मदन मोहन शर्मा की कलाकृतियां से रूबरू होने का मौका मिलेगा भारत मंडपम में
फल और फूलों के अवशेषों से बनी उनकी कलाकृतियां ‘द हार्ट आफ आर्ट’ प्रदर्शनी में 20-22 मार्च तक होगी प्रदर्शित खबर है..नई दिल्ली ओशिबाना कला के प्रेमी प्रतिभावान कलाकार मदन मोहन शर्मा की कलाकृतियों से रूबरू होने का पहली बार मौका भारत मंडपम में मिलने वाला है। उनकी कलाकृतियां कला प्रदर्शनी श्रृंखला ‘द हार्ट आफ आर्ट’ में प्रदर्शित की जाएंगी, जो कि 20-22 मार्च तक आयोजित होगी।गौरतलब है कि ओशिबाना कला के बारे में बहुत सारे लोग नहीं जानते होंगे, लेकिन जिन्हें प्रकृति के खूबसूरत उपहार फूल, पत्तियों और वनस्पतियों से प्यार होता है वे उन्हें सहेजने में जरा भी संकोच नहीं करते हैं। हालांकि ओशिबाना फूल, पत्तियों और अन्य वानस्पतिक सामग्री को समेटकर, सुंदर और सजीव कलात्मक चित्र बनाने की एक जापानी पारंपरिक कला है। इस कला को अपनी हुनरमंद उंगलियों से उकेरने वाले सिद्धहस्त कलाकार मदन मोहन शर्मा हमारे बीच नहीं रहे हैं, किंतु उनकी कलाकृतियां आज भी जीवंत है।उन्होंने अपने जीवनकाल में पूरी सादगी और तन्मयता के साथ फूल और फलों के अवशेषों को सहेज कर उनसे शानदार कलाकृतियां बनाई, जिनमें प्रमुख रूप से अयोध्या का राम मंदिर और बिहार का सूर्य मंदिर शामिल है। उनकी दर्जनों कलाकृतियां यह बताने को पर्याप्त है कि उन्हें ओशिबाना कला के प्रति सिर्फ शौक नहीं था बल्कि उनका दिली लगाव था। उनकी तमाम कलाकृतियों से रूबरू होने का पहला अवसर उन कला प्रेमियों को भारत मंडपम मेंमिलने जा रहा है। उनकी उन तमाम कलाकृतियों को पहली बार लोगों के बीच लाने का संकल्प उनके परिवार के सदस्यों ने लिया है। बताया जाता है कि स्वर्गीय मदन मोहन शर्मा अपनी इन कलाकृतियों को लेकर कभी व्यावसायिक सोच नहीं रखते थे बल्कि उन्हें जब भी घर में थोड़ा सा भी वक्त मिलता था तो फल और फूलों के अवशेष से कलाकृतियां बनाने में जुट जाते थे। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण कला प्रदर्शनी में उनकी ऐसी बहुत सी कलाकृतियां देखने को मिलेंगी जो शायद किसी कलाकार के लिए बनाना भी दुर्लभ होगा।
