पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत

खबर है..नई दिल्लीपश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा जबरदस्त जीत हासिल करके चुनाव में भगवा को फहरा दिया है। इस चुनाव में सत्तारुढ़ दल तृणमूल कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा है। पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत दर्ज की और पुडुचेरी में सहयोगियों के साथ सरकार बचाने में सफलता हासिल की। तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने सबसे बड़ी पार्टी बनकर सबको चौंका दिया। असम में भाजपा की वापसी हुई है जबकि केरल में कांग्रेस ने वापसी करते हुए सत्ता परिवर्तन कर दिया।इन परिणामों ने साफ कर दिया कि भाजपा अब भी राष्ट्रीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली चुनावी ताकत बनी हुई है, हालांकि दक्षिण भारत में उसके सामने चुनौतियां कायम हैं। 126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा ने लगातार दूसरी बार स्पष्ट जनादेश हासिल किया है। देर तक के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार भाजपा 81 सीटें जीत चुकी थी। कांग्रेस 17 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी है। बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और असम गण परिषद (एजीपी) को 10-10 सीटें मिली हैं, जबकि एआईयूडीएफ 2 सीटें जीत सकी है।इस चुनाव में देश की निगाहें पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव पर टिकी हुई थीं। 294 सदस्यीय विधानसभा में 292 सीटों के रुझान/नतीजों के अनुसार भाजपा 208 सीटों पर जीत या बढ़त के साथ सत्ता के बेहद करीब पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस 79 सीटों पर सिमटती दिख रही है। भाजपा 173 सीटें जीत चुकी है और 35 पर आगे है. वहीं टीएमसी 59 सीटें जीतकर 20 सीटों पर आगे है. कांग्रेस को 2 सीटें मिली हैं।30 सदस्यीय पुडुचेरी विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बढ़त बनाए रखी है। अखिल भारतीय एन.आर. कांग्रेस (एआईएनआरसी) 11 सीटें जीतकर एक सीट पर आगे है। भाजपा को 4 सीटें मिली हैं। डीएमके 5 सीटों पर विजयी रही है, जबकि निर्दलीयों ने 3 सीटें जीती हैं। टीवीके ने यहां भी 2 सीटें जीतकर उपस्थिति दर्ज कराई है।तमिलनाडु के नतीजों ने सबसे बड़ा राजनीतिक सरप्राइज दिया। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके 234 सदस्यीय विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। पार्टी 93 सीटें जीत चुकी है और 14 सीटों पर आगे है‌‌।सत्तारूढ़ डीएमके 47 सीटें जीतकर 13 पर आगे रही, जबकि एआईएडीएमके 41 सीटें जीतकर 6 सीटों पर आगे है। कांग्रेस 3 सीटें जीतकर 2 पर आगे है. पीएमके 2 सीटों पर आगे है। हालांकि टीवीके बहुमत से दूर है, लेकिन पहली बार चुनाव लड़ते हुए यह प्रदर्शन तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।140 सदस्यीय केरल विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले मोर्चे ने सत्ता में वापसी की है कांग्रेस 63 सीटें जीत चुकी है। माकपा 26 सीटों पर सिमटी, जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को 22 सीटें मिली हैं। केरल कांग्रेस (केईसी) 7 सीटें जीत सकी है।

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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम 4 मई को, देशभर की नजरें टिकीं

खबर है..नई दिल्लीपश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इन नतीजों को लेकर पूरे देश में उत्सुकता बनी हुई है कि आखिर किस पार्टी को जनता का जनादेश मिलेगा और किसे हार का सामना करना पड़ेगा।चुनाव आयोग ने इन राज्यों में मतगणना की तैयारी पूरी कर ली है और सोमवार कल सुबह से मतगणना का कार्य शुरू हो जाएगा। समझा जाता है कि मत करना कुछ घंटे बाद रुझान का सिलसिला शुरू हो जाएगा और दोपहर बाद तक जीत हार के नतीजे आ जाएंगे।पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान हुआ, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले गए। वहीं असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ था।अगर प्रमुख मुकाबलों की बात करें तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर है। तमिलनाडु में मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कड़गम गठबंधन, अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम गठबंधन, टीवीके और एनटीके के बीच है।केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बीच मुकाबला है। असम में मुख्य लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच मानी जा रही है, जबकि पुडुचेरी में NDA और कांग्रेस गठबंधन आमने-सामने हैं।इन चुनावों में कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है, जिनमें ममता बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी, मोहम्मद सलीम, एम. के. स्टालिन, उद्धयनिधि स्टालिन, पिनारयी विजयन, वी. डी. सतीसन, राजीव चंद्रशेखर, हिमंता बिस्वा सरमा, गौरव गोगोई, एन. रंगास्वामी और वी. वैथिलिंगम शामिल हैं।चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। अब 4 मई को आने वाले नतीजे तय करेंगे कि इन राज्यों में सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी।

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भारत की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग प्रणाली की शुरूआतएनएचएआई के गुजरात टोल प्लाजा पर पहले दिन लगभग 41,500 वाहनों ने किया पार

खबर है..नई दिल्लीभारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल वसूली प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव लाते हुए गुजरात के एनएच-48 के सूरत-भरूच खंड पर स्थित चोरायासी टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) आधारित टोल प्रणाली का सफलतापूर्वक शुरुआत की है। इस प्रणाली के लागू होने के पहले ही दिन लगभग 41,500 वाहनों ने एमएलएफएफ टोल प्लाजा को पार किया।एमएलएफएफ प्रणाली न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ बाधा रहित टोल प्रणाली की शुरुआत करती है जिससे वाहन बिना रुके टोल केंद्रों से गुजर सकते हैं और निर्बाध यातायात प्रवाह सुनिश्चित होता है। यह प्रणाली स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) और फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करके स्वचालित और संपर्क रहित टोलिंग संचालन को सक्षम बनाती है। एमएलएफएफ राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं के यात्रा अनुभव में एक क्रांतिकारी बदलाव लाती है, जिससे दक्षता और सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर भीड़भाड़ में काफी कमी आएगी, यात्रा का समय बेहतर होगा, ईंधन दक्षता बढ़ेगी और वाहनों से होने वाला उत्सर्जन कम होगा।सुगम यात्रा अनुभव के लिए, एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं से अपने फास्टैग खातों में पर्याप्त शेष राशि बनाए रखने का आग्रह किया है। अपर्याप्त फास्टैग शेष राशि, अमान्य या खराब फास्टैग जैसी स्थितियों में, उपयोगकर्ताओं को उपयोगकर्ता शुल्क का भुगतान न करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक नोटिस (ई-नोटिस) जारी किया जाएगा। ऐसे उपयोगकर्ताओं को ई-नोटिस जारी होने के 72 घंटों के भीतर सामान्य उपयोगकर्ता शुल्क का भुगतान करना होगा। 72 घंटों के बाद भी भुगतान न करने पर, वाहन श्रेणी की सामान्य दर से दोगुना उपयोगकर्ता शुल्क लिया जाएगा।ई नोटिस पोर्टल के माध्यम से प्राप्त और भुगतान किया जा सकता है। उपयोगकर्ता ई-नोटिस जारी होने के 72 घंटों के भीतर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। ई-नोटिस का भुगतान न करने पर फास्टैग को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है और वाहन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अन्य वाहन संबंधी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।एमएलएफएफ की शुरुआत से पारदर्शिता बढ़ाकर और टोल प्लाजा स्थापित करने की परिचालन लागत को कम करके टोल संचालन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। एमएलएफएफ राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर अधिक सुदृढ़, कुशल और लागत प्रभावी टोलिंग प्रणाली के विकास में भी योगदान देगा

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एआईएमटीसी की अगुवाई में चक्का जाम पर उतरीं दिल्ली-एनसीआर की ट्रांसपोर्ट यूनियनें

सी.ए.क्यू.एम. और दिल्ली सरकार द्वारा NGT टैक्स में भारी वृद्धि तथा बी.एस. IV कमर्शियल वाहनों पर 01.11.2026 से दिल्ली में प्रतिबंध का विरोध 21 से 23 मई तक दिल्ली एनसीआर की ट्रांसपोर्ट यूनियन की ओर से तीन दिवसीय सांकेतिक चक्काजाम| खबर है..नई दिल्लीऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के नेतृत्व में दिल्ली एनसीआर की ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने सीएक्यूएम और दिल्ली सरकार द्वारा एनजीटी टैक्स में भारी वृद्धि तथा बीएस4 कमर्शियल वाहनों पर एक नवंबर से दिल्ली में प्रतिबंध के विरोध में सांकेतिक चक्का जाम का ऐलान किया है। दिल्ली एनसीआर सभी ट्रांसपोर्ट यूनियनें 21 से 23 मई तक तीन दिवसीय सांकेतिक चक्का जाम पर रहेंगी।इस संबंध में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल की अध्यक्षता में 26 अप्रैल को दिल्ली एवं एनसीआर की सभी प्रमुख ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों और यूनियनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई । इस बैठक में सी.ए.क्यू.एम एवं दिल्ली सरकार द्वारा पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ई.सी.सी.) में की गई भारी बढ़ोतरी तथा बी.एस. IV कमर्शियल वाहनों पर 01.11.2026 से दिल्ली में प्रतिबंध पर विस्तार से चर्चा की गई और इस फैसले के खिलाफ सभी परिवहन संगठनों के पदाधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया और रोष प्रकट किया |डॉ हरीश सभरवाल ने ई.सी.सी. बढ़ोतरी पर ट्रांसपोर्ट सेक्टर की प्रमुख चिंताएं से अवगत करते हुए कहा “सी. ए. क्यू. एम की सिफारिश के अनुसार, जो ट्रक दिल्ली में न तो लोड करते हैं और न ही अनलोड, बल्कि सिर्फ दिल्ली को एक कॉरिडोर की तरह पार करके दूसरे राज्यों में माल लेकर जाते हैं, उन्हें ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर भेजने के लिए इस शुल्क में बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया था। इसका एआईएमटीसी ने भी समर्थन किया था।माननीय सुप्रीम कोर्ट के भी आदेश के अनुसार ई.सी.सी. बढ़ाने का उद्देश्य केवल उन ट्रकों को हतोत्साहित करने का था, जो बिना किसी काम के दिल्ली से ट्रांजिट होकर गुजरते हैं | यह व्यवस्था सिर्फ ट्रांजिट वाहनों पर लागू होनी थी, न कि दिल्ली में सामान लाने-ले जाने वाले वाहनों पर, जो दिल्ली की अर्थव्यवस्था को सुचारु बनाने और यहाँ के निवासियों के लिए आवश्यक सामान लाने और ले जाने का कार्य करते हैं। लेकिन सी. ए. क्यू. एम और दिल्ली सरकार ने यह ई.सी.सी. बढ़ोतरी सभी वाहनों पर लागू कर दी है, यहां तक कि उन ट्रकों पर भी जो दिल्ली में लोडिंग-अनलोडिंग के लिए जरूरी रूप से आते हैं और यहां के निवासियों को आवश्यक सामान पहुंचाते हैं।यह ट्रक ऑपरेटर्स के साथ अन्याय और विश्वासघात है। यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर चोट करती है| सरकार का यह कदम जमीनी हकीकत से दूर है और दिल्ली में आने वाली सभी आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

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नए सीनियर डीसीएम समर्थ और सीनियर डीएसओ अरुण ने संभाला कामकाज

उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल खबर है.. लखनऊ उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के नये सीनियर डीसीएम समर्थ गुप्ता और सीनियर डीएसओ अरुण कुमार दोहरे ने बृहस्पतिवार को पदभार ग्रहण कर लिया। श्री दोहरे उत्तर रेलवे मुख्यालय बड़ौदा हाउस (नई दिल्ली) से यहां आए हैं, जबकि श्री गुप्ता उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में ही सीनियर डीएसओ के पद को संभाल रहे थे। भारतीय रेल यातायात सेवा के दोनों अधिकारी विभिन्न पदों तैनात रहकर अपने कार्यों को बखूबी अंजाम दे चुके हैं। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के सीनियर डीसीएम की जिम्मेदारी संभालने वाले कुलदीप तिवारी का स्थानांतरण उत्तर रेलवे मुख्यालय बड़ौदा हाउस में हुआ है। नये सीनियर डीसीएम समर्थ गुप्ता भारतीय रेल यातायात सेवा (आईआरटीएस) 2012 बैच के अधिकारी हैं। उन्होंने एरिया ऑफिसर, आगरा कैंट, मंडल यातायात प्रबंधक टुंडला, वरिष्ठ यातायात प्रबंधक/फ्रेट ऑपरेशन इन्फॉर्मेशन सिस्टम मुख्यालय नई दिल्ली, उप मुख्य परिचालन प्रबंधक व वरिष्ठ मंडल संचालन प्रबंधक अंबाला समेत विभिन्न पदों पर तैनात रहे। श्री गुप्ता ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद वाणिज्य विभाग के अधिकारियों और स्टाफ से परिचय के उपरांत मुसाफिरों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के साथ मंडल के समग्र विकास के लिए अपनी प्राथमिकता बताई।उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के नए सीनियर डीएसओ अरुण कुमार दोहरे 2010 बैच के आईआरटीएस अधिकारी हैं। वह लखनऊ मंडल के विभिन्न पदों जैसे सहायक मंडल परिचालन प्रबंधक, कोचिंग, प्लानिंग, चारबाग रेलवे स्टेशन के वरिष्ठ स्टेशन प्रबंधक, मंडल परिचालन प्रबंधक कोचिंग, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक सामान्य पर तैनात रह चुके हैं। इसके अलावा वह पूर्व मध्य रेलवे (हाजीपुर) में Additional Registrar ,डिप्टी सीओएम जनरल, स्टेशन निदेशक पटना के पद पर तैनात रह चुके हैं। लखनऊ आने से पहले वह उत्तर रेलवे मुख्यालय में डिप्टी सीओएम टीटी के पद पर तैनात थे।

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