तिरुपति में कचरे से संसाधन बनाने की अनोखी पहल

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नई दिल्ली

स्वच्छ भारत मिशन–शहरी 2.0 के अंतर्गत **तिरुपति नगर निगम ने कचरा प्रबंधन को सर्कुलर अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए एक अनुकरणीय मॉडल विकसित किया है। इस पहल के तहत फेंकी जाने वाली वस्तुओं को उपयोगी उत्पादों में बदलकर पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
शहर में विशेष रूप से तैयार किए गए अपसाइक्लिंग ड्रॉप बॉक्स लगाए गए हैं, जहां नागरिक पुरानी किताबें, कपड़े और जूते अलग-अलग सेक्शन में जमा कर सकते हैं। इन वस्तुओं को नियमित रूप से आरआरआर (रिड्यूस-रीयूज-रीसायकल) केंद्रों तक पहुंचाया जाता है, जहां उपयोग योग्य और अनुपयोगी सामग्री को अलग किया जाता है।
अच्छी स्थिति वाले कपड़े और जूते जरूरतमंद लोगों, वृद्धाश्रमों और अनाथालयों को वितरित किए जाते हैं, जबकि पुरानी किताबों से नगर निगम स्कूलों में पुस्तकालय विकसित किए जा रहे हैं। वहीं अनुपयोगी कपड़ों को स्वयं सहायता समूहों को दिया जाता है, जो उन्हें डोरमैट, फुटमैट और कपड़े के थैलों जैसे पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों में बदलते हैं। इन उत्पादों की बाजार में बिक्री से महिलाओं की आय बढ़ रही है।
इस पहल के तहत अब तक हजारों उपयोगी वस्तुओं का पुनः उपयोग किया जा चुका है और बड़ी मात्रा में कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका गया है। तिरुपति का यह मॉडल दिखाता है कि सही सोच और जनभागीदारी से कचरे को संसाधन में बदला जा सकता है और स्वच्छ शहर का सपना साकार किया जा सकता है।

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