अश्विनी वैष्णव ने दोहरीघाट-मऊ-औड़िहार यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

नई दैनिक रेल सेवा से मऊ और गाजीपुर जिलों के यात्रियों को किफायती, सुरक्षित और आरामदायक संपर्क सुविधा मिलेगी रेल मंत्री:यह ट्रेन सेवा वाराणसी तक बढ़ाई जाएगीरेल मंत्री ने पूर्वांचल से राष्ट्रीय राजधानी के लिए जल्द ही एक और ट्रेन शुरू करने का वादा किया खबर है..नई दिल्लीरेल, सूचना एवं प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए दोहरीघाट-औड़िहार यात्री ट्रेन को वर्चुअल रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। शुभारंभ समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा, सांसद राजीव राय और अन्य गणमान्य व्यक्ति तथा वरिष्ठ रेल अधिकारी उपस्थित थे।यह उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में रेल संपर्क और यात्री सुविधा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रेल यात्रियों की सुविधा और मऊ और गाजीपुर जिलों के लोगों की सीधी दैनिक रेल सेवा की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए यह नई रेल सेवा शुरू की गई है।यह ट्रेन सादत, जखनियां, दुल्लापपुर, मऊ, इंदारा, कोपागंज, घोसी, अमिला और मुरादपुर स्टेशनों पर रुकेगी। इस ट्रेन सेवा का विस्तार जल्द ही वाराणसी तक किया जाएगी। इस ट्रेन में 8 कोच होंगे, जिनमें दैनिक यात्रियों और मार्ग पर अन्य यात्रियों के लिए आरामदायक और सुविधाजनक यात्रा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए यात्री कोच शामिल हैंपूर्वांचल क्षेत्र से दिल्ली के लिए बेहतर कनेक्टिविटी की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए, श्री वैष्णव ने उत्तरी गंगा कॉरिडोर से शुरू की जाने वाली एक नई एक्सप्रेस ट्रेन की घोषणा की। यह ट्रेन छपरा, बलिया, मऊ, आजमगढ़, शाहगंज, जौनपुर, सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, गाजियाबाद और आनंद विहार को जोड़ेगी। उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों को आश्वासन दिया कि यह सेवा शीघ्र ही शुरू की जाएगी।

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कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की 49वीं बैठक आयोजित

बैठक में शामिल हुए देशभर के शीर्ष कर्मचारी नेता शिव गोपाल मिश्रा और राघवैय्या ने रखी कर्मचारी पक्ष की बात खबर है..नई दिल्लीसंयुक्त परामर्श तंत्र (जेसीएम) की राष्ट्रीय परिषद की 49वीं बैठक सोमवार को सेवा तीर्थ के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव ने की। इस बैठक में कर्मचारी पक्ष के नेता राघवैय्या और कर्मचारी पक्ष के सचिव शिव गोपाल मिश्रा के साथ-साथ कर्मचारी पक्ष के 28 अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सरकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व प्रमुख मंत्रालयों और विभागों के सचिवों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने किया जिनमें सचिव (कार्मिक) और व्यय विभाग के सचिव शामिल थे।बैठक की शुरुआत में, अध्यक्ष ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और सदस्यों, विशेष रूप से कर्मी पक्ष को, जेसीएम योजना के 60 गौरवशाली वर्ष पूरे होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह योजना 1966 में शुरू की गई थी और वर्ष 2026 में अपना हीरक जयंती वर्ष मना रही है।जेसीएम तंत्र के महत्व की जानकारी देते हुए, अध्यक्ष ने कहा कि अपनी स्थापना के बाद से ही, संयुक्त परामर्श तंत्र ने सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच संवाद और परामर्श को संस्थागत रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब तक राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की कुल 48 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।इसके अतिरिक्त, यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय परिषद की बैठकें कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में, कर्मचारी पक्ष और सरकारी पक्ष दोनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में आयोजित की जाती हैं, जैसा कि इस योजना के अंतर्गत परिकल्पित है। राष्ट्रीय परिषद की 48वीं बैठक 26 जून 2021 को आयोजित की गई थी, जिसके बाद स्थायी समिति की तीन बैठकें भी बुलाई गईं। इसके अलावा, कर्मचारियों के कल्याण और सेवा शर्तों से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श करने के लिए मंत्रालय स्तर पर विभागीय परिषद की बैठकें भी निरंतर आयोजित की जा रही हैं।चेयरमैन ने कहा कि जेसीएम व्यवस्था के तहत लगातार चर्चाओं से कर्मचारियों के कई मुद्दों और शिकायतों को सुलझाने में मदद मिली है। इससे उनके हित में विभिन्न निर्देशों और दिशानिर्देशों में बदलाव किए गए हैं।49वीं बैठक के दौरान, कर्मचारी पक्ष द्वारा पेश किए गए 24 एजेंडा बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। हर बिंदु पर स्वस्थ और रचनात्मक चर्चा हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने कर्मचारियों के हित में सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुँचने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास किए। कई मुद्दे पहले से ही संबंधित मंत्रालयों और विभागों के सक्रिय विचाराधीन हैं।बैठक में सरकार की इस प्रतिबद्धता को दोहराया गया कि वह रचनात्मक परामर्श व्यवस्था बनाए रखेगी और लगातार बातचीत तथा सहयोग के माध्यम से कर्मचारियों के कल्याण को बढ़ावा देगी।

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाएंनागपुर में 17 और 18 मई को ‘जल-संवाद’ और ‘जलक्रांति’ सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे

खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि विदर्भ को किसान आत्महत्या के क्षेत्र के कलंक से मुक्त करने और विदर्भ के गाँवों में जल समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए यहां जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना चाहिए।विदर्भ में जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था के रजत जयंती समारोह के अवसर पर 17 और 18 मई को नागपुर में “जलसंवाद” (जल संवाद) और “जलक्रांति” (जल क्रांति) सम्मेलनों का आयोजन किया गया है।गडकरी आज आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे, जिसमें विधायक चरणसिंह ठाकुर और उमेश यावलकर भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि देश में जल की कमी नहीं है; बल्कि जल संसाधनों की उचित योजना और प्रबंधन की कमी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई और कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जल प्रबंधन संभव है।उन्होंने बताया कि फार्म तालाबों से निकाली गई मिट्टी का उपयोग अकोला, वाशिम और बुलढाणा जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में किया गया है, जिससे पश्चिमी विदर्भ में भूजल स्तर बढ़ा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि क्षेत्र के किसानों ने अपनी फसल पैटर्न बदल ली है। श्री गडकरी ने यह जोर दिया कि गैर सरकारी संगठनों की जल संरक्षण में भागीदारी महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता की सक्रिय भागीदारी समान रूप से मूल्यवान है, इसलिए जल संरक्षण को जन आंदोलन बनना चाहिए । उन्होंने आगे कहा कि वारूड-मोरशी और कटोल-नरखेड़ के भूजल-कमी वाले “डार्क जोन” क्षेत्रों में नदियों और नालों के गहनकरण संबंधी संरक्षण कार्य जनभागीदारी से किए जा रहे हैं और इन प्रयासों से क्षेत्र में जल संरक्षण परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं। गडकरी ने स्थानीय स्वशासन निकायों से इन पहलों में महत्वपूर्ण योगदान देने की अपील भी की।पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था पिछले 25 वर्षों से जल संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। संगठन द्वारा विकसित ‘तमस्वदा मॉडल’ को देशभर में मान्यता मिल रही है। संगठन के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में नागपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया गया है। रजत जयंती समारोह दो चरणों में होंगे 17 मई 2026 को “नागपुर जलसंवाद-2026” और 18 मई 2026 को “जलक्रांति सम्मेलन”। देशभर से प्रमुख जल विशेषज्ञ, पद्म पुरस्कार विजेता और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियाँ इन आयोजनों में भाग लेने वाली हैं।

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प्रधानमंत्री तेलंगाना में लगभग ₹1,535 करोड़ की रेल परियोजनाएं करेंगे राष्ट्र को समर्पित

इससे रेल संपर्क मज़बूत होगा, भीड़ कम होगी और यात्रियों की आवाजाही बेहतर होगी खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 मई 2026 को तेलंगाना में लगभग ₹1,535 करोड़ की प्रमुख रेलवे अवसंरचना परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह इस क्षेत्र में रेल संपर्क को मज़बूत करने, परिचालन दक्षता में सुधार करने और यात्रियों व माल की आवाजाही को बेहतर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।ये परियोजनाएँ भारतीय रेल के उन लगातार प्रयासों का हिस्सा हैं जिनका उद्देश्य महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर को आधुनिक बनाना, भीड़भाड़ वाले खंडों को भीड़-मुक्त करना और यात्रियों को तेज़, सुरक्षित व अधिक विश्वसनीय यात्रा का अनुभव प्रदान करना है।इन परियोजनाओं का एक प्रमुख घटक काज़ीपेट-विजयवाड़ा मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना के कई खंड हैं, जो 118 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। इनमें वारंगल-काज़ीपेट, नेकोंडा-महबूबाबाद और एर्रुपालेम-डोर्नकल जंक्शन रेल खंड शामिल हैं। इस परियोजना से तेलंगाना के हनुमकोंडा, वारंगल, महबूबाबाद और खम्मम जैसे प्रमुख ज़िलों को फ़ायदा होगा।यह कॉरिडोर व्यस्त ‘ग्रैंड ट्रंक’ मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण यात्री और माल यातायात को संभालता है। मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना लाइन की क्षमता में काफ़ी वृद्धि करेगी। इससे रेलगाड़ियों का परिचालन अधिक सुचारू और तेज़ हो सकेगा। इसके साथ ही अधिक उपयोग वाले मार्गों पर भीड़ भी कम होगी। इससे रेलगाड़ियों के समय की पाबंदी में सुधार होने, मालगाड़ियों के ठहराव में कमी आने और पूरे क्षेत्र में माल की अधिक कुशल आवाजाही संभव होने की आशा है।प्रधानमंत्री 21 किलोमीटर लंबा काज़ीपेट रेल अंडर रेल बाईपास भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजना है। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र के सबसे व्यस्त रेल जंक्शनों में से एक, काज़ीपेट जंक्शन पर भीड़भाड़ को कम करना है।यह बाईपास हैदराबाद, बल्हारशाह और विजयवाड़ा की ओर रेलगाड़ियों की एक साथ आवाजाही को संभव बनाएगा। इससे परिचालन में लचीलापन काफ़ी बढ़ जाएगा और रेलगाड़ियों का प्रतीक्षा समय कम हो जाएगा। यह परियोजना इस व्यस्त जंक्शन पर परिचालन संबंधी टकरावों और क्रॉसिंग में होने वाली देरी को कम करेगी। इससे रेलगाड़ियों की समय की पाबंदी बेहतर होगी और उनका परिचालन सुव्यवस्थित हो जाएगा।कुल मिलाकर, ये रेल अवसंरचना परियोजनाएं भारतीय रेल का उच्च क्षमता वाला और भविष्य के लिए तैयार रेल नेटवर्क बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। यह नेटवर्क आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा, यात्रियों की सुविधा में सुधार करेगा है और तेलंगाना तथा पड़ोसी राज्यों के बीच क्षेत्रीय संपर्क को मज़बूत बनाएगा।

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भारतीय रेल ने उत्तर रेलवे के 1,478 रूट किलोमीटर पर दी कवच प्रणाली के विस्तार को मंजूरी

खबर है..नई दिल्लीरेल सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में भारतीय रेल ने उत्तर रेलवे के अहम मार्गों पर स्वदेशी कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के विस्तार को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर लगभग ₹362 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसके तहत फिरोजपुर और जम्मू मंडल के करीब 1,478 रूट किलोमीटर पर कवच प्रणाली स्थापित की जाएगी।परियोजना के अंतर्गत फिरोजपुर मंडल के शेष 1,012 रूट किलोमीटर पर लगभग ₹241 करोड़ की लागत से कवच लगाया जाएगा। वहीं जम्मू मंडल में जलंधर सिटी जंक्शन-जम्मू तवी-श्री माता वैष्णो देवी कटरा, बटाला जंक्शन-पठानकोट जंक्शन और बनिहाल-बारामूला सेक्शनों के लगभग 466 रूट किलोमीटर पर करीब ₹121 करोड़ की लागत से कवच प्रणाली स्थापित की जाएगी।इसके तहत रेलवे ट्रैक के किनारे स्थायी कवच सिस्टम लगाए जाएंगे। साथ ही, 40 मीटर ऊंचे संचार टावर और एंटीना इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा, ताकि सुरक्षा प्रणाली बेहतर और निर्बाध तरीके से कार्य कर सके।कवच भारत में विकसित एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो किसी भी आपात स्थिति में स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन टक्कर जैसी घटनाओं को रोकने में मदद करता है। यह तकनीक लोको पायलट को सुरक्षित ट्रेन संचालन में सहयोग देती है, क्योंकि इसके माध्यम से लोकोमोटिव, सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रैक पर लगे उपकरणों के बीच लगातार संपर्क बना रहता है।इन महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर कवच प्रणाली लागू होने से ट्रेन संचालन और अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और सुगम बनेगा। भारतीय रेल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के तहत देशभर में कवच प्रणाली का तेजी से विस्तार कर रही है, जिससे रेलवे नेटवर्क को सुरक्षित, आधुनिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा सके।

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पीएम-सेतु के तहत उत्कृष्टता केंद्र के लिए कानपुर स्थित एनएसटीआई में उद्योग परामर्श बैठक

बैठक की अध्यक्षता एमएसडीई की सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने की खबर है..नई दिल्लीकेन्द्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने कानपुर स्थित राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (एनएसटीआई) में एक उद्योग परामर्श बैठक का आयोजन किया, जिसमें प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता परिवर्तन उन्नत आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना के तहत वैमानिकी और संबद्ध क्षेत्रों के लिए एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) की स्थापना पर विचार-विमर्श किया गया।इस बैठक की अध्यक्षता एमएसडीई की सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने की। इसमें डीजीटी के महानिदेशक श्री दिलीप कुमार सहित डीजीटी के वरिष्ठ अधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के निदेशक तथा अग्रणी उद्योग और बहुपक्षीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।इस परामर्श बैठक में रक्षा एयरोस्पेस, नागरिक विमानन, सटीक अभियांत्रिकी और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों के 25 से अधिक संगठनों ने भाग लिया। इसमें हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), डसॉल्ट एविएशन इंडिया, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एल एंड टी प्रेसिजन इंजीनियरिंग, अदानी स्किल डेवलपमेंट सेंटर, होंडा मोटर्स, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, जेके सीमेंट, नामटेक (एनएएमटीईसीएच), इनोवेटिव इंडिया लिमिटेड, इनोविजन लिमिटेड, जेआईटीएम, आईसीआईसीआई फाउंडेशन, नेट प्लांट प्राइवेट लिमिटेड, एवीपीएल इंटरनेशनल, नेवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड (एनयूपीपीएल) के साथ-साथ एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और विश्व बैंक शामिल थे।चर्चाओं का मुख्य केन्द्र पाठ्यक्रम निर्माण, प्रशिक्षण संचालन, अवसंरचना विकास तथा अप्रेन्टिसशिप संबंधों में उद्योग भागीदारी को मजबूत करना रहा, ताकि एयरोस्पेस और संबद्ध क्षेत्रों की उभरती कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जा सके। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि कानपुर के एनएसटीआई में प्रस्तावित यह राष्ट्रीय उत्कृष्टापूर्ण (एनसीओई) उद्योगों के सक्रिय सहयोग से विकसित किया जाएगा तथा इसका उद्देश्य उच्च स्तरीय विनिर्माण और वैमानिकी व्यवसायों में प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ाना है। यह पहल भारत के विकसित होते एयरोस्पेस इकोसिस्टम के लिए एक कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायक होगी।मंत्रालय ने पुन: दोहराया कि एनएसटीआई कानपुर में स्थापित होने वाला यह राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र (एनसीओई) मजबूत औद्योगिक सह-निवेश, भारत-फ्रांस द्विपक्षीय सहयोग तथा पीएम-एसईटीयू ढांचे पर आधारित एक आदर्श संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। यह प्रतिवर्ष हजारों वैमानिकी और संबद्ध क्षेत्र के पेशेवरों को प्रशिक्षित करेगा, भारत के बढ़ते वैमानिकी और संबद्ध क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से योगदान करेगा तथा एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के राष्ट्र विजन को सशक्त करेगा। मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि पीएम-सेतु के घटक-I के अंतर्गत हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाया गया है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश में अलीगंज, साकेत, पांडू नगर कानपुर, मुजफ्फरनगर, आगरा, नैनी प्रयागराज, वाराणसी और चरगावां गोरखपुर जैसे आईटीआई क्लस्टर की पहचान की गई है। इन कल्स्टरों में हब आईटीआई स्पोक आईटीआई के नेटवर्क का मार्गदर्शन करेंगे, जिससे क्षेत्रीय कौशल इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सके, प्रशिक्षण गुणवत्ता में सुधार हो तथा उद्योगों से जुड़ाव बढ़ाया जा सके।यह परामर्श पीएम-सेतु योजना के अंतर्गत आईटीआई के आधुनिकीकरण तथा व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण में उद्योग सहभागिता को मजबूत करने के लिए जारी प्रयासों का हिस्सा है।

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अगस्त से बदली मिलेगी रेल यात्री आरक्षण प्रणाली

अपग्रेडेड यात्री आरक्षण प्रणाली में अगस्त से रेल गाड़ियों की होगी शिफ्टिंग40 वर्ष पुरानी इस प्रणाली से अपग्रेडेड सिस्टम पर होगी गाड़ियों की शिफ्टिंगयात्रियों को परेशानी न हो इसलिए रेल मंत्री ने दिए अधिकारियों को निर्देश खबर है..नई दिल्लीरेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेल भवन में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में 40 साल पुरानी आरक्षण प्रणाली में अपग्रेडेड सिस्टम पर गाड़ियों की शिफ्टिंग होते समय यात्रियों को परेशानी न हो इसलिए अधिकारियों को निर्देश दिए । इस बैठक में रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और रवनीत सिंह बिट्टू भी उपस्थित थे।1986 में शुरू हुई इस प्रणाली में पिछले 40 साल में कई छोटे बदलाव किए गए । लेकिन अब इसमें आमूलचूल परिवर्तन किया गया है । अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर इसके क्षमता का विस्तार किया गया है । रेल आरक्षण प्रणाली ने कई महत्वपूर्ण पड़ाव देखें है I वर्ष 2002 में भारतीय रेलवे ने ticketing में internet का प्रयोग शुरू किया। आज ये प्रणाली इतनी लोकप्रिय है कि देश की ज्यादातर आबादी खिड़की की ओर रुख नहीं करती। देश में आज जितनी भी ticketing की माँग है उसका बड़ा हिस्सा (~88%) online माध्यम से होता है।भारतीय रेल का मोबाइल ऐप रेलवन यात्रियों के बीच बड़ी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रेलवन ऐप की शुरुआत पिछले साल जुलाई में हुई थी। एक साल से कम समय में ही देशभर में अब तक 3.5 करोड़ डाउनलोड हो चुके हैं।इस ऐप के लोकप्रिय होने के कई कारणों में से सबसे बड़ा कारण यह है कि यह ऐप देश के आम आदमी को रेल संबंधी सभी जानकारियाँ तो देता ही है, टिकटिंग तथा अन्य सेवाओं से जुड़ी उनकी शिकायतों का भी निपटारा करता है। आज जब आप अपनी टिकट बनाते हैं, तो रेलवन ऐप आपको यह बताता है कि आपकी वेटिंग में दिख रही टिकट कन्फर्म होगी या नहीं। टिकट के कन्फर्म होने की सटीक संभावना भी अब आपको एआई के माध्यम से रेलवन ऐप बताने लगा है। यह नई सुविधा इस साल की शुरुआत से ही लागू की गई है, जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं। रेलवन ऐप पर वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने के अनुमान की सटीकता पहले के 53 प्रतिशत से बढ़कर अब 94 प्रतिशत तक पहुँच गई है।रेलवन ऐप में इस तरह की कई एकीकृत एवं आधुनिक सुविधाएँ हैं, जो रेल संबंधी अन्य सभी सेवाओं को भी अपने में समाहित किए हुए हैं। जैसे – आरक्षित, अनारक्षित तथा प्लेटफॉर्म आदि विभिन्न प्रकार के टिकटों की बुकिंग, रद्दीकरण तथा रिफंड।इस के साथ साथ आपके हमारे मौजूदा टिकट की वेटिंग status की ताजा स्थिति, ट्रेन के आने जाने का समय, ट्रेन की मौजूदा स्थिति, ट्रेन के आने-जाने का platform, आप के coach की position, रेल मदद जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ रेलवन (RailOne) app पे हैं। अपनी यात्रा के दौरान आप अपना food भी रेलवन (RailOne) app पर order कर सकते हैं। App आपको ये विकल्प देता है कि आप की seat तक आपका मनपसंद खाना पहुंच सके। आरामदायक व सेवापरक सुविधाओं से लैस यह रेलवन (RailOne) app तेजी से लोकप्रिय हो रहा है ।इसके साथ-साथ आपके मौजूदा टिकट की वेटिंग स्थिति की ताज़ा जानकारी, ट्रेन के आने-जाने का समय, ट्रेन की वर्तमान स्थिति, ट्रेन के आने-जाने का प्लेटफॉर्म, आपके कोच की स्थिति जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी रेलवन ऐप पर उपलब्ध हैं। अपनी यात्रा के दौरान आप रेलवन ऐप पर भोजन भी ऑर्डर कर सकते हैं। यह ऐप आपको यह सुविधा देता है कि आपकी सीट तक आपका मनपसंद खाना पहुँच सके। आरामदायक एवं सेवापरक सुविधाओं से लैस यह रेलवन ऐप तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।रोज़ाना इस app के माध्यम से देश भर में 9.29 लाख टिकिटे book हो रही हैं। इसमें 7.2 लाख टिकटें अनारक्षित तथा अन्य 2.09 लाख आरक्षित टिकटें हैं। अनारक्षित टिकटों में platform टिकट भी शामिल है। Android तथा IOS पर रेलवन (RailOne) app को लोग काफी पसंद कर रहे है। जहाँ 3 करोड़ 16 लाख लोगो ने इसे गूगल प्लेस्टोर से अब तक डाउनलोड किया है, वहीं 33.17 लाख लोगो ने इसे ऐपल phones में डाउनलोड किया है।देश में यात्रियों के लिए भारतीय रेल एक जीवन रेखा है – भारतीय रेल ने 2024-25 में यात्रियों के टिकटों पर 60,239 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी। यह रेलवे पर यात्रा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को औसतन 43% की छूट के बराबर है। दूसरे शब्दों में, यदि सेवा प्रदान करने की लागत 100 रुपये है, तो टिकट की कीमत केवल 57 रुपये है।

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सात ज्योर्तिलिंग एवं दक्षिण भारत की करें यात्रा

खबर है.. लखनऊ भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने गर्मी की छुट्टियों को लेकर भारत गौरव पर्यटक ट्रेनों को चलाने का निर्णय लिया है। सैलानियों को सात ज्योर्तिलिंग के दर्शन और दक्षिण भारत की यात्रा के लिए आईआरसीटीसी ने टूर पैकेज लॉन्च किया है। दो भारत गौरव पर्यटक ट्रेन के जरिए मुसाफिरों को सैर कराया जाएगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए आईआरसीटीसी ने LTC और EMI की भी सुविधा दी है ताकि अधिक से अधिक लोग यात्रा का लाभ उठा सके। भारत गौरव पर्यटक ट्रेनों में ‘पहले आओ- पहले पाओ’ के आधार पर बुकिंग की जाएगी । यह जानकारी बुधवार को आईआरसीटीसी उत्तर क्षेत्र के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक (CRM) अजीत कुमार सिन्हा ने संवाददाताओं को दी।आईआरसीटीसी के पर्यटन भवन गोमती नगर स्थित कार्यालय में पत्रकार वार्ता में श्री सिन्हा ने बताया कि भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन के माध्यम से 12 से 28 जून के बीच 11 रात एवं 12 दिन की यात्रा के दौरान 7 ज्योतिर्लिंग की यात्रा होगी। इस दौरान पर्यटकों को भारत गौरव पर्यटक ट्रेन से उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर व ओंमकारेश्वर, गुजरात में द्वारकाधीश, भेंट द्वारिका, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, सिग्नेचर ब्रिज, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, नासिक में त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, पंचवटी, कालाराम मंदिर, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग, संभाजी नगर में घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग एवं स्थानीय मंदिरों के दर्शन कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि भारत गौरव पर्यटक ट्रेन में स्लीपर श्रेणी में 24100/- प्रति व्यक्ति, थर्ड एसी में 40880/- प्रति व्यक्ति और सेकंड एसी में 54300/- प्रति व्यक्ति किराए का निर्धारण किया गया है। 7 ज्योतिर्लिंग यात्रा के लिए यहां से कर सकेंगे सफर: आईआरसीटीसी के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि भारत गौरव ट्रेन में योग नगरी ऋषिकेश, हरिद्वार, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, कानपुर, उरई, वीरांगना लक्ष्मीबाई और ललितपुर रेलवे स्टेशन से पर्यटक सफर कर सकते हैं।आईआरसीटीसी उत्तर क्षेत्र के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक श्री सिन्हा ने बताया कि दूसरी भारत गौरव पर्यटक ट्रेन का संचालन दक्षिण भारत की यात्रा के लिए 29 जून से 10 जुलाई के बीच किया जाएगा। 11 रात एवं 12 दिन के इस यात्रा के दौरान तिरुपति बालाजी मंदिर (तिरुपति), रामनाथ स्वामी मंदिर (रामेश्वरम), मीनाक्षी मंदिर (मदुरै), स्थानीय दर्शन (कन्याकुमारी) , मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (मरकापुर) का भ्रमण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्लीपर श्रेणी में 24350/_ , थर्ड एसी में 41800/- और सेकंड एसी में 55750/- प्रति व्यक्ति किराए का निर्धारण किया गया है। इस भारत गौरव ट्रेन में पर्यटक योग नगरी ऋषिकेश, हरिद्वार, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, रायबरेली, प्रतापगढ़, प्रयागराज और मानिकपुर से सफर कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा की बुकिंग आईआरसीटीसी कार्यालय एवं आईआरसीटीसी की बेवसाइट www.irctctourism.com से आनलाइन भी कराई जा सकती है। प्रेसवार्ता के दौरान उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (सीनियर डीसीएम) समर्थ गुप्ता भी मौजूद रहे।पर्यटक हेल्पलाइन नंबरों से भी ले सकते हैं जानकारी : भारत पर्यटक ट्रेनों में बुकिंग के लिए पर्यटक हेल्पलाइन नंबर 923639 1908, 82879 30908, 82879 301 99, 9717 649 141, 73028 21864, 9415 042930, 9305111764, 82879 30913 और 8595 924 294 से कर सकते हैं।

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मंत्रिमंडल ने दी आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना 5.0 को मंजूरी

2,55,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण प्रवाह में से, पश्चिम एशिया की स्थिति को देखते हुए एयरलाइंस के लिए 5,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए खबर है..नई दिल्लीएटीएफ की कीमतों में तीव्र वृद्धि के कारण एयरलाइंस को हो रहे वित्तीय संकट को देखते हुए, साथ ही हवाई क्षेत्र बंद होने और परिचालन में कमी, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर, जिसके परिणामस्वरूप विमानों का उपयोग कम हो रहा है और नकदी की कमी हो रही है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय एयरलाइंस को लक्षित ऋण सहायता प्रदान करने के लिए ईसीएलजीएस 5.0 योजना को मंजूरी दी है।इस योजना का उद्देश्य नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा सदस्य ऋण संस्थानों (एमएलआई) को एमएसएमई के लिए 100% और गैर-एमएसएमई के साथ-साथ एयरलाइन क्षेत्र के लिए 90% क्रेडिट गारंटी कवरेज प्रदान करना है। यह गारंटी पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर, पात्र उधारकर्ताओं को दी गई अतिरिक्त क्रेडिट सुविधा के तहत डिफ़ॉल्ट राशि के लिए है, ताकि वे अल्पकालिक तरलता असंतुलन से निपट सकें।विमानन क्षेत्र के लिए, इस योजना में विशेष रूप से एयरलाइंस के लिए ₹5,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। यह योजना संरचित वित्तीय राहत प्रदान करती है, जिसमें प्रति उधारकर्ता अधिकतम ₹1,000 करोड़ की ऋण सीमा है, और उधारकर्ता द्वारा समतुल्य इक्विटी निवेश के अधीन अतिरिक्त ₹500 करोड़ की राशि भी दी जा सकती है। ऋण की अवधि 7 वर्ष तक होगी, जिसमें पुनर्भुगतान पर 2 वर्ष की मोहलत शामिल है, जिससे अल्पकालिक तरलता दबाव कम होगा।ईसीएलजीएस 5.0 की शुरुआत का उद्देश्य मौजूदा चुनौतीपूर्ण दौर में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और एयरलाइनों को अतिरिक्त ऋण सहायता प्रदान करना है। 7 साल की लंबी ऋण अवधि, साथ ही ब्याज के 50% तक को वित्तपोषित ब्याज सावधि ऋण (एफआईटीएल) में परिवर्तित करने का विकल्प, तत्काल पुनर्भुगतान के दबाव को कम करने और नकदी प्रवाह और तरलता में सुधार करने की उम्मीद है।इस घोषणा पर मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में, भारत की विमानन विकास गाथा आज वैश्विक स्तर पर सुधारों, लचीलेपन और पुनरुत्थान की नींव पर निर्मित एक सफल गाथा के रूप में उभर रही है। और वर्तमान अनिश्चित और अभूतपूर्व परिस्थितियों में, जब दुनिया भर की एयरलाइंस संचालन संबंधी चुनौतियों से जूझ रही हैं, भारतीय एयरलाइंस समय पर उठाए गए कदमों के समर्थन से स्थिर बनी हुई हैं—चाहे वह वैश्विक वृद्धि के बीच एटीएफ कीमतों को नियंत्रित करना हो, हवाई अड्डों पर लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में कमी करना हो—और अब सरकार द्वारा एक साहसिक निर्णय लिया गया है। आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0 को मंजूरी देकर, एयरलाइनें अल्पकालिक तरलता चुनौतियों से निपटने और वैश्विक व्यवधानों के बीच निर्बाध परिचालन बनाए रखने में सक्षम होंगी। यह रोजगार की सुरक्षा, कनेक्टिविटी को बनाए रखने और विमानन पारिस्थितिकी तंत्र में लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए मजबूत वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, साथ ही एमएसएमई का भी सहायता करेगा।” इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में उपयोग की गई अधिकतम कार्यशील पूंजी के 20% तक अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये है। एयरलाइंस के लिए यह ऋण 100% तक होगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति उधारकर्ता 1,500 करोड़ रुपये है, बशर्ते कुछ विशिष्ट शर्तें पूरी हों। गारंटी कवर की अधिकतम अवधि ऋण की अवधि के साथ समाप्त होगी। यह योजना एनसीजीटीसी द्वारा इन दिशानिर्देशों के जारी होने की तिथि से 31.03.2027 तक स्वीकृत सभी ऋणों पर लागू होगी। यह योजना विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों, विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और परिचालन संबंधी बाधाओं के प्रभाव को कम करने में भी सहायक होगी, जो एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति को लगातार प्रभावित कर रही हैं। सरकारी गारंटी द्वारा समर्थित ऋण तक पहुंच को सक्षम बनाकर, यह ऋणदाताओं का विश्वास बढ़ाएगी, क्षेत्र में ऋण प्रवाह में सुधार करेगी और परिचालन स्थिरता को बढ़ावा देगी। इससे रोजगार को बनाए रखने, क्षेत्र की क्षमता को संरक्षित करने और यात्रियों पर बढ़ी हुई लागत के बोझ को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत के विमानन क्षेत्र की निरंतर वृद्धि और मजबूती को समर्थन मिलेगा।

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सेमीकंडक्टर निर्माण की दो इकाइयों को मंत्रिमंडल की मंजूरी

इन दोनों इकाइयों के निर्माण पर 3,900 करोड़ रुपये से अधिक के होंगे निवेश कंपाउंड सेमीकंडक्टर आधारित मिनी/माइक्रो एलईडी डिस्प्ले विनिर्माण में भारत के आगे बढ़ने से रफ्तार और तेज हुई खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के तहत दो और सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिसमें जीएएन (गैलियम नाइट्राइड) तकनीक पर आधारित देश की पहली व्यावसायिक मिनी/माइक्रो- एलईडी डिस्प्ले सुविधा और एक सेमीकंडक्टर पैकेजिंग सुविधा शामिल हैं।मंज़ूर किए गए दो प्रस्तावों से गुजरात में लगभग 3,936 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई स्थापित की जाएंगी और इनसे कुशल पेशेवारों के लिए कुल 2,230 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।दोनों अनुमोदित प्रस्तावों के अनुसार क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड (सीएमएल) मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले मॉड्यूल्स के निर्माण के लिए धोलेरा, गुजरात में कंपाउंड सेमीकंडक्टर निर्माण और एटीएमपी के लिए एक एकीकृत सुविधा केंद्र स्थापित करेगा। एकीकृत सुविधा केंद्र जीएएन फाउंड्री सेवाएँ भी प्रदान करेगा, जिसमें 6” वेफर्स पर एपिटेक्सी शामिल है। मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले पैनलों की प्रस्तावित वार्षिक उत्पादन क्षमता 72,000 वर्ग मीटर है, और मिनी-माइक्रो-एलईडी जीएएन एपिटेक्सी वेफर्स के लिए 24,000 आरजीबी वेफर्स सेट हैं। प्रस्तावित उत्पादों का उपयोग टीवी और साइनेज/कमर्शियल डिस्प्ले के लिए बड़े डिस्प्ले में, टैबलेट्स, स्मार्टफोन और कार डिस्प्ले के लिए मध्यम आकार के डिस्प्ले में और एक्सटेंडेड रियलिटी (एक्सआर) ग्लास और स्मार्ट वॉच के लिए माइक्रो-डिस्प्ले में किया जाएगा।सूचि सेमिकॉन प्राइवेट लिमिटेड (एसएसपीएल) गुजरात के सूरत में एक आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (ओएसएटी) सुविधा स्थापित करेगी जो अलग-अलग सेमीकंडक्टर का उत्पादन करेगी। सूचि सेमिकॉन की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष 1033.20 मिलियन चिप्स है। लक्षित अनुप्रयोगों में पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एनालॉग आईसी, और औद्योगिक प्रणालियाँ शामिल हैं, जो वाहन, औद्योगिक स्वचालन और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अंतिम बाजारों को सेवा प्रदान करेंगी।इन दोनों अनुमोदनों के साथ देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा क्योंकि भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत कुल अनुमोदित परियोजनाओं की संख्या 12 तक पहुँच जाएगी, जिनका कुल निवेश लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये है।ये देश में उभरती विश्व स्तरीय चिप डिजाइन क्षमताओं में पूरक भूमिका निभाएंगी, जिन्हें सरकार द्वारा 315 शैक्षणिक संस्थानों और 104 स्टार्ट-अप्स को प्रदान किए गए डिज़ाइन अवसंरचना समर्थन से गति मिली है। भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में गति और बढ़ रही है, क्योंकि दस अनुमोदित परियोजनाएं पहले से ही कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। दो परियोजनाओं ने पहले ही भारत से व्यावसायिक शिपमेंट शुरू कर दी है और दो अन्य परियोजनाओं से जल्द ही व्यावसायिक शिपमेंट शुरू करने की उम्मीद है।

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