₹220 करोड़ की मारारिकुल्लम–आलप्पुष़ा रेल दोहरीकरण परियोजना को मंजूरी

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नई दिल्ली
भारतीय रेल ने दक्षिण रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने और रेल क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केरल के 10.65 किलोमीटर लंबे मारारिकुल्लम–आलप्पुष़ा रेल सेक्शन के दोहरीकरण को लगभग ₹220 करोड़ की लागत से मंजूरी दे दी है।
यह परियोजना रेलवे नेटवर्क की क्षमता वृद्धि के लिए स्वीकृत दोहरीकरण, तिहरीकरण, चौथी लाइन, फ्लाईओवर और बाईपास कार्यों के व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है। मारारिकुल्लम–आलप्पुष़ा सेक्शन वर्तमान में एरणाकुलम –तुरवूर –आलप्पुष़ा –अम्बलप्पुष़ा – कायमकुलम रेल कॉरिडोर का एकमात्र शेष एकल रेल लाइन खंड है, जबकि इस मार्ग के अन्य हिस्सों में दोहरीकरण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है या निर्माणाधीन है।
परियोजना पूरी होने के बाद प्रतिदिन दोनों दिशाओं में 9 अतिरिक्त यात्री ट्रेनों के संचालन की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही, प्रतिवर्ष लगभग 2.88 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। इससे रेलवे को अनुमानित ₹3.08 करोड़ की अतिरिक्त वार्षिक शुद्ध आय प्राप्त होने की संभावना है।
इस दोहरीकरण से यात्री एवं मालगाड़ियों के ठहराव और प्रतीक्षा समय में कमी आएगी, परिचालन दक्षता बेहतर होगी तथा ट्रेनों का संचालन अधिक तेज और सुचारु बन सकेगा। इसके अलावा, रेल लाइन की क्षमता बढ़ने से समयपालन में सुधार होगा और पूरे क्षेत्र में रेल संपर्क अधिक मजबूत होगा।
यह परियोजना भारतीय रेल के मिशन 3000 MT तथा उच्च घनत्व यातायात नेटवर्क कॉरिडोर के अंतर्गत चिन्हित की गई है। आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें वित्तीय आंतरिक प्रतिफल दर (FIRR) 3.99% और आर्थिक आंतरिक प्रतिफल दर (EIRR) 22.30% आंकी गई है।
भारतीय रेल के अनुसार, परियोजना के पूरा होने से रेल परिचालन अधिक कुशल होगा, यात्री और माल सेवाओं में सुधार आएगा तथा केरल के क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

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