सड़क सुरक्षा में सुधार लाने में जमीनी स्तर के हस्तक्षेपों की भूमिका महत्वपूर्ण : उमाशंकर

स्वयंसेवकों से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और जीवन बचाने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह

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नई दिल्ली
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने कहा कि पूरे देश में सड़क सुरक्षा में सुधार लाने में जमीनी स्तर के हस्तक्षेपों की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए। सचिव ने स्वयंसेवकों से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और जीवन बचाने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
वे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत आईआईटी मद्रास में स्थापित ‘सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र’ (सीओईआरएस) ने 16-18 मार्च 2026 तक फरीदाबाद में ‘सड़क सुरक्षा मित्र’ (एसएसएम) स्वयंसेवकों के लिए अपनी पहली प्रत्यक्ष प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के युवाओं को सड़क सुरक्षा में सक्रिय योगदानकर्ता के रूप में सशक्त बनाना और पूरे देश में युवाओं के नेतृत्व वाला आंदोलन खड़ा करना है। इस तीन-दिवसीय गहन कार्यशाला में 5 राज्यों और 13 जिलों से आए 53 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को ‘जिला सड़क सुरक्षा समितियों’ (डीआरएससी) को तीन प्रमुख क्षेत्रों में सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। ये क्षेत्र हैं – दुर्घटनाओं के समय तत्काल प्रतिक्रिया, सड़क सुरक्षा ऑडिट, और जिला-स्तरीय सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए प्रशासनिक सहायता।
सड़क सुरक्षा स्वयंसेवकों और संबंधित पक्षों को संबोधित करते हुए वी. उमाशंकर ने पूरे देश से आए सड़क सुरक्षा नेताओं और स्वयंसेवकों की भागीदारी पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त सीख को जिला स्तर पर ठोस और परिणाम-उन्मुख कार्यों में बदलें।
रोकथाम के उपायों के महत्व पर बल देते हुए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव ने कहा कि यद्यपि दुर्घटना के बाद की प्रतिक्रियाएं—जैसे कि सीपीआर देना और आपातकालीन सेवाओं को सूचित करना—अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, तथापि दुर्घटनाओं को पूरी तरह से होने से रोकना ही हमारा प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक सड़क दुर्घटना का कोई न कोई अंतर्निहित कारण अवश्य होता है, और इन कारणों की पहचान करके उनका समाधान करने से भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने में मदद मिल सकती है।
मुख्य आँकड़ों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली लगभग 45% मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़ी होती हैं, जिसमें हेलमेट का इस्तेमाल न करना एक बड़ा कारण है। उन्होंने हेलमेट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान तेज़ करने और समुदाय को जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी बताया कि दुर्घटनाओं में होने वाली लगभग 20% मौतें पैदल चलने वालों की होती हैं। उन्होंने बेहतर बुनियादी ढाँचे तथा ट्रैफ़िक को धीमा करने के उपायों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

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