सेवा तीर्थ से प्रधानमंत्री का सर्वप्रथम निर्णयसेवा का संकल्प, हर वर्ग तक पहुंच का संदेश

खबर है..नई दिल्ली प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ में स्थानांतरित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने निर्णयों की पहली श्रृंखला में समाज के विभिन्न वर्गों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और वंचित नागरिको को केंद्र में रखते हुए महत्वपूर्ण फाइलों पर हस्ताक्षर किए। इन निर्णयों में सेवा, सुरक्षा और सशक्तिकरण की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।प्रधानमंत्री मोदी के अनुमोदित प्रमुख फैसले निम्नलिखित हैं:

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दानकुनी–सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना पर तेजी से काम करें: रेलमंत्री

खबर है..नई दिल्लीभारतीय रेलवे ने केंद्रीय बजट 2026 में घोषित दानकुनी–सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के शीघ्र क्रियान्वयन के लिए फास्ट-ट्रैक कार्रवाई शुरू कर दी है।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फ्रेट कॉरिडोर को तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।लगभग 2,100 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित यह कॉरिडोर दानकुनी (पश्चिम बंगाल) से सूरत (गुजरात) तक जाएगा। यह पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरेगा।क्या होगा फायदा?पूर्वी और पश्चिमी भारत के बीच माल परिवहन में तेजीलॉजिस्टिक्स अधिक कुशल और तेज़मालगाड़ियों के सफर समय में कमीमौजूदा रेलवे मार्गों पर भीड़भाड़ में राहतआधुनिक तकनीक पर जोरडेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) को नवीनतम तकनीकी मानकों को अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख विशेषताएं होंगी:उच्च क्षमता वाली विद्युतीकरण प्रणालीलेवल क्रॉसिंग रहित ट्रैक (Nil LC)उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम जैसे ‘कवच’बेहतर सुरक्षा और अधिक माल वहन क्षमताडीपीआर अपडेट और निगरानीपरियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को नवीनतम लागत अनुमान और संशोधित समय-सीमा के साथ अपडेट किया जाएगा।परियोजना को विभिन्न खंडों में बांटकर समानांतर रूप से कार्य शुरू किया जाएगा। प्रत्येक क्षेत्र के लिए समर्पित कोर टीमें गठित की जाएंगी, जो मैदान में रहकर प्रगति की निगरानी करेंगी।रेलवे बोर्ड ने प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियों को तेजी से पूरा करने और कॉन्ट्रैक्ट दस्तावेजों की तैयारी साथ-साथ शुरू करने के निर्देश दिए हैं ताकि परियोजना में कोई देरी न हो।इसके अलावा, आवश्यक मानव संसाधन का आकलन भी किया जा रहा है। रेलवे बोर्ड को हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट दी जाएगी।

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चुनावी राज्यों में ईवीएम/वीवीपीएटी के प्रति जागरूकता अभियान अभियान के तहत 1.16 लाख से अधिक मतदाताओं ने किया सांकेतिक मतदान

खबर है..नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) चुनाव वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में व्यापक ईवीएम/वीवीपीएटी जागरूकता अभियान आयोजित कर रहा है ताकि मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) इकाइयों के कामकाज से परिचित कराया जा सके।यह अभियान ईवीएम प्रदर्शन केंद्रों (ईडीसी) और मोबाइल प्रदर्शन वैन (एमडीवी) के माध्यम से एक व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है।पांचों राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) मुख्यालयों के साथ-साथ रिटर्निंग ऑफिसर/राजस्व उप-मंडल मुख्यालयों में ईवीएम प्रदर्शन केंद्र स्थापित करके संचालित किए गए हैं।10 फरवरी, 2026 तक, 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मतदान केंद्रों पर आयोजित ईवीएम प्रदर्शन शिविरों में 1.20 लाख से अधिक मतदाताओं ने भाग लिया और इन प्रदर्शनों में 1.16 लाख से अधिक मतदाताओं ने सांकेतिक मतदान किया। 29 हजार से अधिक मतदान केंद्रों (पीएसएल) को एमडीवी द्वारा कवर किया जा चुका है।ईवीएम/वीवीपीएटी जागरूकता अभियान का उद्देश्य मतदाताओं को मशीनों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करके, उनके कामकाज से संबंधित शंकाओं को दूर करके और चुनावी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करके मतदाताओं का विश्वास बढ़ाना है। भौतिक प्रदर्शन केंद्रों और मोबाइल प्रचार के माध्यम से, आयोग शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। आयोग पारदर्शी चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले दिनों में मतदाता जागरूकता पहलों को और तेज करेगा।

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6G में विश्व का नेतृत्व करेगा भारत : सिंधिया

2030 तक 100 करोड़ देशवासी होंगे 5G कनेक्टिविटी से लैस खबर है..नई दिल्ली केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार 11 फरवरी को कहा कि भारत ने दुनिया में सबसे तेज गति से 5G तकनीक को अपनाया है। मात्र 22 महीनों में देश के 99.9% जिलों में 5G सेवाएँ प्रारंभ हो चुकी हैं, जो वैश्विक स्तर पर एक रिकॉर्ड है। इसके लिए टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा लगभग ₹4 लाख करोड़ का निवेश किया गया और देशभर में 5 लाख से अधिक बीटीएस स्थापित किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में 40 करोड़ नागरिक 5G सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, और वर्ष 2030 तक यह संख्या बढ़कर 100 करोड़ तक पहुँचने की संभावना है। भविष्य की दिशा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि भारत 4G में पीछे था, 5G में दुनिया के साथ चला है और 6G में दुनिया का नेतृत्व करेगा।डिजिटल कनेक्टिविटी को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए सिंधिया ने कहा कि वाई-फाई नेटवर्क का विस्तार ग्रामीण भारत के लिए एक नई क्रांति सिद्ध हो रहा है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि वाई-फाई हॉटस्पॉट के मामले में महाराष्ट्र देश में दूसरे स्थान पर है, जहाँ 7,500 हॉटस्पॉट स्थापित किए गए हैं, जबकि देशभर में यह संख्या 92,000 है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 10 वर्षों में देश में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी 6 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ तक पहुँच गई है, और वर्ष 2030 तक इस नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ बनाने की योजना है।उत्तर पूर्वी भारत में कनेक्टिविटी की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए केन्द्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री सिंधिया ने अरुणाचल प्रदेश के विजयनगर जैसे दुर्गम क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘आखिरी गाँव’ की सोच को बदलकर उसे ‘भारत का पहला गाँव’ बनाया है, और सरकार इन क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी और ‘राइट ऑफ वे’ जैसी पर्यावरणीय एवं भौगोलिक चुनौतियों के समाधान के लिए अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्थानीय सांसदों के साथ मिलकर कार्य करने की बात भी कही।मंत्री ने कहा कि जहाँ आर्थिक रूप से मोबाइल टावर लगाना कठिन है, वहाँ सरकार ‘डिजिटल भारत निधि’ के माध्यम से कनेक्टिविटी सुनिश्चित कर रही है। 4G सैचुरेशन योजना के तहत लगभग 30,000 गाँवों को चिह्नित किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि इसके लिए 21,000 टावर स्थापित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 17,000 टावर पहले ही लगाए जा चुके हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में देश के हर गाँव में शत-प्रतिशत 4G सैचुरेशन सुनिश्चित कर डिजिटल समावेशन का सपना साकार किया जाएगा। सिंधिया ने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल तकनीक नहीं, बल्कि समावेशी विकास का माध्यम है, जो भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा रही है।

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भारत टैक्सी : चालकों को मुनाफे का सीधा मिल रहा फायदा “बाइक दीदी” मंच से जुड़ी 150 से अधिक महिला चालक

खबर है..नई दिल्लीभारत का पहले सहकारी नेतृत्व वाला राइड हीलिंग प्लेटफार्म भारत टैक्सी का सीधा मुनाफा चालकों को मिल रहा है। यह प्लेटफॉर्म शून्य-कमीशन मॉडल पर काम करता है, जिसमें चालकों को मुनाफे का सीधा वितरण होता है, जो निवेश-संचालित एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के लिए एक घरेलू और स्वदेशी विकल्प प्रदान करता है।यह जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। सहकारिता मंत्रालय रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा और जमीनी स्तर पर आर्थिक भागीदारी के साधन के रूप में सहकारी समितियों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत टैक्सी की परिकल्पना चालकों को जिन्हें सारथी कहा जाता है स्वामित्व, शासन और मूल्य सृजन के केंद्र में रखकर मोबिलिटी के क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी इंटरवेंशन के रूप में की गई है। यह सुविधा नागरिकों को मोबिलिटी और परिवहन सुविधा देने में कारगर साबित हो रही है।अभी तक भारत टैक्सी सेवा दिल्ली एनसीआर-दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ और द्वारका में काम कर रही है। भारत टैक्सी ऐप में 990,082 पंजीकृत ग्राहक और 3 लाख से अधिक पंजीकृत चालक हैं जो 291,665 राइड पूरी कर चुके हैं। आने वाले समय में, भारत टैक्सी की योजना 2029 तक राष्ट्रीय उपस्थिति के साथ चरणवार रोलआउट करने की है।वर्तमान में एप द्वारा सुविधा शुल्क, प्लेटफ़ॉर्म शुल्क या कमीशन के रूप में कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। हालांकि, भारत टैक्सी द्वारा संचालित हवाई अड्डे के प्रीपेड बूथों पर, प्रचालन खर्चों का ध्यान रखने के लिए किराए पर 7% सेवा शुल्क लगाया जाता है।भारत टैक्सी स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, सेवानिवृत्ति बचत और एक समर्पित ड्राइवर सहायता प्रणाली के माध्यम से सारथी के लिए सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। यह दिल्ली में सात प्रमुख स्थानों पर सहायता केंद्र संचालित करता है, तेजी से आपातकालीन सहायता और सत्यापित सवारी डेटा प्रदान करता है, ड्राइवरों को विशिष्टता प्रतिबंधों के बिना अन्य प्लेटफार्मों पर काम करने की स्वतंत्रता देता है, और “बाइक दीदी” जैसी पहल के माध्यम से महिला सशक्तीकरण को सक्रिय रूप से बढ़ावा देता है, जिसके तहत 150 से अधिक महिला चालक पहले ही मंच से जुड़ चुकी हैं।भविष्य को देखते हुए, भारत टैक्सी ने सभी राज्यों और शहरों में राष्ट्रव्यापी विस्तार, हर राज्य में समर्पित सहायता केंद्रों की स्थापना, चालक सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत करने और एक संधारणीय, समावेशी और सहकार-संचालित मोबिलिटी इकोसिस्टम प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के साथ गहन एकीकरण की योजना बनाई है।

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ट्रेन में बर्थ पर मिलेगा खाना, ई-पेंट्री सेवा की शुरूआत 25 मेल एक्सप्रेस ट्रेनों में ऑनलाइन भोजन बुकिंग का मिला विकल्प

खबर है..नई दिल्लीआईआरसीटीसी ने ट्रेन में बर्थ पर खाना देने का पूरा इंतजाम कर लिया। इसके लिए उसने ई-पेंट्री सेवा की शुरुआत की है। इस योजना में फिलहाल 25 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को शामिल किया गया है।आईआरसीटीसी ने हाल ही में ऐसी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों के यात्रियों की सुविधा के लिए ई-पैंट्री भोजन बुकिंग सुविधा शुरू की है। जिनमें भोजन टिकट के किराए में शामिल नहीं होता है। ई-पैंट्री एक डिजिटल समाधान है, जिसके माध्यम से पैंट्री वाली चुनिंदा ट्रेनों में भोजन पहले से बुक किया जा सकता है। मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में ई-पैंट्री सेवा शुरू होने से यात्री अब अपने भोजन की अग्रिम बुकिंग करके सुगम यात्रा कर सकते हैं।आईआरसीटीसी के टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म (www.irctc.co.in) में एकीकृत इस सुविधा से कन्‍फर्म, आरएसी या आंशिक रूप से कन्‍फर्म टिकट वाले यात्रियों को मानक भोजन और रेल नीर का पहले ही आदेश दे दिया जा सकता है। जिसे पैंट्री कार के कर्मचारी सीधे उनकी सीटों पर पहुंचाते हैं। ई-पैंट्री सेवा को प्रारंभ में भारत की सबसे लंबी दूरी की ट्रेन विवेक एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22503/04) पर प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया था और वर्तमान में इसे 25 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में उपलब्ध कराया I

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स्कूली बच्चों के लिए एक करोड़ अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट पूरे पांच महीने में 83000 स्कूलों में (एमबीयू) शिविर आयोजित

खबर है..नई दिल्ली भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणयू (आईडीएआई) ने स्कूली बच्चों के लिए मिशन मोड के तहत चल रहे अभियान में एक करोड़ अनिवार्य बायोमेट्रिक (एमडीयू) अपडेट का काम पूरा कर लिया है। इसके लिए प्राधिकरण ने मात्र 5 महीने में 83000 स्कूलों में एमडीयू शिविर आयोजित किए थे। प्राधिकरण 7-15 आयु वर्ग के बच्चों के लिए एमबीयू को एक अक्टूबर 2025 से एक वर्ष की अवधि के लिए निःशुल्क कर दिया गया था।यूआईडीएआई ने सितंबर 2025 में स्कूली छात्रों के लिए यह विशेष एमबीयू अभियान शुरू किया था। यह अभियान यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) एप्लिकेशन के साथ सफल तकनीकी एकीकरण के बाद शुरू किया गया था, जिससे स्कूलों में बच्चों के एमबीयू की स्थिति को देखना संभव हुआ था। इस सफलता ने यूआईडीएआई और स्कूलों को संयुक्त रूप से उन बच्चों की पहचान करने में मदद की, जिनका एमबीयू होना बाकी था और एमबीयू पूरा करने के लिए स्कूलों में शिविर आयोजित किए गए।यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर यूआईडीएआई की इस कदम से अवगत कराया और विद्यालयों में लक्षित एमबीयू शिविर आयोजित करने में उनके सहयोग का अनुरोध किया। देश भर में आठ स्थानों पर स्थित यूआईडीएआई के क्षेत्रीय कार्यालयों ने इस व्यापक अभियान को सभी हितधारकों, अर्थात् राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों, जिला स्तरीय प्रशासन, यूआईडीएआई रजिस्ट्रारों और विद्यालय अधिकारियों के साथ समन्वयित करने के लिए पांच महीने तक अथक परिश्रम किया है। यह मिशन मोड अभियान तब तक चलता रहेगा जब तक देश के सभी विद्यालय इसमें शामिल नहीं हो जाते। इस पहल से अब तक 83,000 विद्यालयों के 1 करोड़ बच्चे लाभान्वित हुए और कई और भी बच्चों को इससे लाभान्वित होने की आशा है। पांच वर्ष से कम आयु का बच्चा आधार कार्ड के लिए पंजीकरण कराते समय अपनी फोटो, नाम, जन्मतिथि, लिंग, पता और जन्म प्रमाण पत्र प्रदान करता है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के फिंगरप्रिंट और आइरिस बायोमेट्रिक्स आधार पंजीकरण के लिए नहीं लिए जाते हैं क्योंकि इस आयु में ये परिपक्व नहीं होते हैं। इसलिए, 5 से 15 वर्ष की आयु पार करने के बाद, फिंगरप्रिंट और आइरिस बायोमेट्रिक्स (एमबीयू) प्रक्रिया का पालन करते हुए आधार में फिंगरप्रिंट और आइरिस बायोमेट्रिक्स की जानकारी देना बच्चों के लिए अनिवार्य है। आधार में एमबीयू न होने से विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने, एनईईटी, जेईई, सीयूईटी आदि जैसी प्रतियोगी और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में पंजीकरण कराने के दौरान प्रमाणीकरण में कठिनाइयां आ सकती हैं।बच्चों को एमबीयू पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करने और इस सेवा को सभी के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से, यूआईडीएआई ने 7-15 आयु वर्ग के बच्चों के लिए एमबीयू के शुल्क को 1 अक्टूबर 2025 से एक वर्ष की अवधि के लिए माफ कर दिया था। इसके अलावा, 5-7 वर्ष और 15-17 वर्ष के बच्चों के लिए एमबीयू निःशुल्क बना हुआ है।स्कूलों में आयोजित शिविरों के अलावा, बच्चे देश भर में चल रहे आधार नामांकन केंद्रों और आधार सेवा केंद्रों में भी अपना आधार पंजीकरण फॉर्म भर सकते हैं। इसी अवधि में इन केंद्रों पर आने वाले बच्चों द्वारा लगभग 1.3 करोड़ आधार पंजीकरण फॉर्म भरे जा चुके हैं।

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नकली और घटिया बीज बेचने वाले नहीं बचेंगे, हो सकती है कार्रवाई

खबर है..नई दिल्ली किसानों को नकली और घटिया बीज बेचने वाले दुकानदारों की खैर नहीं है। पकड़े जाने पर वे बचेंगे नहीं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। इसके लिए राज्य सरकारों के पास पूरा अधिकार है। इसकी पुष्टि खुद केंद्रीय कृषि एवं कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने की है।ठाकुर ने शुक्रवार 6 फरवरी को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया है कि बीज की गुणवत्ता को भी विनियमित करने और नकली बीज को बेचने पर रोक लगाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है। वह ऐसे दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकती हैं। बीज अधिनियम, 1966, बीज नियम, 1968 और बीज (नियंत्रण) आदेश, 1983 राज्य सरकारों को बीज निरीक्षकों की नियुक्ति करने का अधिकार देते हैं जो बीज केंद्रों का निरीक्षण कर सकते हैं। नमूने ले सकते हैं और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने, स्टॉक जब्त करने, बिक्री रोकने के आदेश देने और अभियोजन चलाने जैसी प्रवर्तन कार्रवाई कर सकते हैं।इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में बीजों की ‘एंड-टू-एंड’ डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए बीज प्रमाणीकरण, ट्रेसिबिलिटी एवं समग्र सूची (साथी) पोर्टल भी लॉंच किया जो नकली/घटिया बीजों के प्रसार को रोकने में मदद करता है। भारत सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मौजूदा कानूनी ढांचे के सख्त क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी भी जारी करती है, ताकि नकली/घटिया बीजों की बिक्री को रोकने के लिए डीलरों/खुदरा विक्रेताओं के भंडारण और बिक्री केंद्रों पर निगरानी बढ़ाई जा सके।

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प्रधानमंत्री ने परीक्षा पे चर्चा 2026 के दौरान छात्रों से बातचीत की सफलता के लिए दिए सुंदर सुझाव

खबर है..नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 फरवरी परीक्षा पर चर्चा के दौरान छात्रों से जनता से बातचीत की और परीक्षा में सफलता के लिए उन्हें सुझाव दिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों को सभी की सलाह सुनी चाहिए और अपनी आदतों में बदलाव तब जाकर सफलता हासिल होगी।प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को सलाह दी कि वे छात्रों को पहले से सूचित करें ताकि उनमें जिज्ञासा पैदा हो और उनकी समझ बेहतर हो। लक्ष्य पहुंच के भीतर होने चाहिए, लेकिन आसानी से पहुंच वाले नहीं, लक्ष्य निर्धारित करें और कार्य करें। उन्होंने कहा कि मन को विकसित करें, फिर उसे जोड़ें, और फिर अध्ययन के विषयों को व्यवस्थित करें, इससे आपको सफलता मिलेगी।मोदी ने कहा कि पढ़ाई, कौशल, आराम और शौक में संतुलन ही विकास की कुंजी है। किताबें ज्ञान प्रदान करती हैं, लेकिन केवल अभ्यास ही आपको पेशेवर रूप से कुशल बनाता है। अतीत पर ध्यान केंद्रित करने में समय बर्बाद न करें, आगे आने वाले जीवन के बारे में सोचें। शिक्षा केवल परीक्षाओं के लिए नहीं बल्कि जीवन के लिए है, परीक्षाएं स्वयं की परीक्षा लेने के लिए होती हैं। बनने की नहीं, करने की आकांक्षा रखनी चाहिए। वर्तमान ईश्वर का सबसे बड़ा ‘उपहार’ है, यहीं और अभी जीएं। आप किसी क्षण में जितना अधिक शामिल होते हैं, उतना ही अधिक समय तक आपको वह याद रहता है।उन्होंने कहा कि सहयोगात्मक शिक्षा सभी को बेहतर बनाने में मदद करती है। छात्र दोहराएं और बुद्धिमान बनें। स्कूल में अपनी नींव मजबूत करें, प्रतियोगी परीक्षाएं समय के साथ आएंगी। प्रधानमंत्री ने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों को उनकी क्षमता, योग्यता और रुचि के अनुसार विकसित होने दें। अपने शौक को व्यावहारिक उत्पाद बनाएं और उन्हें मुफ्त में साझा करें, फीडबैक से नए विचारों और सफलता को बढ़ावा मिलता है। खुद को जानें, जीवन के सभी अनुभवों को जीएं। परीक्षाएं त्योहारों की तरह होती हैं, उनका उत्‍सव मनाएं। सच्चा आत्मविश्वास आंतरिक सत्य से आता है, अपने असली स्वरूप के प्रति सच्चे रहें। आराम से जीवन को आकार नहीं मिलता – आपका जीने का तरीका आकार देता है। सपना न देखना एक अपराध है – हमेशा सपना देखें। खुद अपना सहारा बनें, अपनी खूबियों का जश्न मनाएं। बड़े सपने देखें, कम डरें – आत्मकथाएं पढ़ें।स्वच्छता बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता और कर्तव्य है। प्रौद्योगिकी एक महान शिक्षक है, इसे अपनाएं, एआई हमारी क्षमताओं को बढ़ाता है। एआई का बुद्धिमानी से उपयोग करें, अपनी बुद्धि को बढ़ाएं।

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होली पर चलेंगी रिकॉर्ड 1500 स्पेशल ट्रेनें

खबर है..नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने इस बार होली पर रिकॉर्ड स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है ताकि यात्रियों को अपने गंतव्य शहरों तक जाने की बेहतर रेल सुविधा मिल सके। रेलवे ने देशभर के विभिन्न शहरों से अभी 1410 से अधिक होली स्पेशल ट्रेन चलाने की योजना बनाई है लेकिन यह संख्या बढ़कर 1500 तक जा सकती है। गत वर्ष 2025 में होली के लिए कुल 1,144 स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया गया था।रेल मंत्रालय के अनुसार पूर्व मध्य रेलवे सर्वाधिक 285 विशेष ट्रेनों का संचालन करेगा। इसके बाद पश्चिम रेलवे द्वारा पश्चिमी मार्गों पर यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए 231 ट्रेनों के संचालन की योजना बनाई गई है। मध्य रेलवे द्वारा 209 होली स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी, जबकि दक्षिण मध्य रेलवे कुल 160 सेवाओं का संचालन करेगा। इसके अतिरिक्त, उत्तर रेलवे (एनआर) द्वारा 108 और उत्तर पश्चिम रेलवे (एनडब्ल्यूआर) द्वारा 71 होली स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की योजना तैयार की गई है।कनेक्टिविटी को और अधिक मजबूत करते हुए, उत्तर मध्य रेलवे द्वारा 66 विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। वहीं, पूर्वोत्तर रेलवे और पूर्व तटीय रेलवे दोनों ही 62-62 ट्रेनें चलाएंगे। दक्षिण पश्चिम रेलवे द्वारा 47 ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा, जबकि पश्चिम मध्य रेलवे ने 43 सेवाओं की योजना बनाई है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण रेलवे द्वारा 39 होली स्पेशल ट्रेनें और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा 15 सेवाएं संचालित की जाएंगी। क्षेत्रीय मांग को पूरा करने के लिए कोंकण रेलवे द्वारा 9 और पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (एनएफआर) द्वारा 2 विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी।

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