पर्यटन परिवहन की समस्याओं के समाधान के संबंध में शेखावत से मिले

एआईएमटीसी ने राजस्थान में लैगेज करियर पर प्रतिबंध और उत्तराखंड में ग्रीन कार्ड का मुद्दा उठाया

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नई दिल्ली

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर राजस्थान में छोटे पर्यटक वाहनों पर लैगेज करियर पर प्रतिबंध और उत्तराखंड में चार धाम यात्रा में बाहरी राज्यों के वाहनों के साथ ग्रीन कार्ड के भेदभाव का मुद्दा उठाया। केंद्रीय मंत्री ने ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल की बातों को ध्यान से सुना और समाधान का आश्वासन दिया।
डॉ सभरवाल ने कहा कि बताया कि राजस्थान में पर्यटक वाहनों पर रूफ-माउंटेड लगेज कैरियर (छत पर यात्री सामान रखने की व्यवस्था) को अचानक बंद कर दिए जाने से पर्यटन वाहन संचालकों, विशेषकर छोटे वाहनों जैसे अर्बानिया, टेम्पो ट्रैवलर और टोयोटा क्रिस्टा आदि के ऑपरेटरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन छोटे पर्यटक वाहनों में यात्रियों के सामान के लिए पर्याप्त आंतरिक स्थान उपलब्ध नहीं होता, ऐसे में लगेज कैरियर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से पर्यटन संचालन में गंभीर व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कई स्थानों पर पर्यटक वाहनों को रास्ते में रोका जा रहा है, जिससे संचालकों के साथ-साथ देशी-विदेशी पर्यटकों को भी असुविधा और अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
डॉ. सभरवाल ने स्पष्ट किया कि एआईएमटीसी बसों में अवैध वाणिज्यिक माल ढुलाई के लिए यात्री वाहनों के दुरुपयोग का कड़ा विरोध करता है और सरकार के इस उद्देश्य का पूरा समर्थन करता है। किंतु पर्यटकों के वैध सामान को ले जाने की अनुमति देना पर्यटन संचालन का एक आवश्यक हिस्सा है। इसलिए छोटे पर्यटक वाहनों में यात्रियों के सामान के लिए रूफ-माउंटेड लगेज कैरियर की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि पर्यटन गतिविधियां सुचारु रूप से चल सकें।
डॉ. सभरवाल ने मंत्री का ध्यान उत्तराखंड में होने वाली चार धाम यात्रा के दौरान अन्य राज्यों में पंजीकृत पर्यटक वाहनों के साथ किए जा रहे कथित भेदभाव की ओर भी आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उत्तराखंड में पंजीकृत वाहनों को छह माह की ग्रीन कार्ड वैधता दी जाती है, जबकि अन्य राज्यों के वाहनों को केवल 15 दिन की वैधता दी जाती है, जिससे देशभर से आने वाले पर्यटन ऑपरेटरों को बार-बार आवेदन और शुल्क भुगतान की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

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