केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में दस रुपए प्रति लीटर की कटौती की

खुदरा पेट्रोल-डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं, तेल विपणन कंपनियों की अंडररिकवरी में आंशिक मदद खबर है..नई दिल्लीभारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर उत्पाद शुल्क में तत्काल प्रभाव से 10 रुपये प्रति लीटर की कमी कर दी है। यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में हुई तीव्र वृद्धि के बाद लिया गया है, जो पिछले एक महीने में लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के कारण चार सप्ताह से भी कम समय में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है।पेट्रोल और डीजल के खुदरा पंप मूल्यों में कोई बदलाव नहीं होगा। उत्पाद शुल्क में कटौती का सीधा असर पंप पर कीमतों में कटौती के रूप में नहीं पड़ रहा है। इसके बजाय, यह सीधे तौर पर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन – द्वारा वहन किए जा रहे घाटे (अंडररिकवरी) को कम करता है। ये कंपनियां भारतीय उपभोक्ताओं को आपूर्ति लागत से काफी कम कीमतों पर ईंधन की आपूर्ति जारी रखे हुए हैं। विद्यमान अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर, पेट्रोल पर लगभग 26 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 81.90 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा वहन किया जा रहा कुल दैनिक घाटा लगभग 2,400 करोड़ रुपये है। उत्पाद शुल्क में कटौती से इन घाटे में से 10 रुपये प्रति लीटर की भरपाई हो जाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि तेल विपणन कंपनियां खुदरा कीमतों को अपरिवर्तित रखते हुए बिना किसी रुकावट के ईंधन की आपूर्ति जारी रख सकें।वैश्विक ईंधन बाजारों के साथ तुलना करना महत्वपूर्ण है। वर्तमान संकट की शुरुआत से ही दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ईंधन की कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत, उत्तरी अमेरिका में 30 प्रतिशत और यूरोप में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत ने संतुलित रुख बनाए रखा है। इस स्थिरता की एक वित्तीय लागत है और सरकार ने इसे वहन करने का विकल्प चुना है।पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार के सामने दो विकल्प थे: या तो अन्य सभी देशों की तरह भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करना, या फिर खुद पर वित्तीय बोझ उठाना ताकि भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रह सकें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकारी खजाने पर बोझ डालने का निर्णय लिया। आसमान छूती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के इस दौर में तेल विपणन कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान को कम करने के लिए सरकार ने अपने कर राजस्व में अत्यधिक कमी की है।यह निर्णय 2022 के रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद अपनाई गई रणनीति के अनुरूप है, जब तेल और गैस कंपनियों ने लगातार नुकसान उठाया और सरकार ने वैश्विक मूल्य अस्थिरता से परिवारों और व्यवसायों को बचाने के लिए केंद्रीय करों में कटौती की। आज लिए गए निर्णय में भी यही सिद्धांत लागू होता है : भारत के नागरिकों और उद्योगों को उन व्यवधानों का बोझ नहीं उठाना चाहिए जो उन्होंने उत्पन्न नहीं किए हैं। सरकार वैश्विक ऊर्जा स्थिति पर निरंतर दृष्टि रखेगी और भारतीय उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति स्थिरता और मूल्य संरक्षण बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगी।

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वैष्णव ने कवच कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की

रेलवे की कवच के अंतर्गत विकसित स्वदेशी यूनिवर्सल ब्रेकिंग प्रणाली, कवच 4.0 के त्वरित कार्यान्वयन में सहायक होगी खबर है..नई दिल्लीरेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे की स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित रेलगाड़ी सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली कवच की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में तैनाती में तेजी लाने और अधिक कुशल रेलगाड़ी संचालन सुनिश्चित करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।कवच को आगे बढ़ाने वाली तकनीकी प्रगतिभारतीय रेलवे ने कवच में कई अत्याधुनिक सुधार किए हैं। यूनिवर्सल ब्रेकिंग प्रणाली (यूबीए), जो विभिन्न निर्माताओं के ब्रेकिंग कर्व्स को मानकीकृत करता है, अंतरसंचालन सुनिश्चित करता है और बार-बार होने वाले परीक्षणों को समाप्त करता है। बेसलाइन सॉफ्टवेयर, एआई-संचालित डिजाइन स्वचालन और लोकोमोटिव, इंटरलॉकिंग प्रणाली और ट्रैक मशीनों के लिए एकीकरण इंटरफेस में महत्वपूर्ण उन्नयन प्रणाली की मजबूती को और बढ़ा रहे हैं।कवच तैनाती की वास्तविक समय की निगरानी और पूर्वानुमानित रखरखाव को सक्षम करने के लिए एक एकीकृत संचालन प्रबंधन प्रणाली के रूप में एक केंद्रीकृत निगरानी मंच, सुरक्षा, विकसित किया जा रहा है।अब तक की प्रगतिअब तक कवच को 3,103 किलोमीटर मार्ग पर स्थापित किया जा चुका है। उच्च घनत्व और उच्च उपयोग वाले गलियारों सहित 24,427 किलोमीटर मार्ग पर कवच का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है।कवच संस्करण 4.0 के कार्यान्वयन के अंतर्गत:दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे प्रमुख गलियारों पर 1,638 किलोमीटर मार्ग पर पहले ही यह प्रणाली चालू हो चुकी है।भारतीय रेलवे ने हाल ही में, दिल्ली-हावड़ा उच्च घनत्व गलियारे के प्रयागराज-कानपुर खंड के 190 किलोमीटर मार्ग पर कवच प्रणाली चालू की है।7,100 किलोमीटर मार्ग पर ट्रैक के किनारे इंस्टॉलेशन का काम चल रहा है।8,921 किलोमीटर पर ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाई जा चुकी है, जिसे 1,183 दूरसंचार टावरों और 767 स्टेशनों पर कवच डेटा सेंटर इंस्टॉलेशन द्वारा सपोर्ट किया जा रहा है।4,277 इंजनों पर कवच प्रणाली लगाई जा चुकी है।8,979 इंजनों पर काम जारी है।विस्तार योजनाएँकवच लगाना एक जटिल प्रक्रिया है। इसके कार्यान्वयन को और आगे बढ़ाने के लिए, रेलवे अगले दो वर्षों में कवच नेटवर्क को 9,000 किलोमीटर तक विस्तारित करने की योजना बना रहा है और उसके बाद प्रति वर्ष 10,000 किलोमीटर तक बढ़ने की संभावना है।

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भारत की सबसे बड़ी ग्रीन फील्ड जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे मोदी

प्रधानमंत्री 28 मार्च को जेवर आएंगे, देंगे सौगात और करेंगे जनसभा खबर है..नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 28 मार्च शनिवार को जेवर आएंगे। सुबह लगभग 11:30 बजे वे गौतम बुद्ध नगर में जेवर स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद दोपहर लगभग 12 बजे प्रधानमंत्री नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर एक जनसभा को संबोधित करेंगे।नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन भारत के वैश्विक विमानन केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में परिकल्पित यह हवाई अड्डा, देश के हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संपर्क को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के लिए दूसरे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया गया है, जो इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का पूरक है। ये दोनों हवाई अड्डे मिलकर एक एकीकृत विमानन प्रणाली के रूप में कार्य करेंगे, जिससे भीड़ कम होगी, यात्री क्षमता बढ़ेगी और दिल्ली एनसीआर को वैश्विक विमानन केंद्रों में अग्रणी स्थान प्राप्त होगा।नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजनाओं में से एक है। नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत लगभग 11,200 करोड़ रुपये के कुल निवेश से विकसित किया गया है। प्रारंभिक चरण में हवाई अड्डे की यात्री संचालन क्षमता 12 मिलियन यात्री प्रति वर्ष (एमपीपीए) होगी, जो हवाई अड्डे के पूर्ण विकसित होने तक 70 एमपीपीए तक हो जाएगा। इसमें 3,900 मीटर लंबा रनवे है जो बड़े आकार के विमानों के संचालन में सक्षम है। इसके साथ ही इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग सहित आधुनिक नेविगेशन सिस्टम हैं, जो हर मौसम में दिन-रात संचालन में कुशल है।इस हवाई अड्डे में एक सुदृढ़ कार्गो प्रणाली भी शामिल है, जिसमें एक मल्टी-मोडल कार्गो हब, इंटीग्रेटेड कार्गो टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स जोन शामिल हैं। कार्गो सुविधा को प्रति वर्ष 2.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक माल ढुलाई के लिए तैयार किया गया है, जिसे लगभग 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकता है और इसमें 40 एकड़ का एक समर्पित रखरखाव, मरम्मत तथा ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा क्षेत्र भी शामिल है।यमुना एक्सप्रेसवे पर रणनीतिक रूप से स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन प्रणालियों के निर्बाध जुड़ाव के साथ एक बहु-मोडल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जो यात्रियों और माल ढुलाई के लिए कुशल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करता है।

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रेल मंत्रालय सख्त, खानपान की गुणवत्ता से समझौता नहीं

रेलवे अपनी ही कंपनी आईआरसीटीसी पर लगाया 10 लाख का जुर्मानावंदे भारत एक्सप्रेस में खाना परोसने वाली कंपनी पर भी 50 लाख का जुर्मानाखाना परोसने वाली कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेट करने का आदेश खबर है..नई दिल्लीरेल मंत्रालय ने खानपान की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किए जाने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। भारतीय रेलवे ने अपनी ही कंपनी आईआरसीटीसी पर 10 लख रुपए का जुर्माना लगाया है जबकि वंदे भारत एक्सप्रेस में खाना परोसने वाली कंपनी पर भी 10 लाख का जुर्माना ठोका है इसके अलावा खाना पर उसने अली कंपनी का कांटेक्ट भी इंटरनेट करने का आदेश दिये है।भारतीय मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया एक्स ट्विटर हैंडल में कहा गया है कि “ 15 मार्च 2026 को ट्रेन संख्या 21896 (पटना – टाटानगर वंदे भारत एक्स) में पाई गई अनियमितता के संबंध में यात्री द्वारा भोजन की गुणवत्ता पर की गई शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। कार्रवाई करते हुए IRCTC पर ₹10 लाख का दंड लगाया गया है। संबंधित service provider पर ₹50 लाख का जुर्माना तथा contract termination के आदेश दिए है । यात्रियों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”इस बड़ी कार्रवाई से साफ समझा जा सकता है कि यात्रियों की सुरक्षा और गुणवत्ता को भारतीय रेलवे तथा रेल मंत्रालय ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इस कार्रवाई से रेलवे में हड़कंप मचा हुआ है। समझा जाता है कि खानपान की गुणवत्ता को लेकर अब मिलने वाली किसी भी शिकायत को नजर अंदाज नहीं किया जाएगा और शिकायत पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। भारतीय रेलवे के प्रवक्ता ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे, आईआरसीटीसी के के माध्यम से रेलवे नेटवर्क में प्रतिदिन 15 लाख से अधिक यात्रियों को भोजन परोसता है, जो विश्व के सबसे बड़े ऑनबोर्ड खाद्य संचालनों में से एक है। यात्री सुरक्षा और खाद्य गुणवत्ता इस मिशन की आधारशिला है। इस मानक का कोई भी उल्लंघन होने पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाती है ।

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हाईवे और रेलवे परियोजनाओं में आरओबी अनुमोदन प्रक्रियाओं के लिए PRISM-SG पोर्टल शुरू

इस पहल से एक वर्ष की प्रक्रिया तीन महीने में होगी पूरी खबर है..नई दिल्लीबुनियादी ढांचा विकास में दक्षता, पारदर्शिता और अंतर-एजेंसी समन्वय को बढ़ाने की दिशा में एक प्रमुख कदम के रूप में, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज नई दिल्ली में PRISM-SG (पोर्टल फॉर रेल-रोड इंस्पेक्शन एंड स्टेजेस मैनेजमेंट – स्टील गर्डर्स) पोर्टल लॉन्च किया।PRISM-SG पोर्टल का विकास सड़क ऊपरी पुलों (आरओबी) के निर्माण से संबंधित प्रमुख अनुमोदन और निरीक्षण प्रक्रियाओं को डिजिटाइज करने के लिए किया गया है, जिसमें क्वालिटी एश्योरेंस प्लान (क्यूएपी), वेल्डिंग प्रक्रिया विनिर्देश पत्रक (डब्ल्यूपीएसएस) और स्टील गर्डर्स के निर्माण चरण निरीक्षण को शामिल किया गया है।यह पोर्टल दस्तावेजों की अंत-से-अंत ऑनलाइन जमा, जांच, प्रश्न उठाना और उनका समाधान, अनुमोदन, निरीक्षण शेड्यूलिंग तथा निरीक्षण रिपोर्ट, फोटोग्राफ, परीक्षण परिणामों की अपलोडिंग को सक्षम बनाता है, जो पूर्ण ऑडिट ट्रेल और वास्तविक समय निगरानी क्षमताओं द्वारा समर्थित है।वर्तमान में, आरओबी के निर्माण के लिए भारतीय रेलवे से जनरल अरेंजमेंट ड्रॉइंग (जीएडी), संरचनात्मक चित्र, क्वालिटी एश्योरेंस प्लान (क्यूएपी), वेल्डिंग प्रक्रिया विनिर्देश पत्रक (डब्ल्यूपीएसएस) और स्टील गर्डर्स के निर्माण चरण निरीक्षण जैसी कई अनुमोदनों की आवश्यकता होती है। जबकि जीएडी और संरचनात्मक चित्रों के अनुमोदन आरआरसीएएस पोर्टल के माध्यम से प्रोसेस किए जाते हैं और क्यूएपी, डब्ल्यूपीएसएस और निर्माण निरीक्षण संबंधी प्रक्रियाएं मुख्य रूप से ऑफलाइन या भौतिक मोड में की जाती हैं। इससे अक्सर विलंब होता है साथ ही हितधारकों के बीच वास्तविक समय ट्रैकिंग और समन्वय सीमित रहता है।नव लॉन्च PRISM-SG पोर्टल इन चुनौतियों का समाधान करता है, जो सड़क स्वामित्व विभागों, भारतीय रेलवे, ठेकेदारों, फैब्रिकेटरों और निरीक्षण एजेंसियों सहित सभी प्रमुख हितधारकों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करता है। यह पहल अनुमोदन और निरीक्षण समयसीमा को लगभग 12 महीनों से घटाकर 3 से 4 महीनों तक करने में मदद करेगी, जिससे परियोजना दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार होगा। यह आरओबी और रेलवे पुलों के समय पर पूर्ण होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे देश भर में कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा और बुनियादी ढांचा वितरण में तेजी आएगी।

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सड़क सुरक्षा में जनभागीदारी जरूरी : दयाशंकर सिंह

खबर है.. लखनऊ उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय सड़क सुरक्षा संवाद कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सरकार कानून तो बना सकती है, लेकिन सड़क सुरक्षा केवल नियमों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही सुनिश्चित हो सकती है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने व्यवहार से देश को सुरक्षित बनाएं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और स्काउट-गाइड की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि 2047 में जब देश आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब सड़क सुरक्षा और सामाजिक योगदान में स्काउट-गाइड का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे यातायात नियमों का पालन करें और जिम्मेदार नागरिक बनें।श्री सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली मृत्यु के आंकड़े में 50 प्रतिशत की कमी लाई जाए। जब तक देश के युवा इस महत्वपूर्ण अभियान से नहीं जुड़ेंगे तब तक इस लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन होगा। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाले मौत के आंकड़ों की बात की जाए तो प्रतिवर्ष लगभग 23 से 24 हजार मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं के कारण होती है जबकि कोरोना जैसी महामारी में भी इतनी संख्या में लोगों की मृत्यु नहीं हुई। इस दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य है कि यहां से प्रशिक्षित होकर जाएं और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए पूरे मनोयोग से प्रयास किया जाए। एक्सप्रेस वे पर सड़क दुर्घटनाओ में कमी लेने के लिए जगह-जगह पर कैमरे लगाए गए हैं, जिससे कि ओवर स्पीडिंग उलटी लेन ड्राइविंग इत्यादि को नियंत्रित किया जा सके लेकिन लोग चालान से बचने के लिए भिन्न-भिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। इसी प्रकार नो हेलमेट नो फ्यूल का कानून लाया गया है, लोग उसका पालन करें।उन्होंने कहा कि चालान का लक्ष्य जीवन बचाना है, जुर्माना वसूल करना नहीं। उन्होंने कार्यक्रम में आए युवाओं से अधिक से अधिक सड़क सुरक्षा के नियमों को लोगों तक पहुंचाने की अपील की और पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने संकल्प दिलाया कि सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करेंगे और दुर्घटना में होने वाले मौत के आंकड़ों में 50 प्रतिशत की कमी लाने का प्रयास करेंगे। परिवहन आयुक्त श्रीमती किंजल सिंह ने बताया कि इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रदेश के सभी 75 जनपदों से आए स्काउट गाइड प्रशिक्षिकों को आधारभूत नियमों, संकल्पनाओं और दुर्घटनाओं में त्वरित प्राथमिक सहायता के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इन प्रशिक्षिकों के माध्यम से जनपदों में स्कूल स्तर से गठित सभी स्काउट गाइड इकाईयों तक इसे विस्तारित किया जाएगा। इसके अलावा एक प्रायोगिक चरण में एनसीसी और एनएसएस युवाओं को भी प्रदेश स्तर पर सड़क सुरक्षा से जोड़ने की योजना है, क्योंकि इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी है। यह संगठन अपनी सक्रियता, अनुशासन सेवा और जागरूकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा संवाद प्रदेश के सभी जनपदीय स्तर स्काउट एवं गाइड इकाईयों को सड़क सुरक्षा की मुहिम से जोड़ने और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल है।कार्यक्रम में भारत स्काउट एवं गाइड, उ0प्र0 के स्टेट चीफ कमिश्नर डॉ0 प्रभात कुमार, विशेष सचिव पीडब्लयूडी अमित कुमार, आईआरटीई के निदेशक रोहित बालूजा एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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चुनाव में सुरक्षा चाक-चौबंद करने के लिएअंतर-राज्यीय सीमा बैठकें आयोजित

खबर है..नई दिल्लीभारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने आज 24 मार्च को चुनाव वाले 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उनके 12 सीमावर्ती राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ तैयारियों की समीक्षा करने, समन्वय बढ़ाने के लिए समीक्षा बैठक की और सभी संबंधित अधिकारियों को हिंसा-मुक्त, धमकी-मुक्त और प्रलोभन-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आगामी आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव के लिए चुनाव तैयारियों, कानून व्यवस्था की स्थिति, अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थों, हथियारों की जब्ती, अंतरराज्यीय चेक पोस्ट और व्यय संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों की समीक्षा की।मतदान वाले राज्यों ने आयोग को अपनी समग्र तैयारियों, कानून व्यवस्था संबंधी मुद्दों, व्यय प्रवर्तन और केंद्रीय एजेंसियों तथा पड़ोसी राज्यों के साथ लंबित मुद्दों के बारे में जानकारी दी। सीमावर्ती जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया और मतदान वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमाओं को सील कर दिया गया।पड़ोसी सीमावर्ती राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे मतदान करने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को प्रलोभन मुक्त और हिंसा मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने में सहायता के लिए हर संभव कदम उठाएं।एजेंसियों अर्थात सीबीडीटी, सीबीआईसी, ईडी, डीआरआई, सीईआईबी, एफआईयू-आईएनडी, आरबीआई, आईबीए, एनसीबी, आईसीजी,बीसीएएस, एएआई, डाक सेवा, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, एसएसबी, आरपीएफ, आईटीबीपी, भारतीय तटरक्षक बल और असम राइफल्स के प्रमुखों को मतदान वाले राज्यों और इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से सटे क्षेत्रों में कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने और अंतरराज्यीय चेक पोस्टों पर जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए।नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), आयकर विभाग, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) सहित केंद्रीय एजेंसियों को चुनाव से पहले प्रयासों को तेज करने और कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी पर कार्रवाई करते हुए अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थों, हथियारों आदि की अधिकतम जब्ती करने का निर्देश दिया गया था।

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रेलमंत्री ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत पाँच नए सुधारों की घोषणा की

माल ढुलाई, निर्माण और यात्रियों की सुविधा पर बलजल्द ही यात्री ट्रेन के रवाना होने से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगेअब नमक और ऑटोमोबाइल ले जाने के लिए विशेष कंटेनर डिज़ाइन कर सकता है ऑटोमोबाइल उद्योगरेलवे ने नमक परिवहन में जंग-रोधी स्टेनलेस स्टील के कंटेनर पेश किए खबर है..नई दिल्लीरेल अश्विनी वैष्णव ने आज 24 मार्च घोषणा की कि 2026 के दौरान सुधार करने के भारतीय रेल के संकल्प के अनुरूप, पाँच नए सुधारों को स्वीकृति दी गई है। इन नए सुधारों की मंज़ूरी के साथ, वर्ष 2026 के लिए सुधारों की कुल संख्या नौ हो गई है।वैष्णव ने कहा कि वर्तमान “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पहल के तहत, चार सुधारों की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी और अब पाँच नए सुधार पेश किए जा रहे हैं। इन पाँच नए सुधारों में से दो माल ढुलाई से, एक निर्माण से और दो यात्रियों की सुविधा से संबंधित हैं।उन्होंने बताया कि पांचवां सुधार नमक के परिवहन पर केंद्रित है। नमक का उत्पादन करने वाले तीन प्रमुख राज्य तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान हैं। रेलवे द्वारा पहुँचाए जाने वाले कुल नमक का 62 प्रतिशत हिस्सा 1,000 से 2,500 किलोमीटर की दूरी तय करता है, जिससे यह खंड रेल परिवहन के लिए बेहद उपयुक्त बन जाता है। नमक की ढुलाई के लिए अब स्टेनलेस स्टील से बना, ऊपर से लोड होने वाला और बगल से खाली होने वाला कंटेनर सिस्टम सफलतापूर्वक विकसित किया गया है। यह कंटेनर जंग से बचाने के लिए स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है, और इसमें ऊपर से लोड करने के लिए फ्लैप तथा बगल से खाली करने के लिए हाइड्रोलिक तंत्र लगा है, जिससे गंतव्य स्थान पर ट्रकों में नमक को आसानी से अनलोड किया जा सकता है।उन्होंने बताया कि अब टिकट रद्द करने पर रिफंड अपने आप ही मिल जाएगा। यात्रियों के हित में एक और कदम उठाते हुए, अब यात्री प्रस्थान से 30 मिनट पहले तक अपनी यात्रा की श्रेणी (क्लास) को अपग्रेड कर सकेंगे; जबकि पहले यह बदलाव केवल चार्ट तैयार होने से पहले तक ही संभव था। रेल मंत्री ने कहा कि इन सुधारों से रेलवे टिकटिंग प्रणाली में पारदर्शिता और बढ़ेगी, गलत इस्तेमाल या दुरुपयोग में कमी आएगी और यात्रियों का अनुभव भी बेहतर होगा।मंत्री ने कहा कि नौवां सुधार यात्रियों को रेलगाड़ी के शुरुआती स्टेशन से रवाना होने से 30 मिनट पहले तक डिजिटल रूप से अपना बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा देता है। उन्होंने बताया कि पहले यात्री चार्ट तैयार होने से पहले ही बोर्डिंग पॉइंट बदल सकते थे। नए प्रावधान के तहत, यदि कोई यात्री शुरुआती स्टेशन से रेलगाड़ी में सवार नहीं हो पाता है, तो वह अगला सुविधाजनक स्टेशन चुन सकता है और अपनी कन्फर्म सीट खोए बिना रेलगाड़ी में सवार हो सकता है।

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भारत ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ के मूल्यों में करता है विश्वास : बिरला

श्रीलंका के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकातभारत और श्रीलंका हजारों वर्षों की सभ्यतागत, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत करते हैं साझावैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत तेजी से कर रहा है विकास खबर है..नई दिल्लीश्रीलंका की संसद में अवसंरचना और मामलों की संसदीय निगरानी समिति के अध्यक्ष एस.एम. मारिक्कर के नेतृत्व में एक श्रीलंकाई संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने 23 मार्च को संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की।लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि श्रीलंका भारत का एक करीबी पड़ोसी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश हजारों वर्षों से चली आ रही सभ्यतागत, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत साझा करते हैं। श्री बिरला ने बीते दशक में भारत के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि निरंतर अनुसंधान एवं नवाचार ने पूरे देश में मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास को गति दी है।भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए उन्होंने अवसंरचना और संपर्क के क्षेत्र में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला, साथ ही संसदीय कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने में नवाचार एवं प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारत ने राज्यों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया है, साथ ही बंदरगाहों और हवाई अड्डों का भी काफी विस्तार किया है तथा ये सभी देश की वृद्धि और विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।बिरला ने ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ (विश्व एक परिवार है) के दर्शन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत अपने मित्र पड़ोसी देशों को सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।इस अवसर पर, बिरला ने भारतीय संसद द्वारा आयोजित राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) के दौरान श्रीलंका की संसद के माननीय अध्यक्ष के साथ अपनी मुलाकात को स्नेहपूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन बेहद सफल रहा, जिसमें नवाचारों और राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के समक्ष आने वाले चुनौतियों पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि 28वें सीएसपीओसी में राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों की अब तक की सबसे अधिक भागीदारी देखी गई, जिसने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बना दिया।

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आम चुनाव और उपचुनाव 2026

मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को मिलेंगी न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं खबर है..नई दिल्लीभारत निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और छह राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।निर्वाचन आयोग ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश जारी किए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि 2,18,807 मतदान केंद्रों में से प्रत्येक मतदान के दिन सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाओं (एएमएफ) और मतदाता सहायता से सुसज्जित हो।एएमएफ में पीने का पानी, छायादार प्रतीक्षा क्षेत्र, पानी की सुविधा वाला शौचालय, पर्याप्त रोशनी, दिव्यांग मतदाताओं के लिए उचित ढलान वाला रैंप, मानक मतदान कक्ष और उचित संकेत शामिल हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे कतार में नियमित अंतराल पर बेंच लगाएं ताकि मतदाता अपनी बारी का इंतजार करते समय बैठ सकें।मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए, सभी मतदान केंद्रों पर चार एकसमान और मानकीकृत मतदाता सुविधा पोस्टर (वीएफपी) प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे, जिनमें मतदान केंद्र का विवरण, उम्मीदवारों की सूची, क्या करें और क्या न करें, स्वीकृत पहचान दस्तावेजों की सूची और मतदान प्रक्रिया की जानकारी होगी।प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाता सहायता बूथ (वीएबी) स्थापित किए जाएंगे, जिनमें बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ)/कर्मचारियों की एक टीम होगी जो मतदाताओं को संबंधित बूथ की मतदाता सूची में अपना मतदान बूथ नंबर और क्रम संख्या खोजने में सहायता करेगी । वीएबी पर प्रमुख चिह्न लगे होंगे और मतदान परिसर में पहुंचते ही मतदाताओं को आसानी से दिखाई देंगे।

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