹1,237.58 करोड़ के रणनीतिक निवेश (Strategic Investment Plans) को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं में प्रमुख उद्योग साझेदार (Anchor Industry Partner) के रूप में जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया, अपोलो मेड-स्किल्स, श्री सिद्धार्थ इन्फ्राटेक एंड सर्विसेज तथा न्यूलैंड फाउंडेशन शामिल हैं।राज्यवार प्रमुख परियोजनाएं :ओडिशा:सरकारी आईटीआई बारबिल को हब तथा आनंदपुर, कोईरा, करंजिया और बरकोट आईटीआई को स्पोक के रूप में विकसित किया जाएगा। एंकर इंडस्ट्री पार्टनर जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड होगा, जिसके तहत ₹240.21 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।गुजरात:सरकारी आईटीआई सूरत हब होगा, जबकि हजीरा, बारडोली, सचिन और महिला आईटीआई सूरत स्पोक के रूप में शामिल होंगे। आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया ₹240.18 करोड़ का निवेश करेगी।तेलंगाना:सरकारी आईटीआई ओल्ड सिटी क्लस्टर में अपोलो मेड-स्किल्स लिमिटेड द्वारा ₹241.01 करोड़ का निवेश किया जाएगा।सरकारी आईटीआई पटानचेरू क्लस्टर में सिद्धार्थ इन्फ्राटेक एंड सर्विसेज (आई) प्रा. लि. ₹275.24 करोड़ का निवेश करेगी।सरकारी आईटीआई संगारेड्डी क्लस्टर में न्यूलैंड फाउंडेशन ₹240.94 करोड़ का निवेश करेगी।इन निवेश योजनाओं के माध्यम से उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप आईटीआई का आधुनिकीकरण, अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का विकास तथा युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

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कृति कोरापुट कॉफी और पुरी–कोरापुट एक्सप्रेस: जनजातीय विकास को मिलेगी नई उड़ान

खबर है..भुवनेश्वरकृति कोरापुट कॉफी केवल एक प्रीमियम क्षेत्रीय उत्पाद नहीं, बल्कि जनजातीय उद्यमिता, सतत कृषि और बेहतर संपर्क व्यवस्था का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है। पूर्वी घाट की पहाड़ियों में जनजातीय किसानों द्वारा पर्यावरण-अनुकूल पद्धतियों से उगाई जाने वाली शेड-ग्रोन अरेबिका कॉफी अपने विशिष्ट चॉकलेट और मेवेदार स्वाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है।यह पहल हजारों जनजातीय किसानों और महिलाओं के लिए आजीविका का मजबूत माध्यम बनी है। खेती, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़कर वे स्थायी आय अर्जित कर रहे हैं, वहीं क्षेत्र की जैव विविधता के संरक्षण में भी योगदान दे रहे हैं।इसी क्रम में पुरी–कोरापुट एक्सप्रेस का शुभारंभ क्षेत्र के विकास को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है। बेहतर रेल संपर्क से कोरापुट का जुड़ाव राज्य के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों से मजबूत होगा, जिससे स्थानीय उत्पादों, विशेषकर कृति कोरापुट कॉफी, को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और जनजातीय समुदायों के लिए नए आर्थिक अवसर सृजित होंगे।विशेषज्ञों का मानना है कि कृति कोरापुट कॉफी और पुरी–कोरापुट एक्सप्रेस, दोनों मिलकर समावेशी विकास के उस मॉडल को मजबूत करेंगे, जिसमें आधुनिक बुनियादी ढांचा स्थानीय उद्यमों को सशक्त बनाते हुए ओडिशा के जनजातीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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कौशल विकास मंत्रालय ने ‘नवाचार मंत्र’ पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 जुलाई तक बढ़ाई

खबर है..नई दिल्लीदेश भर के नवाचारकर्ताओं और उद्यमियों की बढ़ती रुचि को देखते हुए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने अपने प्रमुख राष्ट्रीय इनोवेशन प्लेटफ़ॉर्म ‘नवाचार मंत्र’ के पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 जुलाई 2026 कर दी है। इस निर्णय से अधिक से अधिक छात्र, स्टार्टअप, पेशेवर और जमीनी स्तर के नवाचारकर्ता अपने व्यावसायिक विचारों को मंच पर प्रस्तुत कर सकेंगे।अब तक नवाचार मंत्र के आधिकारिक पोर्टल पर हजारों प्रतिभागी पंजीकरण करा चुके हैं। मंत्रालय को उम्मीद है कि समय-सीमा बढ़ने से देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से और अधिक अभिनव विचार सामने आएंगे।यह पहल राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (एनआईईएसबीयूडी) द्वारा संचालित की जा रही है, जबकि आईआईटी दिल्ली का फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफआईटीटी) इसका नॉलेज पार्टनर है।नवाचार मंत्र के माध्यम से चयनित प्रतिभागियों को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, मेंटरशिप, इनक्यूबेशन सपोर्ट, उद्योग से जुड़ने के अवसर, निवेशकों तक पहुंच और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उनके नवाचारों को सफल एवं टिकाऊ उद्यमों में बदला जा सके।मंत्रालय का कहना है कि यह पहल नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देने, रोजगार सृजित करने वाले उद्यमियों को तैयार करने और भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्रालय ने छात्रों, स्टार्टअप्स, पेशेवरों और आकांक्षी उद्यमियों से 15 जुलाई 2026 तक पंजीकरण कर इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है।

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मोदी राजस्थान और गुजरात में दें गया 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात

खबर है..नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान और गुजरात के दौरे पर ऊर्जा, परिवहन, रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा और सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।राजस्थान में प्रधानमंत्री 79,450 करोड़ रुपये की लागत से विकसित 9 एमएमटीपीए क्षमता वाले रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। साथ ही 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली जयपुर मेट्रो फेज-2 की आधारशिला रखेंगे। वे लगभग 900 करोड़ रुपये की रेल दोहरीकरण परियोजनाओं, 740 करोड़ रुपये की जोधपुर रिंग रोड परियोजना तथा बीकानेर की 1,300 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाओं का भी लोकार्पण करेंगे। इसके अलावा, राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में चयनित 54,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपेंगे।गुजरात के साणंद में प्रधानमंत्री 7,500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से स्थापित सीजी सेमी ओएसएटी (सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्ट) संयंत्र का उद्घाटन करेंगे। यह संयंत्र प्रतिवर्ष 5 अरब सेमीकंडक्टर चिप्स के उत्पादन की क्षमता रखेगा और भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इन परियोजनाओं से ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास, आधुनिक परिवहन, रोजगार सृजन और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को नई मजबूती मिलेगी।

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“आम के आम, गुठलियों के दाम” की मिसाल बने मलिहाबाद के गिरजा शंकर मौर्य

खबर है..लखनऊमलिहाबाद के भदेश्वर मऊ निवासी प्रगतिशील किसान गिरजा शंकर मौर्य अपनी अभिनव खेती से ‘आम के आम, गुठलियों के दाम’ कहावत को साकार कर रहे हैं। चार एकड़ में विकसित उनके मल्टी लेयर प्राकृतिक खेती मॉडल में आम के साथ लीची, अमरूद, चीकू, पपीता, सहजन, हल्दी, सब्जियां तथा उड़द, मूंग और अरहर जैसी दलहनी फसलें भी उगाई जाती हैं। यही नहीं, इन फलों का प्रसंस्करण कर जूस, अमावट और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिससे उनकी आय पारंपरिक आम की खेती की तुलना में करीब छह गुना तक बढ़ गई है।इन दिनों लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित उत्तर प्रदेश आम महोत्सव में गिरजा शंकर मौर्य का स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां वे प्राकृतिक खेती से तैयार फलों और उनसे बने उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं तथा किसानों और आगंतुकों को प्राकृतिक खेती के लाभों से भी अवगत करा रहे हैं।गिरजा शंकर मौर्य बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2017 में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पद्धति अपनाई थी। शुरुआत एक गाय के गोबर और गोमूत्र से हुई थी, जबकि आज उनके पास चार गायें हैं। इन्हीं के गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत एवं अन्य प्राकृतिक घोलों के माध्यम से वे पूरी खेती करते हैं। उनकी खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का उपयोग नहीं होता।उन्होंने बताया कि मल्टी लेयर खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि खेत पूरे वर्ष उत्पादन देता है। अलग-अलग ऊंचाई और मौसम की फसलों के संयोजन से एक ही भूमि पर कई प्रकार की पैदावार होती है, जिससे जोखिम कम होता है और आमदनी लगातार बनी रहती है।गिरजा शंकर मौर्य का कहना है कि आम महोत्सव जैसे आयोजन किसानों के लिए बेहद उपयोगी हैं। इससे प्राकृतिक खेती, फल प्रसंस्करण और आधुनिक बागवानी की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचती है। साथ ही किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी भी मिलती है तथा अन्य किसान भी नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।उन्होंने प्राकृतिक खेती और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन कृषि को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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भारतीय रेल के आधुनिकीकरण में आरडीएसओ की अहम भूमिका : रवनीत सिंह

खबर है..लखनऊरेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने कहा कि भारतीय रेल के आधुनिकीकरण, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को हासिल करने में अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता के क्षेत्र में निरंतर कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि उन्नत अनुसंधान और प्रभावी मानकीकरण भारतीय रेल को विश्वस्तरीय परिवहन प्रणाली बनाने में निर्णायक योगदान देंगे।बुधवार को एक दिवसीय दौरे पर आरडीएसओ पहुंचे राज्य मंत्री ने संगठन की विभिन्न अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया और भारतीय रेल के अनुसंधान, परीक्षण तथा मानकीकरण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने सिग्नल प्रयोगशाला, एयर ब्रेक प्रयोगशाला, इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्रयोगशाला, नवीन श्रांति परीक्षण प्रयोगशाला तथा आईएमडब्ल्यू प्रयोगशाला का भ्रमण कर वहां संचालित परीक्षणों, अनुसंधान गतिविधियों और तकनीकी नवाचारों की जानकारी प्राप्त की।दौरे के दूसरे चरण में आयोजित समीक्षा बैठक में आरडीएसओ के महानिदेशक प्रभास दानसाना ने आरडीएसओ की प्रमुख उपलब्धियों, वर्तमान अनुसंधान गतिविधियों तथा भारतीय रेल की सुरक्षा, विश्वसनीयता और तकनीकी उन्नयन में संगठन की भूमिका पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने आरडीएसओ की कार्यप्रणाली, हाल की उपलब्धियों, विभिन्न परीक्षणों एवं ट्रायल्स, प्रगतिशील परियोजनाओं तथा विक्रेता विकास गतिविधियों की भी जानकारी साझा की।बैठक के अंत में राज्य मंत्री ने आरडीएसओ के अधिकारियों के साथ संवाद कर संगठन की विभिन्न गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान आधारित तकनीकी विकास और स्वदेशी नवाचार भारतीय रेल को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार साबित होंगे।

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जून 2026 में भारतीय रेल की रफ्तार बरकरार

माल ढुलाई में 4% और यात्री यातायात में स्थिर वृद्धि, पहली तिमाही में 419 मिलियन टन से अधिक माल परिवहन खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेल ने जून 2026 में माल ढुलाई और यात्री सेवाओं दोनों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए देश के आर्थिक विकास में अपनी भूमिका को और मजबूत किया है। जून 2026 में रेलवे ने 142.21 मिलियन टन माल ढुलाई की, जो पिछले वर्ष जून की तुलना में 4 प्रतिशत अधिक है। इससे रेलवे को लगभग 430 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ।प्रमुख उपलब्धियांजून 2026 में 142.21 मिलियन टन माल ढुलाई।माल परिवहन से राजस्व में 3 प्रतिशत की वृद्धि।वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 419.08 मिलियन टन माल ढुलाई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक है।प्रमुख वस्तुओं की ढुलाई में उल्लेखनीय वृद्धिउर्वरक : 19.1%अन्य वस्तुएं : 17.3%लौह अयस्क : 9.4%क्लिंकर : 7.2%बिजली संयंत्रों को कोयला आपूर्ति : 7%घरेलू कोयला : 4.9%कुल कोयला : 3.6%यात्री सेवाओं में भी बढ़ी रफ्तारजून 2026 में भारतीय रेल ने 63.81 करोड़ यात्रियों को यात्रा सुविधा प्रदान की, जो पिछले वर्ष जून के 62.37 करोड़ यात्रियों से अधिक है।गैर-उपनगरीय (लंबी एवं मध्यम दूरी) यात्रियों में 3.9 प्रतिशत वृद्धि।उपनगरीय यात्रियों में 0.9 प्रतिशत वृद्धि।आधुनिक रेल सेवाओं का विस्तारभारतीय रेल ने आधुनिक और आरामदायक यात्रा सुविधाओं का विस्तार जारी रखा है।164 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं संचालित।72 अमृत भारत ट्रेन सेवाएं उपलब्ध।हाल ही में हावड़ा–कामाख्या वंदे भारत स्लीपर सेवा शुरू।जून 2026 में चार नई अमृत भारत ट्रेनों का शुभारंभ।आर्थिक विकास को गतिभारतीय रेल ने कहा कि माल ढुलाई, यात्री सेवाओं के विस्तार, क्षमता वृद्धि, परिचालन दक्षता और आधुनिक अवसंरचना के माध्यम से वह देश को सुरक्षित, विश्वसनीय, किफायती और यात्री-अनुकूल परिवहन उपलब्ध कराने के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने यूपी कोऑपरेटिव बैंक में आधार सेवाओं का शुभारंभ किया

देश का पहला सहकारी बैंक बना, जो अपनी शाखाओं के माध्यम से आधार सेवाएं देगाप्रदेश में प्रतिदिन 15 हजार मशीनों से करीब 90 हजार आधार नामांकन और अपडेट हो रहे हैं : प्रशांत कुमार सिंह खबर है..लखनऊउत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक में आधार सेवाओं का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा रजिस्ट्रार के रूप में नामित होने वाला देश का पहला सहकारी बैंक बन गया है, जो अपनी शाखाओं के माध्यम से आम जनता को आधार नामांकन और अपडेट की सेवाएं उपलब्ध कराएगा। इस नई व्यवस्था से लोगों को आधार संबंधी सेवाएं अधिक सुलभ और सुविधाजनक तरीके से मिल सकेंगी। अब नागरिक उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक की शाखाओं में जाकर आधार का नया नामांकन कराने के साथ-साथ आवश्यक अपडेट भी करा सकेंगे। कार्यक्रम में प्रदेश के सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, प्रमुख सचिव सहकारिता अजय कुमार शुक्ला, UIDAI क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ के उप महानिदेशक प्रशांत कुमार सिंह तथा आयुक्त एवं निबंधक, सहकारिता योगेश कुमार सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर UIDAI के उप महानिदेशक प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में आधार नामांकन और अपडेट के लिए लगभग 15 हजार मशीनें कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन करीब 90 हजार लोगों के आधार नामांकन एवं अपडेट का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंक की शाखाओं में आधार सेवाएं शुरू होने से लोगों को अपने नजदीक ही यह सुविधा उपलब्ध होगी। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को इससे बड़ा लाभ मिलेगा और उन्हें आधार संबंधी कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी अपील की कि जिन बच्चों की आयु 5 वर्ष या 15 वर्ष हो चुकी है और जिन्होंने अभी तक अपना अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट नहीं कराया है, वे जल्द से जल्द आधार केंद्र पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कराएं। इससे भविष्य में सरकारी योजनाओं, शिक्षा और अन्य सेवाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

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IRPGIMSR और उत्तर रेलवे केंद्रीय अस्पताल ने रचा इतिहास, राष्ट्रीय सर्जिकल कौशल पाठ्यक्रम की सफल मेजबानी

खबर है..नई दिल्लीउत्तर रेलवे केंद्रीय अस्पताल (NRCH), नई दिल्ली से संबद्ध इंडियन रेलवे पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (IRPGIMSR) के सर्जरी विभाग ने 126वें FMAS AMASI स्किल कोर्स की सफल मेजबानी कर रेलवे चिकित्सा सेवाओं के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है। यह पहली बार है जब संस्थान ने ‘मिनिमल एक्सेस सर्जरी’ (दूरबीन विधि से सर्जरी) के इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।कार्यक्रम में देशभर से 277 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जबकि 80 प्रतिष्ठित फैकल्टी सदस्य, जिनमें देश के अग्रणी लेप्रोस्कोपिक सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल थे, ने प्रतिभागियों को आधुनिक सर्जिकल तकनीकों का प्रशिक्षण दिया।उद्घाटन समारोह में डॉ. प्रो. रुशमा टंडन, निदेशक एवं पीसीएमडी, IRPGIMSR एवं NRCH, नई दिल्ली ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने आधुनिक चिकित्सा शिक्षा में कौशल, नवाचार और उत्कृष्टता के महत्व पर जोर दिया।प्रशिक्षण की प्रमुख विशेषताएंउन्नत लेप्रोस्कोपिक तकनीकों का लाइव सर्जिकल प्रदर्शन।सर्जिकल दक्षता बढ़ाने के लिए हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल प्रशिक्षण।देश के विशेषज्ञों द्वारा इंटरएक्टिव अकादमिक सत्र और नवीनतम तकनीकों पर विस्तृत चर्चा।कार्यक्रम को प्रतिभागियों और विशेषज्ञों से अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इस सफल आयोजन ने न केवल अनुभवी विशेषज्ञों और युवा सर्जनों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान सुनिश्चित किया, बल्कि IRPGIMSR और NRCH को देश में सर्जिकल शिक्षा, चिकित्सा नवाचार और कौशल विकास के अग्रणी केंद्र के रूप में भी नई पहचान दिलाई।

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