दिल्ली एनसीआर में व्यावसायिक वाहनों की बुधवार आधी रात से चक्का जाम

जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होने का आशंका

सरकार को अपनी बात पहुंचानी है, चक्का जाम हमारी मजबूरी है : सभरवाल

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नई दिल्ली
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और यूनाइटेड फ्रंट का ऑल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के आह्वान पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क बढ़ोतरी के विरोध में बुधवार आधी रात से व्यावसायिक वाहनों का चक्का जाम का ऐलान किया है। दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में 21 से 23 में तक तीन दिवसीय चक्का जाम के ऐलान से जरूरी सामानों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। इस तीन दिन दिवसीय चक्का जाम आंदोलन में ट्रांसपोर्टेशन के संयुक्त मोर्चा में दिल्ली एनसीआर की 68 संगठन शामिल हैं।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल कहा है कि हम प्रभावित वाहन चालकों एवं वाहन व्यवसायिक के सामने सरकार तक अपनी बात पहुंचने के लिए चक्का जाम का रास्ता तैयार करना पड़ा है पूर्ण ग्राम यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में 21 दिन की नोटिस देकर देशव्यापी चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने एक प्रेस वार्ता में कहा कि वैसे तो ट्रांसपोर्टों की कई मुद्दों की पर लंबी लड़ाई है लेकिन मौजूदा तीन दिवसीय चक्का जाम में प्रमुख तौर पर बीएस वाहनों की दिल्ली में एक नवम्बर से प्रवेश पर पाबंदी और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क में बढ़ोतरी का ही मुद्दा उठाया गया है।
उन्होंने बताया कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क में 55% की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्ट कारोबारी की कमर टूट गई। उनका कहना है कि दिल्ली में प्रवेश करने वाले हल्के कमर्शियल वाहनों पर शुल्क 1400 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये तथा भारी ट्रकों पर 2600 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये कर दिया गया है। ट्रांसपोर्ट संगठनों का दावा है कि देशभर के लगभग 95 लाख ट्रक चालक, 50 लाख बस, टैक्सी और मैक्सी कैब ऑपरेटर तथा 3500 से अधिक ट्रांसपोर्ट संगठन आंदोलन से जुड़े हैं। उनका कहना है कि तीन दिन के दौरान 16 से 20 लाख वाहनों के पहिए थम सकते हैं, जिनमें मंडियों से जुड़ी करीब 10 हजार गाड़ियां शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि यदि ट्रांसपोर्ट वाहनों से 12% दिल्ली में प्रदूषण बढ़ता है तो सरकार 88% से बढ़ाने वाले प्रदूषण के कारणों को दूर क्यों नहीं? ट्रांसपोर्टरों पर ही प्रदूषण को लेकर भारी भरकम शुल्क लगाने का काम किया जा रहा है। सरकार इस क्षति पूर्ति शुल्क के नाम पर वर्ष 2023 तक 1500 करोड रुपए ट्रांसपोर्ट व्यवसाईयों से वसूल चुकी है। लेकिन उनका अभी तक कोई ऐसा काम नहीं किया गया है जिससे ट्रांसपोर्ट व्यवसाईयों को और प्रदूषण से राहत मिले। सरकार को ट्रांसपोर्ट व्यवसाईयों को सहुलियत देने का काम करना चाहिए ना कि उन्हें परेशान करने का।

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