₹220 करोड़ की मारारिकुल्लम–आलप्पुष़ा रेल दोहरीकरण परियोजना को मंजूरी

खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेल ने दक्षिण रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने और रेल क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केरल के 10.65 किलोमीटर लंबे मारारिकुल्लम–आलप्पुष़ा रेल सेक्शन के दोहरीकरण को लगभग ₹220 करोड़ की लागत से मंजूरी दे दी है।यह परियोजना रेलवे नेटवर्क की क्षमता वृद्धि के लिए स्वीकृत दोहरीकरण, तिहरीकरण, चौथी लाइन, फ्लाईओवर और बाईपास कार्यों के व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है। मारारिकुल्लम–आलप्पुष़ा सेक्शन वर्तमान में एरणाकुलम –तुरवूर –आलप्पुष़ा –अम्बलप्पुष़ा – कायमकुलम रेल कॉरिडोर का एकमात्र शेष एकल रेल लाइन खंड है, जबकि इस मार्ग के अन्य हिस्सों में दोहरीकरण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है या निर्माणाधीन है।परियोजना पूरी होने के बाद प्रतिदिन दोनों दिशाओं में 9 अतिरिक्त यात्री ट्रेनों के संचालन की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही, प्रतिवर्ष लगभग 2.88 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। इससे रेलवे को अनुमानित ₹3.08 करोड़ की अतिरिक्त वार्षिक शुद्ध आय प्राप्त होने की संभावना है।इस दोहरीकरण से यात्री एवं मालगाड़ियों के ठहराव और प्रतीक्षा समय में कमी आएगी, परिचालन दक्षता बेहतर होगी तथा ट्रेनों का संचालन अधिक तेज और सुचारु बन सकेगा। इसके अलावा, रेल लाइन की क्षमता बढ़ने से समयपालन में सुधार होगा और पूरे क्षेत्र में रेल संपर्क अधिक मजबूत होगा।यह परियोजना भारतीय रेल के मिशन 3000 MT तथा उच्च घनत्व यातायात नेटवर्क कॉरिडोर के अंतर्गत चिन्हित की गई है। आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें वित्तीय आंतरिक प्रतिफल दर (FIRR) 3.99% और आर्थिक आंतरिक प्रतिफल दर (EIRR) 22.30% आंकी गई है।भारतीय रेल के अनुसार, परियोजना के पूरा होने से रेल परिचालन अधिक कुशल होगा, यात्री और माल सेवाओं में सुधार आएगा तथा केरल के क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

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दिल्ली-एनसीआर में बीएस-IV डीज़ल वाणिज्यिक वाहनों को वैध आयु पूरी होने तक चले : एआईएमटीसी

खबर है..नई दिल्लीदेश के सड़क परिवहन क्षेत्र के सर्वोच्च संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने दिल्ली-एनसीआर में बीएस-IV डीज़ल वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने तथा 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में उनके प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।एआईएमटीसी ने कहा कि प्रस्तावित प्रतिबंधों से हजारों ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, फ्लीट मालिकों, वाहन चालकों और छोटे उद्यमियों की आजीविका प्रभावित होगी, क्योंकि उनकी निर्भरता बीएस-IV वाहनों पर है। संगठन का कहना है कि ये वाहन उस समय लागू सरकारी नीतियों, कानूनों और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप वैध रूप से खरीदे और पंजीकृत किए गए थे।एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने कहा,“बीएस-IV वाणिज्यिक वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध अनुचित, मनमाना और हजारों ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के लिए आर्थिक रूप से विनाशकारी साबित होगा। परिवहन व्यवसायियों ने इन वाहनों में करोड़ों रुपये का निवेश इस भरोसे के साथ किया था कि उन्हें निर्धारित आयु तक संचालन की अनुमति मिलेगी। ऐसे वाहनों को समय से पहले सड़कों से हटाना कानून का पालन करने वालों को दंडित करने जैसा है।”सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवालाएआईएमटीसी ने 17 दिसंबर 2025 को एम.सी. मेहता बनाम भारत सरकार एवं अन्य मामला में आए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि बीएस-IV और उससे उच्च उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के मालिकों के विरुद्ध केवल वाहन की आयु के आधार पर कठोर कार्रवाई न करने की बात कही गई थी। संगठन का तर्क है कि इससे स्पष्ट होता है कि बीएस-IV वाहनों को उनकी वैध आयु पूरी करने तक संचालन की अनुमति मिलनी चाहिए।डॉ. सभरवाल ने कहा कि बीएस-IV वाहनों की तुलना बीएस-I, बीएस-II और बीएस-III वाहनों से नहीं की जा सकती, क्योंकि इनमें उन्नत प्रदूषण नियंत्रण तकनीक और आधुनिक एग्जॉस्ट सिस्टम लगे हैं। वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के साथ ये वाहन निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन करते हैं।एआईएमटीसी ने चेतावनी दी कि अचानक प्रतिबंध से परिवहन क्षेत्र, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स लागत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। आवश्यक वस्तुओं, खाद्यान्न, दवाइयों, औद्योगिक सामान और निर्माण सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने से इसका असर आम जनता तक पहुंच सकता है।एआईएमटीसी की प्रमुख मांगेंबीएस-IV वाणिज्यिक वाहनों को फिटनेस मानकों और वैध PUCC के आधार पर निर्धारित आयु पूरी होने तक संचालन की अनुमति दी जाए।वैध रूप से खरीदे और पंजीकृत वाहनों को समय से पहले अनुपयोगी घोषित न किया जाए।1 नवंबर 2026 से दिल्ली-एनसीआर में बीएस-IV वाहनों के प्रवेश एवं संचालन पर प्रस्तावित प्रतिबंध वापस लिया जाए। बीएस-VI और इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तन के लिए सरकार कम से कम 50% प्रोत्साहन (इंसेंटिव) प्रदान करे।एआईएमटीसी ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य है, लेकिन पर्यावरणीय नीतियों को व्यावहारिक, न्यायसंगत और सामाजिक रूप से संतुलित तरीके से लागू किया जाना चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि कानून का पालन करने वाले ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों की आर्थिक स्थिरता और आजीविका की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

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दिल्ली-एनसीआर में पुराने ट्रकों-ब बसों को बदलने के लिए ₹9,585 करोड़ की योजना को मंजूरी

दिल्ली-एनसीआर में करीब 2.07 लाख वाहन मालिकों (1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें) को इसका लाभ मिलने का अनुमान खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए पुराने ट्रकों और बसों के प्रतिस्थापन की दो वर्षीय ऐतिहासिक योजना को मंजूरी दी है। इस योजना पर कुल ₹9,585 करोड़ खर्च किए जाएंगे।योजना का वित्तपोषण नेशनल कैपिटल विजन प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी) द्वारा किया जाएगा, जबकि इसका क्रियान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय करेंगे। इसे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सहयोग से लागू किया जाएगा।योजना के तहत बीएस-IV या उससे पुराने ट्रक और बस मालिकों को अपने वाहनों को बीएस-VI या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। दिल्ली-एनसीआर में करीब 2.07 लाख वाहन मालिकों (1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें) को इसका लाभ मिलने का अनुमान है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 प्रदूषण का 14 प्रतिशत, कार्बन मोनोऑक्साइड का 40 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड का 63 प्रतिशत उत्सर्जन परिवहन क्षेत्र से होता है। कुल वाहनों में मात्र 3 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बावजूद ट्रक और बसें पीएम 2.5 उत्सर्जन का 36 प्रतिशत योगदान करती हैं।योजना के प्रमुख लाभकेंद्र सरकार की ओर से 5 वर्ष तक ऋण पर 5% ब्याज सब्सिडी।वाहन श्रेणी के अनुसार ₹4,800 तक मासिक ईंधन वाउचर।इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर एकमुश्त प्रोत्साहन राशिराज्यों द्वारा पंजीकरण शुल्क माफ और मोटर वाहन कर में 100% तक छूट।ऑटो कंपनियों की ओर से एक्स-शोरूम कीमत पर 8% तक छूट।बीएस-III या उससे पुराने वाहनों को पंजीकृत स्क्रैपिंग केंद्रों पर स्क्रैप कराना अनिवार्य होगा, जबकि बीएस-IV वाहनों को एनसीआर के बाहर। गैर-एनसीएपी शहरों में बेचा या स्क्रैप किया जा सकेगा।योजना का संचालन पूरी तरह डिजिटल पोर्टल के माध्यम से होगा, जिससे पात्रता जांच, सब्सिडी, ईंधन वाउचर और प्रदूषण में कमी की निगरानी वास्तविक समय में की जा सकेगी। इसकी निगरानी कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार समिति करेगी।

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भारत को वैश्विक टैलेंट हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम

इंडिया स्किल्स एक्सेलरेटर राउंडटेबल में कौशल अंतर दूर करने पर मंथन खबर है..नई दिल्लीदेश में तेजी से बदलती तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के बीच कौशल की कमी (स्किल गैप) को दूर करने तथा भारत को वैश्विक प्रतिभा केंद्र के रूप में मजबूत बनाने के उद्देश्य से कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय ने विश्व आर्थिक मंच के सहयोग से नई दिल्ली में उच्च स्तरीय ‘इंडिया स्किल्स एक्सेलरेटर’ राउंडटेबल का आयोजन किया।इस राउंडटेबल का विषय था — “फ्रॉम इनसाइट टू एक्शन: क्लोजिंग स्किल्स गैप्स फॉर ग्रोथ”, जिसमें सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विकास साझेदारों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया।इस कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता केंद्रीय कौशल एवं उद्यमिता विकास मंत्री जयंत चौधरी ने की। जनवरी 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद शुरू किए गए ‘इंडिया स्किल्स एक्सेलरेटर’ का संचालन कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय कर रहा है। यह पहल WEF के ग्लोबल एक्सेलरेटर्स नेटवर्क का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक-निजी साझेदारी के माध्यम से कौशल विकास प्रणाली को बदलती श्रम बाजार जरूरतों के अनुरूप बनाना है।राउंडटेबल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और ग्रीन इकोनॉमी जैसे उभरते क्षेत्रों में कार्यबल तैयार करने, कौशल वित्तपोषण के नए मॉडल विकसित करने और रोजगार क्षमता बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई।कार्यक्रम में जयंत चौधरी ने कहा कि यदि भारत कौशल को तकनीक और उद्योग की बदलती मांगों के अनुरूप ढालने में सफल रहता है, तो देश की जनसांख्यिकीय शक्ति विश्व का सबसे बड़ा विकास इंजन बन सकती है। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया स्किल्स एक्सेलरेटर’ केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि मिलकर समाधान तैयार करने का मॉडल है।वहीं डॉ. सुकांत मजूमदार ने शिक्षा और कौशल के बीच गहरे संबंध पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य में युवाओं को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि प्रासंगिक कौशल, अनुकूलन क्षमता और आजीवन सीखने की मानसिकता से लैस करना जरूरी होगा।राउंडटेबल का समापन सार्वजनिक-निजी सहयोग को मजबूत करते हुए कार्यबल परिवर्तन, कौशल वित्तपोषण, उभरती तकनीकों और समावेशी विकास के लिए साझा रोडमैप तैयार करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ। इसके निष्कर्ष भारत को भविष्य के लिए तैयार वैश्विक प्रतिभा केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे।

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एआईएमटीसी ने प्रधानमंत्री से डीज़ल कीमतों में तत्काल कटौती की मांग की

नई दिल्लीअंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आई उल्लेखनीय गिरावट के मद्देनज़र ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डीज़ल के दाम तत्काल कम करने की पुरजोर अपील की है।एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल ने कहा कि देशभर का परिवहन क्षेत्र इस समय गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। वाणिज्यिक वाहनों के संचालन खर्च का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा डीज़ल पर निर्भर है। डीज़ल की लगातार ऊँची कीमतों का सीधा असर लाखों ट्रक ऑपरेटरों, छोटे फ्लीट मालिकों, ड्राइवरों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि बढ़ती ईंधन लागत के कारण लॉजिस्टिक्स खर्च में वृद्धि हुई है, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ा है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें प्रभावित हुई हैं।डॉ. सभरवाल के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक रिपोर्टों के मुताबिक, मई 2026 के दौरान क्रूड ऑयल की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई है, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी मासिक गिरावटों में शामिल है। इसके बावजूद देश में डीज़ल की कीमतों में अपेक्षित राहत अब तक दिखाई नहीं दी है।उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी का लाभ परिवहन क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जाना चाहिए। इससे परिवहन क्षेत्र को तत्काल राहत मिलेगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, महंगाई नियंत्रण में मदद मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।एआईएमटीसी ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सड़क परिवहन क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों की चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र राहत प्रदान की जाएगी।

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तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान एप्लिकेशन का पायलट लॉन्च

युवाओं को निकोटीन की लत से बचाने पर जोर खबर है..नई दिल्लीतंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान एप्लिकेशन के पायलट संस्करण के शुभारंभ के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि देशभर में जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, डेंटल कॉलेजों, आयुष संस्थानों, गैर-संचारी रोग (एनसीडी) क्लीनिकों तथा अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं में 2,000 से अधिक तंबाकू त्याग केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने शिक्षण संस्थानों और परिसरों से तंबाकू मुक्त प्रथाओं को अपनाने तथा बनाए रखने की अपील की। साथ ही, हितधारकों और भागीदार संस्थानों से पायलट चरण के दौरान एप्लिकेशन का सक्रिय उपयोग कर सुझाव देने का आग्रह किया ताकि पहल को और प्रभावी बनाया जा सके। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि तंबाकू का सेवन कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, पुरानी श्वसन संबंधी बीमारियों सहित कई गैर-संचारी रोगों का प्रमुख कारण है और यह देश में मृत्यु एवं दिव्यांगता का बड़ा कारण बना हुआ है। उन्होंने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य पेशेवरों, प्रवर्तन एजेंसियों, नागरिक समाज संगठनों और सामुदायिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना करते हुए भावी पीढ़ियों को तंबाकू और निकोटीन की लत से बचाने के लिए सामूहिक सतर्कता और एकजुटता का आह्वान किया। संयुक्त सचिव प्रभाकर ने साक्ष्य-आधारित तंबाकू नियंत्रण नीतियों को बढ़ावा देने और युवाओं को उभरते निकोटीन एवं तंबाकू उत्पादों से सुरक्षित रखने में भारत की अग्रणी भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं उप महानिदेशक डॉ. एल. स्वास्तिचरण ने बच्चों, किशोरों और युवाओं को तंबाकू तथा निकोटीन की लत से बचाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।कार्यक्रम में “तंबाकू निषेध की शपथ” भी दिलाई गई, जिसके माध्यम से तंबाकू मुक्त और स्वस्थ भारत के निर्माण के प्रति सामूहिक संकल्प दोहराया गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एनटीसीपी वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन शपथ की सुविधा उपलब्ध कराते हुए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य हितधारकों से व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए नई दिल्ली स्थित HRIDAY के सहयोग से स्कूली छात्रों द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसमें तंबाकू सेवन और निकोटीन की लत के दुष्प्रभावों को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, स्वास्थ्य पेशेवरों, नागरिक समाज संगठनों और तंबाकू नियंत्रण क्षेत्र के अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

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ललितपुर–सिंगरौली रेल लाइन परियोजना: बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र को मिलेगी नई रेल कनेक्टिविटी

खबर है..नई दिल्लीललितपुर–सिंगरौली रेल लाइन परियोजना बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण रेल संपर्क परियोजना है। यह परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई पिछड़े एवं दूरस्थ क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने का कार्य करेगी।सिंगरौली–ललितपुर रेल लाइन पन्ना के जंगलों से होकर गुजरती है, जिससे मध्य प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र को झांसी–भोपाल मुख्य रेल लाइन से बेहतर संपर्क मिलेगा।पन्ना के जंगलों में प्रस्तावित एलाइनमेंट को लेकर सामने आई खबरों का केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संज्ञान लिया है। रेल मंत्री द्वारा एलाइनमेंट से संबंधित ड्रोन फोटो और टोपो शीट का अध्ययन किया गया। इसके बाद अधिकारियों की टीम को निर्देश दिए गए कि मौजूदा एलाइनमेंट का तकनीकी विशेषज्ञों के साथ पुनः विस्तृत अध्ययन किया जाए, ताकि अधिकतम संख्या में पेड़ों को संरक्षित किया जा सके। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित क्षेत्र में जितने पेड़ प्रभावित होंगे, उनसे दोगुनी से अधिक संख्या में पौधारोपण आगामी मानसून से पहले सुनिश्चित किया जाए। यह पहल विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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पर्यावरण के अनुकूल पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन जल्द दौड़ेगी, भारतीय रेलवे ने दी मंजूरी

खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेलवे ने देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन को पटरियों पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उत्तरी रेलवे के जिंद–सोनीपत खंड पर 10 डिब्बों वाली हाइड्रोजन ट्रेन को चलाने की मंजूरी दे दी गई है। यह ट्रेन 1200 किलोवाट इंजन से संचालित होगी और अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी।रेल मंत्रालय के अनुसार, यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित होगी, जिसमें हाइड्रोजन गैस की रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली पैदा होती है और उत्सर्जन के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। इससे यह पारंपरिक डीजल आधारित रेल प्रणालियों की तुलना में अधिक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल विकल्प मानी जा रही है।इस पहल के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जो स्वच्छ रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन तकनीक का परीक्षण या उपयोग कर रहे हैं। इनमें जर्मनी, जापान, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।हरियाणा के जिंद–सोनीपत रेलखंड को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है। जिंद में हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने की स्वदेशी सुविधा तैयार की गई है, जिसे सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक लाइसेंस भी मिल चुके हैं। ट्रेन के सुरक्षित संचालन के लिए हाइड्रोजन रिसाव और आग का पता लगाने वाले सेंसर, आपातकालीन कंप्रेसर यूनिट और 24×7 निगरानी प्रणाली की व्यवस्था की गई है।भारतीय रेलवे ने स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक चरण में प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी ट्रेन के साथ रहेंगे, ताकि संचालन पूरी तरह सुरक्षित और निर्बाध बना रहे। यह परियोजना ऊर्जा दक्षता, हरित परिवहन और शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों की दिशा में भारत का महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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पीएनजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: सरकार ने एलपीजी कनेक्शन नियमों में किया बदलाव

खबर है..नई दिल्लीकेंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस (पीएनजी) और एलपीजी कनेक्शन के बीच अधिक सुविधा और लचीलापन देने के उद्देश्य से लीक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन) संशोधन आदेश, 2026 की अधिसूचना जारी की है। इस संशोधन के तहत अब पीएनजी कनेक्शन लेने वाले एलपीजी उपभोक्ताओं को भविष्य में गैर-पीएनजी क्षेत्रों में एलपीजी कनेक्शन दोबारा प्राप्त करने का विकल्प मिलेगा।सरकार द्वारा 25 मई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, जिन घरेलू उपभोक्ताओं ने पीएनजी कनेक्शन ले लिया है, वे 30 दिनों के भीतर अपने एलपीजी कनेक्शन को हटाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके साथ ही उन्हें ट्रांसफर वाउचर प्राप्त करने का विकल्प भी दिया जाएगा, जिससे भविष्य में यदि वे किसी ऐसे क्षेत्र में स्थानांतरित होते हैं जहां पीएनजी सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो एलपीजी कनेक्शन पुनः बहाल कराया जा सकेगा।सरकार का कहना है कि यह संशोधन उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राहत और सुविधा प्रदान करेगा। विशेष रूप से यह व्यवस्था तबादला-प्रभावित कर्मचारियों, प्रवासी परिवारों, किरायेदारों और छात्रों के लिए लाभकारी साबित होगी, जिन्हें अक्सर शहर बदलना पड़ता है और हर स्थान पर पीएनजी सुविधा उपलब्ध नहीं होती।विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन स्थायी रूप से समाप्त कराने की चिंता से राहत मिलेगी और वे जरूरत के अनुसार भविष्य में दोबारा इसका लाभ उठा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा उपभोग प्रणाली अधिक उपभोक्ता-अनुकूल बनेगी और शहरी व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गैस वितरण व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

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सीबीएसई की तकनीकी खामियों की जांच करेगी आईआईटी मद्रास की टीम

खबर है..नई दिल्लीपरीक्षोत्तर पुनर्मूल्यांकन सेवाओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पोर्टल में आई तकनीकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञों की मदद लेने के निर्देश दिए हैं। अब इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मद्रास के प्रोफेसरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम सीबीएसई को तकनीकी चुनौतियों से निपटने में सहायता करेगी।शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष की परीक्षोत्तर पुनर्मूल्यांकन सेवाओं की घोषणा के बाद सामने आई तकनीकी खामियों की विस्तृत जांच आईआईटी मद्रास की टीम करेगी। यह निर्णय सीबीएसई के परिणामोत्तर सेवा पोर्टल में लॉगिन, सर्वर और अन्य तकनीकी दिक्कतों की शिकायतों के बाद लिया गया है।विशेषज्ञ टीम पोर्टल की स्थिरता, सर्वर प्रदर्शन और तकनीकी कार्यप्रवाहों की समीक्षा कर लक्षित सुधार लागू करेगी। साथ ही, आईटी अवसंरचना की मजबूती का आकलन कर लॉगिन प्रमाणीकरण, उपयोगकर्ता पहुंच प्रणाली और भुगतान गेटवे की सटीक एवं सुचारू कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुझाए जाएंगे।प्रधान ने स्पष्ट किया कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और सीबीएसई को एक पारदर्शी, कुशल और छात्र-हितैषी प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम प्राथमिकता के आधार पर उठाने चाहिए। यह पहल पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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