अमृत भारत स्टेशन योजना में राजस्थान में 85 स्टेशनों का पुनर्विकास : अश्विनी

राज्य के लिए रेलवे बजट बढ़कर ₹10,228 करोड़ हुआ खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत राजस्थान में 85 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिनमें से 15 स्टेशन पूरे हो चुके हैं। जैसलमेर, बाड़मेर, बूंदी, मंडलगढ़ और सोमेसर सहित कई स्टेशन अब आधुनिक सुविधाओं के साथ यात्रियों की सेवा कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि अलवर रेलवे स्टेशन का ₹112 करोड़ की लागत से पुनर्विकास किया जा रहा है। परियोजना के तहत दो साइड एंट्री, अतिरिक्त हाई लेवल प्लेटफॉर्म, 6 मीटर चौड़ाई के दो फुट ओवरब्रिज, 9 लिफ्ट, आधुनिक पार्किंग और बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था विकसित की जा रही है। स्टेशन का निर्माण राजस्थान की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और राज्य मंत्री संजय शर्मा भी शामिल हुए।रेल मंत्री ने बताया कि राजस्थान में वर्तमान में 5 वंदे भारत ट्रेनें और एक अमृत भारत एक्सप्रेस संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए रेलवे बजट बढ़कर ₹10,228 करोड़ हो गया है तथा 2014 के बाद लगभग 3,900 किलोमीटर नई रेलवे लाइन और दोहरीकरण कार्य किए गए हैं।

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आईआरएफसी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में किया शानदार प्रदर्शन

रणनीतिक विविधीकरण के पहले पूर्ण वर्ष में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल कीकंपनी की एसेट अंडर मैनेजमेंट बढ़कर रिकॉर्ड 4.85 लाख करोड़ रुपये पहुंची खबर है..नई दिल्लीरेल मंत्रालय के अंतर्गत नवरत्न सीपीएसई भारतीय रेलवे वित्त निगम (आईआरएफसी) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया। कंपनी का वार्षिक शुद्ध लाभ 7.80 प्रतिशत बढ़ा, साथ ही राजस्व में भी सकारात्मक वृद्धि हुई। विविधीकरण आधारित विस्तार के कारण कंपनी के स्प्रेड और नेट इंटरेस्ट मार्जिन में लगातार सुधार हुआ तथा कंपनी ने अपना शून्य एनपीए का रिकॉर्ड बरकरार रखा।कंपनी ने संकेत दिया कि मेट्रो, बंदरगाह और अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में उभरते अवसरों तथा मजबूत परियोजना पाइपलाइन के चलते आने वाले वित्त वर्ष में विकास और तेज होने की उम्मीद है। इस अवसर पर कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनोज कुमार दुबे ने कहा‌ कि वित्तीय वर्ष 2025-26 आईआरएफसी के लिए एक निर्णायक वर्ष रहा है। हमने रेलवे इकोसिस्टम के बुनियादी ढांचे को समर्थन देने की अपनी मूल जिम्मेदारी निभाते हुए एक विविधीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया है। हमारी विविधीकरण रणनीति अब बेहतर स्प्रेड, उच्च मार्जिन और शेयरधारकों के लिए अधिक मूल्य के रूप में दिखाई दे रही है। आईआरएफसी ने व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की अपनी क्षमता साबित की है, साथ ही वित्तीय अनुशासन और शून्य एनपीए की परंपरा भी कायम रखी है।उन्होंने आगे कहा कि 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही और वित्त वर्ष के ऑडिटेड वित्तीय परिणाम आईआरएफसी के बिजनेस मॉडल में एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाते हैं, जिसमें कंपनी पारंपरिक रेलवे फाइनेंसर से एक विविधीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग संस्था के रूप में विकसित हुई है, जबकि रेलवे अभी भी उसके केंद्र में है।वर्ष 1986 में मुख्य रूप से भारतीय रेल के लिए धन जुटाने हेतु स्थापित आईआरएफसी ने पिछले एक वर्ष में अपने पारंपरिक ऋण मॉडल पर निर्भरता कम होने के बाद अपनी रणनीति में बदलाव किया है। वित्तीय वर्ष 24 से भारतीय रेल द्वारा नए ऋण वितरण नहीं लेने के कारण कंपनी ने बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन, उर्वरक तथा रेलवे से जुड़े बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में विस्तार किया है।वित्तीय वर्ष 26 के दौरान आईआरएफसी ने 72,949 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी और लगभग 35,067 करोड़ रुपये का वितरण किया, जो उसके वार्षिक लक्ष्य से अधिक रहा। कंपनी ने प्रतिस्पर्धी और द्विपक्षीय वित्तपोषण अवसरों में सक्रिय भागीदारी करते हुए लगभग 56,251 करोड़ रुपये की बोलियां हासिल कीं। प्रमुख सौदों में कंपनी ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन लिमिटेड के विश्व बैंक ऋण को 9,821 करोड़ रुपये की दीर्घकालिक रुपये सुविधा के माध्यम से पुनर्वित्त किया, जिससे लगभग 2,700 करोड़ रुपये की बचत हुई।इसके अलावा, आईआरएफसी ने हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के लिए 12,842 करोड़ रुपये का पुनर्वित्त सौदा किया, जो उर्वरक क्षेत्र में बड़े पुनर्वित्त सौदों में कंपनी की एंट्री मानी जा रही है। कंपनी ने बाहरी वाणिज्यिक उधार सौदों के माध्यम से वैश्विक बाजारों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत की, जहां निवेशकों की मजबूत भागीदारी देखने को मिली और उधारी लागत को कम करने में मदद मिली।विविधीकरण रणनीति के चलते कंपनी की लाभप्रदता में भी सुधार हुआ है। उच्च प्रतिफल वाले एसेट्स के कारण वित्तीय वर्ष 26 में नेट इंटरेस्ट मार्जिन बढ़कर 1.50 प्रतिशत पहुंच गया।मजबूत बैलेंस शीट, विविधीकृत पोर्टफोलियो और उभरते इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में बढ़ते अवसरों के साथ आईआरएफसी अब देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसर के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है, जबकि कंपनी जोखिम प्रबंधन और ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण के तहत आगे बढ़ रही है।

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अहमदाबाद (सरखेज) – धोलेरा सेमी हाई-स्पीड दोहरी लाइन परियोजना को मंजूरी

खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाली अहमदाबाद (सरखेज) – धोलेरा सेमी हाई-स्पीड दोहरी लाइन परियोजना को मंजूरी दी है। स्वदेशी रूप से विकसित तकनीक से निर्मित भारतीय रेलवे की यह पहली सेमी हाई-स्पीड परियोजना होगी।इस परियोजना खंड से अहमदाबाद, धोलेरा एसआईआर, धोलेरा का आगामी हवाई अड्डा और लोथल राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (एनएचएमसी) के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा। अहमदाबाद को धोलेरा से जोड़ने से यात्रियों का यात्रा समय कम होगा, जिससे दैनिक आवागमन आरामदायक होगा और एक ही दिन में वापसी यात्रा संभव हो सकेगी। यह सेमी हाई-स्पीड रेलवे न केवल दो शहरों को करीब लाएगा, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों को भी एक-दूसरे के करीब लाएगा।भारत की पहली सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना के रूप में यह परियोजना एक अग्रणी परियोजना के रूप में काम करेगी और देश भर में सेमी हाई-स्पीड रेल के चरणबद्ध विस्तार के लिए एक संदर्भ मॉडल के रूप में कार्य करेगी।इस नये रेल लाइन प्रस्ताव से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी और आवागमन में सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की कार्यकुशलता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। यह परियोजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। इससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।इस परियोजना को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्‍टीमॉडल संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।गुजरात के अहमदाबाद जिले को शामिल करने वाली इस परियोजना से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 134 किलोमीटर की वृद्धि होगी। प्रस्तावित परियोजनाओं से लगभग 284 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 5 लाख है।

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एम्स दिल्ली चिकित्सा नवाचार का उत्कृष्ट केंद्र : उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने एम्स के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया खबर है..नई दिल्लीउपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान -एम्स, नई दिल्ली के 51वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में एम्स के योगदान का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह संस्थान चिकित्सा नवाचार और स्वास्थ्य सेवा उत्कृष्टता में देश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जो रोगी देखभाल और आधुनिक चिकित्सा के उच्चतम मानक स्थापित करते हुए आम लोगों के लिए काफी सस्ते दर पर इलाज प्रदान करने वाला बना हुआ है। उन्होंने कहा कि महामारी से निपटने की क्षमता से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच तक, “एम्स ब्रांड” समूचे भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र में भरोसे और सत्यनिष्ठा का पर्याय बन गया है।उपराष्ट्रपति ने शैक्षणिक मानकों से समझौता किए बिना बड़ी संख्या में रोगियों के कुशल चिकित्सा प्रबंधन के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और एम्स के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, संस्थान के निदेशक और संकाय सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एम्स दशकों से ऐसे विशेषज्ञ तैयार करता आ रहा है जिनमें चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ ही नैतिकता और सहानुभूति की भावना प्रबल है। इसी भावना के साथ संस्थान के पूर्व छात्र विश्व भर के प्रतिष्ठित संस्थानों में अग्रणी पदों पर आसीन हैं।इस वर्ष के आरंभ में अंटार्कटिका में दूरस्थ रोबोटिक अल्ट्रासाउंड आयोजित करने में एम्स की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि इसने सिद्ध कर दिया है कि भौगोलिक स्थिति अब भारतीय चिकित्सा उत्कृष्टता में बाधक नहीं है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग के लिए भारत-फ्रांस केंद्र सहित संस्थान के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय सहयोगों का भी उल्लेख किया।उपराष्ट्रपति ने कहा कि एम्स अब स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा दोनों ही क्षेत्रों में वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है। क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग का उल्लेख करते हुए श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि एम्स ने केवल दो वर्षों में 40 पायदान ऊपर चढ़कर वैश्विक स्तर पर 105वां स्थान हासिल कर लिया है। उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान शीघ्र ही इस रैंकिंग में शीर्ष 100 संस्थानों में शामिल हो जाएगा और एक दिन दुनिया का अग्रणी संस्थान बनेगा। उन्होंने कहा कि एम्स ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क के तहत मेडिकल कॉलेजों को दी जाने वाली वार्षिक श्रेणी में 2018 से 2025 तक लगातार शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।उपराष्ट्रपति ने संस्थान के संकाय सदस्यों और अनुसंधानकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि एम्स की उत्कृष्टता वर्षों से इसके संकाय सदस्यों को मिले असंख्य पद्म पुरस्कारों में परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि इस विशिष्ट सूची में 2 पद्म विभूषण, 15 पद्म भूषण और 51 पद्म श्री पुरस्कार विजेता शामिल हैं, जबकि 57 संकाय सदस्य विश्व स्तर पर स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हैं।उत्तीर्ण डॉक्टरों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके द्वारा धारण किया गया सफेद कोट व्यक्तिगत सफलता से कहीं अधिक अपेक्षाएं वहन करता है। उन्होंने छात्रों से विनम्रता, उत्कृष्टता और सहानुभूति के साथ समाज की सेवा करने और यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि उनका कार्य पेशेवर कौशल और व्यापक कल्याण की प्रतिबद्धता दोनों को प्रतिबिंबित करे।इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और एम्स नई दिल्ली के अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा; एम्स नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर निखिल टंडन; संस्थान की डीन प्रोफेसर राधिका टंडन; संस्थान के रजिस्ट्रार प्रोफेसर गिरिजा प्रसाद रथ; संकाय सदस्य, स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ, मेडिकल छात्र-छात्राएं और विशिष्ट जन उपस्थित थे।

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अश्विनी वैष्णव ने दोहरीघाट-मऊ-औड़िहार यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

नई दैनिक रेल सेवा से मऊ और गाजीपुर जिलों के यात्रियों को किफायती, सुरक्षित और आरामदायक संपर्क सुविधा मिलेगी रेल मंत्री:यह ट्रेन सेवा वाराणसी तक बढ़ाई जाएगीरेल मंत्री ने पूर्वांचल से राष्ट्रीय राजधानी के लिए जल्द ही एक और ट्रेन शुरू करने का वादा किया खबर है..नई दिल्लीरेल, सूचना एवं प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए दोहरीघाट-औड़िहार यात्री ट्रेन को वर्चुअल रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। शुभारंभ समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा, सांसद राजीव राय और अन्य गणमान्य व्यक्ति तथा वरिष्ठ रेल अधिकारी उपस्थित थे।यह उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में रेल संपर्क और यात्री सुविधा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रेल यात्रियों की सुविधा और मऊ और गाजीपुर जिलों के लोगों की सीधी दैनिक रेल सेवा की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए यह नई रेल सेवा शुरू की गई है।यह ट्रेन सादत, जखनियां, दुल्लापपुर, मऊ, इंदारा, कोपागंज, घोसी, अमिला और मुरादपुर स्टेशनों पर रुकेगी। इस ट्रेन सेवा का विस्तार जल्द ही वाराणसी तक किया जाएगी। इस ट्रेन में 8 कोच होंगे, जिनमें दैनिक यात्रियों और मार्ग पर अन्य यात्रियों के लिए आरामदायक और सुविधाजनक यात्रा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए यात्री कोच शामिल हैंपूर्वांचल क्षेत्र से दिल्ली के लिए बेहतर कनेक्टिविटी की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए, श्री वैष्णव ने उत्तरी गंगा कॉरिडोर से शुरू की जाने वाली एक नई एक्सप्रेस ट्रेन की घोषणा की। यह ट्रेन छपरा, बलिया, मऊ, आजमगढ़, शाहगंज, जौनपुर, सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, गाजियाबाद और आनंद विहार को जोड़ेगी। उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों को आश्वासन दिया कि यह सेवा शीघ्र ही शुरू की जाएगी।

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कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की 49वीं बैठक आयोजित

बैठक में शामिल हुए देशभर के शीर्ष कर्मचारी नेता शिव गोपाल मिश्रा और राघवैय्या ने रखी कर्मचारी पक्ष की बात खबर है..नई दिल्लीसंयुक्त परामर्श तंत्र (जेसीएम) की राष्ट्रीय परिषद की 49वीं बैठक सोमवार को सेवा तीर्थ के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव ने की। इस बैठक में कर्मचारी पक्ष के नेता राघवैय्या और कर्मचारी पक्ष के सचिव शिव गोपाल मिश्रा के साथ-साथ कर्मचारी पक्ष के 28 अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सरकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व प्रमुख मंत्रालयों और विभागों के सचिवों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने किया जिनमें सचिव (कार्मिक) और व्यय विभाग के सचिव शामिल थे।बैठक की शुरुआत में, अध्यक्ष ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और सदस्यों, विशेष रूप से कर्मी पक्ष को, जेसीएम योजना के 60 गौरवशाली वर्ष पूरे होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह योजना 1966 में शुरू की गई थी और वर्ष 2026 में अपना हीरक जयंती वर्ष मना रही है।जेसीएम तंत्र के महत्व की जानकारी देते हुए, अध्यक्ष ने कहा कि अपनी स्थापना के बाद से ही, संयुक्त परामर्श तंत्र ने सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच संवाद और परामर्श को संस्थागत रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब तक राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की कुल 48 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।इसके अतिरिक्त, यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय परिषद की बैठकें कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में, कर्मचारी पक्ष और सरकारी पक्ष दोनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में आयोजित की जाती हैं, जैसा कि इस योजना के अंतर्गत परिकल्पित है। राष्ट्रीय परिषद की 48वीं बैठक 26 जून 2021 को आयोजित की गई थी, जिसके बाद स्थायी समिति की तीन बैठकें भी बुलाई गईं। इसके अलावा, कर्मचारियों के कल्याण और सेवा शर्तों से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श करने के लिए मंत्रालय स्तर पर विभागीय परिषद की बैठकें भी निरंतर आयोजित की जा रही हैं।चेयरमैन ने कहा कि जेसीएम व्यवस्था के तहत लगातार चर्चाओं से कर्मचारियों के कई मुद्दों और शिकायतों को सुलझाने में मदद मिली है। इससे उनके हित में विभिन्न निर्देशों और दिशानिर्देशों में बदलाव किए गए हैं।49वीं बैठक के दौरान, कर्मचारी पक्ष द्वारा पेश किए गए 24 एजेंडा बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। हर बिंदु पर स्वस्थ और रचनात्मक चर्चा हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने कर्मचारियों के हित में सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुँचने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास किए। कई मुद्दे पहले से ही संबंधित मंत्रालयों और विभागों के सक्रिय विचाराधीन हैं।बैठक में सरकार की इस प्रतिबद्धता को दोहराया गया कि वह रचनात्मक परामर्श व्यवस्था बनाए रखेगी और लगातार बातचीत तथा सहयोग के माध्यम से कर्मचारियों के कल्याण को बढ़ावा देगी।

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाएंनागपुर में 17 और 18 मई को ‘जल-संवाद’ और ‘जलक्रांति’ सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे

खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि विदर्भ को किसान आत्महत्या के क्षेत्र के कलंक से मुक्त करने और विदर्भ के गाँवों में जल समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए यहां जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना चाहिए।विदर्भ में जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था के रजत जयंती समारोह के अवसर पर 17 और 18 मई को नागपुर में “जलसंवाद” (जल संवाद) और “जलक्रांति” (जल क्रांति) सम्मेलनों का आयोजन किया गया है।गडकरी आज आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे, जिसमें विधायक चरणसिंह ठाकुर और उमेश यावलकर भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि देश में जल की कमी नहीं है; बल्कि जल संसाधनों की उचित योजना और प्रबंधन की कमी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई और कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जल प्रबंधन संभव है।उन्होंने बताया कि फार्म तालाबों से निकाली गई मिट्टी का उपयोग अकोला, वाशिम और बुलढाणा जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में किया गया है, जिससे पश्चिमी विदर्भ में भूजल स्तर बढ़ा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि क्षेत्र के किसानों ने अपनी फसल पैटर्न बदल ली है। श्री गडकरी ने यह जोर दिया कि गैर सरकारी संगठनों की जल संरक्षण में भागीदारी महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता की सक्रिय भागीदारी समान रूप से मूल्यवान है, इसलिए जल संरक्षण को जन आंदोलन बनना चाहिए । उन्होंने आगे कहा कि वारूड-मोरशी और कटोल-नरखेड़ के भूजल-कमी वाले “डार्क जोन” क्षेत्रों में नदियों और नालों के गहनकरण संबंधी संरक्षण कार्य जनभागीदारी से किए जा रहे हैं और इन प्रयासों से क्षेत्र में जल संरक्षण परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं। गडकरी ने स्थानीय स्वशासन निकायों से इन पहलों में महत्वपूर्ण योगदान देने की अपील भी की।पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था पिछले 25 वर्षों से जल संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। संगठन द्वारा विकसित ‘तमस्वदा मॉडल’ को देशभर में मान्यता मिल रही है। संगठन के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में नागपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया गया है। रजत जयंती समारोह दो चरणों में होंगे 17 मई 2026 को “नागपुर जलसंवाद-2026” और 18 मई 2026 को “जलक्रांति सम्मेलन”। देशभर से प्रमुख जल विशेषज्ञ, पद्म पुरस्कार विजेता और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियाँ इन आयोजनों में भाग लेने वाली हैं।

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प्रधानमंत्री तेलंगाना में लगभग ₹1,535 करोड़ की रेल परियोजनाएं करेंगे राष्ट्र को समर्पित

इससे रेल संपर्क मज़बूत होगा, भीड़ कम होगी और यात्रियों की आवाजाही बेहतर होगी खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 मई 2026 को तेलंगाना में लगभग ₹1,535 करोड़ की प्रमुख रेलवे अवसंरचना परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह इस क्षेत्र में रेल संपर्क को मज़बूत करने, परिचालन दक्षता में सुधार करने और यात्रियों व माल की आवाजाही को बेहतर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।ये परियोजनाएँ भारतीय रेल के उन लगातार प्रयासों का हिस्सा हैं जिनका उद्देश्य महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर को आधुनिक बनाना, भीड़भाड़ वाले खंडों को भीड़-मुक्त करना और यात्रियों को तेज़, सुरक्षित व अधिक विश्वसनीय यात्रा का अनुभव प्रदान करना है।इन परियोजनाओं का एक प्रमुख घटक काज़ीपेट-विजयवाड़ा मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना के कई खंड हैं, जो 118 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। इनमें वारंगल-काज़ीपेट, नेकोंडा-महबूबाबाद और एर्रुपालेम-डोर्नकल जंक्शन रेल खंड शामिल हैं। इस परियोजना से तेलंगाना के हनुमकोंडा, वारंगल, महबूबाबाद और खम्मम जैसे प्रमुख ज़िलों को फ़ायदा होगा।यह कॉरिडोर व्यस्त ‘ग्रैंड ट्रंक’ मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण यात्री और माल यातायात को संभालता है। मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना लाइन की क्षमता में काफ़ी वृद्धि करेगी। इससे रेलगाड़ियों का परिचालन अधिक सुचारू और तेज़ हो सकेगा। इसके साथ ही अधिक उपयोग वाले मार्गों पर भीड़ भी कम होगी। इससे रेलगाड़ियों के समय की पाबंदी में सुधार होने, मालगाड़ियों के ठहराव में कमी आने और पूरे क्षेत्र में माल की अधिक कुशल आवाजाही संभव होने की आशा है।प्रधानमंत्री 21 किलोमीटर लंबा काज़ीपेट रेल अंडर रेल बाईपास भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजना है। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र के सबसे व्यस्त रेल जंक्शनों में से एक, काज़ीपेट जंक्शन पर भीड़भाड़ को कम करना है।यह बाईपास हैदराबाद, बल्हारशाह और विजयवाड़ा की ओर रेलगाड़ियों की एक साथ आवाजाही को संभव बनाएगा। इससे परिचालन में लचीलापन काफ़ी बढ़ जाएगा और रेलगाड़ियों का प्रतीक्षा समय कम हो जाएगा। यह परियोजना इस व्यस्त जंक्शन पर परिचालन संबंधी टकरावों और क्रॉसिंग में होने वाली देरी को कम करेगी। इससे रेलगाड़ियों की समय की पाबंदी बेहतर होगी और उनका परिचालन सुव्यवस्थित हो जाएगा।कुल मिलाकर, ये रेल अवसंरचना परियोजनाएं भारतीय रेल का उच्च क्षमता वाला और भविष्य के लिए तैयार रेल नेटवर्क बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। यह नेटवर्क आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा, यात्रियों की सुविधा में सुधार करेगा है और तेलंगाना तथा पड़ोसी राज्यों के बीच क्षेत्रीय संपर्क को मज़बूत बनाएगा।

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भारतीय रेल ने उत्तर रेलवे के 1,478 रूट किलोमीटर पर दी कवच प्रणाली के विस्तार को मंजूरी

खबर है..नई दिल्लीरेल सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में भारतीय रेल ने उत्तर रेलवे के अहम मार्गों पर स्वदेशी कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के विस्तार को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर लगभग ₹362 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसके तहत फिरोजपुर और जम्मू मंडल के करीब 1,478 रूट किलोमीटर पर कवच प्रणाली स्थापित की जाएगी।परियोजना के अंतर्गत फिरोजपुर मंडल के शेष 1,012 रूट किलोमीटर पर लगभग ₹241 करोड़ की लागत से कवच लगाया जाएगा। वहीं जम्मू मंडल में जलंधर सिटी जंक्शन-जम्मू तवी-श्री माता वैष्णो देवी कटरा, बटाला जंक्शन-पठानकोट जंक्शन और बनिहाल-बारामूला सेक्शनों के लगभग 466 रूट किलोमीटर पर करीब ₹121 करोड़ की लागत से कवच प्रणाली स्थापित की जाएगी।इसके तहत रेलवे ट्रैक के किनारे स्थायी कवच सिस्टम लगाए जाएंगे। साथ ही, 40 मीटर ऊंचे संचार टावर और एंटीना इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा, ताकि सुरक्षा प्रणाली बेहतर और निर्बाध तरीके से कार्य कर सके।कवच भारत में विकसित एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो किसी भी आपात स्थिति में स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन टक्कर जैसी घटनाओं को रोकने में मदद करता है। यह तकनीक लोको पायलट को सुरक्षित ट्रेन संचालन में सहयोग देती है, क्योंकि इसके माध्यम से लोकोमोटिव, सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रैक पर लगे उपकरणों के बीच लगातार संपर्क बना रहता है।इन महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर कवच प्रणाली लागू होने से ट्रेन संचालन और अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और सुगम बनेगा। भारतीय रेल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के तहत देशभर में कवच प्रणाली का तेजी से विस्तार कर रही है, जिससे रेलवे नेटवर्क को सुरक्षित, आधुनिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा सके।

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पीएम-सेतु के तहत उत्कृष्टता केंद्र के लिए कानपुर स्थित एनएसटीआई में उद्योग परामर्श बैठक

बैठक की अध्यक्षता एमएसडीई की सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने की खबर है..नई दिल्लीकेन्द्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने कानपुर स्थित राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (एनएसटीआई) में एक उद्योग परामर्श बैठक का आयोजन किया, जिसमें प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता परिवर्तन उन्नत आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना के तहत वैमानिकी और संबद्ध क्षेत्रों के लिए एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) की स्थापना पर विचार-विमर्श किया गया।इस बैठक की अध्यक्षता एमएसडीई की सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने की। इसमें डीजीटी के महानिदेशक श्री दिलीप कुमार सहित डीजीटी के वरिष्ठ अधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के निदेशक तथा अग्रणी उद्योग और बहुपक्षीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।इस परामर्श बैठक में रक्षा एयरोस्पेस, नागरिक विमानन, सटीक अभियांत्रिकी और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों के 25 से अधिक संगठनों ने भाग लिया। इसमें हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), डसॉल्ट एविएशन इंडिया, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एल एंड टी प्रेसिजन इंजीनियरिंग, अदानी स्किल डेवलपमेंट सेंटर, होंडा मोटर्स, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, जेके सीमेंट, नामटेक (एनएएमटीईसीएच), इनोवेटिव इंडिया लिमिटेड, इनोविजन लिमिटेड, जेआईटीएम, आईसीआईसीआई फाउंडेशन, नेट प्लांट प्राइवेट लिमिटेड, एवीपीएल इंटरनेशनल, नेवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड (एनयूपीपीएल) के साथ-साथ एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और विश्व बैंक शामिल थे।चर्चाओं का मुख्य केन्द्र पाठ्यक्रम निर्माण, प्रशिक्षण संचालन, अवसंरचना विकास तथा अप्रेन्टिसशिप संबंधों में उद्योग भागीदारी को मजबूत करना रहा, ताकि एयरोस्पेस और संबद्ध क्षेत्रों की उभरती कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जा सके। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि कानपुर के एनएसटीआई में प्रस्तावित यह राष्ट्रीय उत्कृष्टापूर्ण (एनसीओई) उद्योगों के सक्रिय सहयोग से विकसित किया जाएगा तथा इसका उद्देश्य उच्च स्तरीय विनिर्माण और वैमानिकी व्यवसायों में प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ाना है। यह पहल भारत के विकसित होते एयरोस्पेस इकोसिस्टम के लिए एक कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायक होगी।मंत्रालय ने पुन: दोहराया कि एनएसटीआई कानपुर में स्थापित होने वाला यह राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र (एनसीओई) मजबूत औद्योगिक सह-निवेश, भारत-फ्रांस द्विपक्षीय सहयोग तथा पीएम-एसईटीयू ढांचे पर आधारित एक आदर्श संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। यह प्रतिवर्ष हजारों वैमानिकी और संबद्ध क्षेत्र के पेशेवरों को प्रशिक्षित करेगा, भारत के बढ़ते वैमानिकी और संबद्ध क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से योगदान करेगा तथा एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के राष्ट्र विजन को सशक्त करेगा। मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि पीएम-सेतु के घटक-I के अंतर्गत हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाया गया है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश में अलीगंज, साकेत, पांडू नगर कानपुर, मुजफ्फरनगर, आगरा, नैनी प्रयागराज, वाराणसी और चरगावां गोरखपुर जैसे आईटीआई क्लस्टर की पहचान की गई है। इन कल्स्टरों में हब आईटीआई स्पोक आईटीआई के नेटवर्क का मार्गदर्शन करेंगे, जिससे क्षेत्रीय कौशल इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सके, प्रशिक्षण गुणवत्ता में सुधार हो तथा उद्योगों से जुड़ाव बढ़ाया जा सके।यह परामर्श पीएम-सेतु योजना के अंतर्गत आईटीआई के आधुनिकीकरण तथा व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण में उद्योग सहभागिता को मजबूत करने के लिए जारी प्रयासों का हिस्सा है।

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