“आम के आम, गुठलियों के दाम” की मिसाल बने मलिहाबाद के गिरजा शंकर मौर्य

  • चार एकड़ में मल्टी लेयर प्राकृतिक खेती से आम, लीची, अमरूद के साथ सब्जियां और दलहन उगाकर कमा रहे छह गुना अधिक आय
  • उत्तर प्रदेश आम महोत्सव में प्राकृतिक फलों से बने जूस, अमावट और अन्य उत्पादों का स्टॉल बना आकर्षण

खबर है..
लखनऊ
मलिहाबाद के भदेश्वर मऊ निवासी प्रगतिशील किसान गिरजा शंकर मौर्य अपनी अभिनव खेती से ‘आम के आम, गुठलियों के दाम’ कहावत को साकार कर रहे हैं। चार एकड़ में विकसित उनके मल्टी लेयर प्राकृतिक खेती मॉडल में आम के साथ लीची, अमरूद, चीकू, पपीता, सहजन, हल्दी, सब्जियां तथा उड़द, मूंग और अरहर जैसी दलहनी फसलें भी उगाई जाती हैं। यही नहीं, इन फलों का प्रसंस्करण कर जूस, अमावट और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिससे उनकी आय पारंपरिक आम की खेती की तुलना में करीब छह गुना तक बढ़ गई है।
इन दिनों लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित उत्तर प्रदेश आम महोत्सव में गिरजा शंकर मौर्य का स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां वे प्राकृतिक खेती से तैयार फलों और उनसे बने उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं तथा किसानों और आगंतुकों को प्राकृतिक खेती के लाभों से भी अवगत करा रहे हैं।
गिरजा शंकर मौर्य बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2017 में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पद्धति अपनाई थी। शुरुआत एक गाय के गोबर और गोमूत्र से हुई थी, जबकि आज उनके पास चार गायें हैं। इन्हीं के गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत एवं अन्य प्राकृतिक घोलों के माध्यम से वे पूरी खेती करते हैं। उनकी खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का उपयोग नहीं होता।
उन्होंने बताया कि मल्टी लेयर खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि खेत पूरे वर्ष उत्पादन देता है। अलग-अलग ऊंचाई और मौसम की फसलों के संयोजन से एक ही भूमि पर कई प्रकार की पैदावार होती है, जिससे जोखिम कम होता है और आमदनी लगातार बनी रहती है।
गिरजा शंकर मौर्य का कहना है कि आम महोत्सव जैसे आयोजन किसानों के लिए बेहद उपयोगी हैं। इससे प्राकृतिक खेती, फल प्रसंस्करण और आधुनिक बागवानी की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचती है। साथ ही किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी भी मिलती है तथा अन्य किसान भी नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।
उन्होंने प्राकृतिक खेती और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन कृषि को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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