कहा, बहुत अच्छी बहू हो आप, ससुर की सुंदर कलाकृतियों को दुनिया के सामने लेकर लाईं
एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाएंगे जहां कलाकार अपनी कलाकृतियों को चाहेंगे तो बेच भी सकेंगे
भारत मंडपम में मदन मोहन शर्मा की कलाकृतियों से रूबरू हुए कला प्रेमी
‘द हार्ट आफ आर्ट’ प्रदर्शनी में फल और फूलों के अवशेषों से बनी उनकी कलाकृतियों ने सराहा
खबर है..
नई दिल्ली
फिल्म अभिनेता और कला प्रेमी बिंदु दारा सिंह ने आज भारत मंडप में आयोजित ‘द हार्ट आफ आर्ट’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और यहां आयोजित कलाकार स्वर्गीय मदन मोहन शर्मा की उत्कृष्ट कलाकृतियों को देखने के लिए उनके स्टाल पर पहुंचे। उन्होंने यहां स्टॉल पर प्रदर्शित कलाकृतियों को देखकर कहा, ‘आप बहुत ही अच्छी बहू हो, जो अपने ससुर जी की कलाकृतियों को दुनिया के सामने लेकर आईं हैं। निःसंदेह ये कलाकृतियां उस कलाकार की सोच को प्रदर्शित कर रही हैं, जिन्होंने फूल, पत्ते, फल एवं सब्जियां के अवशेषों से इतनी खूबसूरत कलाकृतियों को उकेरा है।
स्वर्गीय मदन मोहन शर्मा की कलाकृतियों को प्रदर्शित करने की प्रबल इच्छा के साथ भारत मंडप में करीबन पांच दर्जन से अधिक कलाकृतियों को लेकर पहुंचीं डॉ. पल्लवी मिश्रा ने फिल्म अभिनेता बिंदु दारा सिंह को बताया कि वे इन कलाकृतियों को व्यावसायिक तौर पर बेचने के लिए यहां लेकर नहीं आईं हैं, बल्कि बताने आई हैं कि प्राकृतिक वस्तुओं के अवशेषों से भी कलाकृतियां बनाई जा सकती हैं। इस पर बिंदु दारा सिंह ने कहा कि हम जल्दी ही एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने जा रहे हैं जहां कलाकार अपनी पेंटिंग को प्रदर्शित कर सकते हैं। यदि कलाकार यहां अपनी पेंटिंग को बेचना चाहेंगे तो उन्हें यहां कला प्रेमियों का बाजार मिलेगा और नहीं बेचना चाहेंगे तो उन्हें प्रशंसक जरूर मिलेंगे।
भारत मंडप में आज से शुरू हुए ‘द हार्ट ऑफ़ आर्ट’ कला प्रदर्शनी श्रृंखला में स्वर्गीय मदन मोहन शर्मा की दुर्लभ कलाकृतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में कला के प्रेमी आए। यह कला प्रदर्शनी 22 मार्च तक चलेगी। जापान की ओशिबाना कला की तरह प्रकृति के खूबसूरत उपहार फूल, पत्तियों और अन्य वानस्पतिक सामग्री को समेटकर, सुंदर और सजीव कलात्मक चित्र बनाने वाले कलाकार मदन मोहन शर्मा हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनकी कलाकृतियों ने आज खूब प्रशंसा बटोरी। डा. पल्लवी मिश्रा ने बताया कि
बाबूजी ने अपने जीवन के 50 वर्ष पूरे करने के बाद इन कलाकृतियों को बनाने की शुरुआत की। उन्होंने बताया था कि उन्हें इसके लिए ईश्वरीय प्रेरणा प्राप्त हुई थी। इसके बाद वे ताउम्र कलाकृतियों को बनाते रहे।
अपने जीवन काल में उन्होंने 100 से अधिक ऐसी कलाकृतियां बनाई हैं। इनमें प्रमुख रूप से अयोध्या का राम मंदिर और बिहार का सूर्य मंदिर भी शामिल है। उनकी दर्जनों कलाकृतियां यह बताने को पर्याप्त है कि उन्हें ओशिबाना कला के प्रति सिर्फ शौक नहीं था बल्कि उनका दिली लगाव था। उन्होंने बताया कि बाबूजी की इन कलाकृतियों वह सहेज कर रखेंगी।
