श्रमिकों ने हड़ताल कर श्रम कार्यालय पर किया प्रदर्शन

  • चारों श्रम संहिता को वापस करने की मांग को लेकर मजदूरों ने भरी हुंकार
  • सहायक श्रमायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को सौपा गया ज्ञापन

खबर है..
लखनऊ
राजधानी के मजदूरों ने अपने-अपने सस्थानों में हड़ताल कर अपर श्रमायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। मजदूरों की इस हड़ताल की पहल 10 केन्द्रीय श्रम संगठनों, सेवा एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों के स्वतंत्र फेडरेशनों के संयुक्त मंच ने दिल्ली में एक कन्वेंशन किया था। इस हड़ताल की प्रमुख मॉग चारों श्रम संहिता को वापस करने की है। इसके अलावा अन्य समस्यायें भी इस हड़ताल में उठाई गई हैं ।
चारबाग एपी सेन रोड स्थित अपर श्रमायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शनकारियों ने सभा की जिसकी अध्यक्षता अध्यक्ष मण्डल ने किया। अध्यक्ष मण्डल में राजा राम यादव, रामेश्वर यादव, अजय शेखर सिंह, आशुतोष, मगनजी, बहन सीता देवी, पियूष मिश्रा आदि शामिल थे। सभा को इंटक के महामंत्री दिलीप श्रीवास्तव, एटक के महामंत्री चन्द्रशेखर, एबएमएस के मत्री अविनाश पांडेय और रेलवे के नेता अरुण गोपाल मिश्रा, सीटू के महामंत्री प्रेम नाथ राय, टीयूसीसी के मंत्री आरती, एआईयूटीयूसी के महामंत्री बालेन्द्र कटियार, एक्टू के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही, सेवा की महामंत्री फरीदा जलीस, यूपी चीनी मिल मजदूर फेडरेशन के महामंत्री विद्याकांत तिवारी, जितेंद्र कुमार तिवारी, फूलचंद्र और हर्षवर्धन आदि ने सम्बोधित किया।

सहायक श्रमायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को सौपा गया ज्ञापन
हिंद मजदूर सभा, उत्तर प्रदेश के मंत्री अविनाश पांडेय ने बताया कि ज्ञापन में चारो श्रम सहिता रद्द करने बिजली सशोधन विधेयक 2025, बीज संशोधन विधेयक 2025 को वापरा करने, विकसित भारत ग्रामीण रोजगार व आजीविका मिशन गारण्टी अधिनियम (VB-G-RAM G) को रद कर ‘मनरेगा’ को बहाल करने, प्रदेश में न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्डका गठन किया जाय तथा विक्रय सर्वान कर्मियों (सेल्ला प्रोमोशन एम्प्लाइज) के लिये न्यूनतम सलाहकार बोर्ड में उप-समिति का गठन किया जाय। न्यूनतम वेतन रू0 26000/- से कम न हो प्रदेश में श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जाए. सभी को स्थायी रोजगार मिले-संविदा नीति बन्द हो, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, रेलवे, कोयला, तेल, भेल सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने, स्कीम वर्कर्स को राज्य कर्मवारी घोषित किया जाय। उनको रू0 26000/- प्रतिमाह मानदेय तथा रु० 10000/- मासिक पेंशन दिया जाय, नियमित प्रकृति के काम पर रखे गये सचिव आउट सोर्सिग / ठेका मजदूरों को नियमित करने, समान काम के लिये समान वेतन देने घरेलू कामगारी और होम बेस्ड वर्कर्स को मजदूर का दर्जा देने और उनके लिये बोर्ड का गठन किया जाय। रेलवे / बैंक/बीमा के विभिन्न प्रतिष्ठानों में कार्यरत आउटसोर्सिंग / संविदा श्रमिकों को केन्द्र सरकार द्वारा जारी न्यूनतम वेतन, ई०एस०आई० और भविष्य निधि योजना से आच्छादित किया जाए, ई-श्रम और बी०ओ०सी० बोर्ड में पजीकृत सभी श्रमिकों को आयुष्मान कार्ड जारी करने और उनके लिए अन्य कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने की मांग की गयी है।

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